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सच्ची मित्रता में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होता है

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अमेठी । दुवरिया गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिवस सोमवार को कथा व्यास जानकी दास महाराज ने कृष्ण और सुदामा की मित्रता की कथा श्रोताओं को श्रवण कराई।उन्होंने कहा कि सुदामा एक गरीब ब्राह्मण था। सुदामा अपने तथा अपने परिवार की दुर्दशा के लिए स्वयं को दोषी मानता था।

दुखी मन से वह कई बार अपनी पत्नी से भी अपने विचार व्यक्त किया करता था। उसकी पत्नी उसे दिलासा देती रहती थी। सुदामा की पत्नी ने सुदामा को श्रीकृष्ण के पास जाने का आग्रह किया और कहा, “श्रीकृष्ण बहुत दयावान हैं, इसलिए वे हमारी सहायता अवश्य करेंगे।’

सुदामा ने संकोच-भरे स्वर में कहा, “श्रीकृष्ण एक पराक्रमी राजा हैं और मैं एक गरीब ब्राह्मण हूं। मैं कैसे उनके पास जाकर सहायता मांग सकता हूं ? उसकी पत्नी ने तुरंत उत्तर दिया तो क्या हुआ ? मित्रता में किसी प्रकार का भेद-भाव नहीं होता। आप उनसे अवश्य सहायता मांगें। मुझसे बच्चों की भूख-प्यास नहीं देखी जाती।’ अंतत: सुदामा श्रीकृष्ण के पास जाने को राजी हो गया।

उसकी पत्नी पड़ोसियों से थोड़े-से चावल मांगकर ले आई तथा सुदामा को वे चावल अपने मित्र को भेंट करने के लिए दे दिए। श्रीकृष्ण ने वह पोटली सुदामा के हाथों से छीन ली तथा उन चावलों को बड़े चाव से खाने लगे।उधर सुदामा की टूटी झोंपड़ी एक सुंदर एवं विशाल महल में बदल गई थी।

उसकी पत्नी तथा बच्चे सुंदर वस्त्र तथा आभूषण धारण किए हुए उसके स्वागत के लिए खड़े थे। श्रीकृष्ण की कृपा से ही वे धनवान बन गए थे।वास्तव में श्रीकृष्ण सुदामा के एक सच्चे मित्र साबित हुए थे, जिन्होंने गरीब सुदामा की बुरे वक्त में सहायता की।

कथा श्रवण में राम सिंह, अमर बहादुर सिंह, श्याम सिंह, विपिन सिंह, राहुल गुप्ता, राजेश, राकेश,आदित्य,अमित, उपेंद्र, आलोक, राहुल सिंह सहित सैकड़ों भक्त मौजूद रहे।

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