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माखनचोर ने मुंह में जसोदा मां को कराया ब्रम्हांड दर्शन- ज्ञानवी श्री

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REPORT BY LOK REPORTER 

AMETHI NEWS I

जिले के विकासखंड जामों के सूरतगढ़ गांव में दुर्गा बक्श सिंह के यहाँ चल रही संगीत मयी श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिवस ज्ञानवी श्री ने नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की हाथी दीन्हे घोड़ा दीन्हे और दीन्ही पालकी भजन के साथ भगवान श्री कृष्ण के जन्म उत्सव की कथा सुनाई।

ज्ञानवी श्री ने बताया कि मथुरा के राजा उग्रसेन का पुत्र कंस पाप कर्म में संलग्न हो कर संत, ब्राह्मण, गो एवं संसार के समस्त प्राणियों को कष्ट देता था। कंस के भय से व्यथित होकर गोमाता, पृथ्वी, संत एवं देवता मिलकर भगवान नारायण के पास जाते हैं और भगवान नारायण से कंस के समस्त दुराचार की कथा बताते हैं। तब भगवान भक्त वत्सल स्वभाव को चरितार्थ करने के लिए समस्त देवताओं को आश्वस्त करते हुए कंस को समाप्त करने का संकल्प लेते हैं।

कथा वाचक ने बताया कि इन्हीं कंस की एक बहन देवकी है और उनका विवाह बटेश्वर के राजा वासुदेव के साथ होता है। जब कंस अपनी बहन देवकी को विदा करने चला तब आकाशवाणी द्वारा उसे पता चला कि देवकी का आठवां पुत्र उसका काल होगा। मृत्यु के भय से कंस ने अपनी बहन को ही समाप्त करना चाहा। तब वसुदेव ने कंस को इतना बड़ा पाप करने से रोका एवं संकल्प लिया कि मैं अपने पुत्रों को तुम्हें समर्पित कर दूंगा। लेकिन तुम देवकी का वध मत करो।

उसके बाद कंस देवकी के प्राणों को छोड़कर देवकी एवं वसुदेव को कठोर कारावास में डाल देता है। कालांतर में एक एक करके कंस देवकी वसुदेव के छह पुत्रों को समाप्त कर देता है। देवकी के गर्भ में सातवें पुत्र के रूप में भगवान शेष के अवतार बलराम आते हैं और भगवान के आदेश पर योग माया शेष अवतारी बलराम को देवकी के गर्भ से रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर देती हैं।

उसके बाद अष्टम पुत्र के रूप में नारायण देवकी के गर्भ से कृष्ण के रूप में अवतार लेते हैं। इस अवसर पर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा वाचक ज्ञानवी श्री ने श्रीकृष्ण की बाल लीला का वर्णन करते हुए कथा में बताया कि वासुदेव श्रीकृष्ण को गोकुल में नंद-यशोदा के घर छोड़ आए। उन्होंने उनकी कन्या को ले जाकर कंस को दे दिया।

कंस नहीं माना और कन्या को पत्थर पर पटकने चाहा लेकिन कन्या कंस के हाथ से छूट गई। कन्या ने देवी का रूप धारण कर कंस को चेतावनी दी कि तुम्हें मारने वाला गोकुल में जन्म ले चुका है। यह कहते हुए अंतर्ध्यान हो गई।

इतनी बात सुनकर कंस ने गोकुल में सभी बच्चों को मारने का आदेश देता है। श्रीकृष्ण को मारने के लिए तरह-तरह के उपाय करने लगा मगर सफल नहीं हुआ। तब कंस ने पूतना राक्षसी को भेजा। पूतना ने कृष्ण को मारने के लिए अपने स्तनों में विष लगाकर स्तन पान कराने लगी। भगवान कृष्ण ने पूतना का वध कर दिया I

राक्षस लढासुर,बकासुर आदि राक्षसों के बध की कथा सुनाई इसी के साथ बालरूपी भगवान की उखल बंधन,मुंह में जसोदा मां को ब्रम्हांड का दर्शन का प्रसंग सुनाया।कृष्ण माखन चुराया करते थे, और माखन ही गोप गोपियों की आजीविका थी। ऐसे में वे कृष्ण की माँ से शिकायत करतीं थीं। पर कृष्ण मासूम बनकर उन्हें फिर से मना लेते थे।

श्रीकृष्ण भगवान के माखन चोरी की झांकी ने उपस्थित भक्तों का मन मोह लिया I इस अवसर पर त्रियुगी सिंह, त्रिभुवन सिंह, हरि बक्श सिंह,देवेन्द्र सिंह गल्लू , विजय सिंह, गुड्डू, नीरज , सुरजीत , राम पदारथ दुबे ,देवराज, दीपराज , राहुल, शिवराज, राम खेलावन सिंह,सुरेन्द्र सिंह, माता प्रसाद धर्मेंद्र सिंह, अतुल सिंह, अमर बहादुर सिंह, सीताराम, प्रेम कुमार विनोद सोनी, रामप्रसाद मौर्य, सहित सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और पुरुष मौजूद रहे I

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