जज्बातों का मोल…..
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जज्बातों का अब कोई मोल नहीं
जिंदगी जीनी है अब प्रैक्टिकल
यह कोई खेल नहीं
कितनी तेजी से बदल रहा है जमाना,
शहर दर शहर, गांव दर गांव
नहीं अब यहां
किसी के जज्बातों का भाव
बदल रही है हमारी संस्कृति का रूप
आचार विचारों और परिधानों का प्रारूप
यही है आजकल की युवा पीढ़ी का रूप…..
डॉ0 रानी गुप्ता
सूरत, गुजरात

