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Special News : जमीनी माप के लिए होगा डिजिटल तकनीकी का प्रयोग

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प्रस्तुति- ए.एस. भदौरिया

अमेठी, उप्र।

जमीनी माप के विवादों में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार डिजिटल तकनीकी का प्रयोग करेगी इसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। जमीन मापने के लिए अब जीपीएस रोवर मशीन का इस्तेमाल होगा। जमीनी माप के मामलों में डिजिटल तकनीकी के प्रयोग से राजस्व निरीक्षकों और लेखपालों की मनमानी खत्म होगी और पैमाइश भी सटीक होगी।

यह तकनीक सैटेलाइट के ज़रिए सटीक मानचित्र बनाएगी, जिससे चकबंदी और राजस्व मामलों में पारदर्शिता आएगी। जमीनी विवादों में कमी आएगी। इस योजना की शुरुआत के लिए प्रदेश सरकार लगभग 350 रोवर खरीद रही है। जमीनी माप की यह डिजिटल प्रणाली जमीन की पैमाइश में पुरानी गड़बड़ियों को खत्म करेगी और लेखपाल-कानूनगो की मनमानी पर रोक लगाएगी, जिससे सभी राजस्व मामले मेरिट के आधार पर समय से निपटाए जा सकेंगे।

डिजिटल नक्शा तैयार करेगी रोवर मशीन

रोवर मशीन सैटेलाइट के ज़रिए जमीन के हर गाटे (प्लॉट) का सटीक डिजिटल नक्शा तैयार करेगी, जिससे मौजूदा रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर पता चलेगा। रोवर मशीन को खेत के कोनों पर रखकर अक्षांश-देशांतर दर्ज किए जाएंगे और सटीक क्षेत्रफल निकाला जाएगा, जो पहले के तरीकों से ज़्यादा विश्वसनीय होगा।

बीते दिनों मुख्यमंत्री ने इस योजना के क्रियान्वयन के लिए राजस्व विभाग को रोवर खरीदने और कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए हैं, जिसके लिए इंजीनियरिंग कॉलेजों और आई आई टी की मदद ली जाएगी।

डिजिटल तकनीकी का चकबंदी में लाभ

नए ई-नक्शों से चकबंदी आसान होगी, ग्राम समाज की ज़मीनों का चिह्नांकन होगा, अवैध कब्ज़े हटेंगे और सरकारी योजनाओं के लिए ज़मीन का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

अमित सिंह उपजिलाधिकारी, तिलोई के उवाच

तकनीक का इस्तेमाल करके भूमि रिकॉर्ड को डिजिटाइज किया जा रहा है और जमीन की पैमाइश को पारदर्शी बनाने की प्रक्रिया पर कार्य चल रहा है।

 

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