Lok Dastak

Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak

धीमा ज़हर….

1 min read

 

क्रोध, लोभ ,मोह , अहम आदि में डूबना भी एक तरह से धीमा – धीमा जहर पीने के समान है|इसीलिए सकारात्मक चितन से खुद भी तिरे व दूसरों को भी तिराने की खुशो देवे देवें| मानव तन में रहता है एक दानव भी ।जाने जब तब हो जाता है वो हावी भी । जिस थाली में खाता पीता मानव उसमें कर देता है छेद भी ।उस के वश हो जाते अवांछनिय , अधम कर्म भी पछताना होता अंत में फिर । पर तब तक बहुत, हो जाती देर भी । पर होत क्या फिर, जब चिड़िया चुग जाए खेत ही । रह जाता मानव बस हाथ मलता यूँही ।

रोता रहता अपनी क़िस्मत को वो फिर ।कर्म के बंधन है प्रगाढ़ भी । है ये सब मोहनिया कर्म के कारण ही ।क्रोध में हो जाती आँखें लाल आग बरसती सी । शरीर में होती कंपन जैसे उठाते सागर में ज्वार भाटे सी । दिमाग़ हो जाता निर्जीव सा सोच को जैसा मार गया हो लकवा सा । मानव बन जाता है दानव सा फिर जो होता इसका भान नही। उतरता जब क्रोध का भूत तब हतप्रभ रह जाता देख विनाश का मंज़र ही । करता है क्रोध व अहम । पीता है स्वयं ही धीमा ज़हर । ढाता है खुद पर ही कहर।कर लेता है वह तन-मन दूषित । खो देता है होश-औ-हवास बन जाता है घृणा का पात्र। नहीं चाहता आना कोई दिल से उसके पास।पछतावा रह उसे जाता उसे करले प्रायश्चित कितना भी ।

इसके विपरीत चित्त उसका रहता शांत । जिसका स्थिर -सम है श्वास । होता खान पान सात्विक और समयबद्ध भी । ज्ञान चक्षु का जागरण होता । जीवन में होता नहीं विषय विकार भी । वह कषायों का करता वो शमन और इच्छाओं का सीमित परिमाण भी । मैत्री की धारा बहती निस दिन । रखता करुणा दया समत्व भाव जीवों के प्रति वह फिर ये दानव नहीं पनपता कभी ।

प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़ )

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright ©2022 All rights reserved | For Website Designing and Development call Us:-8920664806
Translate »