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बदहाल जिंदगी जी रहा आजाद हिन्द फौज के जांबाज सिपाही का परिवार, सरकार बेखबर

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गणतंत्र दिवस से पूर्व विशेष रिपोर्ट ..

जहां देश में 74 वाँ गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है अमृत महोत्सव मनाया गया देश भगत की ओर बढ़ रहा है नए-नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं विश्व पटल में अपना एक मुकाम हासिल कर चुका भारत देश जिसे जिन वीरों ने आजादी दिलाई आज वही आजादी के दीवानों के परिजन बदहाली तंगी , भुखमरी के कगार पर गुजर बसर कर रहे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के हाल जानने का न तो पूर्ववर्ती सरकार ने किया और न ही मौजूदा सरकार में इनका कोई पुरसाहाल है I

सरकारी आंकड़ों के अनुमान के अनुसार देश में करीब 2 करोड़ स्वतंत्रता सेनानी परिवार है वही उत्तर प्रदेश में 80 हज़ार तथा जिस अमेठी जनपद की आज हम बात कर रहे हैं, वहां भी करीब 142 परिवार स्वतंत्रता सेनानियों के बताए जा रहे हैं I स्वतंत्रता सेनानी परिवारों की माने तो काफी ऐसे परिवार हैं जो आज भी गुमनामी में जी रहे हैं I कितने शहीद हो गए हैं लेकिन उन्हें पता ही नहीं है कि उनके पूर्व स्वतंत्रा सेनानी रहे हैं और उन्हें स्वतंत्रता सेनानी की सरकारी इमदाद ही मिल रही है I

बानगी के तौर पर हम बात कर रहे हैं अमेठी जनपद में गुमनामी में गुजर-बसर कर रहा स्वतंत्रता सेनानी परिवार की जोकि स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय भूमिका अदा करते हुए नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ आजाद हिन्द फौज में रहकर आजादी की लड़ाई लड़ने वाले मोहम्मद इसहाक का परिवार अभावों का जीवन जीने को विवश है ।प्रशासनिक उपेक्षा का आलम यह है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार को मिलने वाली पेंशन भी अब उनकी मृत्यु के बाद बंद होने से आश्रित दर दर की ठोकरें खाते हुए मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। किसी कार्यालय ,मार्ग अथवा गेट का निर्माण न होने पर चिंता जताते हुए निराशा व्यक्त की । परिजनों ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार से एक बार फिर उम्मीद जगी है जिससे परिवार का भला हो सके ।

आजाद हिन्द फौज में फील्ड अफसर थे मोहम्मद इसहाक

आजाद हिन्द फौज के संस्थापक नेताजी सुभाषचंद्र बोस की सेना में बतौर फील्ड अफसर रहे मोहम्मद इसहाक का जन्म रंगून में हुआ था।छात्र जीवन में इसहाक का देश सेवा व देश भक्ति का ऐसा रंग चढ़ा कि कक्षा 08 तक की पढ़ाई पूरा होते होते सुभाष चंद्र बोस की विचारधारा से अत्यधिक प्रभावित होकर महात्मा गांधी के अंग्रेजो भारत छोड़ो आन्दोलन में शामिल होकर अहम भूमिका निभाई।

मोहम्मद इसहाक की यादों को ताजा किया

अपने पिता मोहम्मद इसहाक की यादों को ताजा करते हुए उनके पुत्र मो0 अशफ़ाक एवं मोहम्मद कमर आफताब ने बेहद भावुक होते हुए बताया कि सरकारी इमदाद के तौर पर उनके परिवार की अब तक कोई मदद नहीं मिली है वही सम्मान के तौर पर एक अदद मार्ग व गेट तक नहीं बन पाया है। 24 अप्रैल 1999 को उनके पिता मोहम्मद इसहाक की मृत्यु के बाद मिलने वाली स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पेंशन भी बंद हो गई।उन्होंने बताया कि चार भाइयों में से दो भाई परिवार के भरण पोषण के सिलसिले में सुल्तानपुर में रहकर मेहनत मजदूरी कर रहे हैं I वही वे दो भाई अमेठी नगर पंचायत अंतर्गत मोहल्ला गंगागंज सरवन पुर वार्ड नंबर 08 में अपने परिवार के साथ रहकर ड्राइवर का काम करते हुए परिवार का पेट पाल रहे हैं।अपने पिता स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद इसहाक के जीवन संघर्षों से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए बताया कि उनके पिता आजादी की लड़ाई में 07 बार जेल गए थे।1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद उन्हें उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस में बतौर सिपाही नौकरी कर रहे थे।

अब तक नहीं शासन व सरकार तक सेनानी के उत्तराधिकारी की गुहार

स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद इसहाक के परिवार के सदस्यों ने कई बार प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री सहित स्थानीय जिला स्तरीय अधिकारियों से मिलकर अपनी दीन हीन दशा को बताते हुए अपनी फरियाद कर चुके हैं किंतु अब तक कोई विचार न होने से उनका परिवार निराश हो गया है। स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद इसहाक के पौत्र मोहम्मद फैजान को सिर्फ इस बात का मलाल है कि आजादी में उनके बाबा के योगदान को सरकारों के साथ-साथ शासन प्रशासन ने भी भुला दिया गया है I स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे में आरक्षण होने के बाद भी उनके परिवार से किसी को कोई सरकारी नौकरी भी नही मिली है। उन्होंने लंबे अरसे तक सत्ता पर काबिज रहे गांधी परिवार को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पिता मोहम्मद इसहाक व उनके परिवार की अनदेखी की गई है।

क्या बताया स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी समिति

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी समिति के संयोजक राजेश कुमार सिंह ने प्रकरण पर दुख जताते हुए कहा कि ऐसे न जाने कितने स्वतंत्रता सेनानी परिवार गुमनामियों में जी रहे हैं I उन्होंने प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया है I उन्होंने बताया कि इस सम्बंध में जिलाधिकारी अमेठी राकेश कुमार मिश्र से वार्ता किया है I उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द सेनानियों के परिवारों से संबंधित समस्याओं के निराकरण के लिए बैठक बुलाएंगे I इसके साथ स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्ति स्थापित करने एवं पार्क निर्माण की मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया है I

फिलहाल बदहाली में जी रहे इन परिवारों के साथ सरकार और शासन कितना न्याय करती है, आने वाले वक्त में ही पता चलेगा I अभी तो स्वतंत्रा सेनानी साहब का परिवार गरीबी और आर्थिक तंगी के बीच में ही जी रहा है I अभी तक इस परिवार को उम्मीद की किरण नहीं दिख रही है I परिजनों की मांग है की मुझे मदद मिले या ना मिले, लेकिन उनके योगदान को कम से कम सरकार व शासन याद तो रखें I

नीरज सिंह / विजय यादव 

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