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09 कुण्डीय यज्ञशाला में दी गई आहुति, गायत्री महापुरश्चरण साधना की हुई पूर्णाहुति।

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REPORT BY DEEPAK SINGH 

AMETHI NEWS I 

गायत्री शक्तिपीठ अमेठी पर 15 अक्टूबर से 26 नवंबर तक चली सामूहिक गायत्री महापुरश्चरण साधना (24 लाख गायत्री मंत्र जप) की पूर्णाहुति देव दीपावली पर्व कार्तिक पूर्णिमा को सैकड़ों लोगों द्वारा आहुतियां देकर सम्पन्न हुई। इस अवसर पर विश्व शांति, आतंकवाद समाप्ति और राष्ट्र रक्षा के लिए बलिदान होने वाले हुतात्माओं की आत्म शांति हेतु आहुतियां प्रदान कीगई।अपने व्यक्तित्व विकास हेतु इस जप अनुष्ठान में अनेक साधकों ने सवा लाख मंत्र जप तथा कुछ लोगों ने 51 हजार मंत्र जप किया। 300 से अधिक लोगों ने मन्त्र लेखन कर अपने जीवन में सर्वविध उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया ।

साधकों में प्रमुख रूप से सुभाष चन्द्र द्विवेदी, राघवेन्द्र प्रताप सिंह,डा चन्द्रावती सिंह,चन्द्रभान मिश्र, अरविंद कुमार सिंह, डा विजय लक्ष्मी सिंह, चिरौंजी लाल, संगीता शर्मा, इन्द्र देव शर्मा, संगीता तिवारी, त्रिवेणी प्रसाद सिंह सहित सैकड़ों लोगों ने सहभागिता प्रदान की।

इस अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ के व्यवस्थापक डा त्रिवेणी सिंह ने इस जप अनुष्ठान में उत्तरोत्तर वृद्धि के लिए प्रेरित करते हुए बताया कि अखण्ड ज्योति एवं वन्दनीया माता जी की जन्मशताब्दी 2026से पूर्व अमेठी में मार्च 2025 में 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ एवं युवा अभ्युदय कार्यक्रम सम्पन्न होना है जिसमें
साधकों (मंत्र जप करने या मंत्र लेखन अनुष्ठान करने वाले लोगों) को ही देव पूजन का सुअवसर प्राप्त होगा।

इस विशिष्ट आयोजन में युवाओं को विशेष भूमिका का निर्वहन करना होगा। इसमें कन्या कौशल और किशोर कौशल के कार्यक्रम के साथ ही एक अतिविशिष्ट सत्र आयोजित होगा जिसमें
हजारों युवाओं को आज के विवेकानंद देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्याजी जीवन जीने की कला के गुह्य सूत्रों पर प्रकाश डालेंगे।

इस कार्यक्रम के साथ ही गायत्री शक्तिपीठ अमेठी पर भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के उत्तरोत्तर विकास हेतु शिक्षक गरिमा समारोह भी आयोजित किया गया जिसमें उत्कृष्ट सहयोग प्रदान करने के लिए शिक्षकों को सम्मानित भी किया गया। सम्मानित होने वालों में नवल किशोर सिंह, आलोक कुमार सिंह,डा राकेश कुमार मिश्र, मनोज कुमार द्विवेदी,राम शंकर पाठक आदि रहे।

संयोजक राधेश्याम त्रिपाठी ने बच्चों में संस्कार,अपनी संस्कृति की आवश्यकता एवं महत्ता पर प्रकाश डालते हुए इस परीक्षा में भागीदारी बढ़ाने के लिए सभी को सहयोग देने का आह्वान किया।

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