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	<title>साहित्य Archives - Lok Dastak</title>
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	<description>Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak</description>
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	<title>साहित्य Archives - Lok Dastak</title>
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		<title>Literature : समकालीन हिंदी कथा साहित्य में रेणु गुप्ता की सशक्त लेखनी</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/25462</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 15:17:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[Literature]]></category>
		<category><![CDATA[कथा]]></category>
		<category><![CDATA[रेणु गुप्ता]]></category>
		<category><![CDATA[समकालीन]]></category>
		<category><![CDATA[सशक्त लेखनी]]></category>
		<category><![CDATA[हिंदी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; प्रस्तुति- कपिलदेव सिंह (वरिष्ठ पत्रकार) रेणु गुप्ता समकालीन हिंदी कथा साहित्य की एक संवेदनशील...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h2><span style="color: #ff0000"><strong>प्रस्तुति- कपिलदेव सिंह (वरिष्ठ पत्रकार)</strong></span></h2>
<p>रेणु गुप्ता समकालीन हिंदी कथा साहित्य की एक संवेदनशील और सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनकी लेखनी जीवन के यथार्थ से उपजी हुई है, जिसमें स्त्री-मन की जटिलताओं, सामाजिक विसंगतियों और मानवीय संवेदनाओं का सूक्ष्म चित्रण मिलता है। सरल भाषा, प्रभावी शिल्प और गहरे भावबोध के कारण उनकी कहानियाँ पाठक के मन को सहज ही छू जाती हैं।</p>
<p>रेणु गुप्ता का कथा साहित्य समाज के उन अनकहे सचों को स्वर देता है, जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। उनके लेखन में संवेदना के साथ-साथ विचार की स्पष्टता दिखाई देती है, जो पाठक को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है। यही कारण है कि उनका रचनाकर्म आधुनिक हिंदी साहित्य में अपनी अलग पहचान बनाता है।</p>
<h3><span style="color: #993300"><strong>रेणु गुप्ता का परिचय&#8230;.</strong></span></h3>
<p>लेखिका कथा साहित्य | लेख |</p>
<p>सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापिका, वॉरेन अकादमी, जयपुर</p>
<p>शिक्षा &#8211; बी.एससी., एम.ए.(अंग्रेज़ी), बी.एड., सी.लिब.</p>
<p>संप्रति &#8211; स्वतंत्र लेखन</p>
<p>लेखन विधा &#8211; कहानी, लेख, लघुकथा, लघु कथा, व्यंग्य, ब्लॉग, उपन्यास, वेब सीरीज़ आदि।</p>
<p><strong>प्रकाशित साहित्य-</strong></p>
<p>• लघुकथा संकलन: ‘आधा है चंद्रमा’ (सन 2023)</p>
<p>• उपन्यास: ‘अंजुरी भर नेह’ (सन 2024)</p>
<p>• कहानी संकलन: ‘कैसी पहेली ज़िंदगानी’ (सन 2025)</p>
<p>• ई बुक: (लंबी कहानी): ‘एहसास –ए –जुनून’ (9,000 शब्द) अमेज़ॉन पर स्वप्रकाशित।</p>
<p>• प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में लघुकथा, लेख और कहानियाँ: ‘मधुमती’ (राजस्थान साहित्य अकादमी), ‘हरिगंधा’ (हरियाणा साहित्य अकादमी), ‘राजस्थान पत्रिका’, ‘पंजाब केसरी’, ‘अमर उजाला’, ‘लघुकथा वृत’, ‘वनिता’, ‘सांध्य टाइम्स’, ‘लोकमित्र’, ‘स्वदेश’, ‘कलम हस्ताक्षर’, ‘संपर्क भाषा भारती’, ‘सरस्वती सुमन’, ’नेशनल एक्सप्रेस, ‘नवभारत’, ‘ट्यूलिप टुडे’, ‘पलाश’, ‘लघुकथा कलश’, ‘लोकमत समाचार’, ‘ग्वालियर किरण,’ ‘सरिता’, ‘मुक्ता’, ‘गृहशोभा’, ‘मेरी सहेली’, ‘मेरी निहारिका’, ‘पूर्वांचल प्रहरी’, ‘साहित्य सांदीपनि’, ‘जन टाइम्स’, ‘जागरण सखी’ में लगभग तीन सौ कहानियों, लघुकथाओं तथा लेखों का प्रकाशन</p>
<p>• साझा संकलन (लघुकथा एवं कहानियाँ):</p>
<p>‘संरचना’, ‘समय की दस्तक’, ‘बाल मन की लघुकथाएँ’, ‘रजत शृंखला लघुकथा संकलन’, ‘रत्नावली’, ‘मनमुक्ता’, ‘खाकीधारी’, ‘मानवता की लड़ाई’, ‘मां’, ‘दीया तले अंधेरा,’ ‘बूंद में सागर,’ ‘अदहने क आखर,’ ‘दमकते लम्हे’, ‘स्वरांजलि’, ‘मुट्ठी में जुगनू’, ‘21वीं सदी की लघुकथाएँ’, ‘बसंत आने को है’ आदि</p>
<p>• ई लघुकथा संकलन: ‘हिंदी के प्रमुख लघुकथाकार’ एवं ‘एक लेखक की ग्यारह लघुकथाएँ’ शृंखला के अंतर्गत ई–लघुकथा संकलन में कुछ लघुकथाएँ</p>
<p>• वेब पोर्टल:</p>
<p>नेट पर कई पोर्टल यथा स्टोरीमिरर, मातृभारती पर लघुकथाएँ एवं कहानियां प्रकाशित।</p>
<p>• ई-पत्रिका: dusbus.com पर एक सौ सत्तावन लेखों एवं कहानियों का प्रकाशन।</p>
<p>• 20 मार्च, 2022 को विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी, मुंबई द्वारा आज़ादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत ‘एक चिड़िया, अनेक चिड़ियाँ’ कार्यक्रम में मेरी एक लघुकथा का वाचन हुआ।</p>
<p>• वार्ता एवं कहानियाँ:</p>
<p>अनेक वार्ताएं आकाशवाणी, गुवाहाटी से प्रसारित।</p>
<p>अनेक कहानियाँ. आकाशवाणी जयपुर अजमेर के आमेर चैनल से प्रसारित</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>लेखिका को मिले सम्मान :</strong></span></p>
<p>Ø एकल लघुकथा संग्रह- ‘आधा है चंद्रमा’ हेतु:</p>
<p>• हिन्दी गौरव सम्मान 2023 (साहित्य अर्पण मंच द्वारा)</p>
<p>• लघुकथा श्री सम्मान-2023 (लघुकथा शोध केंद्र, समिति भोपाल द्वारा)</p>
<p>• श्रीमती देवकी सूर्यवंशी स्मृति सम्मान 2024 (साहित्य अर्चन मंच, नागपूर द्वारा)</p>
<p>• माँ राजपती देवी स्मृति साहित्य सम्मान 2024</p>
<p>Ø उपन्यास ‘अंजुरी भर नेह’ हेतु</p>
<p>• कादंबरी सम्मान-स्वर्गीय राजेश दुबे पुरस्कार-2024 ( संस्कारधानी, जबलपुर की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था कादंबरी द्वारा)</p>
<p>• शब्द श्री सम्मान 2025</p>
<p>• लोकरंजन सम्मान (श्रेष्ठ श्रेणी)</p>
<p><strong>कहानी हेतु:</strong></p>
<p>• शब्द निष्ठा पुरस्कार-2024 (आचार्य रत्न लाल ‘विद्यानुग’ स्मृति अखिल भारतीय कहानी प्रतियोगिता- 2024 में)</p>
<p><strong>लघुकथा हेतु:</strong></p>
<p>• लघुकथा श्री सम्मान-2019 (लघुकथा के क्षेत्र में मेरे योगदान हेतु)</p>
<p>• प्रथम पुरस्कार (कथा दर्पण साहित्य मंच द्वारा आयोजित श्री कमल चंद वर्मा स्मृति राष्ट्रीय लघुकथा लेखन त्रैमासिक प्रतियोगिता क्र. 42 के अंतर्गत)</p>
<p><strong>संपर्क: ईमेल: renugupta2066@gmail.com</strong></p>
<p><strong> फ़ेसबुक: facebook.com\renu.gupta.1276</strong></p>
<p><strong>इंस्टाग्राम: @renu.gupta.1276</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
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		<item>
		<title>Literature : वर्तमान पीढ़ी को बेहतर करने की प्रेरणा देता है इतिहास &#8212; डॉ. अंगद सिंह निशीथ</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/25410</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Jan 2026 04:01:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[Literature]]></category>
		<category><![CDATA[इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ. अंगद सिंह निशीथ]]></category>
		<category><![CDATA[पुस्तक विमोचन]]></category>
		<category><![CDATA[प्रेरणा]]></category>
		<category><![CDATA[वर्तमान पीढ़ी]]></category>
		<category><![CDATA[स्वतंत्रता संग्राम]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; रिपोर्ट &#8211; लोक संवाददाता  अमेठी/नई दिल्ली। किसी भी देश-समाज का इतिहास, उसका आईना होता...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><span style="color: #ff0000"><strong>रिपोर्ट &#8211; लोक संवाददाता </strong></span></h3>
<h3><strong>अमेठी/नई दिल्ली।</strong></h3>
<p>किसी भी देश-समाज का इतिहास, उसका आईना होता है, जिससे वर्तमान पीढ़ी को कुछ अच्छा करने की प्रेरणा मिलती है।</p>
<p>यह बात अमेठी के सांसद किशोरी लाल शर्मा ने ‘उत्तर प्रदेश का स्वतंत्रता संग्राम-अमेठी’ पुस्तक का लोकार्पण करते हुए कही। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में आहुति देने वाले सभी सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित किया।</p>
<p>उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ एवं वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित पुस्तक का लोकार्पण कार्यक्रम भारत मण्डप्म, प्रगति मैदान नई दिल्ली में वाणी प्रकाशन द्वारा आयोजित एक भव्य समारोह में संपन्न हुआ।</p>
<p>इस अवसर पर अमेठी के सांसद श्री किशोरी लाल शर्मा ने अमेठी संसदीय क्षेत्र से जुड़े अपने विभिन्न अनुभवों भी साझा किया। आज़ादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में लिखित इस पुस्तक के लेखक एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ.राकेश पांडेय ने पुस्तक लेखन संबंधी तथ्यों के संकलन हेतु विभिन्न पुस्तकालयों की पुस्तकों, संग्रहालय एवं गजेटियर आदि से प्राप्त सामग्री पर विस्तृत प्रकाश डाला।</p>
<p>लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में अवकाश प्राप्त प्रोफेसर अंगद सिंह ने पुस्तक की गुणवत्ता की तारीफ़ करते हुए कहा कि इतिहास लेखन तथ्यों पर आधारित होता है और इतिहास लेखन हेतु तथ्य संकलन एक कठिन कार्य है। उन्होने पुस्तक में वर्णित विभिन्न पक्षों की चर्चा करते हुए आज़ादी के संग्राम और इसमें सर्वस्व न्योछावर करने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दोहराया कि शहीदों की ‘चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाक़ी निशाँ होगा’..।</p>
<p>डॉ. सिंह ने अमेठी जनपद के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए, अमेरिकन क्रांति, फ़्रांसीसी क्रांति, रूसी क्रांति और चीन की क्राँतियों का भी ज़िक्र किया, जहाँ से हमें उपनिवेशवाद एवं गुलामी से मुक्ति संदेश के साथ ही स्वतन्त्रता, समानता और बंधुत्व का व्यापक संदेश प्राप्त हुआ।<img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone wp-image-25411 size-large" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260116-WA0001-1024x711.jpg" alt="" width="640" height="444" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260116-WA0001-1024x711.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260116-WA0001-300x208.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260116-WA0001-768x533.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260116-WA0001.jpg 1280w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>उक्त महत्वपूर्ण कार्यक्रम में सूत्रधार एवं संचालक प्रख्यात साहित्यकार डॉ. ओम निश्चल ने वर्तमान समाज में डॉ. राकेश पाण्डेय द्वारा लिखित पुस्तक की उपादेयता की विशेष ढंग से चर्चा की और साथ ही अवधी के विख्यात कवि जमुई खाँ आजाद द्वारा शहीदों के सम्मान में रचित महत्वपूर्ण रचना ‘फूल टूटी जवान वतन के बरे,शीश चरणन मा मैया झुकावत रहब’ का सस्वर पाठ किया।</p>
<p>इस अवसर पर वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली के संचालक अरुण माहेश्वरी ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया और आभार प्रदर्शन किया इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से पधारे विद्वान श्रोताओं का समूह उपस्थित रहा।</p>
<p>&nbsp;</p>
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			</item>
		<item>
		<title>Stage Play : निर्देशक राजीव सिंह दिनकर की भव्य रंगमंचीय नाट्य प्रस्तुति &#8216;मेरे कृष्ण&#8217;</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/25331</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 04 Jan 2026 06:02:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA['मेरे कृष्ण']]></category>
		<category><![CDATA[Stage Play]]></category>
		<category><![CDATA[निर्देशक]]></category>
		<category><![CDATA[प्रस्तुति]]></category>
		<category><![CDATA[भव्य]]></category>
		<category><![CDATA[रंगमंचीय नाट्य]]></category>
		<category><![CDATA[राजीव सिंह दिनकर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य यात्रा को दर्शाने वाला भव्य...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/25331">Stage Play : निर्देशक राजीव सिंह दिनकर की भव्य रंगमंचीय नाट्य प्रस्तुति &#8216;मेरे कृष्ण&#8217;</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><span style="color: #ff0000"><strong>प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय</strong></span></h3>
<p>भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य यात्रा को दर्शाने वाला भव्य रंगमंचीय नाट्य प्रस्तुति &#8216;मेरे कृष्ण&#8217; में सौरभ राज जैन श्रीकृष्ण की भूमिका में, पूजा बी शर्मा राधा एवं महामाया के रूप में, तथा अर्पित रांका दुर्योधन एवं कंस की भूमिकाओं में दिखाई देंगे। नाटक का निर्देशन राजीव सिंह दिनकर ने किया है। इसका निर्माण विवेक गुप्ता, राजीव सिंह दिनकर एवं विष्णु पाटिल द्वारा किया गया है। नाटक के लेखक डॉ. नरेश कात्यायन हैं तथा इसका मौलिक संगीत उद्भव ओझा द्वारा रचित है।</p>
<p>वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल से लेकर द्वारका में उनके अंतिम क्षणों तक के दृश्यों का समावेश इस नाटक में किया गया है। 2 घंटे 45 मिनट की अवधि वाला &#8216;मेरे कृष्ण&#8217; एक गहन रंगमंचीय अनुभव है, जो श्रीकृष्ण के जीवन के दिव्य, मानवीय और दार्शनिक आयामों की यात्रा कराता है। यह नाटक 20 जीवंत दृश्यों में प्रकट होता है, जिनमें श्रीकृष्ण के जीवन के प्रमुख अध्यायों को दर्शाया गया है। शाश्वत दर्शन में निहित होते हुए भी, इसकी कथा शैली मनोरंजक, दृश्यात्मक रूप से समृद्ध और भावनात्मक रूप से प्रभावशाली है, जिसमें नाट्यकला, संगीत, नृत्य और मल्टीमीडिया का सुंदर समन्वय है।</p>
<p>यह नाटक श्रीकृष्ण के जीवन के कुछ कम ज्ञात प्रसंगों और दृष्टिकोणों को भी उजागर करता है। इस नाटक के प्रत्येक दृश्य को गतिमान चित्रकला की तरह परिकल्पित किया गया है, जहाँ रंगमंच, दृश्य कला और आध्यात्मिक अन्वेषण एक-दूसरे से मिलते हैं। इस नाटक के मंचन का मुख्य उद्देश्य यह है कि इस नाटक को देखने वाला प्रत्येक दर्शक यह प्रश्न लेकर न जाए कि &#8216;श्रीकृष्ण कौन हैं &#8230;?&#8217; बल्कि यह अनुभूति लेकर जाए कि &#8216;श्रीकृष्ण मेरे भीतर सदैव हैं&#8230;। बकौल निर्देशक राजीव सिंह दिनकर इस</p>
<p>नाटक का स्वर शैली काव्यात्मक होने के साथ आधुनिक है, दार्शनिक होते हुए भी मनोरंजक है। इस नाटक के जरिए लोकहित में देश की जनता के बीच एक संवाद जागृत करना चाहते हैं। पूजा के बारे में नहीं, बल्कि जागरूकता के बारे में।</p>
<p>&nbsp;</p>
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]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>REMEMBRANCE :  बैसवारे के ही थे विनोद कुमार शुक्ल&#8230;&#8230;..विनम्र श्रद्धांजलि !</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/25273</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Dec 2025 15:49:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[REMEMBRANCE]]></category>
		<category><![CDATA[बैसवारे]]></category>
		<category><![CDATA[विनम्र श्रद्धांजलि]]></category>
		<category><![CDATA[साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.lokdastak.com/?p=25273</guid>

					<description><![CDATA[<p>प्रस्तुति &#8211; गौरव अवस्थी रायबरेली/उन्नाव (उत्तर प्रदेश) रायपुर (छत्तीसगढ़) में प्रख्यात कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/25273">REMEMBRANCE :  बैसवारे के ही थे विनोद कुमार शुक्ल&#8230;&#8230;..विनम्र श्रद्धांजलि !</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h3></h3>
<h3><span style="color: #ff0000"><strong>प्रस्तुति &#8211; गौरव अवस्थी</strong></span></h3>
<p><img decoding="async" class="size-thumbnail wp-image-19981" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/फोटो-06-1-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/फोटो-06-1-150x150.jpg 150w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/फोटो-06-1-24x24.jpg 24w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/फोटो-06-1-48x48.jpg 48w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/फोटो-06-1-96x96.jpg 96w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/फोटो-06-1.jpg 300w" sizes="(max-width: 150px) 100vw, 150px" /></p>
<h3><span style="color: #ff0000"><strong>रायबरेली/उन्नाव (उत्तर प्रदेश)</strong></span></h3>
<p>रायपुर (छत्तीसगढ़) में प्रख्यात कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल जी का दुर्भाग्यपूर्ण निधन हो गया। जन्म के ठीक एक सप्ताह पहले..</p>
<p>निधन की सूचना के बाद से ही समाज खासतौर से साहित्य जगत में शोक व्याप्त है। उनकी एक कविता है-&#8216;एकला कहां चला&#8217;। इस कविता की पहली लाइन है-</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>एकला कहां चला</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>साथ मेरे रास्ता चला..</strong></span></p>
<p>कल से ही सोशल मीडिया पर उनकी कविताओं की भरमार है। खासकर &#8216;दीवार में एक खिड़की रहती थी&#8217;।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अनेक राजनीतिक पदधारियों ने हिंदी के इस महत्वपूर्ण हस्ताक्षर के निधन पर अपना शोक प्रकट किया। यह शोकांजलियां बता रहीं हैं कि जमाना उनके साथ है। भले ही जमाना अंतिम यात्रा समाप्त होने के बाद वैसे ही लौटने को मजबूर होगा, जैसे उस कविता में मजबूर होकर रास्ता लौटा था-</p>
<p><strong><span style="color: #993300">&#8216;लौटने का कोई रास्ता </span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #993300">रास्ता देखेगा नहीं तो</span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #993300">लौट जाएगा..&#8217;</span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #993300">उनके देहावसान पर उन्हीं के शब्दों में-</span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #993300">&#8216;इस रात बहुत सी रातों की इकट्ठी रात है,</span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #993300">इस रात बहुत सी रातों का अंधेरा है..&#8217;</span></strong></p>
<p>दुख की इस बेला में भी यह फख्र बार-बार मन में घर कर रहा है कि जिन कवि पर देश हो दुनिया इतनी दुखी है उन सम्माननीय विनोद कुमार शुक्ल का नाता भी अपने बैसवारे से ही है।</p>
<p>उन्नाव का पूर्वी क्षेत्र और रायबरेली का पश्चिमी क्षेत्र &#8216;बैसवारा&#8217; कहलाता है। यह वही बैसवारा है जहां प्रताप नारायण मिश्र, आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी, पंडित रघुनंदन प्रसाद शर्मा, आचार्य बृजनंदन, भगवती चरण वर्मा रामविलास शर्मा, आचार्य नंद दुलारे बाजपेई, डॉ शिवमंगल सिंह सुमन, मधुकर खरे, डॉ शिव बहादुर सिंह भदौरिया, डॉ उपेंद्र बहादुर सिंह समेत अन्यान्य साहित्य मनीषियों ने जन्म लिया।</p>
<p>विनोद कुमार शुक्ल के पूर्वज भी जानकी प्रसाद शुक्ल बक्सर (उन्नाव) के पास जगतपुर ग्राम के निवासी थे। उनके पुत्र रामलाल शुक्ल (विनोद जी के बाबा) रोजी रोजगार के सिलसिले में तब मध्य प्रदेश और अब छत्तीसगढ़ में शामिल राजनांदगांव में जाकर बस गए। विनोद जी ही नहीं उनके पिता शिव गोपाल शुक्ला का जन्म भी राजनांदगांव में ही हुआ बताया जाता है।</p>
<p>रामलाल शुक्ल जी के 6 पुत्र (रामाधार मन्ना महाराज, शिवबिहारी, शिवमंगल शिवकरण, शिवगोपाल, किशोरी लाल) और एक पुत्री थी। विनोद कुमार शुक्ल शिव गोपाल जी के आत्मज हैं।</p>
<p>उनके चाचा किशोरी लाल शुक्ल राजनांदगांव में पांच बार विधायक रहे और मध्य प्रदेश सरकार में कई बार कैबिनेट मंत्री भी राजनांदगांव को जिला बनाने में उन्हीं की महती भूमिका मानी जाती है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-25274" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251227-WA0030-1024x612.jpg" alt="" width="640" height="383" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251227-WA0030-1024x612.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251227-WA0030-300x179.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251227-WA0030-768x459.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251227-WA0030-1536x918.jpg 1536w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251227-WA0030.jpg 1600w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>विनोद कुमार शुक्ला जी की कुलदेवी आज भी उनके परिवार में स्थापित हैं। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बस गए शुक्ला परिवार के वंशज आज भी यदा-कदा अपने पूर्वजों की पवित्र माटी को माथे पर लगाने के लिए उन्नाव आते रहते हैं। हालांकि ग्राम में रहने वाले किशोरी लाल शुक्ल के पौत्र मनोज शुक्ला को यह याद नहीं है कि विनोद कुमार शुक्ल का अपने पैतृक ग्राम पहले कब आना हुआ था?</p>
<p>कुछ भी हो कलम-कृपाण की धनी बैसवारे की धरा के एक और लाल विनोद कुमार शुक्ल के स्वभाव में बैसवारे का ठेठपन पूरी ठसक के साथ मौजूद था। अपने पुत्र के लिए उन्होंने किसी भी राजनेता के आगे हाथ नहीं पसारा..यही बैसवारा है..</p>
<p><strong>उनके महाप्रयाण से उनके अपने बैसवारे के लोग शोक संतृप्त हैं..</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/25273">REMEMBRANCE :  बैसवारे के ही थे विनोद कुमार शुक्ल&#8230;&#8230;..विनम्र श्रद्धांजलि !</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
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		<title>Literary Creation : साहित्यिक रचना&#8230;&#8230; रावण की कांवड़</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/24043</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 04 Aug 2025 16:16:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[Literary Creation]]></category>
		<category><![CDATA[कांवड़]]></category>
		<category><![CDATA[रचना]]></category>
		<category><![CDATA[रचयिता]]></category>
		<category><![CDATA[रावण]]></category>
		<category><![CDATA[साहित्यिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; PRESENTED BY KRIPA SHANKAR VIKRAM कांवड़ उठाया रावण ने सुनो रावण परिवार ! एक...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000">PRESENTED BY KRIPA SHANKAR VIKRAM</span></strong></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>कांवड़ उठाया रावण ने सुनो रावण परिवार !</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>एक दिवस जा पहुंचा रावण देवघर राज्य विहार !!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>झारखण्ड की पावन भूमि वासुकी नाथ के द्वार !</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>शिवलिंग ले जाने लंका , रावण था तैयार !!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>महादेव की हुई कृपा जब वह उठा ना पाया भार!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>लघु शंका के तलब से बदला रावण का व्यवहार !!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>जब बैठा लघु शंका रावण बनी कर्मनासा की धार!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>जिसको पकड़ाया था शिवलिंग वो बैठा थक हार !</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>उसी जगह पर रख दिया शिवलिंग होकर के लाचार !!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>वाणी का खंडन हुआ,उस क्षण हुआ वहां चमत्कार !</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>शिवलिंग स्थापित हुआ ,रावण हिला न पाया भार !!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>मूत्र वाहिनी नदी बन गयी बह निकली जलधार!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>हुआ दशानन क्रोधित बलभर देख स्वयं प्रतिकार !!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>कर रक्खा शिवलिंग पर, पुनः अंगूठा अधिभार !</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>दबा दिया शिवलिंग को वैद्य शिखर के सार!!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>शिव बैठे अब शिखर पर रावण खाया खार!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>जो समझे हो मित्र सब बोलो ॐ नमः शिवाय !</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>कालखंड के अन्त में रहे चरवाहे बैजू भेड़ चराय!!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>बैजू को शिवलिंग मिला जंगल के अभिप्राय !</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>बैजू के इक नियम ने दिया बाबा को हरषाय!!</strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-24044 size-full" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250804-WA0043.jpg" alt="" width="720" height="1025" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250804-WA0043.jpg 720w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250804-WA0043-211x300.jpg 211w" sizes="auto, (max-width: 720px) 100vw, 720px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>प्रतिदिन मारे लट्ठ से शिवलिंग फिर वो खाना खाय!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>बाबा बैजू की कथा भक्तों सुन कर मन हरषाय!!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>इक दिन बैजू भूलकर बैठा अपने घर खाना खाय!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>आयी याद फिर बाबा की चल पड़ा शीश झकाय!!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>भूल याचना कर बैजू दिया शिवलिंग पर लट्ठ जमाय!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>बैजू की इस श्रद्धा से बाबा मन-ही-मन हरषाय!!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>प्रकट हुए भोले भंडारी बैजू खड़े खड़े मुसकाय!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>आशीर्वाद दिये बैजू को खुश होकर भोले नाथ !!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>हमसे से पहले जाने जाओगे तुम हो बैजनाथ !</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>बैजनाथ की धरती देवघर अब वैद्यनाथ का नाम !!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>मां सती का अंग गिरा था , शिवांगेस्वर धाम!</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>सिद्धपीठ इक्यावन को है सत &#8211; सत मेंरा प्रणाम !!</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>नोट &#8212; रचियता एक युवा साहित्यकार है।</strong></span></p>
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		<title>Author : मुंशी प्रेमचंद साहित्य रत्न सम्मान से सम्मानित हुए पत्रकार एवं साहित्यकार सत्येंद्र प्रकाश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Jul 2025 03:15:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[Author]]></category>
		<category><![CDATA[पत्रकार]]></category>
		<category><![CDATA[मुंशी प्रेमचंद]]></category>
		<category><![CDATA[सम्मान]]></category>
		<category><![CDATA[सम्मानित]]></category>
		<category><![CDATA[साहित्य रत्न]]></category>
		<category><![CDATA[साहित्यकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; PRESENTED BY KAPIL DEV SINGH GAHARWAR &#160; साहित्यकार सत्येंद्र प्रकाश को उनकी काव्य रचना...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/23899">Author : मुंशी प्रेमचंद साहित्य रत्न सम्मान से सम्मानित हुए पत्रकार एवं साहित्यकार सत्येंद्र प्रकाश</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>PRESENTED BY KAPIL DEV SINGH GAHARWAR</strong></span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>साहित्यकार सत्येंद्र प्रकाश को उनकी काव्य रचना &#8220;अंत कहां&#8221; के लिए मिला मुंशी प्रेमचंद साहित्य रत्न सम्मान</strong></span></p>
<p>अख़बार और साहित्य जगत के सशक्त हस्ताक्षर वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार सत्येंद्र प्रकाश को उनकी काव्य रचना *** अंत कहां ** * के लिए इस वर्ष का मुंशी प्रेमचंद साहित्य रत्न सम्मान दिया जाएगा। उनकी इस बेहतरीन कविता को जयपुर , राजस्थान की एक जानी मानी संस्था अभाकाम ने इस वर्ष 2025 में पुरस्कृत करने के लिए चुना है। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के मूल निवासी पत्रकार और साहित्यकार,समाजसेवी सत्येंद्र प्रकाश जी की जन्मभूमि और पत्रकारीय कर्मभूमि गृह जनपद सुल्तानपुर समेत अयोध्या /फैजाबाद और अखबारों की मंडी देश की राजधानी नई दिल्ली रही है ।</p>
<p>उत्तर भारत के ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी में स्नातकोत्तर की डिग्री लेने के साथ ही सत्येंद्र प्रकाश जी साहित्य साधना और स्वतंत्र लेखन में रम गए। सामाजिक सरोकारों और राजनीतिक विसंगतियों को लेकर लिखी गई इनकी रचनाओं,गीत, ग़ज़ल मुक्तक, और कविताओं को जब सुधी जनों ने सराहा तो ये एक संवेदनशील रचनाकार के रूप में निखरे। आप आदमी को फोकस करते हुए अपनी धारदार टिप्पणियों और स्वतंत्र लेखन से इन्होंने अपनी विशेष पहचान बनाई। समाज सेवा से जुड़े संवेदनशील सत्येंद्र प्रकाश ने हिंदी समाचार पत्रों और हिंदी की पत्रिकाओं की ओर रुख किया। प्रिंट मीडिया की दुनिया में अपनी रिपोर्टिंग और तीखी टिप्पणियों से भी जाने गए।</p>
<p>दैनिक पत्र पत्रिकाओं का साप्ताहिक रविवारीय पृष्ठ इनकी जादुई कलम से जीवंत बन जाता था। यूं कहें कि कविताएं इनका पहला प्यार रही हैं। चार दशकों तक कई बड़े अखबारों और पॉपुलर पत्रिकाओं के संपादकीय से सक्रिय रूप से जुड़े रहकर अपनी लेखकीय क्षमता का लोहा मनवाया। दुनिया भर में मशहूर आउटलुक हिंदी मैगजीन के एडिटोरियल में उसके अंतिम अंक के प्रकाशन तक कार्यरत रहकर अपनी कलम चलाई। इसके अलावा दिल्ली की आधा दर्जन से अधिक पत्र पत्रिकाओं के संपादकीय विभाग में सक्रिय रूप से जुड़े रहे। एक समय दिल्ली के एक चर्चित अखबार के यशस्वी संपादक और पूर्व में बीबीसी रेडियो हिंदी सेवा में रहे वरिष्ठ पत्रकार मधुकर उपाध्याय के साथ उस समाचार पत्र के संपादकीय विभाग में काम करके अख़बार को समृद्ध कर अपनी खास छाप छोड़ी।</p>
<p>इससे पूर्व इन्होंने दैनिक जागरण सहित उत्तर प्रदेश के एक दर्जन से अधिक दैनिक/साप्ताहिक और मासिक पत्र पत्रिकाओं में संवाददाता /संपादकीय सलाहकार ,कवि एवं लेखक के रूप में अपना बेहतरीन योगदान दिया। आजकल दिल्ली से प्रकाशित एक राष्ट्रीय स्तर की मासिक पत्रिका उदय सर्वोदय,वीकली आई,साप्ताहिक मैगज़ीन और फर्स्ट एडिटर से जुड़ाव के साथ स्वतंत्र लेखन ,कविता , ग़ज़ल,मुक्तक , टिप्पणियां, समाचार&#8230;और समाजसेवा से भी सरोकार बना हुआ है। आउटलुक पत्रिका से सेवा निवृत्ति के बाद इनकी काव्य रचनाओं की अच्छी प्रस्तुतियां सराही गई।सामाजिक और राजनीतिक सरोकारों को लेकर इनके दोहे, चौके और छक्कों को सुधी पाठकों ने बहुत पसंद किया।इनकी काव्य रचनाओं का संकलन पुस्तक का आकार ले रहा है। अब किसी अच्छे प्रकाशक की तलाश है।</p>
<p>बीते दिनों लखनऊ आए अभाकाम संस्था के महामंत्री डॉ अरुण कुमार सक्सेना ने संस्था अध्यक्ष अजीत कुमार सक्सेना के हवाले से एक पारिवारिक भेंट में बताया कि दिल्ली के साहित्यकार सत्येंद्र प्रकाश की कविता को चतुर्थ राष्ट्रीय मुंशी प्रेमचंद सहित्य रत्न सम्मान 2025 के लिए चुना गया है। उनको यह सम्मान/ पुरस्कार अगले महीने 3 अगस्त को राज्य कृषि प्रबंधन संस्थान दुर्गापुरा ,जयपुर के आडिटोरियम में आयोजित होने वाले सम्मान समारोह में प्रदान किया जाएगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/23899">Author : मुंशी प्रेमचंद साहित्य रत्न सम्मान से सम्मानित हुए पत्रकार एवं साहित्यकार सत्येंद्र प्रकाश</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
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		<title>POETRY : जीवन का अनमोल सत्य &#8212;&#8212;&#8212;</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/23461</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Jun 2025 16:55:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[poetry]]></category>
		<category><![CDATA[अनमोल]]></category>
		<category><![CDATA[कविता]]></category>
		<category><![CDATA[जीवन]]></category>
		<category><![CDATA[रचना]]></category>
		<category><![CDATA[सत्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; PRESENTED BY VERSHA VARSHNEY &#160; किसी के धोखा देने पर  किसी की मृत्यु होने...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><strong style="color: #ff0000">PRESENTED BY VERSHA VARSHNEY</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>किसी के धोखा देने पर </strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>किसी की मृत्यु होने पर </strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>      बहुमूल्य वस्तु चोरी होने पर </strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>पर मत मरना तुम मृत्यु से पहले </strong></span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>दौर ऐसा भी आएगा </strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>जीना मुश्किल हो जाएगा </strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>        न दिखाई देगा आगे पीछे </strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>पर मत मरना तुम मृत्यु से पहले </strong></span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>ये जीवन है आड़ा तिरछा </strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>आएंगी पल पल व्याधा </strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>    न साथ निभाएगा तेरा कोई </strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>पर मत मरना तुम मृत्यु से पहले </strong></span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>प्रेम की अभिलाषा में </strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>नफरत हिस्से तेरे आएगी </strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>     मिलेगा न कुछ कड़वाहट के सिवा </strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>पर मत मरना तुम मृत्यु से पहले </strong></span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>रिश्ते नाते सब खेल यहाँ </strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>सब धन दौलत के दीवाने हैं </strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>      प्रेम बन गया सिर्फ खिलौना यहां</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>पर मत मरना तुम मृत्यु से पहले </strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>तेरा हौसला ही तेरे काम आएगा </strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>कर्म तेरा तुझे नाम दिलाएगा </strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>  </strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>  मत बिखर जाना तुम जीने से पहले </strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>जी लेना अपना जीवन तुम मृत्यु से पहले </strong></span></p>
<p><strong><span style="color: #333300">वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़</span></strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/23461">POETRY : जीवन का अनमोल सत्य &#8212;&#8212;&#8212;</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>KAVI SAMMELAN : &#8221;मिले यदि प्रेम का प्याला जहर भी जाम होता है&#8221;</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/22991</link>
					<comments>https://www.lokdastak.com/archives/22991#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Apr 2025 02:41:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[KAVI SAMMELAN]]></category>
		<category><![CDATA[जहर]]></category>
		<category><![CDATA[जाम]]></category>
		<category><![CDATA[प्रेम का प्याला]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.lokdastak.com/?p=22991</guid>

					<description><![CDATA[<p>&#160; REPORT BY AS BHADAURIYA AMETHI NEWS। सेमरौता कस्बे के रामगंज चौराहे पर श्रीराम नवमी...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/22991">KAVI SAMMELAN : &#8221;मिले यदि प्रेम का प्याला जहर भी जाम होता है&#8221;</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY AS BHADAURIYA</strong></span></p>
<p><em><strong>AMETHI NEWS।</strong></em></p>
<p>सेमरौता कस्बे के रामगंज चौराहे पर श्रीराम नवमी के उपलक्ष्य में भव्य कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। स्मृति शेष कृष्ण नारायण शुक्ल एवं पत्नी जी की याद में आयोजित इस सारस्वत आयोजन की अध्यक्षता राष्ट्रीय कवि रामेश्वर प्रसाद द्विवेदी प्रलयन्कर और मुख्य अतिथि वरिष्ठ भाजपा नेता राकेश त्रिपाठी रहे। संचालन वेद प्रकाश सिंह प्रकाश ने किया।</p>
<p>अध्यक्षीय कवि रामेश्वर प्रसाद द्विवेदी &#8216; प्रलयन्कर&#8217; ने कहा कि,<br />
जो नहा सके ना कुंभ, भीड़ में ना जा सके है।<br />
बाल वृद्ध युवा सभी, चित्त मन लाइए।<br />
माता पिता गुरु चरणों, को ले पखार आप,<br />
यही महाकुंभ जल, इसी में नहाइये।।<br />
हैदरगढ़ बाराबंकी के शिव किशोर तिवारी खंजन ने कहा कि,<br />
मिले यदि प्रेम का प्याला, जहर भी जाम होता है।<br />
हृदय जो प्रेम में डूबा, वो प्रभु का धाम होता है।।<br />
रायबरेली से पधारे कवि शिव कुमार सिंह शिव ने कहा कि,<br />
कविताई यो आसान नहीं, बहुतय दिक्कत झेलित है।<br />
कबो कबो तो मुसरिन के जस, हमहु दंडय पेलित है।।<br />
बाराबंकी से आए कवि वेद प्रकाश सिंह प्रकाश ने कहा कि,<br />
मै युगों से क्रांति का, उदघोष करता आ रहा हूं।<br />
मै युगों से शांति का संदेश देता आ रहा हूं।।</p>
<p>सुल्तानपुर से आए कवि इंद्रजीत सिंह अर्चक ने कहा कि,<br />
बीन बजावत धावती मातु, ना रामही रूप बखानि थकानी।<br />
गूंज मची चहुं ओर सुवंदन, कीरति गावत लोग बखानी।।<br />
बाराबंकी से आए कवि यदुनाथ द्विवेदी ने पढ़ा कि,<br />
बता दिया मोदी जी ने, स्वाभिमान से जीना है।<br />
दिखा दिया मोदी जी ने, कि छप्पन इंची सीना है।<br />
डॉ गीता पांडेय ने पढ़ा कि,<br />
शीश पे किरीट सोहे, कर में धनुष लिए हैं।<br />
ढुमुक धुमुक् चलें, छवि अभिराम है।।</p>
<p>रायबरेली से पधारे हास्य व्यंग के कवि मधुप श्रीवास्तव नर कंकाल ने कहा कि,<br />
अरी क्रूर कुटिल कुलटा, तूने पति की ले ली जान।<br />
और नाम रखा मुस्कान।।<br />
जमुना प्रसाद अबोध ने कहा कि,<br />
बसी सरयू किनारे पर, परम पावन अयोध्या है।<br />
ये है श्री राम की धरती, ये मन भावन अयोध्या है।।<br />
सुशील पांडेय ने चैता गीत गाकर समां बांध दिया।<br />
ओज और व्यंग के कवि जितेन्द्र मिश्र यायावर ने कहा कि,<br />
इतिहास गा रहे हो, मुगल आतताइयो का,<br />
शिवा संभा और राणा, की कहानी भूले हो।<br />
धरा पे कटाया सर, भारती की आन हेतु ,<br />
बलिदानी वीरो की, अमिट निशानी भूले हो।।</p>
<p>आयोजक विनोद शुक्ला और सुशील पांडेय ने सभी आगंतुकों का आभार जताया। इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि पूर्व बेसिक शिक्षा अधिकारी माता प्रसाद अवस्थी, प्रधान देवी शरण बाजपेई, कमलेश अग्निहोत्री, कर्ण कुमार बाजपेई, लक्ष्मी कांत अवस्थी, घनश्याम तिवारी, संतोष मिश्रा, संतोष जायवाल , प्रमोद शुक्ला समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहें।।</p>
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		<title>Poet Conference : राणा का भाला भूल गये क्या उनका पौरुष याद नही&#8230;.</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 30 Mar 2025 15:58:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[Conference]]></category>
		<category><![CDATA[Poet]]></category>
		<category><![CDATA[कवि सम्मेलन]]></category>
		<category><![CDATA[पौरुष]]></category>
		<category><![CDATA[भाला]]></category>
		<category><![CDATA[भूल]]></category>
		<category><![CDATA[याद]]></category>
		<category><![CDATA[राणा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY LOK REPORTER AMETHI NEWS। नव वर्ष मंगलमय रहे सबको सदा ही सर्वदा,अभिषेक नित...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY LOK REPORTER</strong></span></p>
<p><em><strong>AMETHI NEWS।</strong></em></p>
<p><strong>नव वर्ष मंगलमय रहे सबको सदा ही सर्वदा,अभिषेक नित करती रहें गंगा गोदावरी नर्मदा&#8230;&#8230;.</strong></p>
<p><strong> शानदार कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन </strong></p>
<p>जिले के गौरीगंज स्थित शहबाजपुर में रविवार को  श्री चन्द्र भवन शुक्ल इण्टर कालेज गौरीगंज तथा अवधी साहित्य संस्थान अमेठी के संयुक्त तत्वावधान में  कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन एवं डॉ केशरी शुक्ल अविग्य की वाणी वंदना से हुआ। अतिथियों का स्वागत करते हुए अध्यक्ष अवधी साहित्य संस्थान अमेठी डॉ अर्जुन पाण्डेय ने कहा कि हिन्दी साहित्य सम्वर्द्धन में गद्य एवं पद्य दोनों विधाओं की भूमिका अहम है।</p>
<p>अध्यक्षता करते हुए बस नरेन्द्र प्रताप शुक्ल ने पढ़ा &#8211; मिले जीवन को नव उत्कर्ष,करो तय अपने लक्ष्य सहर्ष। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ राजेश द्विवेदी ने पढ़ा तू आशा हो विश्वास तुम्ही प्राणों का स्पंदन हो,तुम्हीं मानवता के सम्बोधन हो। रामेश्वर सिंह &#8216;निराश&#8217; ने पढ़ा राणा का भाला भूल गये क्या उनका पौरुष याद नही।</p>
<p>ज्ञानेन्द्र पाण्डेय अवधी मधुरस ज्ञानेन्द्र पाण्डेय ने पढ़ा अवधी हमरिउ अनु हम,अवधी हमरिउ बानु।हरिनाथ शुक्ल &#8216;हरि&#8217; ने पढ़ा भाई चारा तो राम का देखो, पादुका बन्धु ले गया ढ़ोकर। चन्द्र प्रकाश मिश्र मटियारी ने पढ़ा अंधियारे में साथ भला क्या,देती मुझको मेरी छाया। राजेन्द्र शुक्ल अमरेश ने पढ़ा नव वर्ष मंगलमय रहे सबको सदा ही सर्वदा,अभिषेक नित करती रहें गंगा गोदावरी नर्मदा।श्रीनाथ शुक्ल ने पढ़ा छोड़ हमहू शहरिया अब अइबै ,किसनिया करैबै गोरिया।</p>
<p>ओज कवि अनिरुद्ध मिश्र ने पढ़ा बदलता है सदा जैसे कि दिन व रात होते हैं,समय ही जिन्दगी का फलसफा हमको सिखाता है।अर्चना ओजस्वी ने पढ़ा अपनी मां की करूं हर जनम अर्चना,जिसने दुःख का हरण कर दिया। श्रीनाथ मौर्य सरस ने पढ़ा छोड़ के मां  की मूर्ति को गर असली मां को पूजा होता,सच कहता हूं सम्पूर्ण जगत में वृद्धाश्रम कहीं न होता। रामबदन शुक्ल &#8216;पथिक&#8217; ने पढ़ा मलकिन तौ प्रधान होइ गयिन,हर घर कै मेहमान होइ गयिन।</p>
<p>अमर बहादुर सिंह &#8216;अमर&#8217; ने पढ़ा हम तुम्हारे लिए,तुम हमारे लिए।प्राण में प्राण से प्राण प्यारे लिए। शब्बीर अहमद सूरी ने पढ़ा मोहब्बत को छुपाओगे कभी छुप नहीं सकती,कली है तो महकने से कभी भी रह नहीं सकती।डॉ केशरी शुक्ल अविग्य ने पढ़ा दिल में मोहब्बतों का भ्रम पालने वाले,कुछ फ्रिज में मिल रहे तो कुछ ड्रम में मिल रहे। जगदम्बा तिवारी &#8216;मधुर&#8217;ने पढ़ा कागा जल्दी अइहौ हमारे अंगना।</p>
<p>चिंतामणि मिश्र, सूर्य मणि ओझा, राजेश यादव ,इंदुमती तिवारी,चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मंजुल, सुरेश चन्द्र शुक्ल &#8216;नवीन&#8217;, अभिजित तिवारी, सुनीता श्रीवास्तव, आशालता,बालकृष्ण शुक्ल,शीतला प्रसाद मिश्र,फतेहपुर बहादुर सिंह कसक, रामकुमारी संस्सृति,आशुतोष गुप्ता,रामशंकर सिंह, तेजभान सिंह,बालकवि आंद्रिया नीति आदि ने अपनी रसभरी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-22919" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250330-WA0014-1024x461.jpg" alt="" width="640" height="288" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250330-WA0014-1024x461.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250330-WA0014-300x135.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250330-WA0014-768x345.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250330-WA0014.jpg 1156w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>समारोह में उपस्थित गणमान्य साहित्य प्रेमियों में भाजपा के जिला अध्यक्ष सुधांशु शुक्ल, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय तिवारी,विषुव मिश्र, कैलाश शर्मा स्वामी नाथ पाल, डॉ सत्यदेव मिश्र, डॉ अभिमन्यु कुमार पाण्डेय, सत्येन्द्र प्रकाश शुक्ल, राजेन्द्र शुक्ल, डॉ लालता प्रसाद द्विवेदी, रीता पाण्डेय आदि की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही।</p>
<p>कवि गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का संचालन प्रख्यात कवि समीर मिश्र ने किया। समारोह के समापन पर विद्यालय के प्रबन्धक श्रीराम शुक्ल ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।</p>
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		<title>Virtual Holi Milan : होली एक-रंग अनेक _ छाई भारतीय परंपराओं की रंग-बिरंगी छटा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 23 Mar 2025 16:21:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[Holi]]></category>
		<category><![CDATA[Milan]]></category>
		<category><![CDATA[Virtual]]></category>
		<category><![CDATA[अनेक]]></category>
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		<category><![CDATA[भारतीय परंपराओं]]></category>
		<category><![CDATA[रंग]]></category>
		<category><![CDATA[रंग-बिरंगी छटा]]></category>
		<category><![CDATA[होली]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; REPORT BY GAURAV AWASTHI RAEBARELI NEWS। होली, सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि उमंग,...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY GAURAV AWASTHI</strong></span></p>
<p><strong>RAEBARELI NEWS।</strong></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-22739 size-thumbnail" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250320-WA0019-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" /></p>
<p>होली, सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि उमंग, भाईचारे और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है। इस बार जब आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की अमेरिका इकाई ने वर्चुअल मंच पर ‘होली एक-रंग अनेक’ कार्यक्रम का आयोजन किया, तो मानो डिजिटल दुनिया में भी रंगों की बौछार हो गई।</p>
<p>डिजीटल प्लेटफॉर्म ZOOM पर आयोजित इस कार्यक्रम ने भारत की अलग-अलग परंपराओं, लोकगीतों और सांस्कृतिक विविधताओं को जीवंत कर दिया। अमेरिका में बसे प्रवासी भारतीयों की सहभागिता ने इस आयोजन को और खास बना दिया।</p>
<p>कार्यक्रम का प्रारंभ समिति की अध्यक्ष मंजु मिश्रा द्वारा प्रतिभागियों के स्वागत से हुआ। उन्होंने भारतीय त्योहारों की प्राचीनता, उनकी संस्कृति में गहराई और प्रवासी भारतीयों के लिए इन त्योहारों के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके बाद कुशल संचालन की बागडोर रचना श्रीवास्तव ने संभाली। उनकी सहजता और प्रभावी वक्तृत्व शैली ने पूरे कार्यक्रम में ऊर्जा का संचार बनाए रखा।</p>
<p>इस होली मिलन समारोह का का मुख्य आकर्षण था भारत के 6 अलग-अलग राज्यों में होली मनाने की अनूठी परंपराओं का परिचय। इन परंपराओं ने यह दिखाया कि भले ही हर राज्य में होली मनाने का तरीका अलग है, लेकिन प्रेम, आनंद और उल्लास का भाव हर जगह समान है। सबसे पहले भगवान जगन्नाथ की धरती ओडिशा की बारी आई।</p>
<p>कोलकाता में हिंदी विश्वविद्यालय की कुलपति नंदिनी साहू ने बताया कि ओडिशा में होली ‘रंग’ से अधिक ‘भक्ति’ पर आधारित है। यहां होली जगन्नाथ संस्कृति से प्रेरित है, जिसमें भगवान कृष्ण की रास लीला और भक्तिमय भजनों के माध्यम से त्योहार मनाया जाता है। पुरी में होली भक्ति और आराधना का पर्व है, जहां प्राकृतिक सुंदरता और रास लीला का वर्णन विशेष रूप से किया जाता है।</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>अरुणाचल और उत्तराखंडी होली नहीं खेली, तो क्या खेली</strong></span></p>
<p>जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय, पासीघाट में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. हरिनिवास पांडेय ने बताया कि पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश में होली से मिलता-जुलता एक त्योहार मनाया जाता है। यहां की गालो जनजाति में धान की फसल पकने की खुशी में एक-दूसरे के चेहरों पर चावल का पिसा हुआ लेप लगाने की परंपरा है।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-22815" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250323-WA0062-1024x512.jpg" alt="" width="640" height="320" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250323-WA0062-1024x512.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250323-WA0062-300x150.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250323-WA0062-768x384.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250323-WA0062-1536x768.jpg 1536w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250323-WA0062.jpg 1600w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>उत्तराखंड में बैठकी होली और खड़ी होली की परंपरा है, जो कुमाऊं और गढ़वाल मंडलों में अलग-अलग अंदाज में मनाई जाती है। इसके बारे में एमबी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हल्द्वानी की प्रोफेसर प्रभा पंत ने बताया। उन्होंने बताया, &#8220;कुमाऊं क्षेत्र में पूस महीने के पहले रविवार से लेकर बसंत पंचमी तक होली गीतों की गूंज रहती है।</p>
<p>रात में चौपाल लगती है, जहां लोकगीतों के साथ ठंडाई और उत्सव का आनंद लिया जाता है। कुमाऊं के होली गीतों में मथुरा, ब्रज और गोकुल की गाथाएं भी सुनाई देती हैं, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को उत्तर प्रदेश से जोड़ती हैं।&#8221;</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>तेलंगाना में कामदेव और तमिलनाडु में भगवान मुरुगन के दर्शन की अनूठी परंपरा</strong></span></p>
<p>तेलंगाना में होली अलग तरह से मनाई जाती है। यहां होलिका दहन की बजाय कामदेव की पूजा होती है। गांवों में अल्पना से सजे घरों में होली की धूम रहती है। कामदेव की मूर्ति को गांव भर में घुमाने के बाद होली का आयोजन किया जाता है। लोग होली की राख को शुभ मानते हैं और अबीर-गुलाल में मिलाकर इसे चेहरे पर लगाते हैं।</p>
<p>तमिलनाडु में होली के समय राजा अपने शरीर पर टैटू जैसे चित्र उकेरवाते थे, जो उनकी शक्ति का प्रतीक होते थे। यहां मुरुगन भगवान के दर्शन को शुभ माना जाता है। पोंगल की तरह यहां भी लोग सड़कों पर फूलों से होली खेलते हैं और एक-दूसरे पर फूल फेंककर स्नेह जताते हैं।</p>
<p>डॉ. सुरभि दत्त ने तेलंगाना में होली की परंपरा पर बात करते हुए बताया कि हैदराबाद जैसे शहरों में विभिन्न राज्यों के लोग मिलकर होली में भाग लेते हैं, जिससे यह त्योहार सांस्कृतिक संगम का प्रतीक बन गया है। वहीं, RBS कला एवं विज्ञान महाविद्यालय, सुलूर-कोयंबटूर की प्रोफेसर ललिता रवींद्र एन ने बताया कि तमिलनाडु की होली प्रेम और सादगी की प्रतीक है।</p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>अवधी लोकगीतों से सजी सांस्कृतिक संध्या</strong></span></p>
<p>इस अनोखे डिजीटल होली मिलन का एक और आकर्षण था शुभ्रा ओझा की ओर से प्रस्तुति। उन्होंने ‘उड़े रे गुलाल..’ नामक डिजिटल प्रेजेंटेशन में अमेरिका में बसे प्रवासी भारतीयों की होली की तस्वीरों और वीडियो क्लिप्स ने यह दिखाया कि देश से दूर रहकर भी वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से कितने जुड़े हुए हैं। इस प्रस्तुति को सभी ने खूब सराहा।</p>
<p>कार्यक्रम में अवधी और भोजपुरी लोकगीतों ने समां बांध दिया। अयोध्या की प्रसिद्ध लोकगायिका संजोली पांडेय ने अपने 2000 से अधिक लोकगीतों में से चुनिंदा गीतों की प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके गीत ‘सिया निकली अवध की ओर, होलिया खेले रामलला’ ने सभी के दिलों में उत्साह भर दिया।</p>
<p>कैलिफोर्निया में रहने वाली शोनाली श्रीवास्तव ने ढोलक की थाप पर ‘सखी री देखो श्याम खेलन आए होली’, ‘सरजू तट राम खेले होली’ जैसे गीतों से सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। कक्षा 8 की छात्रा और रायबरेली की दृष्टि पांडेय ने अपनी प्रस्तुति ‘मसाने में होरी खेलत..’ से कार्यक्रम की शुरुआत की और अपने भजन ‘मैहर की सारदा भवानी..’ से समापन किया। उनकी मासूमियत और मधुर आवाज ने हर किसी का मन मोह लिया।</p>
<p>कार्यक्रम का समापन संयोजक गौरव अवस्थी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। उन्होंने सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों और दर्शकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ये आयोजन भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता का अद्भुत उदाहरण है। कुलमिलाकर, ‘होली एक-रंग अनेक’ कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि होली सिर्फ रंगों का नहीं, बल्कि विविध संस्कृतियों का संगम है।</p>
<p>भले ही स्थान और परंपराएं बदल जाएं, लेकिन प्रेम, उल्लास और भाईचारे का रंग हर जगह एक समान रहता है। इस वर्चुअल होली मिलन ने तकनीक के माध्यम से भारतीय परंपराओं को जीवंत कर दिया और प्रवासी भारतीयों के दिलों में भी त्योहार की उमंग भर दी।</p>
<p>आयोजन में भारत इकाई के अध्यक्ष विनोद शुक्ल, नीलम राकेश(लखनऊ), करुणालक्ष्मी (मैसूर-कर्नाटक), डाॅ सुमन फुलारा(उत्तराखंड), अक्षय नामदेव(छत्तीसगढ), गणेशदत्त बजाज(अमेरिका), पुष्पा राजगोपाल (तमिलनाडु), देवांशु तिवारी, करुणा शंकर मिश्र विशेष रूप से उपस्थित रहे।</p>
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