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नारद कहेउ सहित अभिमाना …..

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गौरीगंज,अमेठी । जब भक्त के हृदय में अभिमान का अंकुर प्रस्फुटित होता है तब भगवान उसे दूर करने के लिए भी माया रचते हैं। मंगलवार को स्थानीय विधायक राकेश प्रताप सिंह के यहां चल रही श्रीराम कथा में दूसरे दिन कथा वाचक स्वामी प्रणव पुरी महाराज ने नारद मोह प्रसंग का विस्तार पूर्वक वर्णन किया। जिसमें उन्होंने मानस की पंक्तियों का उद्धरण देते हुए बताया कि
नारद कहेउ सहित अभिमाना।
कृपा तुम्हारि सकल भगवाना॥
करुनानिधि मन दीख बिचारी। उर अंकुरेउ गरब तरु भारी॥ देवर्षि नारद ने अभिमान के साथ कहा – भगवन! यह सब आपकी कृपा है। करुणानिधान भगवान ने मन में विचारकर देखा कि इनके मन में गर्व के भारी वृक्ष का अंकुर पैदा हो गया है। इस अहंकार को नष्ट करने के लिए भगवान ने माया रची। जिसमें भगवान का रूप ले करके ही नारद जी स्वयंवर में भाग लिए भगवान की कृपा से ही इनका मोह दूर हुआ घमंड चकनाचूर हुआ। उन्होंने भगवान को श्राप भी दिया। इस प्रसंग को स्वामी जी ने बहुत ही मार्मिक ढंग से विस्तार पूर्वक सुनाया। बताया कि अभिमान रावण को भी हुआ था, लेकिन वह दूसरी तरह का अभिमान था।इसलिए उसे चकनाचूर करने के लिए भगवान को दूसरी युक्ति खोजनी पड़ी।नारद जी को अभिमान हुआ किंतु वह भगवत शरणागति थे। उन्होंने कहा जो कुछ है वह आपकी कृपा से है लेकिन फिर भी अभिमान उनको थ। इसलिए उसे दूर करने के लिए भगवान ने दूसरी माया रची। यह प्रसंग सुन श्रोता भावबिभोर हो गए।कथा मुख्य रूप से जगदंबा प्रसाद त्रिपाठी मनीष जी किरण कुमार सिंह मुन्ना ब्लाक प्रमुख तिलोई धर्मेंद्र सिंह बबलू पूर्व अध्यक्ष जिला सहकारी बैंक सुल्तानपुर अशोक मिश्रा अध्यक्ष शिक्षक संघ अमेठी शिवमूर्ति सिंह प्रधान कोछित काशी सिंह सिंह काशी सिंहबांके बिहारी सिंह ज्ञान सिंह तीरथ राज मिश्रा बब्बन सिंह ललित सिंह प्रधान सराय भागमानी बोधे तिवारी सहित हजारों की संख्या कथा प्रेमी उपस्थित रहे।

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