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नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती पर विशेष……..

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एक ऐसा महान देशभक्त जो तुम मुझे खून दो,मैं तुम्हें आजादी दिलाऊँगा का प्रणकर्ता स्वतंत्रता सेनानी, आजाद हिन्द फौज के निर्माता व कर्णधार,जय हिन्द का जोशीला नारा बुलंद करने वाला आदि जो आज हमारी आँखों के सामने नहीं है । ऐसे भारत माता के महान सपूत नेताजी सुभाष चंद्र बोस को उनकी जन्म जयन्ती पर मेरा श्रद्धा से शत – शत नमन । कहते है की जहां दो बरतन होंग़े वहाँ खड़-खड़ की आवाज आयेगी।

ठीक वैसे ही जंहा दो विचार वाले व्यक्ति होंग़े वंहा मतभेद होना निश्चित है। विचार का मतभेद होना कोई ग़लत नहीं है।हर व्यक्ति का अपने सोच का अलग नज़रिया होता है।पर कभी-कभी हम उस मतभेद को अपनी प्रतिष्ठा मान कर सामने वाले व्यक्ति से मनभेद कर लेते हैं।यह गलत है ।हम जरा सोच कर देखे कि जब मनभेद होगा वंहा नफ़रत के बीज भी अंकुरित होंग़े और वो ही नफ़रत आगे धीरे-धीरे एक पेड़ जैसे बढ़ता जाता है ठीक वैसे ही वो मनभेद दुश्मनी का रूप धारण कर लेता है।हम उस इंसान से नफ़रत करना शुरू कर देते हैं।

जिसके कारण मन की शांति खोने के साथ करमों का बंधन भी बांधना शुरू कर लेते हैं।। इसलिये जीवन में कभी किसी के साथ मतभेद हो जाये तो या तो बात को आयी-गयी कर दो,या सामने वाले से खमत-खामणा करके अपने दिल को हल्का कर लीजिये।जीवन में शांति और आनंद की अनुभूति रहेगी। ऐसा ही एक वाक्या यह है कि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के विचार गाँधी जी से बिलकुल भी मेल नही खाते थे फिर भी बोस जी गाँधी को पिता के समान सम्मान देते थे । क्योंकि बहुधा मतभेद से हम अज्ञान के कारण मनभेद उत्पन्न कर बैठते है यह मनभेद वास्तव में स्वार्थ का पर्याय है और इसका उदय भी अज्ञान के कारण होता है।

आवश्यकता इस बात कि है कि हम हर परिस्थिति और कर्म को अलग दृष्टीकोण से भी सोच कर देखें, शायद यहीं से हमें अच्छे-खराब का असल भेद ज्ञात होगा। मगर किसी भी हाल में मतभेद के कारणों को मनभेद तक ना आने दें अन्यथा हमारी तमाम क्रियाशीलता एक स्वार्थ, जलन और हीन भावना का रूप ले बैठेगी और हमारे विकास मार्ग कों अवरुद्ध कर देगी । आदमी के पास प्रखर बुद्धि का एक अनूठा बल है । बुद्धि ही मानव जीवन का सबसे उत्तम संबल है ।बुद्धि हमे प्रकाश देती है । बुद्धि हमें विश्वास देती है ।बुद्धि के सकारात्मक उपयोग से हमें बड़ा बल भी मिलता है व इसे सही दिशा प्रदान करने से हमें सुहाना कल भी मिलता है ।

जिंदा हाथ नहीं आये थे आजाद उन्होंने खुद को गोली मार ली थी । तुम मुझे खून दो म़ैं तुम्हें आजादी दूंगा सुभाष बोस ने यह कहते ललकारा था ।ऐसे आजादी के दीवानों से इतिहास भरा पड़ा है यह हम आज देख रहे हैं । शहीदों के शौर्य की गाथा लहर -लहर लहराता तिरंगा है । यह हमको भारत के गीत सुनता है । लहर लहर लहराता तिरंगा देखकर सबके मान को भाता है । सबका मन हर्षाता है ।वीर शहीदों की गाथा नित्य नित्य ये सुनाता है । देश पे हुए शहीदों को आगोश में ये ले लेता है । ऐसे महान देशभक्त स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के श्री चरणों में कोटि-कोटि नमन है , शत – शत वंदन है।

प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़, राजस्थान )

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