WEATHER : उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और तेज हवाओं का कहर: जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त, स्कूल-कॉलेज बंद
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विशेष रिपोर्ट – लोक दस्तक संवाददाता
लखनऊ, उप्र ।
उत्तर प्रदेश के अधिकांश जनपदों में पिछले 24 घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश और चक्रवाती तेज हवाओं ने भारी तबाही मचाई है। मौसम के इस बदले मिजाज से पूरे प्रदेश का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
बुनियादी सुविधाएं हुई बाधित
प्राकृतिक आपदा के कारण राज्य के कई प्रमुख शहरों और ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचा चरमरा गया है। तेज हवाओं के चलते जगह-जगह बिजली के पोल उखड़ गए हैं और ट्रांसफार्मर फुंकने से बिजली की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। बिजली न होने के कारण जलकल विभाग की पंपिंग मशीनें नहीं चल पा रही हैं, जिससे महानगरों से लेकर कस्बों तक पेयजल संकट गहरा गया है। लोग पानी के लिए मशक्क़त रहे हैं।
सड़कों पर जगह-जगह गिरे पेड़, यातायात बाधित
आंधी और भारी बारिश के कारण राज्य के मुख्य मार्गों, संपर्क मार्गों और रिहायशी कॉलोनियों में सैकड़ों विशालकाय पेड़ धराशायी हो गए हैं। सड़कों पर पेड़ और भारी शाखाएं गिरने के कारण कई जगहों पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया है। नगर निगम और लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमें सड़कों से पेड़ हटाने के काम में जुटी हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों में बाधा बन रही है।
जिलों के प्रशासन मुस्तैद, स्कूल-कॉलेज बंद, अलर्ट जारी
खराब मौसम की गंभीरता और जलभराव की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने हाई अलर्ट जारी किया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभिन्न जिला प्रशासनों ने छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शनिवार, 26 सितंबर 2026 को सभी सरकारी व निजी स्कूल-कॉलेज और शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का आदेश जारी किया है। जिलाधिकारियों ने नागरिकों को बहुत जरूरी काम न होने पर घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है।
किसानों पर दोहरी मार: फसलों के गिरने का डर
मौसम का यह मिजाज किसानों के लिए बड़ी चिंता लेकर आया है। हालांकि, खेतों में पानी भरने से धान की अगेती और पछेती फसलों को सिंचाई से बड़ी राहत मिली है, जिससे किसानों की लागत बची है। इसके विपरीत, लगातार चल रही तेज हवाओं ने धान और बाजरे की खड़ी फसलों को खेतों में गिरा (लॉजिंग) दिया है, जिससे फसलें सड़ने का खतरा पैदा हो गया है।
आलू की बोवाई पिछड़ने की बढ़ी संभावना
बारिश के कारण खेतों में भारी जलभराव हो गया है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों को दोबारा सूखने और बोवाई योग्य (पलेवा) होने में कम से कम दो से तीन सप्ताह का समय लगेगा। इस कारण आगामी आलू की मुख्य बोवाई काफी पिछड़ने की संभावना है, जिससे किसान बेहद चिंतित हैं। प्रशासन ने राजस्व विभाग को जल्द से जल्द नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए हैं।
मौसम विभाग का अगले 48 घंटे का अपडेट
मौसम केंद्र लखनऊ के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, मानसून की री-एंट्री के कारण 27 सितंबर तक पूरे क्षेत्र में मौसम बेहद खराब रहेगा। अगले 48 घंटों के दौरान अमेठी और सुल्तानपुर सहित आसपास के जिलों में ‘आकस्मिक बाढ़’ (Flash Flood) का खतरा मंडरा रहा है।
मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस दौरान बादलों की तीव्र गर्जना के साथ विपरीत वज्रपात (आकाशीय बिजली) की घटनाएं हो सकती हैं। प्रशासन ने नागरिकों को बारिश और बिजली चमकने के समय पक्के मकानों में शरण लेने तथा ऊंचे पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे खड़े न होने की सख्त हिदायत दी है।

