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जांच के घेरे में ग्राम पंचायतें,जांच प्रक्रिया में शिथिलता से बाधित हो रहा है ग्राम पंचायतों का विकास

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अमेठी। जिले की ग्राम पंचायतों में मनरेगा में अनियमितता का यह कोई पहला मामला नहीं है। सामग्री व श्रमिक के अनुपात में मनमाना भुगतान में आठ ब्लॉकों के बीडीओ से जवाब मांगा गया है। इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायतों में वित्तीय अनियमितता के मामले में 43 ग्राम पंचायतों की जांच चल रही है।

इसके लिए 22 अधिकारी लगाए गए हैं। मनरेगा भुगतान को लेकर अब आठ ब्लाॅकों की कारगुजारी जांच के घेरे में है। इसमें बीडीओ से लेकर कई अन्य की भूमिका की जांच हो रही है।

ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए भेजी जाने वाली धनराशि का कितना उपयोग कहां पर किया जा रहा है। इसको लेकर खोजबीन शुरू हो गई है। जिले के विभिन्न विकास खंडों के 43 ग्राम पंचायतों की कारगुजारी को लेकर मिली शिकायतों पर जांच चल रही है जांच में अलग-अलग विभागों के 22 अधिकारी लगाए गए हैं। वहीं, एक अन्य शिकायत के मामले में 153 ग्राम पंचायतों के सचिवों पर शिकंजा कसने की पूरी तैयारी है।

ग्राम पंचायतों में विकास के लिए आये धन का सचिवों द्वारा प्रधानों को गुमराह करके शासकीय नियमो को तक पर रखकर शासकीय धन का दुरुपयोग किये जाने के मामले आए दिन आते रहते हैं। इन मामलों में कार्रवाई से पहले जांच कराई जा रही है।

अलग- अलग विभागों के 22 अधिकारी गांवों में हुए विकास कार्यों की शिकायतों के बिंदुओं पर जांच में जुटे हैं। डीडीओ द्वारा पश्चिम दुआरा, ऐधी व सूखी बाजगढ़ ग्राम पंचायतों में हुई अनियमितता की शिकायत की जांच की जा रही है। इनमें से ऐधी की रिपोर्ट मिल चुकी है।

जिसका परीक्षण किया जा रहा है। शेष जगह की रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी द्वारा संग्रामपुर ब्लाक के कंसापुर, सिंहपुर के कुकहा रामपुर व भादर के सवनगी गांव की जांच की जा रही है। डीपीओ द्वारा जगदीशपुर के हसवा सुरवन तथा बाजारशुकुल के मकदूमपुर कला गांव की जांच की जा रही है।

पीडी डीआरडीए द्वारा सिंहपुर के मेहमानपुर गांव की जांच की जा रही है। भूमि संरक्षण अधिकारी द्वारा जगदीशपुर ब्लाक के कोयलारा मुबारकपुर गांव की जांच की जा रही है।

समाज कल्याण अधिकारी विकास द्वारा जगदीशपुर के उतेलवा, बाजाशुकुल के महोना पूरब, संग्रामपुर के धौरहरा की जांच की जा रही है। डीडीएजी द्वारा संग्रामपुर के करनाईपुर और गोरखापुर की जांच की जा रही है। जीएम डीआईसी द्वारा बाजारशुकुल के
इक्काताजपुर गांव की जांच की जा रही है।

पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी द्वारा बाजारशुकुल के अहमदपुर, संग्रामपुर के सरैया कनू व अमेठी के गड़ेरी की जांच की जा रही है। डीसी मनरेगा द्वारा मोचवा व जामो के अहद गांव की जांच की जा रही है।

एआईजी स्टांप द्वारा भेटुआ घाटमपुर, बाजारशुकुल के ऊंचगांव, भादर के कस्तूरीपुर की जांच की जा रही है। डीईएसटीओ द्वारा भादर के खानापुर व गौरीगंज के सुजानपुर की जांच की जा रही है। उपायुक्त स्वत: रोजगार द्वारा गौरीगंज के मेदन मवई व अमेठी के घाघूघार गांव की जांच की जा रही है।

जिला प्रोबेशन अधिकारी द्वारा जामो के टिकरा, एएलसी द्वारा जामो के बघैया कमालपुर, अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई द्वारा तिलोई के रजनपुर, अधिशासी अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग द्वारा संग्रामपुर के मिश्रौली बड़गांव, डीआरएमओ द्वारा अमेठी के रायदैपुर व भादर के पीपरपुर की जांच की जा रही है I

सहायक निदेशक मत्स्य को सिंहपुर के महिया सिंदुरिया व बाजारशुकुल के मवइया रहमतगढ़, जिला कृषि अधिकारी द्वारा भेटुआ के बैसड़ा, जिला आबकारी अधिकारी संग्रामपुर के भौसिंहपुर, बीएसए द्वारा संग्रामपुर के पतापुर तथा जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा शाहगढ़ के हरदोइया गांव में जांच की जा रही है।

इनमें से कटारी, इक्काताजपुर, सरैया कनू गांवों में जांच के बाद कमेटी बनाई गई है। वहीं इक्काताजपुर निवासी सुरजीत यादव की शिकायत पर 153 ग्राम पंचायतों की जांच जिला विकास अधिकारी व वित्त लेखाधिकारी डीआईओएस कार्यालय द्वारा की जा रही है।

इन शिकायतों की जांच में सबसे खास बात है कि जांच अधिकारी द्वारा उत्तर प्रदेश पंचायत राज ( प्रधानों और सदस्यों का हटाया जाना) जांच नियमावली, 1997 की धज्जियां उड़ाई जा रही है जिसके वजह से ग्राम पंचायत की जांच विकास कार्य बाधित हो रही है वहीं शिकायतकर्ता सहित प्रधान व सचिव को आर्थिक नुकसान के साथ ही मानसिक प्रताड़ना का शिकार भी होना पड़ता है।

जांच अधिकारी एक भी ग्राम पंचायतों में पंचायत राज नियमावली में दी गई व्यवस्था के मुताबिक जांच नहीं कर रहें हैं, एक-एक ग्राम पंचायतों की जांच साल- साल दो तीन साल तक जांच समाप्त ही नहीं होती, ऐसे में शिकायतकर्ता भी थक हार कर बैठ जाता है जबिक प्रारम्भिक जांच नियमावली के मुताबिक एक माह में समाप्त होनी चाहिए।

डीपीआरओ श्रीकांत यादव ने बताया जांच प्रक्रिया में देरी होने का कारण जांच अधिकारियो के पास अन्य विभागीय कार्य होते हैं जिसकी वजह से देर होती है शिकायत पर जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद परीक्षण कर रिपोर्ट डीएम व सीडीओ के समक्ष प्रस्तुत की जाती है। जिसके बाद निर्णय के आधार पर कार्रवाई की जाती है।

रिपोर्ट- सुरजीत यादव(अमेठी)

 

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