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264 वां भिक्षु अभिनिष्क्रमण दिवस पर मेरे भाव …

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भैक्षव शासन की छटा में ख़ुशहाली निराली खिली है ।।ध्रुव ॥
चंचल मन को सुस्थिर करने का सुगम्य पथ मिला है ।
अनुभव – ज्ञान – सुधा – घट धर्म से भरने को मिला है ।
अन्तज्योर्ति जगाकर जीवन को उद्दीप्त बनाना है ।
भैक्षव शासन की छटा में ख़ुशहाली निराली खिली है ।।ध्रुव ॥
राग – द्वेष से भरे हुए अज्ञानी मन को मोड़ना है ।
विषय – विकारों के भूतों के डेरो से हटाना है ।
जीवन के सारे भय को धर्म करके हटाना है ।
भैक्षव शासन की छटा में ख़ुशहाली निराली खिली है ।।ध्रुव ॥
बाहर के खुले नयन में अन्दर के नयनों को खोलना है ।
प्रकाश की धारा में सारे के सारे कल्मष को धोना है ।
पावन निर्मल बन जाने को धर्म में रत रह रमना है ।
भैक्षव शासन की छटा में ख़ुशहाली निराली खिली है ।।ध्रुव ॥
श्रद्धा के अंकुर को अब शतशाखी बनाना है ।
संशय के विष – बीजों का अस्तित्व मिटाना है ।
भैक्षव शासन में निज चेतना को लगाना है ।
भैक्षव शासन की छटा में ख़ुशहाली निराली खिली है ।।ध्रुव ॥
प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़ ,राजस्थान)

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