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	<title>वर्ड न्यूज Archives - Lok Dastak</title>
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	<title>वर्ड न्यूज Archives - Lok Dastak</title>
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		<title>WORLD UPDATE : पाकिस्तान (PAKISTAN) के हाथ से फिसलता बलूचिस्तान     </title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 03:16:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[वर्ड न्यूज]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>प्रस्तुति &#8211; अरविंद जयतिलक पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और ब्लूचिस्तान लिबरेशन...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h3><span style="color: #ff0000"><strong>प्रस्तुति &#8211; अरविंद जयतिलक</strong></span></h3>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-thumbnail wp-image-11283" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-150x150.jpg 150w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-24x24.jpg 24w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-48x48.jpg 48w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-96x96.jpg 96w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-300x300.jpg 300w" sizes="(max-width: 150px) 100vw, 150px" /></p>
<p>पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों के बीच छिड़ी जंग से एक बात स्पष्ट है कि अब ब्लूचिस्तान बहुत अधिक समय तक पाकिस्तान का हिस्सा नहीं रहने वाला। जिस तरह ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाके सड़क पर उतरकर पाकिस्तानी सैनिकों से सीधा मोर्चा ले रहे हैं उससे साफ है कि वे आरपार की लड़ाई के मूड में हैं। निःसंदेह पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में बड़े पैमाने पर ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों को नुकसान हुआ है लेकिन जिस तरह पाकिस्तानी हूकुमत के खिलाफ उठी बगावत की लौ तेज हो रही है उससे साफ है कि पाकिस्तान का विखंडन निकट है। गौर करें तो यह पहली बार नहीं है जब ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों द्वारा अपनी आजादी का बिगुल फूंका गया है। वे पाकिस्तान के निर्माण के समय से ही अपनी आजादी की मांग कर रहे हैं।</p>
<p>आमतौर पर उनके आंदोलन का आधार लोकतांत्रिक है लेकिन जब पाकिस्तानी सरकार का अत्याचार बढ़ा तो उन्हें हथियार उठाने की जरुरत आन पड़ी। अब वे अपनी आजादी के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। देखा भी जा रहा है कि वे पाकिस्तान की सरकार और सेना दोनों को कड़ी चुनौती परोस रहे हैं। याद होगा अभी गत वर्ष ही बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों ने जाफर एक्सप्रेस टेªेन को हाइजैक कर पाकिस्तानी हुकूमत के माथे पर शिकन ला दिया था। इससे निपटने में पाकिस्तानी सेना के पसीने छूट गए थे। उस समय पाकिस्तान ने बीएलए लड़ाकों के हाथ तीस पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या की बात कबूली थी। ध्यान देना होगा कि बलोच लिबरेशन आर्मी लगातार मांग करता आ रहा है कि पाकिस्तान सरकार बलूच के राजनीतिक कैदियों, गायब हुए लोगों, अलगाववादी नेताओं, लड़ाकों और उनके कार्यकर्ताओं को बिना किसी शर्त के रिहा करे। अन्यथा उन्हें खतरनाक परिणाम भुगतना होगा।</p>
<p>लेकिन पाकिस्तान का अत्याचार जारी है। मौजू सवाल यह है कि फिर पाकिस्तान बलूचिस्तान में अलगाववाद की उठ रही लपटों से कैसे निपटेगा? जिस तरह बलूचिस्तान की डोर उसके हाथ से फिसलती जा रही है उससे तो यहीं रेखांकित होता है कि आने वाले कुछ वर्षों में बलूचिस्तान अपनी आजादी की जंग में कामयाब होगा। ऐसा इसलिए कि पाकिस्तान में चौतरफा अराजकता का माहौल है। खैबर पख्तुनवां में भी आग लगी है। सिंध प्रांत भी उबल रहा है। पाकिस्तान की भूमि पर फन फैलाए बैठे आतंकी संगठन भी अब पाकिस्तानी संप्रभुता के लिए नई चुनौती परोस रहे हैं। फिर बलूचिस्तान कब तक पाकिस्तान का अविभाजित अंग बना रहेगा। जानना आवश्यक है कि बलूचिस्तान तेल और खनिज से संपन्न पाकिस्तान का सबसे बड़ा और कम आबादी वाला राज्य है। यहां सर्वाधिक आबादी बलूचों की है और उनका आरोप है कि पाकिस्तान की सरकार उनके साथ भेदभाव और शोषण करती है।</p>
<p>उनके खनिज संपदा का जमकर दोहन करती है लेकिन उनकी बुनियादी जरुरतों का तनिक भी ख्याल नहीं रखती है। कहना गलत नहीं होगा कि राजनीतिक तौर पर बलूचों के साथ भेदभाव, नाइंसाफी और शोषण ने वहां के लोगों के मन में पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ नफरत का भाव भर दिया है। गौर करें तो पाकिस्तानी सेना दशकों से बलूचिस्तान में अलगावादियों का उत्पीड़न व हत्या कर रही है। अब तक पाकिस्तानी सेना के हाथों हजारों बलूच नागरिक मारे जा चुके हैं। पाकिस्तानी सेना द्वारा 2006 में बलोच नेता नवाब अकबर बुगती की हत्या के बाद बलूचियों पर अत्याचार पहले से बढ़ गया है। याद होगा 2005 में बलूच नेता नवाब अकबर बुगती और मीर बलाच मार्री द्वारा पाकिस्तान सरकार के समक्ष 15 सूत्री मांग रखी गयी थी। इस मांग में बलूचिस्तान प्रांत के संसाधनों पर ज्यादा नियंत्रण और सैनिक ठिकानों के निर्माण पर रोक का मुद्दा शीर्ष पर था। लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने इन मांगों को सिरे से खारिज कर दिया।</p>
<p>नतीजा टकराव बढ़ गया। जबकि हकीकत है कि बलूचिस्तान के नागरिक अलगाववादी नहीं बल्कि अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से लैस है। पाकिस्तान के कुल प्राकृतिक गैस का एक तिहाई यही से निकलता है। लेकिन विडंबना है कि उसका आनुपातिक लाभ बलूचिस्तान को नहीं मिलता है। उदाहरण के लिए 1952 में बलूचिस्तान के डेरा बुगती में गैस के भंडार का पता लगा और 1954 से गैस का उत्पादन शुरु हो गया। पाकिस्तान के अन्य तीनों प्रांतों को उसका लाभ तुरंत मिलने लगा लेकिन बलूचिस्तान को यह लाभ 1985 में मिला। इसी तरह चीन के साथ तांबा, सोना और चांदी उत्पादन करने की पाकिस्तानी चगाई मरुस्थल योजना 2002 में आकार ली। तय हुआ कि बलूचिस्तान को उसका वाजिब लाभ मिलेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस योजना के तहत प्राप्त लाभ में चीन का हिस्सा 75 फीसद और पाकिस्तान का 25 फीसद है। लेकिन इस 25 फीसद में बलूचिस्तान के हिस्से में सिर्फ 2 फीसद ही आता है। यह स्थिति तब है जब पाकिस्तानी संविधान के 18 वें संशोधन के मुताबिक बलूचिस्तान को विशेष अधिकार प्राप्त है। इसी नाइंसाफी का नतीजा है कि बलूचिस्तान के नागरिक आक्रोशित हैं और पाकिस्तान से अलग होने की मांग कर रहे हैं।</p>
<p>वैसे भी गौर करें तो बलूचिस्तान कभी भी पाकिस्तान का नैसर्गिक हिस्सा नहीं रहा है। इतिहास में जाएं तो 15 अगस्त, 1947 को भारत के साथ ही बलूचिस्तान ने भी अपनी आजादी का एलान किया था। लेकिन अप्रैल 1948 में पाकिस्तानी सेना ने मीर अहमद यार खान को अपना राज्य कलात छोड़ने पर मजबूर कर दिया। उनसे जबरन कलात की आजादी के खिलाफ समझौते पर हस्ताक्षर करवाया गया जबकि उनके भाई प्रिंस अब्दुल करीम खान इस समझौते के विरुद्ध थे। वे किसी भी कीमत पर बलूचिस्तान का 23 फीसद हिस्सा पाकिस्तान को देने को तैयार नहीं थे। लिहाजा उन्होंने 1948 में पाकिस्तान के खिलाफ अलगाव का बिगुल फूंक दिया। उनके नेतृत्व में बलूच नागरिकों ने अफगानिस्तान की जमीन से पाक सैनिकों के खिलाफ गुरिल्ला जंग छेड़ दिया। इस संघर्ष को नवाब नवरोज खान ने आगे बढ़ाया लेकिन इसकी कीमत उन्हें भारी चुकानी पड़ी। पाकिस्तान की सरकार ने उनके दोनों बेटों और भतीजों को फांसी पर लटका दिया। इस अत्याचार के बाद भी जब बलूचों का स्वर धीमा नहीं पड़ा तो यहां 1973-74 में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया और अलगाववादियों के विरुद्ध दमनात्मक कार्रवाई तेज हो गयी।</p>
<p>इस दौरान तकरीबन 8000 बलूची नागरिक मारे गए और हजारों घायल हुए। लेकिन गौर करें तो पाकिस्तानी सेना के जुल्म के बाद भी आजादी का स्वर थमा नहीं है। मौजूदा समय में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट, यूनाइटेड बलोच आर्मी, लश्कर ए बलूचिस्तान और बलूचिस्तान लिबरेशन यूनाइटेड फ्रंट जैसे संगठन बलूचिस्तान की आजादी के लिए आंदोलित हैं। पाकिस्तान के लिए यह मुसीबत पैदा करने वाला है कि भारत ही नहीं अमेरिका भी बलूचिस्तान पर पाकिस्तानी सेना द्वारा मानवाधिकार हनन और अत्याचारपूर्ण कार्रवाई का अनैतिक मान रहा है। याद होगा गत वर्ष पहले कैलिफोर्निया के रिपब्लिकन सांसद दाना रोहराबचेर ने दो अन्य सांसदों के समर्थन से अमेरिकी कांग्रेस में बलूचिस्तान के लोगों के लिए इन जुल्मों के खिलाफ ‘आत्मनिर्णयन’ के अधिकार की मांग वाला प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि बलूचिस्तान का प्रदेश पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान में फैला हुआ है और यहां के लोगों को संप्रभु अधिकार प्राप्त नहीं है।</p>
<p>याद होगा वर्ष 2016 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उलंघन का मुद्दा उठाए जाने से पाकिस्तान घिर गया था। तब उसकी बोलती बंद हो गयी थी। उसे इतना करारा झटका लगा था कि वह निर्वासित बलूच नेताओं से बातचीत को तैयार हो गया था। तब बलूचिस्तान प्रांत के मुख्यमंत्री नवाब सनाउल्ला जेहरी और पाकिस्तानी सेना के दक्षिणी कमान के कमांडर आमिर रियाज ने बलूच नेताओं से बातचीत का पैगाम भेजा। तब बलूच नेताओं ने भारतीय प्रधानमंत्री के समर्थन से उत्साहित होकर भारत का शुक्रिया जताया था। दो राय नहीं कि आने वाले दिनों दुनिया के अन्य देश भी बलूचिस्तान के मसले पर मुखर होंगें और पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ेगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<item>
		<title>Violence in France : नेपाल से लेकर फ्रांस तक हिंसा का तांडव</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/24668</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 13:00:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[वर्ड न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[France]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; विशेष रिपोर्ट -लोकदस्तक संवाददाता पेरिस, फ्रांस। फ्रांस की राजधानी पेरिस एक बार फिर हिंसक...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><span style="color: #ff0000"><strong>विशेष रिपोर्ट -लोकदस्तक संवाददाता</strong></span></h3>
<h3><strong>पेरिस, फ्रांस।</strong></h3>
<p>फ्रांस की राजधानी पेरिस एक बार फिर हिंसक झड़पों का गवाह बनी। शहर के कई हिस्सों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस बल के बीच तनाव इस कदर बढ़ा कि हालात नियंत्रण से बाहर होते दिखाई दिए। सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने नारों, बैनरों और पथराव के जरिए अपनी नाराज़गी जताई, वहीं पुलिस ने स्थिति संभालने के लिए बल प्रयोग किया।</p>
<p>प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरूआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण दिख रहा था लेकिन धीरे-धीरे भीड़ बेकाबू हो गई। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़े, कई जगहों पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और पुलिस पर पथराव किया। इसके जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। कुछ जगहों पर वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया गया ताकि भीड़ को तितर-बितर किया जा सके।</p>
<p>मौके पर हालात इतने बिगड़े कि कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दुकानों और वाहनों को नुकसान पहुंचने की खबरें भी सामने आईं। कई प्रदर्शनकारी पुलिस की गिरफ्त में आए, वहीं झड़पों के दौरान दोनों पक्षों के लोग घायल भी हुए।</p>
<p>पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया, जिससे गुस्सा और भड़क उठा।</p>
<p>पेरिस में इस तरह की झड़पें एक बार फिर इस बात को उजागर करती हैं कि जनता और प्रशासन के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। भीड़ की संख्या, उनका आक्रोश और पुलिस की कड़ी कार्रवाई ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया।</p>
<p>इस टकराव ने पेरिस की सड़कों को युद्ध क्षेत्र जैसा बना दिया, जहां हर तरफ धुआं, नारेबाजी और भागदौड़ का माहौल देखने को मिला। शहर का सामान्य जीवन प्रभावित हुआ और कई इलाकों में आवाजाही ठप पड़ गई।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>Nepal Revolution : नेपाल में हिंसा पर काबू पाने उतरी सेना, कई जिलों में तनाव बरकरार</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/24661</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Sep 2025 17:54:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[वर्ड न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Nepal]]></category>
		<category><![CDATA[Revolution]]></category>
		<category><![CDATA[उतरी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; विशेष रिपोर्ट &#8211; रवि नाथ दीक्षित  काठमांडू, नेपाल। नेपाल इन दिनों अशांति और हिंसक...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/24661">Nepal Revolution : नेपाल में हिंसा पर काबू पाने उतरी सेना, कई जिलों में तनाव बरकरार</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><strong><span style="color: #ff0000">विशेष रिपोर्ट &#8211; रवि नाथ दीक्षित </span></strong></h3>
<h3><strong>काठमांडू, नेपाल।</strong></h3>
<p>नेपाल इन दिनों अशांति और हिंसक प्रदर्शनों की गिरफ्त में है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि सरकार को सड़कों पर नेपाल आर्मी उतारनी पड़ी। सेना हालात पर नियंत्रण पाने की हरसंभव कोशिश कर रही है, लेकिन कई इलाकों में अब भी प्रदर्शनकारी कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। राजधानी काठमांडू से लेकर तराई और बॉर्डर क्षेत्रों तक तनाव पसरा है।</p>
<p><span style="color: #800080"><strong>आर्मी की तैनाती क्यों हुई?</strong></span></p>
<p>नेपाल में बीते कई दिनों से राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक मुद्दों को लेकर विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। आंदोलनकारी जगह-जगह टायर जला रहे हैं, पथराव कर रहे हैं और कई जगह सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। पुलिस बल कई बार लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल कर चुकी है, लेकिन स्थिति काबू से बाहर होती दिखी। नतीजतन, नेपाल सरकार ने सेना को मैदान में उतारने का निर्णय लिया।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, सेना की तैनाती खासकर उन जिलों में की गई है जहां हिंसा का स्तर ज्यादा बढ़ गया है। वहां पुलिस और स्थानीय प्रशासन हालात संभालने में नाकाम साबित हो रहे थे।</p>
<p><span style="color: #993366"><strong>कर्फ्यू और इंटरनेट बंद</strong></span></p>
<p>नेपाल सरकार ने हिंसा प्रभावित जिलों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया है। साथ ही, अफवाहों को रोकने और भीड़ को भड़कने से बचाने के लिए कई जगह इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।</p>
<p>काठमांडू, नेपालगंज, बिराटनगर और तराई के कुछ अन्य क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की गश्त लगातार जारी है।</p>
<p><strong style="color: #ff00ff">सेना की रणनीति</strong></p>
<p>सेना ने प्रमुख चौक-चौराहों, सरकारी दफ्तरों और संवेदनशील इलाकों को अपने कब्जे में ले लिया है। वीडियो फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि भारी संख्या में सैनिक सड़कों पर मौजूद हैं। उनके साथ बख्तरबंद गाड़ियां और आधुनिक हथियार भी तैनात किए गए हैं। सेना न केवल भीड़ को काबू करने में लगी है, बल्कि लोगों को भरोसा दिलाने की कोशिश भी कर रही है कि हालात जल्द सामान्य होंगे।</p>
<p><span style="color: #00ffff"><strong>आंदोलनकारियों का आरोप</strong></span></p>
<p>दूसरी तरफ आंदोलनकारी सरकार पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है और पुलिस-सेना मिलकर उनके दमन में लगी है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि अब तक दर्जनों लोग घायल हो चुके हैं और कई को बिना कारण गिरफ्तार कर लिया गया है।</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>भारत-नेपाल सीमा पर असर</strong></span></p>
<p>नेपाल में फैली हिंसा का असर भारत के सीमावर्ती जिलों तक भी पहुंचा है। उत्तर प्रदेश और बिहार से सटे बॉर्डर पर खास निगरानी रखी जा रही है। सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। नेपालगंज, बहराइच और लखीमपुर खीरी के बॉर्डर चौकियों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं ताकि उपद्रवी भारतीय सीमा में प्रवेश न कर पाएं।</p>
<p><span style="color: #339966"><strong>व्यापार और जनजीवन प्रभावित</strong></span></p>
<p>नेपाल की इस हिंसा का असर आम जनजीवन पर भी गहराता जा रहा है। बाजार बंद हैं, परिवहन व्यवस्था ठप हो चुकी है और लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह ठहर गई हैं। खासकर भारत-नेपाल के बीच होने वाला आयात-निर्यात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>सरकार की अपील</strong></span></p>
<p>नेपाल सरकार ने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने बयान जारी कर कहा है कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है और बातचीत ही एकमात्र रास्ता है। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि आंदोलनकारियों की मांगों पर विचार करने के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई जाएगी।</p>
<p><span style="color: #3366ff"><strong>सेना की चुनौतियां<img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-24662" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250910-231836_WhatsApp-1024x568.jpg" alt="" width="640" height="355" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250910-231836_WhatsApp-1024x568.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250910-231836_WhatsApp-300x166.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250910-231836_WhatsApp-768x426.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250910-231836_WhatsApp.jpg 1080w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></strong></span></p>
<p>हालांकि, सेना के लिए हालात सामान्य करना आसान नहीं होगा। कई इलाकों में भीड़ अचानक भड़क जाती है। पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटनाएं लगातार हो रही हैं। महिलाओं और बच्चों तक को विरोध प्रदर्शनों में आगे किया जा रहा है, जिससे सुरक्षा बलों के लिए स्थिति को नियंत्रित करना और भी कठिन हो रहा है।</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>भविष्य का खतरा</strong></span></p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द काबू में नहीं आए, तो नेपाल एक बड़े राजनीतिक संकट की ओर बढ़ सकता है। इससे न केवल नेपाल की आंतरिक स्थिति खराब होगी, बल्कि भारत और चीन जैसे पड़ोसी देशों पर भी असर पड़ेगा।</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>नेपाल की घटना को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता</strong></span></p>
<p>नेपाल की इस स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है। संयुक्त राष्ट्र ने नेपाल सरकार से संयम बरतने और आंदोलनकारियों से शांतिपूर्ण ढंग से निपटने की अपील की है। भारत सरकार ने भी अपने नागरिकों को नेपाल की यात्रा फिलहाल टालने की सलाह दी है।</p>
<p>नेपाल इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां सेना की मौजूदगी तो हालात को कुछ समय के लिए काबू में ला सकती है, लेकिन स्थायी समाधान केवल संवाद और राजनीतिक इच्छाशक्ति से ही संभव होगा। जनता की मांगों और सरकार की नीतियों के बीच संतुलन बनाना ही नेपाल के भविष्य की दिशा तय करेगा।</p>
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		<title>Nepal Revolution : नेपाल में भड़की हिंसा की आंच यूपी बॉर्डर तक, कई जिलों में अलर्ट </title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 17:49:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[वर्ड न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Nepal]]></category>
		<category><![CDATA[PM MODI]]></category>
		<category><![CDATA[Revolution]]></category>
		<category><![CDATA[आंच]]></category>
		<category><![CDATA[जिलों में अलर्ट]]></category>
		<category><![CDATA[नेपाल भड़की]]></category>
		<category><![CDATA[बॉर्डर]]></category>
		<category><![CDATA[यूपी]]></category>
		<category><![CDATA[सीमा सील]]></category>
		<category><![CDATA[हिंसा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; विशेष रिपोर्ट रवि नाथ दीक्षित काठमांडू, नेपाल। नेपाल में सोमवार को युवाओं का सरकार...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><span style="color: #ff0000"><strong>विशेष रिपोर्ट रवि नाथ दीक्षित</strong></span></h3>
<h3><strong>काठमांडू, नेपाल।</strong></h3>
<p>नेपाल में सोमवार को युवाओं का सरकार विरोधी प्रदर्शन हिंसक हो उठा. नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली ने देश में जारी सरकार विरोधी जबर्दस्त प्रदर्शन के मद्देनजर मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल सहित कई शीर्ष राजनीतिक नेताओं के निजी आवास पर हमला किया तथा संसद भवन में तोड़फोड़ की।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान 22 लोगों की मौत हो गई और करीब 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं।हिंसक प्रदर्शन को देखते हुए नेपाल सरकार ने सोमवार देर रात सोशल मीडिया मंचों पर लगाया गया बैन वापस ले लिया है। नेपाल में अब तक गृह मंत्री रमेश लेखक समेत तीन मंत्री इस्तीफा दे चुके हैं।</p>
<p>नेपाल की राजधानी काठमांडू से शुरू हुई हिंसा अब सीमावर्ती इलाकों तक फैल गई है। मंगलवार को बहराइच-नेपाल सीमा के पास स्थित बांके जिले के नेपालगंज में हालात बिगड़ गए। यहां प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर विरोध किया और जमुनहा चौकी पर तोड़फोड़ की। भीड़ भारतीय सीमा की ओर बढ़ी तो एसएसबी और स्थानीय पुलिस ने उन्हें खदेड़कर वापस भेज दिया।<img decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-24620" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250909-WA0028-1024x554.jpg" alt="" width="640" height="346" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250909-WA0028-1024x554.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250909-WA0028-300x162.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250909-WA0028-768x415.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250909-WA0028.jpg 1080w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>लखीमपुर खीरी में एहतियात के तौर पर बॉर्डर को सील कर दिया गया है। सीमा से सटे कैलाली जिले के धनगढ़ी शहर में उपद्रवियों ने पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबा के घर को आग लगा दी। हिंसक भीड़ ने देउबा और उनकी पत्नी के साथ मारपीट की। यहां विदेश मंत्री आरजू राणा देउबा के आवास, मुख्यमंत्री कार्यालय और विभिन्न राजनीतिक दलों के दफ्तरों को भी नुकसान पहुंचाया गया।</p>
<p>धनगढ़ी में उपद्रवियों ने जेल पर हमला बोल दिया और कैदियों को छुड़ा लिया। हालात बेकाबू होते देख प्रशासन ने कर्फ्यू लागू कर दिया। भारतीय सीमा के लखीमपुर खीरी इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। महराजगंज से लगे नेपाली जिले में भीड़ ने हजारों की संख्या में मोटरसाइकिल रैली निकाली और बैरिकेडिंग तोड़ डाली।</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>बारात रोक दी गई, जांच के बाद मिली इजाजत</strong></span></p>
<p>इसी बीच नेपाल के भैरहवा निवासी शाहनवाज अपनी शादी के लिए बाइक से यूपी के नौतनवा आ रहे थे। उनके साथ रिश्तेदार बाइक चला रहा था और कोई बाराती नहीं था। दोपहर करीब 12 बजे जब वे सोनौली बॉर्डर पहुंचे तो एसएसबी ने सुरक्षा कारणों से उन्हें रोक लिया। दस्तावेज दिखाने और जांच के बाद शाहनवाज को भारत में प्रवेश की अनुमति दी गई। नौतनवा पहुंचने के बाद उनकी शादी संपन्न होगी।</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>नेपाल हिंसा,तख्तापलट का यूपी में असर<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-24621" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250909-WA0029-1024x562.jpg" alt="" width="640" height="351" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250909-WA0029-1024x562.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250909-WA0029-300x165.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250909-WA0029-768x422.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250909-WA0029.jpg 1080w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></strong></span></p>
<p>नेपाल में जारी हिंसा का असर उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में साफ दिख रहा है। गोरखपुर रोडवेज डिपो से सोनौली जाने वाली बसों की संख्या अचानक आधी रह गई है।</p>
<p>लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर नेपाल जाने वाली चार अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को डायवर्ट कर उतारा गया। ये फ्लाइट्स दिल्ली, दुबई और बैंकॉक से काठमांडू जा रही थीं। वहीं अबूधाबी से काठमांडू जाने वाली एक फ्लाइट को वाराणसी मोड़ना पड़ा, जो दोपहर 3:20 बजे लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट पर उतरी। इसमें 144 यात्री सवार थे।</p>
<p><span style="color: #339966"><strong>भारत सरकार ने जारी की एडवाइजरी</strong></span></p>
<p>बहराइच के रुपईडीहा बॉर्डर पर भारतीय नागरिकों को नेपाल न जाने की सलाह दी जा रही है। एसएसबी चौकियों पर कड़ी जांच की जा रही है और हर वाहन की सघन तलाशी ली जा रही है।</p>
<p><strong>इंडो-नेपाल बॉर्डर 24 घंटे के लिए सील</strong></p>
<p>नेपाल में लगातार बढ़ते आंदोलन ने अब उग्र रूप धारण कर लिया है। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रुपईडीहा बॉर्डर को हाई अलर्ट पर रखा गया है। सीमा से सटे नेपाली क्षेत्र में मंगलवार को आंदोलनकारियों ने नेपालगंज के कस्टम कार्यालय और जांच चौकी को आग के हवाले कर दिया। बताया जा रहा है कि नेपाल के बांके जिले स्थित एसपी कार्यालय को भी प्रदर्शनकारियों ने जला दिया है।</p>
<p>स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल गेट के सामने नोमेंस लैंड पर भारी भीड़ जमा हो गई है। वहीं, भारतीय सीमा की ओर एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) और स्थानीय पुलिस ने मोर्चा संभाल रखा है। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए सुरक्षा बल पूरी तरह मुस्तैद हैं।</p>
<p>एसएसबी की 42वीं वाहिनी के कमांडेंट गंगा सिंह उदावत, बहराइच के पुलिस अधीक्षक राम नयन सिंह, उपजिलाधिकारी नानपारा मोनालिसा जौहरी और क्षेत्राधिकारी प्रद्युम्न सिंह ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायज़ा लिया।</p>
<p>सीमा को 24 घंटे के लिए सील कर दिया गया है और आने-जाने वालों को सिर्फ वैध पहचान पत्र दिखाने पर ही सीमा पार करने की अनुमति दी जा रही है।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-24622" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250909-WA0030-902x1024.jpg" alt="" width="640" height="727" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250909-WA0030-902x1024.jpg 902w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250909-WA0030-264x300.jpg 264w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250909-WA0030-768x872.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250909-WA0030-1024x1162.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250909-WA0030.jpg 1080w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और किसी भी प्रकार की अफवाह से बचने को कहा है।</p>
<p><span style="color: #993366"><strong>बातचीत शुरू करने की अपील सेना प्रमुख ने की</strong></span></p>
<p>नेपाल के सेना प्रमुख अशोक राज सिग्डेल ने आंदोलनकारी पक्षों से बातचीत के लिए आगे आने का आह्वान किया है। उन्होंने एक वीडियो बयान जारी कर आंदोलन स्थगित करने और बातचीत के लिए आगे आने का आह्वान किया है।</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>नेपाल की हिंसा को लेकर पीएम मोदी का रियक्शन<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-24623" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250909-230821_X-651x1024.jpg" alt="" width="640" height="1007" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250909-230821_X-651x1024.jpg 651w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250909-230821_X-191x300.jpg 191w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250909-230821_X-768x1208.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250909-230821_X-976x1536.jpg 976w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250909-230821_X-1024x1611.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250909-230821_X.jpg 1071w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></strong></span></p>
<p>आज हिमाचल प्रदेश और पंजाब के दौरे से लौटने के बाद Cabinet Committee on Security की बैठक में नेपाल के घटनाक्रम को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। नेपाल में हुई हिंसा हृदयविदारक है। यह जानकर बहुत पीड़ा हुई कि इसमें अनेक युवाओं की जान गई है। नेपाल की स्थिरता, शांति और समृद्धि हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मैं नेपाल के अपने सभी भाई-बहनों से विनम्र अपील करता हूं कि वे शांति-व्यवस्था बनाए रखें।</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/24619">Nepal Revolution : नेपाल में भड़की हिंसा की आंच यूपी बॉर्डर तक, कई जिलों में अलर्ट </a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
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		<title>International Issue : पीएम मोदी–मैक्रों के बीच यूक्रेन संकट के समाधान के प्रयासों पर विस्तार से हुई टेलीफोनिक चर्चा</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/24562</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Sep 2025 16:29:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[वर्ड न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[International Issue]]></category>
		<category><![CDATA[टेलीफोनिक चर्चा]]></category>
		<category><![CDATA[पीएम]]></category>
		<category><![CDATA[प्रयासों]]></category>
		<category><![CDATA[मोदी–मैक्रों]]></category>
		<category><![CDATA[यूक्रेन]]></category>
		<category><![CDATA[यूरोपियन संघ]]></category>
		<category><![CDATA[विस्तार]]></category>
		<category><![CDATA[संकट]]></category>
		<category><![CDATA[समाधान]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रिपोर्ट- लोकदस्तक विशेष संवाददाता नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को फ्रांस के राष्ट्रपति...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/24562">International Issue : पीएम मोदी–मैक्रों के बीच यूक्रेन संकट के समाधान के प्रयासों पर विस्तार से हुई टेलीफोनिक चर्चा</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h3></h3>
<h3><span style="color: #ff0000"><strong>रिपोर्ट- लोकदस्तक विशेष संवाददाता</strong></span></h3>
<h3><strong>नई दिल्ली।</strong></h3>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच हुई इस वार्ता में यूक्रेन संकट के समाधान के प्रयासों और भारत–फ्रांस द्विपक्षीय रिश्तों पर विस्तार से चर्चा हुई।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय हालात पर भी विचार साझा किए। भारत की ओर से इसे सकारात्मक और रचनात्मक संवाद बताया गया। यह चर्चा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका की मध्यस्थता के बावजूद यूक्रेन युद्ध का कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ पाया है।</p>
<p><strong><span style="color: #993300">पीएम मोदी का X पर बयान</span></strong></p>
<p>वार्ता के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा—</p>
<p>“राष्ट्रपति मैक्रों के साथ महत्वपूर्ण विषयों पर अच्छी बातचीत हुई। द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति पर समीक्षा की और इसे सकारात्मक रूप से आंका। यूक्रेन संघर्ष को शीघ्र समाप्त करने के प्रयासों सहित कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।</p>
<p>भारत–फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी वैश्विक शांति और स्थिरता में अहम भूमिका निभाएगी।”हालांकि, यह साफ नहीं हो सका कि वार्ता में अमेरिका की टैरिफ नीति से जुड़े मसलों पर कोई चर्चा हुई या नहीं।</p>
<p><span style="color: #00ff00"><strong>यूरोपीय संघ से भी मोदी का संवाद</strong></span></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से भी टेलीफोन पर वार्ता की थी। उस दौरान दोनों पक्षों ने भारत–ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को जल्द अंतिम रूप देने की आवश्यकता पर बल दिया। जानकारों का मानना है कि फ्रांस यूरोपीय संघ का अहम सदस्य होने के कारण यह संवाद भारत–फ्रांस रिश्तों को भी नई दिशा देता है।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-24564" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250906-WA0023-1024x548.jpg" alt="" width="640" height="343" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250906-WA0023-1024x548.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250906-WA0023-300x161.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250906-WA0023-768x411.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250906-WA0023.jpg 1080w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p><span style="color: #993366"><strong>रणनीतिक साझेदारी के नए आयाम</strong></span></p>
<p>भारत और फ्रांस की साझेदारी लगातार मजबूत होती जा रही है। रक्षा, अंतरिक्ष, नवीकरणीय ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच गहन सहयोग जारी है। हाल ही में फ्रांस ने भारत के साथ राफेल लड़ाकू विमान सौदे और पनडुब्बी निर्माण परियोजना से जुड़े नए प्रस्तावों की घोषणा की है।</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि यह वार्ता न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और स्थिरता कायम करने की दिशा में भी अहम कदम साबित हो सकती है।</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/24562">International Issue : पीएम मोदी–मैक्रों के बीच यूक्रेन संकट के समाधान के प्रयासों पर विस्तार से हुई टेलीफोनिक चर्चा</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
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		<item>
		<title>Modi&#8217;s Visit to Singapore : भारत-सिंगापुर वार्ता: आतंकवाद पर साझा मोर्चा और विकास की नई साझेदारी</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/24500</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Sep 2025 17:12:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[वर्ड न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Modi's Visit to Singapore]]></category>
		<category><![CDATA[आतंकवाद]]></category>
		<category><![CDATA[नई]]></category>
		<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[वार्ता]]></category>
		<category><![CDATA[विकास]]></category>
		<category><![CDATA[साझा मोर्चा]]></category>
		<category><![CDATA[साझेदारी]]></category>
		<category><![CDATA[सिंगापुर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; विशेष रिपोर्ट रवि नाथ दीक्षित नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सिंगापुर के प्रधानमंत्री...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/24500">Modi&#8217;s Visit to Singapore : भारत-सिंगापुर वार्ता: आतंकवाद पर साझा मोर्चा और विकास की नई साझेदारी</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><strong><span style="color: #ff0000">विशेष रिपोर्ट रवि नाथ दीक्षित</span></strong></h3>
<h3><strong>नई दिल्ली।</strong></h3>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वांग के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। यह मुलाकात केवल कूटनीतिक औपचारिकता तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें सुरक्षा, विज्ञान, कौशल और डिजिटल नवाचार जैसे क्षेत्रों में गहन सहयोग का नया मार्ग प्रशस्त हुआ।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने वार्ता के दौरान कहा कि आतंकवाद आज पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है और इसके खिलाफ लड़ाई में सभी राष्ट्रों का एकजुट होना आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद केवल किसी एक देश की समस्या नहीं बल्कि वैश्विक स्थिरता और मानवता के लिए चुनौती है।</p>
<p>सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वांग ने भी इस विचार से सहमति जताते हुए कहा कि सीमाओं से परे जाकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग ही आतंकवाद से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका है। यह साझा दृष्टिकोण भविष्य में सुरक्षा और खुफिया जानकारी साझा करने को और मजबूत करेगा।</p>
<p>इस वार्ता के दौरान भारत और सिंगापुर के बीच पाँच अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इनमें नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में हवाई संपर्क को आसान और तेज बनाने का समझौता, अंतरिक्ष विज्ञान में संयुक्त अनुसंधान और मिशन सहयोग, कौशल विकास में युवाओं को आधुनिक प्रशिक्षण और रोजगार अवसर उपलब्ध कराने की योजना, डिजिटल परिसंपत्ति नवाचार में ब्लॉकचेन और फिनटेक तकनीकों को बढ़ावा देने का समझौता, और सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़े पहलुओं पर सहयोग शामिल हैं।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-24501" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250904-223324_WhatsApp.jpg" alt="" width="830" height="629" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250904-223324_WhatsApp.jpg 830w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250904-223324_WhatsApp-300x227.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250904-223324_WhatsApp-768x582.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 830px) 100vw, 830px" /></p>
<p>इन समझौतों से यह स्पष्ट है कि भारत और सिंगापुर केवल व्यापारिक साझेदार ही नहीं बल्कि रणनीतिक सहयोगी की भूमिका भी निभा रहे हैं। नागरिक उड्डयन से लेकर डिजिटल नवाचार तक, यह सहयोग एशिया में एक नई आर्थिक और तकनीकी धारा को जन्म देगा। वहीं, कौशल विकास के क्षेत्र में सिंगापुर की विशेषज्ञता और भारत की युवा शक्ति मिलकर रोजगार और विकास की अपार संभावनाएं पैदा करेंगी।</p>
<p>कुल मिलाकर, यह वार्ता इस बात का प्रमाण है कि भारत और सिंगापुर अपने रिश्तों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप ढाल रहे हैं। आतंकवाद के खिलाफ साझा मोर्चा और विकास को नई दिशा देने वाले समझौते न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरे एशियाई क्षेत्र के लिए स्थिरता और प्रगति की मजबूत नींव साबित होंगे।</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/24500">Modi&#8217;s Visit to Singapore : भारत-सिंगापुर वार्ता: आतंकवाद पर साझा मोर्चा और विकास की नई साझेदारी</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
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		<title>SCO Summit 2025 : तियानजिन शिखर सम्मेलन और अमेरिकी मीडिया का नजरिया&#8230;!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 19:33:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[वर्ड न्यूज]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; विशेष रिपोर्ट रवि नाथ दीक्षित तियानजिन, चीन। चीन के तियानजिन शहर में आयोजित शंघाई...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/24446">SCO Summit 2025 : तियानजिन शिखर सम्मेलन और अमेरिकी मीडिया का नजरिया&#8230;!</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><strong><span style="color: #ff0000">विशेष रिपोर्ट रवि नाथ दीक्षित</span></strong></h3>
<h3><span style="color: #000000"><strong> तियानजिन, चीन।</strong></span></h3>
<p>चीन के तियानजिन शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन केवल एशियाई राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने अमेरिका के मीडिया जगत में भी हलचल पैदा कर दी। अमेरिकी अखबारों और चैनलों ने इस बैठक को न केवल व्यापक कवरेज दी, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव की ओर इशारा करने वाला कदम बताया। खासतौर पर इस सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चीन में स्वागत और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी बातचीत ने अमेरिकी पत्रकारों और विश्लेषकों का ध्यान खींचा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>अमेरिकी मीडिया का बड़ा हिस्सा पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति पर सवाल उठाता दिखा। अधिकांश अखबारों ने लिखा कि ट्रंप की नीतियों ने भारत-अमेरिका संबंधों को गहरी चोट पहुंचाई है। उनका मानना है कि पिछले 25 सालों से अमेरिका और भारत के बीच जो विश्वास और सहयोग धीरे-धीरे बना था, उसे ट्रंप ने अपने फैसलों से कमजोर कर दिया।</p>
<p>‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा कि ट्रंप ने भारत को आर्थिक और कूटनीतिक रूप से चीन का विकल्प बनाने की कोशिश तो की, लेकिन उनके जल्दबाज़ी भरे और असंतुलित निर्णयों ने इस संभावना को खत्म कर दिया। यही वजह है कि आज भारत, अमेरिका की बजाय रूस और चीन के करीब दिख रहा है।</p>
<p>सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भव्य स्वागत और राष्ट्रपति शी जिनपिंग का उनके साथ गर्मजोशी भरा व्यवहार भी अमेरिकी मीडिया की सुर्खियों में रहा। रिपोर्ट्स में यह सवाल प्रमुखता से उठाया गया कि क्या भारत की चीन और रूस के साथ बढ़ती निकटता वाशिंगटन और नई दिल्ली के रिश्तों को कमजोर कर सकती है।</p>
<p>‘सीएनएन’ ने अपने कवरेज में लिखा कि चीन इस सम्मेलन के जरिए यह दिखाने में सफल रहा कि वह मोदी और पुतिन जैसे नेताओं को साथ लेकर नई वैश्विक व्यवस्था की नींव रखना चाहता है,</p>
<p>‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने इस आयोजन को चीन की कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया। अखबार ने लिखा कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग एससीओ को केवल सुरक्षा मंच तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि इसे आर्थिक सहयोग और राजनीतिक प्रभाव के बड़े ब्लॉक के रूप में देख रहे हैं।</p>
<p>इसी तरह ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने लिखा कि चीन इस सम्मेलन का इस्तेमाल अपनी ताकत दिखाने और अमेरिका को चुनौती देने के लिए कर रहा है। अखबार ने यह भी उल्लेख किया कि मोदी और पुतिन जैसे नेताओं की उपस्थिति ने चीन के इस संदेश को और अधिक मजबूत बना दिया है,</p>
<p>‘द इकोनॉमिस्ट’ ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ट्रंप के बेमतलब के फैसलों ने भारत को अमेरिका से दूरी बनाने पर मजबूर कर दिया। अखबार ने लिखा कि भारत, जो कभी अमेरिकी नीति के लिए चीन का विकल्प समझा जाता था, अब उसी चीन के साथ सहयोग के नए अवसर तलाश रहा है। यह स्थिति अमेरिका के लिए गहरी चिंता का विषय है।</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत ने खुद को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में चीन का विकल्प बनाने के लिए वर्षों तक मेहनत की थी, लेकिन अब उसकी नीति में बदलाव दिखाई देता है,</p>
<p>‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ ने इस सम्मेलन को अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा के बड़े मंच के रूप में देखा। अखबार ने लिखा कि चीन ने इस मौके का इस्तेमाल खुद को वैश्विक नेतृत्व की भूमिका में पेश करने के लिए किया। यदि भारत इस मंच पर अपनी भागीदारी और अधिक सक्रिय करता है, तो यह सीधे-सीधे अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति को चुनौती दे सकता है।</p>
<p>इस विश्लेषण में यह भी कहा गया कि अमेरिका, जो भारत को एशिया में अपना मजबूत सहयोगी मानता रहा है, उसे अब नई रणनीति पर विचार करना होगा</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-24426" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0001.jpg" alt="" width="744" height="590" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0001.jpg 744w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0001-300x238.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 744px) 100vw, 744px" /></p>
<p>अमेरिका के अलग-अलग चैनलों की कवरेज में भी फर्क देखने को मिला। जहां सीएनएन और ब्लूमबर्ग ने इसे विस्तार से प्रस्तुत किया और चीन की रणनीति पर प्रकाश डाला, वहीं फॉक्स न्यूज ने इसे सीमित रूप से कवर किया। फॉक्स न्यूज ने सम्मेलन की खबरें तो दीं, लेकिन उतनी गहराई से विश्लेषण नहीं किया जितना अन्य चैनलों ने किया,</p>
<p>कुल मिलाकर, तियानजिन एससीओ सम्मेलन ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। अमेरिकी मीडिया के लिए यह आयोजन एक संकेत है कि शक्ति संतुलन बदल रहा है। चीन अपनी रणनीति के जरिए खुद को वैश्विक नेतृत्व की भूमिका में स्थापित करना चाहता है, वहीं भारत का उसके साथ कदम मिलाना अमेरिका के लिए चिंता का कारण बन गया है।</p>
<p>अमेरिकी अखबारों और चैनलों की कवरेज से यह स्पष्ट होता है कि वाशिंगटन को अब अपने रिश्तों और नीतियों पर दोबारा विचार करने की जरूरत है, क्योंकि एशिया में बदलते समीकरण आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/24446">SCO Summit 2025 : तियानजिन शिखर सम्मेलन और अमेरिकी मीडिया का नजरिया&#8230;!</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
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		<title>SCO Summit : तियानजिन में संपन्न हो रहा एससीओ शिखर सम्मेलन,  पुतिन ने भारत-चीन की भूमिका को सराहा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 10:47:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[वर्ड न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[SCO Summit]]></category>
		<category><![CDATA[एससीओ]]></category>
		<category><![CDATA[चीन]]></category>
		<category><![CDATA[तियानजिन]]></category>
		<category><![CDATA[पुतिन]]></category>
		<category><![CDATA[भारत-चीन]]></category>
		<category><![CDATA[भूमिका]]></category>
		<category><![CDATA[शिखर-सम्मेलन]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; विशेष रिपोर्ट &#8211; रवि नाथ दीक्षित चीन के ऐतिहासिक और औद्योगिक महत्व वाले शहर...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/24430">SCO Summit : तियानजिन में संपन्न हो रहा एससीओ शिखर सम्मेलन,  पुतिन ने भारत-चीन की भूमिका को सराहा</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><span style="color: #00ff00"><strong>विशेष रिपोर्ट &#8211; रवि नाथ दीक्षित</strong></span></h3>
<p>चीन के ऐतिहासिक और औद्योगिक महत्व वाले शहर तियानजिन में इस वर्ष का शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया। दो दिवसीय इस बैठक का आज समापन होगा । इस बार सम्मेलन में सुरक्षा, व्यापार, यूरेशियन सहयोग और अंतरराष्ट्रीय संकटों के समाधान जैसे गंभीर मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।</p>
<p>रूस, चीन और भारत सहित कई सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने इसमें हिस्सा लिया और अपने-अपने दृष्टिकोण रखे।</p>
<p><span style="color: #993366"><strong>पुतिन का संबोधन: भारत-चीन के प्रयासों की प्रशंसा</strong></span></p>
<p>रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए सबसे पहले यूक्रेन संकट का जिक्र किया। उन्होंने साफ कहा कि इस मसले पर भारत और चीन ने शांति बहाली तथा संवाद को आगे बढ़ाने में सकारात्मक योगदान दिया है।</p>
<p>पुतिन ने यह भी कहा कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हाल ही में अलास्का में हुई बैठक के अनुभवों और सहमतियों को द्विपक्षीय वार्ताओं में अन्य नेताओं के साथ साझा करेंगे। उनके अनुसार यह बैठक भविष्य में समाधान खोजने की दिशा में सहायक सिद्ध हो सकती है,</p>
<p>अपने भाषण में पुतिन ने एक बार फिर रूस की आधिकारिक स्थिति को दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेन की मौजूदा अस्थिरता किसी सैन्य आक्रमण का परिणाम नहीं है, बल्कि पश्चिमी देशों द्वारा समर्थित कीव में हुए तख्तापलट से हालात बिगड़े।</p>
<p>उन्होंने दावा किया कि अलास्का शिखर सम्मेलन में अमेरिका और रूस के बीच जो सहमति बनी है, उससे यूक्रेन में शांति और स्थिरता लाने का मार्ग खुल सकता है। यह बयान स्पष्ट करता है कि रूस अभी भी इस संकट को बाहरी हस्तक्षेप की उपज मानता है और इसे अंतरराष्ट्रीय संवाद से हल करने का पक्षधर है।</p>
<p>पुतिन ने अपने संबोधन में कहा कि एससीओ का महत्व इसीलिए बढ़ रहा है क्योंकि यह संगठन अब यूरोप और अटलांटिक देशों पर आधारित पारंपरिक सुरक्षा ढांचे का विकल्प प्रस्तुत कर रहा है।</p>
<p>उनके अनुसार एससीओ एक ऐसी यूरेशियन सुरक्षा प्रणाली की नींव रख रहा है जो समानता और बहुपक्षीय सहयोग पर आधारित होगी। इससे सदस्य देशों को न केवल सुरक्षा बल्कि आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं मिलेंगी।</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>SCO की वैश्विक भूमिका</strong></span></p>
<p>रूस के राष्ट्रपति ने शंघाई सहयोग संगठन को अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के समाधान में एक मजबूत और प्रभावी मंच बताया। उन्होंने कहा कि एससीओ सिर्फ चर्चा का स्थान नहीं है, बल्कि यहां लिए गए फैसले व्यावहारिक और लंबे समय तक असर डालने वाले होते हैं।</p>
<p>पुतिन ने यह भी जोर दिया कि सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत किया जा रहा है। खासकर स्थानीय या राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ने से डॉलर पर निर्भरता कम हो रही है और इससे सदस्य देशों की आर्थिक संप्रभुता मजबूत होगी।</p>
<p>सम्मेलन की शुरुआत चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संबोधन से हुई। उन्होंने संगठन के सभी सदस्य देशों से न्याय, निष्पक्षता और संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखने की अपील की।</p>
<p>शी जिनपिंग ने द्वितीय विश्व युद्ध की ऐतिहासिक सच्चाइयों का सम्मान करने और शीत युद्ध जैसी मानसिकता से दूर रहने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि धमकी और टकराव की नीतियां किसी भी तरह से विकास और शांति के लिए उचित नहीं हैं।</p>
<p>उनका संदेश यह था कि वैश्विक राजनीति में स्थिरता तभी आ सकती है जब सहयोग को प्राथमिकता दी जाए और किसी भी प्रकार की धमकाने वाली प्रवृत्तियों को हतोत्साहित किया जाए, पुतिन के बयान से यह स्पष्ट है कि भारत की भूमिका को गंभीरता से लिया जा रहा है।</p>
<p>भारत हमेशा से यह मानता रहा है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद का समाधान संवाद और कूटनीति से होना चाहिए। यही कारण है कि यूक्रेन संकट के मामले में भी भारत ने न तो पश्चिमी देशों का पक्ष लिया और न ही रूस का, बल्कि लगातार शांति वार्ता पर जोर दिया। पुतिन की सराहना इस बात का संकेत है कि भारत का यह संतुलित रुख वैश्विक स्तर पर प्रभाव डाल रहा है।</p>
<p>तियानजिन में आयोजित यह बैठक केवल कूटनीतिक रस्म अदायगी नहीं थी, बल्कि एक ऐसा मंच साबित हुई जिसने नए अंतरराष्ट्रीय समीकरणों का संकेत दिया। रूस और चीन जहां अमेरिका तथा यूरोप के दबाव का सामना कर रहे हैं, वहीं भारत जैसे देश एक संतुलनकारी भूमिका निभा रहे हैं।</p>
<p>एससीओ का विस्तार और इसमें बढ़ती सक्रियता यह बताती है कि आने वाले समय में यह संगठन वैश्विक निर्णयों और नीतियों पर और अधिक असर डालेगा।</p>
<p>तियानजिन शिखर सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल पश्चिमी मॉडल से नहीं, बल्कि बहुपक्षीय सहयोग और आपसी संवाद से ही संभव है। पुतिन का भारत-चीन की सराहना करना इस बात का प्रमाण है कि एशियाई देश अब शांति और स्थिरता की दिशा में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।</p>
<p>शी जिनपिंग का शीत युद्ध की मानसिकता छोड़ने का आह्वान भी मौजूदा दौर की सबसे बड़ी ज़रूरत है। इस तरह यह सम्मेलन न केवल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक नया अध्याय जोड़ता है, बल्कि भविष्य के लिए एक नई दिशा भी तय करता है।</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/24430">SCO Summit : तियानजिन में संपन्न हो रहा एससीओ शिखर सम्मेलन,  पुतिन ने भारत-चीन की भूमिका को सराहा</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
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		<title>Modi&#8217;s Speech : SCO समिट में PM मोदी का प्रहार : आतंकवाद पर दुनिया को चेताया</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/24425</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 07:47:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[वर्ड न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[PM]]></category>
		<category><![CDATA[SCO]]></category>
		<category><![CDATA[आतंकवाद]]></category>
		<category><![CDATA[चेताया]]></category>
		<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[प्रहार]]></category>
		<category><![CDATA[मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[समिट]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; विशेष रिपोर्ट – रवि नाथ दीक्षित तियानजिन, चीन। चीन में आयोजित शंघाई सहयोग परिषद...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/24425">Modi&#8217;s Speech : SCO समिट में PM मोदी का प्रहार : आतंकवाद पर दुनिया को चेताया</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><strong><span style="color: #ff0000">विशेष रिपोर्ट – रवि नाथ दीक्षित</span></strong></h3>
<h3><strong>तियानजिन, चीन।</strong></h3>
<p>चीन में आयोजित शंघाई सहयोग परिषद (SCO) शिखर सम्मेलन में सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का दृष्टिकोण रखते हुए आतंकवाद पर जोरदार तरीके से अपनी बात रखी। पीएम मोदी ने न केवल भारत के अनुभव साझा किए, बल्कि वैश्विक स्तर पर इस चुनौती से निपटने के लिए सामूहिक और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>भारत का रुख और एससीओ में योगदान</strong></span></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने एससीओ का सदस्य बनने के बाद हमेशा रचनात्मक और सकारात्मक भूमिका निभाई है। उन्होंने परिषद के लिए भारत की नीति को तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित बताया – सुरक्षा (Security), संपर्क (Connectivity) और अवसर (Opportunity)।</p>
<p>उनके अनुसार, किसी भी संगठन या देश की प्रगति के लिए इन तीनों का होना अनिवार्य है। जहां सुरक्षा से स्थिरता आती है, वहीं बेहतर कनेक्टिविटी व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देती है, और अवसर समाज को आगे बढ़ाने का आधार बनते हैं।</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>आतंकवाद : वैश्विक खतरा</strong></span></p>
<p>मोदी ने अपने भाषण में आतंकवाद को न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा कि पिछले चार दशकों से भारत इस संकट का दंश झेल रहा है। आतंकवाद की घटनाओं ने हजारों निर्दोष लोगों की जान ली है और विकास की राह में गंभीर रुकावटें खड़ी की हैं।</p>
<p>उन्होंने साफ किया कि आतंकवाद किसी एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए चुनौती है। कोई भी राष्ट्र या नागरिक यह सोचकर सुरक्षित नहीं रह सकता कि यह समस्या उससे दूर है।</p>
<p><span style="color: #800080"><strong>मोदी के सम्बोधन में पहलगाम हमले का ज़िक्र</strong></span></p>
<p>अपने संबोधन में मोदी ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह हमला केवल भारत पर नहीं बल्कि उन सभी देशों और व्यक्तियों पर हमला है जो मानवता और शांति में विश्वास करते हैं।</p>
<p>उन्होंने सवाल उठाया कि क्या दुनिया उन देशों के रवैये को स्वीकार कर सकती है जो खुले तौर पर आतंकवाद को समर्थन देते हैं या उसे पनाह देते हैं? मोदी ने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद के प्रति किसी भी प्रकार का दोहरा रवैया मानवता के लिए खतरनाक है।</p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>शांति और विकास का रिश्ता</strong></span></p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि हर राष्ट्र के विकास की नींव शांति और स्थिरता पर टिकी होती है। अगर देश असुरक्षा, हिंसा और उग्रवाद की चपेट में है तो उसके विकास की गति थम जाती है। उन्होंने ज़ोर दिया कि जब तक आतंकवाद और अलगाववाद जैसी समस्याएं समाप्त नहीं होतीं, तब तक स्थायी शांति की कल्पना भी संभव नहीं है।</p>
<p><span style="color: #00ff00"><strong>भारत की वैश्विक पहल</strong></span></p>
<p>मोदी ने इस अवसर पर बताया कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है। भारत ने संयुक्त सूचना अभियान का नेतृत्व करते हुए अल-कायदा और उसके जैसे संगठनों से मुकाबला किया है।</p>
<p>साथ ही भारत ने आतंकवाद के वित्तीय स्रोतों को रोकने के लिए भी लगातार पहल की है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी गतिविधियों को वित्तीय मदद मिलनी बंद हो जाए तो उनका नेटवर्क स्वतः कमजोर पड़ जाएगा। इस दिशा में भारत ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया और सदस्य देशों से निरंतर सहयोग की अपील की।</p>
<p><span style="color: #00ffff"><strong>आतंकवाद पर एकजुटता की अपील</strong></span></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अब समय आ गया है कि दुनिया मिलकर आतंकवाद के खिलाफ एकजुट खड़ी हो। उन्होंने कहा कि आतंकवाद की कोई सीमा नहीं होती, यह न तो धर्म देखता है और न ही भूगोल। इसलिए इसे समाप्त करने के लिए वैश्विक स्तर पर सामूहिक कार्रवाई ज़रूरी है।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा और शांति केवल किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है।</p>
<p><span style="color: #800000"><strong>मानवता के प्रति जिम्मेदारी</strong></span></p>
<p>मोदी ने अपने भाषण को यह कहते हुए समाप्त किया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा का सवाल नहीं है, बल्कि यह मानवता की रक्षा का भी प्रश्न है। उन्होंने सभी देशों से आह्वान किया कि वे आतंकवाद के हर रूप का विरोध करें और इसमें किसी भी प्रकार का भेदभाव न रखें।</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/24425">Modi&#8217;s Speech : SCO समिट में PM मोदी का प्रहार : आतंकवाद पर दुनिया को चेताया</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
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		<title>SCO Summit : महा सम्मेलन में बड़ा संदेश – आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 31 Aug 2025 17:07:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[वर्ड न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[SCO Summit]]></category>
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		<category><![CDATA[आतंकवाद]]></category>
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		<category><![CDATA[महा सम्मेलन]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>विशेष रिपोर्ट &#8211; लोक संवाददाता बीजिंग/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात साल बाद चीन...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/24419">SCO Summit : महा सम्मेलन में बड़ा संदेश – आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h3><span style="color: #ff0000"><strong>विशेष रिपोर्ट &#8211; लोक संवाददाता</strong></span></h3>
<h3><strong>बीजिंग/नई दिल्ली।</strong></h3>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात साल बाद चीन का दौरा किया और राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच लगभग 50 मिनट बातचीत हुई। इस दौरान आतंकवाद से लड़ाई और सीमा विवाद कम करने पर चर्चा हुई।</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>2026 ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण</strong></span></p>
<p>बैठक के बाद पीएम मोदी ने जिनपिंग को भारत में होने वाले ब्रिक्स समिट 2026 में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। मोदी ने आतंकवाद को वैश्विक चुनौती बताया और चीन से इसमें सहयोग की अपील की।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-24420" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250831-WA0028.jpg" alt="" width="805" height="583" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250831-WA0028.jpg 805w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250831-WA0028-300x217.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250831-WA0028-768x556.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 805px) 100vw, 805px" /></p>
<p>‘<span style="color: #00ff00"><strong>हाथी और ड्रैगन को साथ आना चाहिए’ – जिनपिंग</strong></span></p>
<p>चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मोदी से मुलाकात पर संतोष जताते हुए कहा कि भारत और चीन को मिलकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि “ड्रैगन और हाथी अगर साथ चलें तो विकास की राह और तेज हो सकती है।”</p>
<p><strong>SCO सम्मेलन में नेताओं संग सामूहिक तस्वीर<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-24421" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250831-WA0032.jpg" alt="" width="821" height="408" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250831-WA0032.jpg 821w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250831-WA0032-300x149.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250831-WA0032-768x382.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 821px) 100vw, 821px" /></strong></p>
<p>आधिकारिक स्वागत समारोह के दौरान मोदी ने अन्य नेताओं के साथ ग्रुप फोटो खिंचवाई। इस मौके पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मौजूद थे। इससे दोनों देशों के नेताओं की एक साथ मौजूदगी पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई।</p>
<p><span style="color: #800080"><strong>गलवान झड़प के बाद पहला चीन दौरा</strong></span></p>
<p>मोदी का यह दौरा खास माना जा रहा है क्योंकि जून 2020 में गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद यह उनकी पहली चीन यात्रा है। इस मुलाकात के जरिए दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और संवाद को नया रूप देने की कोशिश हो रही है।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-24422" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/FunPic_20250831_223408659-1024x819.jpg" alt="" width="640" height="512" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/FunPic_20250831_223408659-1024x819.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/FunPic_20250831_223408659-300x240.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/FunPic_20250831_223408659-768x614.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/FunPic_20250831_223408659-1536x1229.jpg 1536w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/FunPic_20250831_223408659.jpg 1920w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>इतिहास का सबसे बड़ा SCO शिखर सम्मेलन</strong></span></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी आज तियानजिन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। इस बार का सम्मेलन अब तक का सबसे बड़ा माना जा रहा है। इसमें 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रधानमंत्री हिस्सा ले रहे हैं।</p>
<p>जिनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत मध्य एशिया, पश्चिम एशिया, दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के शीर्ष नेता मौजूद रहेंगे।</p>
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