Spirituality : बाबा श्रीचन्द्र साहब के 533वें प्रकाश पर्व पर आयोजित हुई विचार गोष्ठी
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रिपोर्ट – लोकदस्तक संवाददाता
अमेठी में विचार गोष्ठी के साथ मनाया गया उदासी सम्प्रदाय के संस्थापक साहिब श्री बाबा श्री चन्द्र साहब का 533वां प्रकाश पर्व
गुरु नानक देव के ज्येष्ठ पुत्र बाबा श्री चन्द्र बाल योगी, ब्रह्मचारी रहे, भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का संरक्षण किया
अमेठी, उप्र ।
सिक्ख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव के सबसे बड़े पुत्र बाबा श्री चन्द्र साहब का 533वां प्रकाश पर्व स्थानीय डाक-बंगले में श्रद्धा, भक्ति और सद्भाव के साथ मनाया गया। बाबा मनोहर सिंह के मार्गदर्शन में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी लंगर आयोजन समिति ने विचार गोष्ठी का आयोजन किया। स्थानीय कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से साहिब श्री बाबा श्री चन्द्र और गुरु महिमा का गुणगान किया।
भोजपुरी और हिंदी फिल्मों के कलाकार श्री नाथ शुक्ल की ओर से साहिब श्री बाबा श्री चन्द्र के जीवन दर्शन पर आधारित रचना कार्यक्रम में आकर्षण का केंद्र रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अवधी कवि राजेन्द्र शुक्ल -अमरेश ने की। संचालन अवधी साहित्य संस्थान के अध्यक्ष और अमेठी में साहित्यिक गतिविधियों के पर्याय कवियों के सबसे बड़े मित्र पर्यावरण विद् डॉ अर्जुन पांडेय ने किया।
श्री गुरु गोबिंद सिंह जी लंगर आयोजन समिति के मुख्य सेवादार संजीव भारती और लंगर समिति के सचिव सदाशिव पांडेय ने कवियों को मालाएं पहनाई और अंगवस्त्र भेंटकर कर सभी कवियों का सम्मान किया। आयोजन समिति की ओर से सेवादार अम्बरीष मिश्र ने साहिब श्री बाबा श्री चन्द्र साहब के जीवन दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि बाबा श्री चन्द्र साहब का जन्म पंजाब प्रांत के कपूरथला जिले में 1494ई में सुल्तानपुर लोधी में हुआ था।
जन्म के समय उनके शरीर पर विभूति की एक परत तथा कानों में मांस के कुंडल बने थे।
वरिष्ठ पत्रकार अम्बरीष मिश्रा ने कहा कि बाबा श्री चंद्र जी के जन्म के समय गुरू नानक जी घर के बाहर बैठकर सत्संग कर रहे थे । उनकी बहन नानकी जी ने सूचना दी की उनके घर एक तेजस्वी बालक ने जन्म लिया है ।जिस अवस्था में अन्य बालक खेलकूद में व्यस्त रहते हैं, उस समय बाबा श्रीचंद गहन वन के एकान्त में समाधि लगाकर बैठ जाते थे।
परम उदासी , असाधारण वैरागी और भगवान के विलक्षण अनुरागी बाबा श्रीचंद ने आचार्य शंकर की तरह भारतीय संस्कृति और अध्यात्म ज्ञान का संरक्षण किया । उन्होने जीवमात्र को भवसागर से पार उतारने के लिए सुगम और आचारमुलक़ भक्ति का पथ प्रशस्त किया । बाबा श्रीचंद ने धर्म की मर्यादा सुरक्षित की , वे जन्मजात योगी थे । उन्होने ज्ञानयोग की साधना की ।बाबा श्रीचंद ने धर्माचरण का शंखनाद किया।आपने जीवन को वैदिक मर्योदा से सम्पन्न कर धर्म का गौरव बढाया।
“मात्राशास्त्र” की रचना की जो इनकी प्रसिध्द कृति है , इसके अलावा इन्होने वेद , ब्रह्मसुत्र और भगवद्गीता पर भाष्य लिखा।गुरु गायत्री,आरता श्री गुरू नानकदेव,सहस्रनामा की रचना की।बाबा श्री चंद्र जी पिता के वैराग्य-संस्कार से बहुत प्रभावित हुए थे। वे अन्य बालको से बहुत कम मिलते थे । दुर से ही निर्लिप्त भाव से उनके खेल देखा करते थे ।
अवधी संस्थान के अध्यक्ष डा अर्जुन पांडेय ने कहा कि बाबा श्री चन्द जी 150 वर्ष तक पृथ्वी पर रहकर लोगों का कल्याण करते रहे।पहले पातशाह श्री गुरुनानक देव से छठवें पातशाह श्री हरगोबिंद जी तक वे धर्म का उपदेश देते रहे। बारठ साहब में लम्बे समय तक तप किये।बाद में अपने शिष्य कमलिया के साथ चम्बा हिमांचल गये।
एक दिन वहाँ रावी तट पर बैठे थे।वहीं से नाव वाले से कहा हमे दूसरी तरफ ले चलो नाव वाले ने कहा राजा का हुक्म है की साधु को न ले जाना।जिस चट्टान पर बाबा जी खड़े थे उसी को हुक्म दिया चल तू ही चल।तुरन्त चट्टान नदी में नाव की तरह तैर कर चलने लगी। बाबा जी गन्तव्य की ओर चले गये।यह सिला वहाँ आज भी बाबा श्री चन्द जी के मंदिर में रखी है।कुछ दिन बाद बाबा जी जंगल मे ध्यान लगाने गये।
काफी समय बाद ध्यान से उठे तो कमलिया को कहा आपका मेरा इतना ही सम्बन्ध था आप वापस बारठ साहब चले जांय, वहीं स्थान की सेवा करें।देखते ही देखते बाबा अदृश्य हो गये।
कवि और फिल्म कलाकार श्री नाथ शुक्ल ने -सबका एक ओंकार, बाबा श्री चन्द्र सरकार -रचना के माध्यम से साहिब श्री बाबा श्री चन्द्र साहब के जीवन और शिक्षाओं का वृत्त चित्र प्रस्तुत किया।
मुख्य सेवादार संजीव भारती ने कहा कि साहिब श्री बाबा श्री चन्द्र साहब जन्मजात योगी और बाल ब्रह्मचारी थे, उन्होंने उदासी सम्प्रदाय की स्थापना की और भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का संरक्षण किया।
कार्यक्रम में गुरु महिमा का हुआ गुणगान
कार्यक्रम में साहिब श्री बाबा श्री चन्द्र साहब के जीवन दर्शन और गुरु महिमा का गुणगान हुआ। डा अर्जुन पांडेय ने गुरु कर चरण कमल दल जैसे ——पंक्ति के माध्यम से गुरु महिमा पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ कवि अमरेश ने मन गुरुचरण में लागे रे ——पंक्ति के माध्यम से गुरु की श्रेष्ठता का बखान किया।
वरिष्ठ कवि राम वदन शुक्ल ने कहा कि गुरु की कृपा के बिना कुछ भी संभव नहीं, उन्होंने राधा का विरह वर्णन प्रस्तुत कर कार्यक्रम को भक्ति रस से सराबोर किया। एक मात्र कवयित्री राम कुमारी गुप्ता -संस्कृति ने संगम नगरी -रचना के माध्यम से तीर्थ राज प्रयाग का गुणगान किया। आशुतोष ने राधा कृष्ण,राम और कृष्ण की भक्ति पर आधारित कविता प्रस्तुत की।
सक्रिय फिर से मदारी हो गये हैं, बाबा पुनः ब्रह्मचारी हो गये हैं जनता जाए तो कहां जाएं रहनुमा सारे शिकारी हो गये हैं—
कार्यक्रम में युवा कवि फतेह बहादुर सिंह कसक,दिवस प्रताप सिंह और अजय अनहद ने समसामयिक रचनाओं के जरिए राजनीति और नेताओं पर कटाक्ष किया। दिवस प्रताप सिंह की रचना -मुसीबत में हर कोई साथ नहीं देता, मुफलिसी में मेहमान भी आना जाना छोड़ देते हैं।को लोगों ने खूब सराहा।
दूसरे कवि की रचना नेताओं के चरित्र पर केंद्रित रही-जब नेता से कौनो काम पडय, मोबाइल पी ए उठावत हैं, मीटिंग चलति अहै नेता कै झूठै झूठ बतावत हैं।

