REMEMBRANCE : बैसवारे के ही थे विनोद कुमार शुक्ल……..विनम्र श्रद्धांजलि !
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प्रस्तुति – गौरव अवस्थी

रायबरेली/उन्नाव (उत्तर प्रदेश)
रायपुर (छत्तीसगढ़) में प्रख्यात कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल जी का दुर्भाग्यपूर्ण निधन हो गया। जन्म के ठीक एक सप्ताह पहले..
निधन की सूचना के बाद से ही समाज खासतौर से साहित्य जगत में शोक व्याप्त है। उनकी एक कविता है-‘एकला कहां चला’। इस कविता की पहली लाइन है-
एकला कहां चला
साथ मेरे रास्ता चला..
कल से ही सोशल मीडिया पर उनकी कविताओं की भरमार है। खासकर ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अनेक राजनीतिक पदधारियों ने हिंदी के इस महत्वपूर्ण हस्ताक्षर के निधन पर अपना शोक प्रकट किया। यह शोकांजलियां बता रहीं हैं कि जमाना उनके साथ है। भले ही जमाना अंतिम यात्रा समाप्त होने के बाद वैसे ही लौटने को मजबूर होगा, जैसे उस कविता में मजबूर होकर रास्ता लौटा था-
‘लौटने का कोई रास्ता
रास्ता देखेगा नहीं तो
लौट जाएगा..’
उनके देहावसान पर उन्हीं के शब्दों में-
‘इस रात बहुत सी रातों की इकट्ठी रात है,
इस रात बहुत सी रातों का अंधेरा है..’
दुख की इस बेला में भी यह फख्र बार-बार मन में घर कर रहा है कि जिन कवि पर देश हो दुनिया इतनी दुखी है उन सम्माननीय विनोद कुमार शुक्ल का नाता भी अपने बैसवारे से ही है।
उन्नाव का पूर्वी क्षेत्र और रायबरेली का पश्चिमी क्षेत्र ‘बैसवारा’ कहलाता है। यह वही बैसवारा है जहां प्रताप नारायण मिश्र, आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी, पंडित रघुनंदन प्रसाद शर्मा, आचार्य बृजनंदन, भगवती चरण वर्मा रामविलास शर्मा, आचार्य नंद दुलारे बाजपेई, डॉ शिवमंगल सिंह सुमन, मधुकर खरे, डॉ शिव बहादुर सिंह भदौरिया, डॉ उपेंद्र बहादुर सिंह समेत अन्यान्य साहित्य मनीषियों ने जन्म लिया।
विनोद कुमार शुक्ल के पूर्वज भी जानकी प्रसाद शुक्ल बक्सर (उन्नाव) के पास जगतपुर ग्राम के निवासी थे। उनके पुत्र रामलाल शुक्ल (विनोद जी के बाबा) रोजी रोजगार के सिलसिले में तब मध्य प्रदेश और अब छत्तीसगढ़ में शामिल राजनांदगांव में जाकर बस गए। विनोद जी ही नहीं उनके पिता शिव गोपाल शुक्ला का जन्म भी राजनांदगांव में ही हुआ बताया जाता है।
रामलाल शुक्ल जी के 6 पुत्र (रामाधार मन्ना महाराज, शिवबिहारी, शिवमंगल शिवकरण, शिवगोपाल, किशोरी लाल) और एक पुत्री थी। विनोद कुमार शुक्ल शिव गोपाल जी के आत्मज हैं।
उनके चाचा किशोरी लाल शुक्ल राजनांदगांव में पांच बार विधायक रहे और मध्य प्रदेश सरकार में कई बार कैबिनेट मंत्री भी राजनांदगांव को जिला बनाने में उन्हीं की महती भूमिका मानी जाती है।

विनोद कुमार शुक्ला जी की कुलदेवी आज भी उनके परिवार में स्थापित हैं। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बस गए शुक्ला परिवार के वंशज आज भी यदा-कदा अपने पूर्वजों की पवित्र माटी को माथे पर लगाने के लिए उन्नाव आते रहते हैं। हालांकि ग्राम में रहने वाले किशोरी लाल शुक्ल के पौत्र मनोज शुक्ला को यह याद नहीं है कि विनोद कुमार शुक्ल का अपने पैतृक ग्राम पहले कब आना हुआ था?
कुछ भी हो कलम-कृपाण की धनी बैसवारे की धरा के एक और लाल विनोद कुमार शुक्ल के स्वभाव में बैसवारे का ठेठपन पूरी ठसक के साथ मौजूद था। अपने पुत्र के लिए उन्होंने किसी भी राजनेता के आगे हाथ नहीं पसारा..यही बैसवारा है..
उनके महाप्रयाण से उनके अपने बैसवारे के लोग शोक संतृप्त हैं..

