LITERATURE : अवधी साहित्य के उत्सव में सजा भारत-नेपाल कवि सम्मेलन
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रिपोर्ट – लोक दस्तक संवाददाता
श्री सिंहराय अवधी साहित्य विकास संस्थान, हलियापुर, सुल्तानपुर का चतुर्थ वार्षिकोत्सव, त्रि-पुस्तक लोकार्पण एवं अंतर्राष्ट्रीय भारत-नेपाल कवि सम्मेलन सम्पन्न
सुल्तानपुर, उप्र ।
श्री सिंहराय अवधी साहित्य विकास संस्थान, हलियापुर, सुल्तानपुर का चतुर्थ वार्षिकोत्सव, पुस्तक विमोचन एवं अंतर्राष्ट्रीय भारत-नेपाल कवि सम्मेलन प्रताप ढाबा, कूरेभार मोड़, हलियापुर में हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में साहित्य, समाजसेवा और अवधी भाषा-साहित्य से जुड़े लोगों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि शम्भू शरण सिंह तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. विन्ध्य मणि त्रिपाठी, रवीन्द्र प्रताप सिंह एवं डॉ. ओम प्रकाश सिंह मंचासीन रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ हरि प्रताप सिंह द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद संस्थान के अध्यक्ष कुँवर इन्द्रजीत सिंह ‘अर्चक’, बी.डी.ओ. (से.नि.) ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया।
तीन पुस्तकों का हुआ विमोचन
वार्षिकोत्सव के अवसर पर तीन पुस्तकों का विमोचन किया गया। इनमें ‘अवधी हमारि बानी’, ‘आपस-2’ और ‘भावना’ शामिल रहीं। वक्ताओं ने अवधी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण तथा नई पीढ़ी तक अवधी साहित्य को पहुंचाने की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए।
साहित्यकारों का सम्मान
कार्यक्रम में पांच साहित्यकारों को साहित्यिक सम्मान से सम्मानित किया गया। शिवनाथ सिंह ‘शिव’, रायबरेली को ‘अवधी मानस मर्मज्ञ’, शिवकुमार सिंह ‘शिव’, दुसौती को ‘अवधी साहित्य सृजन दीप’, अजय ओझा ‘चन्दन’, बाराबंकी को ‘अवधी साहित्य सुमन’, बृजेश कुमार पाण्डेय ‘इन्दु’, सुल्तानपुर को ‘अवधी साहित्य कलश’ तथा राजबहादुर यादव ‘राना’, अमदेवा, सुल्तानपुर को ‘अवधी साहित्य सरोवर’ सम्मान प्रदान किया गया।
कवि सम्मेलन में बही साहित्य की सरिता
कार्यक्रम के दौरान आयोजित अंतर्राष्ट्रीय भारत-नेपाल कवि सम्मेलन में कवियों एवं साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। अवधी भाषा और साहित्य की विविध विधाओं से जुड़ी प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
आयोजन के दौरान फोटोग्राफी एवं वीडियो का दायित्व सत्येन्द्र प्रताप सिंह ‘सजल’ ने निभाया।
कार्यक्रम के अंत में संस्थान की ओर से अतिथियों, साहित्यकारों और उपस्थित सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। आयोजन ने अवधी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में संस्थान की सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया।

