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आखिर सरकार ने लगा दी संगठन पर पाबंदी

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नई दिल्ली  I

जिस संगठन की गतिविधियों को लेकर सरकारी जांच एजेंसियां और सुरक्षा मामलों की जानकारों की काफी समय से की जा रही मांग को केंद्र सरकार ने मानते हुए संगठन पर पाबंदी लगा दी गई जिसे लेकर राजनीतिक दलों में मतभेद भी देखने को मिल रहा है I केंद्र सरकार ने आखिरकार बुधवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) गैर कानूनी संगठन ठहराते हुए पांच वर्ष के लिए बैन लगा दिया है I इसके साथ ही उनके आठ सहयोगी संगठनों पर भी पाबंदी लगा दी है I सरकार के इस फैसले के बाद संगठनों से जुड़े लोगों पर कार्यवाही होने की संभावना बढ़ गई है I पिछले दिनों में पीएफआई पर एनआईए और ईडी की छापेमारी के साथ-साथ जनता से जुड़े लोगों पर भी कार्यवाही जारी है I मंगलवार को भी कई राज्यों में उनके ठिकानों पर रेड पड़ी है  I पीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित सैकड़ों लोगों की अब तक एनआईए व पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की जा चुकी है I ईडी भी जोर शोर से उनकी संपत्तियों एवं खातों की जांच कर रही है I केन्‍द्र सरकार ने पापुलर फ्रंट आफ इंडिया और 8 सहयोगी संगठनों पर देश व‍िरोधी गत‍िव‍िध‍ियों के चलते UAPA के तहत पांच साल का प्रतिबंध लगाया है। सरकार की ओर से लगाए गए इस प्रतिबंध में संस्था के सभी सहयोगियों और तमाम मोर्चों को गैरकानूनी घोषित कर द‍िया है।


पीएफआई की पाबंदी पर राजनेताओं के बयान–

यूपी के मुख्‍यमंत्री योगी आद‍ित्‍यनाथ ने पीएफआइ पर बैन के केन्‍द्र सरकार के फैसले की सराहना करते हुए इसे स्‍वागत योग्‍य बताया है। मुख्‍यमंत्री योगी आद‍ित्‍यनाथ ने कहा क‍ि, ‘राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पापुलर फ्रंट आफ इंडिया और उसके अनुषांगिक संगठनों पर लगाया गया प्रतिबंध सराहनीय एवं स्वागत योग्य है। यह ‘नया भारत’ है, यहां आतंकी, आपराधिक और राष्ट्र की एकता व अखंडता तथा सुरक्षा के लिए खतरा बने संगठन एवं व्यक्ति स्वीकार्य नहीं है।
असम के मुख्यमंत्री हेमंत विस्वा सरमा ने कहा कि भारत सरकार द्वारा PFI पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का स्वागत करता हूं। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ है कि भारत के खिलाफ विभाजनकारी या विघटनकारी डिजाइन से सख्ती से निपटा जाएगा। पीएफआई पर पाबंदी को लेकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि पीएफआई पर पाबंदी लगाने का समय आ गया था I भारत सरकार का निर्णय सही है I राष्ट्र विरोधी समूह के लिए संदेश है I इस फैसले का स्वागत करता हूं I उन्होंने लोगों से अपील की इस संगठन से ना जुड़ें I ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने बरेली में कहा कि पीएफआई पर बैन लगाना सरकार का अच्छा कदम है I यह सरजमी कट्टरपंथियों के लिए नहीं है I कट्टरपंथियों से देश की अखंडता एकता पर असर पड़ता है I वहीं एआईएमआईएम के चीफ़ असदुद्दीन ओवैसी ने पीएफआई का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार का यह फैसला गलत है I अगर कुछ लोगों को गलत गतिविधि के कारण पाबंद किया गया है I यह खतरनाक बात है I पीएफआई पर पाबंदी लगाना सरकार की सरासर तानाशाही है I उन्होंने कहा कि हम कट्टरपंथी सोच का विरोध करते हैं I सवाल उठाते हुए कहा कि दक्षिणपंथी संगठनों पर कब बैन लगाया जाएगा I ऐसे संगठनों को कब तक संरक्षण दिया जाएगा I पीएफआई का समर्थन करने वाले ओवैसी अकेले नेता नहीं हैं I AIUDF के विधायक रफीकुल इस्लाम ने  पीएफआई पर लगी पाबंदी का विरोध करते हुए कहा कि सरकार को पहले सही से जांच कर लेनी चाहिए थी और सरकार को बजरंग दल बीएचपी आरएसएस की भी जांच करनी चाहिए I वहीं कांग्रेस के नेता सुरेश का कहना है कि पीएफआई से पहले आरएसएस की जांच कर पाबंदी लगानी चाहिए I जेडीयू कोटे के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मंत्री जमा खान ने पीएफआई को लेकर बड़ा बयान दिया। जमा खान ने कहा कि पीएफआई को ऐसे बैन करना उचित नहीं है। पहले उसकी जांच होनी चाहिए । मंत्री ने कहा कि टारगेट करके बैन लगाया है।

 आखिर क्यों लगी PFI पर पाबंदी–

पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का गठन 2006 में हुआ था I यह तीन अन्य संगठनों के साथ मिलकर बना था I विशेषज्ञों की मानें तो आतंकी संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया(सिमी) पर सरकार द्वारा पर प्रतिबंध लगाने के बाद इसका अस्तित्व आया था I कहने के लिए यह संगठन दलित और मुस्लिम लोगों के उत्थान एवं सामाजिक कार्य के लिए बनाया गया था I लेकिन इनका उद्देश कुछ और ही था, इनके क्रिया कलापों का खुलासा तब हुआ जब दिल्ली दंगों, शाहीन बाग और बिहार की आतंकी घटनाओं में खुफिया जांच एजेंसियों को इनकी संलिप्तता का पता चला I जिसमें जांच के घेरे में इनके कई पदाधिकारी व कार्यकर्ता मिले उनकी गिरफ्तारी भी हुई I तब से लेकर सरकार से लगातार दबाव बनता रहा कि पीएफआई पर बैन लगाया जाए,वरना देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा है I इस बात की खुफिया एजेंसियों ने भी पोस्ट कर दी थी I आखिरकार सरकार ने पीएफआई और 8 अन्य सहयोगी संगठनों पर 05 वर्ष के लिए पाबंदी लगा दी है I

 

 

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