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	<title>धर्मअध्यात्म Archives - Lok Dastak</title>
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	<description>Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak</description>
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		<title>Religious Activities : गौमाता को राष्ट्रमाता बनाने की मुहिम, अमेठी में हुई बड़ी बैठक</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/25324</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 03 Jan 2026 15:49:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[Religious Activities]]></category>
		<category><![CDATA[अमेठी]]></category>
		<category><![CDATA[गौ प्रतिष्ठा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; रिपोर्ट- लोकदस्तक संवाददाता अमेठी, उप्र। परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><span style="color: #ff0000"><strong>रिपोर्ट- लोकदस्तक संवाददाता</strong></span></h3>
<h3><strong>अमेठी, उप्र।</strong></h3>
<p>परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के आशीर्वाद एवं आज्ञा से प्रस्तावित “गौ प्रतिष्ठा संकल्प पदयात्रा–अमेठी” को लेकर जनपद मुख्यालय गौरीगंज स्थित शंकराचार्य कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।</p>
<p>बैठक में अमेठी लोकसभा क्षेत्र की पांचों विधानसभाओं के गौसेवक, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया और गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने के अभियान को समर्थन देते हुए अपने सुझाव प्रस्तुत किए।</p>
<p>इस अवसर पर भारतीय मजदूर किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजू पाल ने शंकराचार्य जी के गौ प्रतिष्ठा आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। वहीं वरिष्ठ समाजसेवी सुरेश कुमार पांडे (इंदपुर, जामों) तथा सलोन विधायक जीत पांडे ने भी गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित किए जाने की मांग का समर्थन किया।</p>
<p>कार्यालय प्रभारी हरिप्रसाद द्विवेदी ने बताया कि पदयात्रा का उद्देश्य गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराना तथा जनपद अमेठी को गौहत्या से मुक्त कराना है। उन्होंने बताया कि ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य द्वारा मनोनीत गो-सांसद राकेश तिवारी अमेठी लोकसभा क्षेत्र की पांचों विधानसभाओं—सलोन, तिलोई, जगदीशपुर, अमेठी और गौरीगंज—की परिक्रमा करेंगे। पदयात्रा का समापन जामों मार्ग स्थित शंकराचार्य कार्यालय पर होगा।<img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-25325" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260103-WA0027-1024x768.jpg" alt="" width="640" height="480" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260103-WA0027-1024x768.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260103-WA0027-300x225.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260103-WA0027-768x576.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260103-WA0027.jpg 1280w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>गो-सांसद राकेश तिवारी ने बताया कि यह पदयात्रा 18 जनवरी (रविवार) को मां मनकामेश्वरी मंदिर से प्रारंभ होगी, जो प्रतिदिन 10 से 12 किलोमीटर चलकर 28 जनवरी (बुधवार) को समाप्त होगी। यात्रा का उद्देश्य जन-जन में गौसेवा व संरक्षण की भावना जागृत करना, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में गो-धाम की स्थापना तथा लोगों को गौ मतदाता संकल्प से जोड़ना है।</p>
<p>बैठक में कृष्णानंद पांडेय एडवोकेट, अनुराग तिवारी ‘विद्यमान’, उत्कर्ष शुक्ला, राजेश अग्रहरि, सत्यदेव सिंह, सूरज पांडे, अतुल तिवारी ‘सोनू’, सत्येंद्र यादव, जीत बहादुर यादव सहित सैकड़ों गौभक्त उपस्थित रहे।</p>
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		<item>
		<title>Religion Spirituality : निरंकार की रजा में जीवन जीना ही सच्ची साधना &#8211; निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/25312</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Jan 2026 14:54:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[RELIGION SPIRITUALITY]]></category>
		<category><![CDATA[जीवन जीना]]></category>
		<category><![CDATA[निरंकार की रजा]]></category>
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		<category><![CDATA[सुदीक्षा जी महाराज]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; रिपोर्ट &#8211; लोकदस्तक संवाददाता अमेठी, उप्र। ‘निरंकार की रजा में जीवन जीना ही सच्ची...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><span style="color: #ff0000"><strong>रिपोर्ट &#8211; लोकदस्तक संवाददाता</strong></span></h3>
<h3><strong>अमेठी, उप्र।</strong></h3>
<p>‘निरंकार की रजा में जीवन जीना ही सच्ची साधना है।’ यह प्रेरणादायक प्रवचन निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज द्वारा नववर्ष के शुभ अवसर पर दिल्ली स्थित ग्राउंड नम्बर 8, निरंकारी चैक, बुराड़ी रोड में आयोजित विशेष सत्संग समारोह में व्यक्त किए गये।</p>
<p>उक्त जानकारी करौंदी शाखा की मुखी श्रीमती विद्या देवी ने दी। उन्होंने बताया कि इस सत्संग में दिल्ली, एन.सी.आर. सहित विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालुगण सम्मिलित हुए। सभी भक्तों ने नव वर्ष के प्रथम दिन सतगुरु माता जी एवं निरंकारी राजपिता जी के पावन सान्निध्य में उनके दिव्य दर्शन और प्रेरणादायक प्रवचनों से आत्मिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का सुखद आनंद प्राप्त किया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-25313" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260102-WA0010-1024x682.jpg" alt="" width="640" height="426" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260102-WA0010-1024x682.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260102-WA0010-300x200.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260102-WA0010-768x512.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260102-WA0010-1536x1024.jpg 1536w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260102-WA0010-2048x1365.jpg 2048w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>सतगुरु माता जी ने अपने उद्बोधन में फरमाया कि नववर्ष का प्रथम दिवस हमें संतों के वचनों को सुनने और उन्हें जीवन में अपनाने का अनमोल अवसर देता है। जहाँ संसार वर्ष की शुरुआत मौज-मस्ती से करता है, वहीं संत सत्य और सत्संग का मार्ग चुनते हैं। सत्संग से आरंभ हुआ जीवन हर पल निरंकार के एहसास को और अधिक दृढ़ करता चला जाता है।</p>
<p>तार्किक रूप से नववर्ष केवल धरती का सूर्य के चारों ओर एक चक्कर और ऋतुओं का परिवर्तन है। हम शुभकामनाएँ देते हैं और नए संकल्प लेते हैं, पर वास्तविक परिवर्तन तभी सार्थक होता है जब वह भीतर से आए। संत आत्ममंथन द्वारा सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं और निरंकार को सर्वोपरि मानते हुए सेवा, सुमिरन और सत्संग को जीवन की प्राथमिकता बनाते हैं।</p>
<p>सतगुरु माता जी ने कहा कि एक भक्त की यही कामना होती है कि हर नया वर्ष उसे पहले से अधिक सेवा, सुमिरन और सत्संग से जोड़े, साथ ही वह अपनी सांसारिक जिम्मेदारियों को भी पूरी निष्ठा से निभाए। जब जीवन स्वयं संदेश बन जाए और कर्म शब्दों से अधिक बोलें, तभी सच्ची साधना का स्वरूप प्रकट होता है। इसी क्षण में, पूरी चेतन अवस्था के साथ, निरंकार के एहसास में जीना ही वास्तविक जीवन है, क्योंकि भूत और भविष्य माया का रूप हैं। जब मन में यह विश्वास दृढ़ हो जाए कि कल भी दातार की रज़ा थी और आज भी उसकी कृपा है, तो चिंता स्वतः समाप्त हो जाती है और जीवन सहज और संतुलित बन जाता है।<img decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-25314" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260102-WA0009-1024x598.jpg" alt="" width="640" height="374" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260102-WA0009-1024x598.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260102-WA0009-300x175.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260102-WA0009-768x449.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260102-WA0009-1536x897.jpg 1536w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260102-WA0009-2048x1196.jpg 2048w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>सहायक मीडिया प्रभारी  प्रवीन श्रीवास्तव ने बताया कि नववर्ष केवल तारीख़ का परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रेम, मिठास, सौम्यता और समझ को अपनाने का अवसर है। मनमुटाव और द्वेष से दूर रहकर, दूसरों के भावों को समझते हुए, दोषों पर पर्दा डालकर गुणों को अपनाना ही सच्ची भक्ति है। हर श्वास में सुमिरन हो, हर क्षण में निरंकार का वास हो, यही नववर्ष का सच्चा अर्थ और संदेश है। नव वर्ष के अवसर पर सतगुरु माता जी ने अंत में सभी श्रद्धालुओं के लिए सुख, समृद्धि और आनंदमय जीवन की शुभकामनाएं प्रदान की।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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			</item>
		<item>
		<title>Religious Program : राम कथा में श्रीराम की लीलाओं का हुआ मार्मिक चित्रण</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/25084</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Oct 2025 17:27:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[Amethi news]]></category>
		<category><![CDATA[AMETHI UPDATE]]></category>
		<category><![CDATA[Religious Program]]></category>
		<category><![CDATA[मार्मिक चित्रण]]></category>
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		<category><![CDATA[श्रीराम]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; रिपोर्ट- लोकदस्तक संवाददाता अमेठी, उप्र । विधायक राकेश प्रताप सिंह के आवास मंगलम भवन,...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/25084">Religious Program : राम कथा में श्रीराम की लीलाओं का हुआ मार्मिक चित्रण</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><span style="color: #ff0000"><strong>रिपोर्ट- लोकदस्तक संवाददाता</strong></span></h3>
<h3><span style="color: #000000"><strong>अमेठी, उप्र ।</strong></span></h3>
<p>विधायक राकेश प्रताप सिंह के आवास मंगलम भवन, गौरीगंज में परम पूज्य आचार्य शांतनु जी महाराज के श्रीमुख से चल रही श्रीराम कथा के तृतीय दिवस पर भक्तिमय वातावरण में प्रभु श्रीराम की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन हुआ।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-25085" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FunPic_20251025_223723874.jpg" alt="" width="384" height="307" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FunPic_20251025_223723874.jpg 384w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FunPic_20251025_223723874-300x240.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 384px) 100vw, 384px" /></p>
<p>आचार्य श्री ने महाराज दशरथ जी के प्रभु श्रीराम के प्रति अपार प्रेम एवं उनके जीवन की मार्मिक लीलाओं का सुंदर चित्रण किया। साथ ही उन्होंने माता-पिता और संतान के संस्कारों के महत्व पर भी प्रेरणादायक प्रवचन दिया।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-25089" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FunPic_20251025_225217356-1024x819.jpg" alt="" width="640" height="512" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FunPic_20251025_225217356-1024x819.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FunPic_20251025_225217356-300x240.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FunPic_20251025_225217356-768x614.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FunPic_20251025_225217356-1536x1229.jpg 1536w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FunPic_20251025_225217356.jpg 1920w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>इस अवसर पर विधायक गोसाईगंज अभय सिंह, सदस्य विधान परिषद शैलेन्द्र प्रताप सिंह, जगदम्बा प्रसाद त्रिपाठी ‘मनीषी’ जी, मुन्ना सिंह पिठला, भाजपा नेता काशी तिवारी, भाजपा के जिलाध्यक्ष सुधांशु शुक्ला,राजेश सिंह दतनपुर, बेबी सिंह दिनेश सिंह (प्रतापगढ़) सहित अनेक सम्मानित जन उपस्थित रहे।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>SHRI RAM KATHA : श्रीराम जन्मोत्सव पर गूंजा भजन — ‘दशरथ पुत्र जन्म सुनि काना’, भक्तों में उमड़ा आस्था का सागर</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/25060</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Oct 2025 16:41:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[‘दशरथ पुत्र जन्म सुनि काना’]]></category>
		<category><![CDATA[#शांतनुजीमहराज #RAKESHPRATAPSINGH]]></category>
		<category><![CDATA[Amethi news]]></category>
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		<category><![CDATA[आस्था का सागर]]></category>
		<category><![CDATA[गूंजा]]></category>
		<category><![CDATA[भक्तों में उमड़ा]]></category>
		<category><![CDATA[भजन]]></category>
		<category><![CDATA[श्री राम कथा]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीराम जन्मोत्सव]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रिपोर्ट &#8211; नीरज कुमार सिंह अमेठी, उप्र । श्रीराम कथा के द्वितीय दिवस कथा व्यास...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/25060">SHRI RAM KATHA : श्रीराम जन्मोत्सव पर गूंजा भजन — ‘दशरथ पुत्र जन्म सुनि काना’, भक्तों में उमड़ा आस्था का सागर</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2><span style="color: #ff0000"><strong>रिपोर्ट &#8211; नीरज कुमार सिंह</strong></span></h2>
<h3><strong>अमेठी, उप्र ।</strong></h3>
<p>श्रीराम कथा के द्वितीय दिवस कथा व्यास ने भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग बड़े मार्मिक ढंग से सुनाया। मानस की चौपाई दशरथ पुत्र जन्म सुनि काना का अर्थ है कि राजा दशरथ ने अपने पुत्रों के जन्म का समाचार कानों से सुनकर ब्रह्मा जैसा आनंद महसूस किया। इस चौपाई में वह आनंद और उत्साह से भरकर उठना चाहते हैं उनका मन प्रेम से भर गया है और शरीर पुलकित है।</p>
<p>भगवान के जन्म के अनेक कारण का भी वर्णन किया। राम जन्म के हेतु अनेका का अर्थ है कि भगवान राम के जन्म के कई कारण थे। मुख्य रूप से यह धर्म की स्थापना और अधर्म के नाश के लिए हुआ था। जब रावण और उसके सहयोगियों जैसे दुष्टों के अत्याचार बढ़ गए थे। भगवान विष्णु ने अवतार लिया ताकि धरती को अधर्म से मुक्त कर सकें और मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में जीवन के आदर्श स्थापित कर सकें।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-25063 size-full" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251024-WA0010.jpg" alt="" width="1600" height="1066" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251024-WA0010.jpg 1600w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251024-WA0010-300x200.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251024-WA0010-1024x682.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251024-WA0010-768x512.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251024-WA0010-1536x1023.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></p>
<p>गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह के आवास मंगलम पर चल रही श्रीराम कथा के द्वितीय दिवस शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय कथा व्यास आचार्य शान्तनु जी महाराज ने कहा कि इस धरा धाम पर जब जब असुरों के अत्याचार बढ़ते है तब तब प्रभु अवतार लेकर भक्तो को उनके संताप से मुक्त करते है। कथा व्यास ने कहा कि भगवान की सगुन लीलाओं को भक्ति व विश्वास से सुनना चाहिये इसमे तर्क का कोई स्थान नही है।भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव की कथा के क्रम में कथा व्यास ने प्रभु के जन्म के अनेक कारणों को सुनाया।</p>
<p>महाराज जी ने कहा कि भगवान की ये घोषणा है कि जो भी भक्त सब कुछ त्याग कर उनका भजन करते है प्रभु उनकी रक्षा उसी प्रकार करते है जैसे मां अपने बच्चे की रक्षा करती है।मनु एवं शतरूपा जी के प्रसंग को सुनाते हुये महाराज जी ने कहा कि मनु महाराज ने जीवन के अंतिम समय मे सब कुछ त्याग कर हरि भजन का मार्ग चुना हम सब का भी यही दायित्व है कि अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हुये भगवान के भजन में मन लगाएं।देवताओ की करुण पुकार को सुनकर भगवान ने सबको आश्वासन दिया कि मैं अब नर रूप में धरती पर अवतरित होने वाला हूं।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-25064 size-large" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251024-WA0025-1-1024x682.jpg" alt="" width="640" height="426" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251024-WA0025-1-1024x682.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251024-WA0025-1-300x200.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251024-WA0025-1-768x512.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251024-WA0025-1-1536x1024.jpg 1536w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251024-WA0025-1-2048x1365.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>सभी देवता प्रभु की जयजयकार करने लगे।गोस्वामी जी ने अयोध्या की महिमा को गाया है सम्पूर्ण अयोध्यावासी भगवान की आराधना कर रहे है।अयोध्या नगर में बधाइयां बजने लगी दशरथ जी मगन होकर प्रजाजनों को न्योछावर करने लगे और पूरा वातावरण राममय हो गया। कार्यक्रम के आयोजक एवं गौरीगंज के विधायक राकेश प्रताप सिंह ने अतिथियों को प्रभु श्रीराम का प्रतीक चिन्ह भेंट किया।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-25065" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251024-WA00151-1024x682.jpg" alt="" width="640" height="426" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251024-WA00151-1024x682.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251024-WA00151-300x200.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251024-WA00151-768x512.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251024-WA00151-1536x1023.jpg 1536w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251024-WA00151.jpg 1600w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>इस मौके पर दिनेश तिवारी विजय पाल उपाध्याय सम्राट सिंह रवीन्द्र प्रताप सिंह राज कुमार सिंह सचिन सिंह रैकवार उदय सिंह अरविंद सिंह अखण्ड प्रताप सिंह दिग्विजय सिंह मनीष सिंह वीरेन्द्र प्रताप सिंह मोनू सिंह प्रधान धीरु सिंह प्रदीप सिंह सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।</p>
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]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>Religion Spirituality : भगवान अहंकार का मर्दन करते हैं &#8211; आचार्य शांतनु</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/25037</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Oct 2025 16:08:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[religion]]></category>
		<category><![CDATA[spirituality]]></category>
		<category><![CDATA[अहंकार]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य शांतनु महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[कथा]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान]]></category>
		<category><![CDATA[मर्दन]]></category>
		<category><![CDATA[श्रवण]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; रिपोर्ट &#8211; लोकदस्तक संवाददाता  अमेठी, उप्र । तिलोई क्षेत्र के गांव पूरे दान सिंह...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><strong><span style="color: #ff0000">रिपोर्ट &#8211; लोकदस्तक संवाददाता</span></strong></h3>
<h3><strong> अमेठी, उप्र । </strong></h3>
<p>तिलोई क्षेत्र के गांव पूरे दान सिंह वैस में ब्लाक प्रमुख तिलोई के आवास पर चल रही श्रीमद भागवत कथा के छठें दिवस पर कथा व्यास आचार्य शान्तनु जी ने कहा कि भगवान कृष्ण द्वारा जब इन्द्र की पूजा छोड़वाकर गोवर्धन की पूजा करवाया गया तो इन्द्र ने क्रोधित होकर सात दिन तक लगातार वर्षा करवाई तो भगवान नें सभी ग्वाल बालों के साथ मिलकर गोवर्धन को ही छाता बनाकर उठा लिया और इन्द्र का मान भंग कर दिया और अन्त में इन्द्र लज्जित होकर आकर भगवान की स्तुति करने लगे।</p>
<p>सभी ब्रजवासी इस घटना से यह मानने लगें कि कन्हैया अवश्य ही भगवान है परन्तु भगवान नें कहा कि नही यह सब आप लोगों के सहयोग से ही ये सम्भव हुआ है। कथा व्यास ने कहा कि एक बार एकादशी के दिन नंद बाबा रात में तीन बजे यमुना में स्नान करनें चले गये और वरुण देव के दूत नन्दबाबा को पकड़ कर वरुणलोक लेकर गये और फिर नन्दबाबा को कृष्ण जी छुड़वाकर लेकर आये।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-25039 size-full" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0009.jpg" alt="" width="1280" height="576" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0009.jpg 1280w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0009-300x135.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0009-1024x461.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0009-768x346.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p>इसके बाद महाराज जी नें पवित्र महारास का वर्णन किया है और जब भगवान नें अपनी बंशी बजाई है तब सभी गोपियां जो जिस अवस्था में थी उसी अवस्था में भगवान से मिलने के लिये अपने घर से निकल पड़ी। और इस महारास का दर्शन करने भगवान शंकर भी माता पार्वती के संग आये थे।</p>
<p>अब कंस नें अक्रूर जी के माध्यम से मल्ल युद्ध के बहाने भगवान कृष्ण और बलराम को मथुरा बुलवाया। सभी गोपियां व माँ यशोदा भगवान के मथुरा जानें की सूचना पाकर विरह में व्याकुल हो गयीं भगवान नन्दबाबा और ग्वालों के साथ मथुरा आये। और यहां भगवान कृष्ण ने कंस का वध किया। और मथुरा के सभी असुरों का नाश किया है इसके पश्चात राजा उग्रसेन को मथुरा का राज्य सौंपा। और नन्द बाबा को विदा किया।और भगवान ने बलराम के साथ गुरुकुल में जाकर शिक्षा लिया।भगवान ने</p>
<p>उद्धव जी को गोकुल भेजकर गोकुल वासियों व गोपियों का हाल जाना है जरासंध आदि राक्षसों का आतंक बढ़ने के कारण भगवान नें द्वारिकापुरी का निर्माण कर समस्त प्रजा सहित द्वारिका को चले गये।कथा शुरुआत से पूर्व यजमान अर्चना सिंह कृष्ण कुमार सिंह ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ आरती पूजन किया। संचालन धर्मेश मिश्रा ने किया।</p>
<p><strong>इनकी रही मौजूदगी<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-25038 size-large" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0011-1024x461.jpg" alt="" width="640" height="288" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0011-1024x461.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0011-300x135.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0011-768x346.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0011.jpg 1280w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></strong></p>
<p>इस मौके पर राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह,कुंवर मृगांकेश्वर शरण सिंह, उत्कर्ष शरण सिंह,मुकेश सिंह,दिनेश रावत विधायक हैदरगढ़,विवेक विक्रम सिंह,लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता रमेश चंद्र, हीरामणि पटेल, दिलीप गंगवार,हरिनाथ यादव, मनीष सिंह, इंद्रजीत सिंह,कृषि वैज्ञानिक डा लाल पंकज सिंह, दलजीत सिंह,नितेश यादव, सौरभ सिंह, मोहन लाल मौर्य, शिवांशु मिश्रा, सुशील सिंह, करुणा शंकर, गंगा विभूति सहित हजारों की संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।</p>
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]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>Shrimad Bhagwat Katha : जिस पर भगवान की कृपा होती है वही सभी का कृपापात्र &#8211; आचार्य शांतनु।</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/25006</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Oct 2025 15:42:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[Shrimad Bhagwat Katha]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य शांतनु]]></category>
		<category><![CDATA[कृपा]]></category>
		<category><![CDATA[कृपापात्र]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान]]></category>
		<category><![CDATA[श्री कृष्ण]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.lokdastak.com/?p=25006</guid>

					<description><![CDATA[<p>रिपोर्ट &#8211; लोकदस्तक संवाददाता अमेठी, उप्र । क्षेत्र के पूरे दान सिंह बैस गांव में...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/25006">Shrimad Bhagwat Katha : जिस पर भगवान की कृपा होती है वही सभी का कृपापात्र &#8211; आचार्य शांतनु।</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h3><strong><span style="color: #ff0000">रिपोर्ट &#8211; लोकदस्तक संवाददाता</span></strong></h3>
<h3><strong>अमेठी, उप्र ।</strong></h3>
<p>क्षेत्र के पूरे दान सिंह बैस गांव में चल रही श्रीमदभागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर महाराज शांतनु जी नें कहा कि जिसके ऊपर भगवान की कृपा होती है वह सबका कृपापात्र बन जाता है।</p>
<p>महाराज ने राजा अंग की कथा सुनाते हुये कहा कि इनका बेटा वेन हुआ जो बहुत दुराचारी था जिससे परेशान होकर राजा अंग अपने ही राज्य में एक गुफा में जाकर छिप गये। इसलिये व्यक्ति को उत्तम संस्कारी संतान का निर्माण करना चाहिये। अन्यथा बुढ़ापे में ऐसे ही रोना पड़ता है, महाराज पृथु की कथा सुनाते हुये कहा कि महाराज पृथु बडे ही धर्मात्मा राजा हुये जिनके प्रताप के कारण ही इस धरा का नाम पृथ्वी पड़ा।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-25021" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460998263-1024x575.jpg" alt="" width="640" height="359" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460998263-1024x575.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460998263-300x169.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460998263-768x432.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460998263-1280x720.jpg 1280w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460998263.jpg 1500w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>महाराज पृथु नें यज्ञ किया फलस्वरूप भगवान से 10000 कान माँग लिया क्योंकि 2 कानों से भगवान की कथा सुनने से उनका मन नहीं भरता था कथा व्यास नें कहा कि जिन कानों से भगवान की कथा नहीं प्रवेश करती है वो कान साँप के बिल के समान है, सतत्कुमारों नें महाराज पृथु को उपदेश देते हुये कहा कि आत्म वस्तुओं से संग करो, महाराज पृथु तें दक्षिणा स्वरूप अपना सम्पूर्ण राज्य दान में दिया जिसे सनत्कुमारों नें स्वीकार करके पुनः महाराज पृथु को वापस दे दिया।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-25011" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460961706-1024x683.jpg" alt="" width="640" height="427" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460961706-1024x683.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460961706-300x200.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460961706-768x512.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460961706.jpg 1500w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>प्राचीनवर्हि की कथा सुनाते हुये उन्होंने कहा कि पशु बलि किसी भी दृष्टि से ठीक नही है इसलिये सबको शाकाहारी रहना चाहिये। पुरंजनों पाख्यान सुनाते हुये कथा व्यास ने कहा कि जीवात्मा और परमात्मा में क्या सम्बन्ध है इसका ज्ञान होना चाहिये। ऋषभदेव की कथा सुनाते हुये महाराज जी नें बताया की यहीं से जैन मत का प्रारम्भ हुआ।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-25014" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460943689-1024x683.jpg" alt="" width="640" height="427" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460943689-1024x683.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460943689-300x200.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460943689-768x512.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460943689.jpg 1500w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>जड़भरत की कथा सुनाते हुये महाराज ने कहा कि आत्मा अजर अमर है इसे कोई नष्ट नहीं कर सकता है। इसके पश्चात शुकदेव जी ने नरको का वर्णन किया है जिससे बचने का उपाय केवल भगवान का नाम है। इसके उदाहरण स्वरूप शुकदेव महराज ने अजामिलोपाख्यान सुनाया है इसके बाद राजा विश्वरूप की कथा सुनाई। जिन्हें देवताओं का गुरु बनाया गया जिनका वध इन्द्र द्वारा कर दिया गया जिसके कारण इन्द्र को ब्रह्म हत्या का पाप लगा।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-25007" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251014-WA0011-1024x682.jpg" alt="" width="640" height="426" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251014-WA0011-1024x682.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251014-WA0011-300x200.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251014-WA0011-768x512.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251014-WA0011.jpg 1280w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>जिसे इन्द्र नें चार स्थानों पर बाँट दिया पहला ऊसर भूमि दूसरा स्त्रियों में रज के रूप में तीसरा जल में झाग के रूप में चौथा वृक्षों में गोंद के रूप में। इसके पश्चात हिरण्यकशिपु की कथा सुनाई जिसका अन्त करने के लिये भगवान को नृसिंह भगवान के रूप में अवतार लेना पड़ा। इसी का पुत्र प्रह्लाद जी भगवान के परम भक्त हुये उनके पिता द्वारा विभिन्न प्रकार की यातना देनें के बाद भी भगवान के प्रति उनका विश्वास नहीं डिगा सका।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-25015" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460948823-1024x575.jpg" alt="" width="640" height="359" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460948823-1024x575.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460948823-300x169.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460948823-768x432.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460948823-1280x720.jpg 1280w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460948823.jpg 1500w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>अन्त में भगवान स्वयं खम्भे में से प्रकट होकर हिरण्यकशिपु का अन्त किया। इसके पश्चात महाराज जी नें भगवान के हरि अवतार की कथा सुनाई। जिसका अर्थ यह है कि ये संसार बनें का साथी है। इसके बाद महाराज जी नें समुद्रमन्थन की कथा सुनाई। जब दैत्य अमृत लेकर भागने लगे तब भगवान ने मोहिनी अवतार लेकर सभी दैत्यों को मोहित कर लिया और सभी देवता अमृत पी गये।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-25017" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460989393-1024x575.jpg" alt="" width="640" height="359" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460989393-1024x575.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460989393-300x169.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460989393-768x432.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460989393-1280x720.jpg 1280w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460989393.jpg 1500w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>राजा बलि से पृथ्वी को मुक्त कराने के लिये भगवान ने वामन रूप धारण किया और वामन भगवान ने तीन पग में ही नाप लिया है और सम्पूर्ण पृथ्वी को ही दानस्वरूप माँग लिया।</p>
<p><strong><span style="color: #ff6600">श्री कृष्ण जन्मोत्सव कथा सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालुगण</span></strong></p>
<p>इसके बाद भगवान राम की कथा सुनाई है और उसके बाद भगवान कृष्ण की कथा सुनाई है जब धरती पर जरासंघ और कंस आदि आततायियों का आतंक बढ गया तब भगवान नें मथुरा में देवकी माँ के गर्भ से कंस के जेल में जन्म हुआ फिर वसुदेव जी नें गोकुल में नन्द बाबा के यहाँ ले जाकर पहुंचा दिया और पूरे नन्द भवन में आनन्द छा गया चारों तरफ बधाइयां गाई जाने लगी।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-25018" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460968715-1024x575.jpg" alt="" width="640" height="359" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460968715-1024x575.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460968715-300x169.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460968715-768x432.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460968715-1280x720.jpg 1280w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1760460968715.jpg 1500w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>सम्पूर्ण नन्दगाँव आनन्द में सराबोर हो गया। इसके पूर्व यजमान अर्चना सिंह कृष्ण कुमार सिंह ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजन किया। संचालन धर्मेश मिश्रा ने किया।</p>
<p><strong>इन विशिष्ट जनों की रही मौजूदगी<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-25008" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/फोटो-02-2-1024x681.jpg" alt="" width="640" height="426" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/फोटो-02-2-1024x681.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/फोटो-02-2-300x199.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/फोटो-02-2-768x511.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/फोटो-02-2.jpg 1280w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></strong></p>
<p>इस मौके पर गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह, कुंवर मृगांकेश्वर शरण सिंह,पूर्व विधायक तेजभान सिंह, बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष रामप्रसाद मिश्र, केशव सिंह,राधेश्याम धोबी, मानधारा सिंह, गौरीगंज के ब्लाक प्रमुख उमेश प्रताप सिंह, मुसाफिरखाना प्रमुख दिनेश प्रताप सिंह पप्पू, राजेश सिंह दतनपुर,नीरज सिंह पत्रकार, ललित सिंह पत्रकार, रणधीर सिंह, विपुल सिंह चौहान, अमन सिंह चौहान, राजेश विक्रम सिंह, प्रमुख अंकित पासी, बेबी सिंह, सोनू यज्ञ सैनी, रोहित चौधरी,आनंद सिंह, विजय सिंह,प्रधान मोनू जायसवाल, शशिकांत तिवारी, खण्ड शिक्षा अधिकारी हरिओम तिवारी, राम किशन कश्यप, डॉ प्रज्ञा बाजपेयी,डॉ आयुषी सिंह, सहित हजारों की संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/25006">Shrimad Bhagwat Katha : जिस पर भगवान की कृपा होती है वही सभी का कृपापात्र &#8211; आचार्य शांतनु।</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>श्रीमद्भागवत कथा (Shrimad Bhagwat Katha) संसार रूपी भवसागर पार करने का माध्यम है &#8211; शांतनु जी महराज</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/24987</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 16:34:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[Shrimad Bhagwat Katha]]></category>
		<category><![CDATA[कलश यात्रा]]></category>
		<category><![CDATA[पार]]></category>
		<category><![CDATA[भवसागर]]></category>
		<category><![CDATA[माध्यम]]></category>
		<category><![CDATA[शांतनु ज़ी महराज]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीमद्भागवत कथा]]></category>
		<category><![CDATA[संसार रूपी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; रिपोर्ट &#8211; लोकदस्तक संवाददाता अमेठी, उप्र । श्रीमद भागवत कथा इस संसार रूपी भवसागर...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><span style="color: #ff0000"><strong>रिपोर्ट &#8211; लोकदस्तक संवाददाता</strong></span></h3>
<h3><strong>अमेठी, उप्र ।</strong></h3>
<p>श्रीमद भागवत कथा इस संसार रूपी भवसागर पार करने का सबसे सुगम माध्यम है यह अमृत वचन तिलोई के पूरे दान सिंह बैस गांव में आयोजित कथा सुनाते हुए व्यक्त किए।</p>
<p>कथा के प्रथम दिवस के अवसर पर पूज्य शांतनु जी महाराज जी नें कहा कि इस संसार को भवसागर कहा गया है क्योंकि जिस प्रकार सागर के दो छोर होते हैं परन्तु दिखता एक ही है उसी प्रकार जन्म और मृत्यु भी इस संसार रूपी सागर के दो छोर हैं जिसमें जन्म तो दिखता है परन्तु मृत्यु किसकी कब होगी यह किसी को पता नही।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-24988" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251011-WA0048-683x1024.jpg" alt="" width="640" height="960" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251011-WA0048-683x1024.jpg 683w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251011-WA0048-200x300.jpg 200w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251011-WA0048-768x1152.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251011-WA0048-1024x1536.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251011-WA0048-1365x2048.jpg 1365w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251011-WA0048-scaled.jpg 1707w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>इसलिये इस संसार को भवसागर कहा गया है। और भागवत जी की कथा इस संसार सागर से पार जानें की नौका है। जिस पर बैठकर संसार का सामान्य मनुष्य भी भगवान के परमपद को प्राप्त कर सकता है।</p>
<p>कथा व्यास नें कहा जो भगवान का है। वही भागवत है पूरी भागवत की कथा में समय &#8211; समय पर भगवान के भक्तों की कथा सुनाया गया है। महाराज जी ने कहा कि भागवत जी की कथा को सप्ताह ज्ञान यज्ञ कहते हैं। क्योंकि इसमें अपने अज्ञान की आहुति देकर भगवत तत्व को जाना जा सकता है।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-24991" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251011-WA0051.jpg" alt="" width="832" height="553" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251011-WA0051.jpg 832w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251011-WA0051-300x199.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251011-WA0051-768x510.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 832px) 100vw, 832px" /></p>
<p>श्रीमदभागवत में सूत जी महाराज शौनकादि ऋषियों को कथा सुना रहें हैं। शौनक ऋषियों नें सूत जी से भगवत प्राप्ति का सबसे सरल उपाय पूछा तो सूत जी नें सभी शास्त्रों के सार रूप में श्रीमदभागवत की कथा सुनाई। जो इस कलियुग के ताप को शान्त करके मुक्ति दिलानें में सर्वथा सक्षम है। क्योंकि व्यक्ति का जीवन दीर्घ हो या न हो दिव्य होना चाहिये। हमारा जीवन सफल हो या न हो सार्थक अवश्य होना चाहिये।</p>
<p>नारद जी नें कहा कि भक्ति ज्ञान व वैराग्य एक दूसरे के पूरक है और ये सब भागवत जी की कृपा से प्राप्त होता है । शौनकादि ऋषियों नें नारद जी को हरिद्वार में गंगा जी के पावन तट पर कथा सुनाई है शौनक जी नें कहा कि भागवत जी के श्रवण मात्र से व्यक्ति का पाप ताप नष्ट हो जाता है। इस सिद्धान्त के उदाहरण स्वरूप शौनक जी नें नारद जी को अजामिलोपाख्यान सुनाया है।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-24993" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251011-WA0021.jpg" alt="" width="320" height="213" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251011-WA0021.jpg 320w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251011-WA0021-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 320px) 100vw, 320px" /></p>
<p>सभी श्रोता समाज महाराज जी के श्री मुख से कथा का श्रवण करके आनंदित हो उठा।कथा श्रोताओं में प्रमुख रूप से राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह,सुधांशु शुक्ल जिलाध्यक्ष भाजपा,राकेश सिंह विधायक गौरीगंज,अंकित पासी प्रमुख सिंहपुर आदि बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>भव्य कलश यात्रा में हजारों महिलाएं व पुरुष हुए शामिल<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-24989" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FunPic_20251011_215442491.jpg" alt="" width="384" height="307" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FunPic_20251011_215442491.jpg 384w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/FunPic_20251011_215442491-300x240.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 384px) 100vw, 384px" /></strong></span></p>
<p>श्रीमद्भागवत कथा आयोजन से पूर्व सुबह नौ बजे कथा स्थल से बाजे गाजे के साथ हजारों भक्तों की भीड़ कथा व्यास शांतनु महराज की अगुवाई में और कथा यजमान अर्चना सिंह ब्लाक प्रमुख तिलोई और पूर्व प्रमुख कृष्ण कुमार सिंह के साथ हजारों की संख्या में भक्त कलश यात्रा में शामिल हुए।यह कलश यात्रा कथा स्थल से जमुरवा स्थित राम जानकी मंदिर के दर्शनोपरांत मंदिर परिसर में स्थित सगरा से जल भरकर पुनः यात्रा कथा स्थल पहुंची।</p>
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		<title>Religious Program : अत्यंत उदार,परोपकारी व सेवाभावी हैं आचार्य प्रदीप मणि महाराज</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/24957</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Oct 2025 10:51:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[अत्यंत उदार]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[परोपकारी]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदीप मणि महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[वृन्दावन]]></category>
		<category><![CDATA[सेवाभावी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; रिपोर्ट &#8211; डॉ. गोपाल चतुर्वेदी वृन्दावन(मथुरा) उप्र । चैतन्य विहार फेस-2 स्थित नवनिर्मित मणिद्वीप...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/24957">Religious Program : अत्यंत उदार,परोपकारी व सेवाभावी हैं आचार्य प्रदीप मणि महाराज</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><strong><span style="color: #ff0000">रिपोर्ट &#8211; डॉ. गोपाल चतुर्वेदी</span></strong></h3>
<h3><strong>वृन्दावन(मथुरा) उप्र । </strong></h3>
<p>चैतन्य विहार फेस-2 स्थित नवनिर्मित मणिद्वीप भागवत सेवा आश्रम में चल रहे सप्त दिवसीय उद्घाटन समारोह के अंतर्गत शरद पूर्णिमा के पावन पर्व पर वृहद सन्त-विद्वत सम्मेलन का आयोजन सम्पन्न हुआ।जिसमें अपने विचार व्यक्त करते हुए श्रीनाभापीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी सुतीक्ष्णदास देवाचार्य महाराज ने कहा कि शरद पूर्णिमा का पर्व अत्यंत दिव्य है। आज इस पावन पर्व पर &#8220;भागवत भक्त&#8221; आचार्य प्रदीप मणि महाराज द्वारा संस्थापित मणिद्वीप भागवत सेवा आश्रम का उद्घाटन होना बड़े ही हर्ष का विषय है।</p>
<p>श्रीमज्जगद्गुरु स्वामी जयराम दास महाराज ने कहा कि आचार्य प्रदीप मणि महाराज ने बहुत ही कम आयु में ही श्रीमद्भागवत कथा, श्रीराम कथा एवं अन्य धर्म ग्रंथों के माध्यम से देश ही नहीं अपितु विदेशों में प्रभु भक्ति का प्रचार-प्रसार कर असंख्य व्यक्तियों को धर्म के मार्ग से जोड़कर उनका कल्याण किया है।</p>
<p>श्रीपीपाद्वाराचार्य जगद्गुरु बाबा बलरामदास देवाचार्य महाराज ने कहा कि आचार्य प्रदीप मणि महाराज अत्यंत उदार,परोपकारी व सेवाभावी हैं। हमें पूर्ण विश्वाश है कि उनके निर्देशन में मणिद्वीप भागवत सेवा आश्रम गौ सेवा, सन्त सेवा, ब्रजवासी सेवा एवं दीन-दुखियों की सेवा के लिए सदैव समर्पित रहेगा।</p>
<p>श्रीमज्जगद्गुरु स्वामी विश्वेशप्रपन्नाचार्य महाराज ने कहा कि वर्तमान में सनातन धर्म पर हो रहे कुठाराघात से धर्म की रक्षा के लिए ऐसे आश्रमों की स्थापना होना अति आवश्यक है।क्योंकि देश व धर्म की रक्षा के लिए उसकी संस्कृति की रक्षा करना परम् आवश्यक है।तभी धर्म व देश सुरक्षित और ऊर्जा वान बनेगा।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-24958" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251007-WA0011.jpg" alt="" width="1008" height="756" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251007-WA0011.jpg 1008w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251007-WA0011-300x225.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251007-WA0011-768x576.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1008px) 100vw, 1008px" /></p>
<p><strong>इन विशिष्ट जनों की रही मौजूदगी</strong></p>
<p>सन्त-विद्वत सम्मेलन में जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्रीअनन्ताचार्य महाराज, महामण्डलेश्वर श्रीदण्डीस्वामी रामदेवानंद सरस्वती महाराज,भागवत भास्कर कृष्ण चंद्र ठाकुरजी महाराज, डॉ. अनिरुद्धाचार्य महाराज, आचार्य/भागवत पीठाधीश्वर मारुति नंदनाचार्य वागीश महाराज, विश्वविख्यात भागवताचार्य डॉ. चतुरनारायण पाराशर, पुराणाचार्य डॉ. मनोज मोहन शास्त्री, धर्मरत्न स्वामी बलरामाचार्य महाराज, आचार्य रामविलास चतुर्वेदी, डॉ. अशोक शास्त्री, सन्त श्रीदाम किंकर महाराज, श्रीराम कथा मर्मज्ञ अशोक व्यास महाराज, &#8220;यूपी रत्न&#8221; की उपाधि से अलंकृत प्रख्यात साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी, भागवताचार्य विपिन बापू, आचार्य घनश्याम दुबे, डॉ. राधाकांत शर्मा, आचार्य युगल किशोर कटारे, रासाचार्य स्वामी राम शरण शर्मा, आचार्य बुद्धिप्रकाश शास्त्री,धर्मवीर शास्त्री, प्रेम शरण शर्मा,आचार्य नरोत्तम शास्त्री, आचार्य नेत्रपाल शास्त्री, प्रोफेसर ऋषीकांत, डॉ. कौशल किशोर,, पंडित श्याम सुंदर ब्रजवासी, सुमंत कृष्ण महाराज, भक्ति मती बीना माताजी (दिल्ली) आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।संचालन डॉ. आचार्य ऋषिकुमार तिवारी ने किया।</p>
<p>मणिद्वीप भागवत सेवा आश्रम के संस्थापक &#8220;भागवत भक्त&#8221; आचार्य प्रदीप मणि महाराज ने महोत्सव में पधारे समस्त सन्तों विद्वानों का उत्तरीय ओढ़ाकर व ठाकुरजी का चित्रपट, पटुका-प्रसादी-माला आदि भेंट कर स्वागत किया।तत्पश्चात सन्त, ब्रजवासी, वैष्णव सेवा एवं वृहद भंडारा हुआ।</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/24957">Religious Program : अत्यंत उदार,परोपकारी व सेवाभावी हैं आचार्य प्रदीप मणि महाराज</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>Chicago Parliament of Religions : शिकागो धर्म संसद की 132वीं वर्षगांठ पर युवाओं का मार्गदर्शन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 16:52:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[132वीं]]></category>
		<category><![CDATA[Chicago Parliament of Religions : शिकागो]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म संसद]]></category>
		<category><![CDATA[मार्गदर्शन]]></category>
		<category><![CDATA[युवाओं]]></category>
		<category><![CDATA[वर्षगांठ]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; रिपोर्ट- अमित चावला लखनऊ, उप्र।  संध्यारति के उपरान्त सायं 7ः15 बजे से रात्रि 8ः45...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><span style="color: #ff0000"><strong>रिपोर्ट- अमित चावला</strong></span></h3>
<h3><strong>लखनऊ, उप्र। </strong></h3>
<p>संध्यारति के उपरान्त सायं 7ः15 बजे से रात्रि 8ः45 बजे शिकागो में दिनांक 11 सितम्बर 1893 की विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानन्द जी के वक्तृता के 132वीं वर्षगांठ की स्मृति में श्री रामकृष्ण मठ, निराला नगर, लखनऊ के प्रेक्षागृह में एक धर्म संसद का आयोजन किया गया तथा समस्त कार्यक्रम हमारे यूटयूब चैनल ‘रामकृष्ण मठ लखनऊ’ के माध्यम से सीधा प्रसारण भी किया गया।</p>
<p>स्वामी विवेकानन्द जी के वक्तृता के 132वीं वर्षगांठ के अवसर पर स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी महाराज ने कहा कि रामकृष्ण मिशन की स्थापना करने वाले स्वामी विवेकानन्द ने सन् 1893 को शिकागो में विश्व धर्म संसद प्रसिद्ध भाषण दिया था जिसने दुनिया को भारत के प्रति देखने का नजरिया बदल दिया। उन्होंने भारतीय वेदांत और योग के दर्शन को दुनिया के सामने पेश किया जिसने भारत को दुनिया के आध्यात्मिक मानचित्र पर स्थापित किया। स्वामी विवेकानन्द के अनमोल विचार हमें कभी हार न मानने की प्रेरणा देते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उद्बोधन कार्यक्रम का शुभारम्भ रामकृष्ण मठ के प्रेक्षागृह में लघु संसद का आयोजन विभिन्न धर्मो से आए प्रतिनिधियों ने द्वीप प्रज्जलित करके किया तथा रामकृष्ण मठ के सन्यासियों एवं ब्रह्मचारियों ने वैदिक मंत्रोंच्चारणों का पाठ किया।</p>
<p>स्वामी विवेकानन्द द्वारा दिये गये शिकागो में दिये गये भाषण का पाठ विवेकानन्द युवा संघ, लखनऊ के श्री विकास पटेल ने सस्वर पाठ किया तथा भाषण का हिन्दी में अनुवादित पाठ विवेकानन्द युवा संघ, लखनऊ के श्री समर नाथ निगम द्वारा सस्वार पाठ किया गया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के प्रबंध कार्यकारणी समिति के अध्यक्ष अमोद गुजराल ने अपने स्वागत भाषण में उन्होंने मंच पर पधारे गणमान्य अतिथियों एवं उपस्थित भक्ततों एवं युवाओं को इस कार्यक्रम में उपस्थित होने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा शिकागो धर्म महासभा में स्वामी विवेकानन्द द्वारा संपूर्ण विश्व को दिए गए संदेश का प्रचार प्रसार करना न केवल आवश्यक है वरन् जीव जगत के कल्याण के लिए जरूरी भी है।</p>
<p>स्वामी विवेकानन्द जी ने शिकागो में किसी मत की व्याख्या न करते हुए मानव धर्म तथा उसके कर्तव्य की व्याख्या करते हुए भारतीय संस्कृति से सबको अवगत कराया। इस अवसर पर स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी ने आये हुये गणमान्य अतिथियों को पौधें उपहार स्वरूप प्रदान करते हुये व स्वामी विवेकानन्द की पुस्तक देकर सम्मानित किया।</p>
<p>तत्पश्चात कार्यक्रम में सम्मलित विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों द्वारा व्याख्यान दिया गया। जिसमें बौध धर्म का प्रतिनिधित्व अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध अनुसंधान संस्थान, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ के अध्यक्ष भिक्षु देवेन्द्र द्वारा तथा लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज, लखनऊ के कार्यवाहक प्रधानाचार्य एवं प्रोफेसर एवं प्रमुख जूलॉजी विभाग के डा0 नवीन सैमुअल सिंह ने इसाई धर्म व ई.वाई. गुआम के सहायक प्रबंधक एवं सदस्य ए.आर.सी. (सर्व धर्म सम्मेलन), गुआम चैप्टर के हसन तकी काज़मी ने इस्लाम एवं लखनऊ गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह बग्गा ने सिक्ख धर्म का प्रतिनिधित्व किया</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>स्वामी विवेकानन्द ने कहा था युवा पीढी परिवर्तन की अग्रदूत है -स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी</strong></span></p>
<p>रामकृष्ण मठ, लखनऊ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी महाराज ने हिन्दुत्व का प्रतिनिधित्व करते हुये बताया कि हिंदू धर्म, दुनिया का सबसे पुराना धर्म माना जाता है। ‘‘हिंद’’ शब्द ‘‘सिंध’’ का विकृत रूप है, जो संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है सिंधु, वह नदी जो अरब सागर में बहती है। इस गलत उच्चारण का श्रेय उन फारसियों को जाता है जिन्होंने छठी शताब्दी ईसा पूर्व के अंत में भारत पर आक्रमण किया था।</p>
<p>बाद में, भारत पर यूनानियों के आक्रमण (326 ईसा पूर्व) के दौरान, यूनानियों ने सिंधु नदी को ‘‘इंडोस’’ के रूप में वर्णित किया, जिसे कुछ समय बाद बदलकर ‘‘इंडस’’ कर दिया गया। तब से, सिंधु नदी के पूर्व में स्थित देश को भारत, उसके लोगों को भारतीय और उनके धर्म को हिंदू धर्म के रूप में जाना जाने लगा।</p>
<p>हिंदू धर्म का मूल नाम सनातन धर्म है, जिसका अर्थ है ‘‘शाश्वत धर्म।’’</p>
<p>हिंदू धर्म के अनुसार, सर्वोच्च ईश्वर निराकार और कई रूपों से संपन्न है। कई गुना ब्रह्मांड के रूप में ब्रह्म की अभिव्यक्ति वास्तविक नहीं बल्कि स्पष्ट है। मानव व्यक्ति हिंदू धर्म के अनुसार, मनुष्य अनिवार्य रूप से एक आत्मा है जो अनुभव प्राप्त करने के लिए अपने शरीर और मन का उपयोग करता है। आत्मा की प्रकृति क्या है?</p>
<p>हिंदू धर्म का मानना है कि स्थूल जगत और सूक्ष्म जगत एक ही योजना पर बने हैं, और ब्रह्म दोनों की आत्मा है। मनुष्य की आत्मा के रूप में, ब्रह्म को परमात्मा के रूप में जाना जाता है। उपनिषद मनुष्य की दो आत्माओं के बारे में बताते हैं, जो मानो उसके भीतर एक-दूसरे के बगल में निवास करती हैंः वास्तविक आत्मा (परमात्मा) और प्रत्यक्ष आत्मा (जीवात्मा)।</p>
<p>श्रीरामकृष्ण और स्वामी विवेकानन्द का जीवन हिंदू धर्म की आध्यात्मिक शिक्षाओं की वैधता को प्रदर्शित करते हैं। प्रेम, भक्ति और सभी धर्मों की एकता पर उनकी शिक्षाएँ आज की दुनिया के लिए व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करती हैं।</p>
<p>समापन गीत रामकृष्ण मठ, लखनऊ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्दजी द्वारा प्रस्तुत किया गया तथा कार्यक्रम के अन्त में उपस्थित सभी भक्तगणों के मध्य प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>Religion &#8211; Spirituality : ‘‘रामायण मानव मन के संशय दूर करती है।’’ -स्वामी अभयानंद सरस्वती</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 15:54:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[religion]]></category>
		<category><![CDATA[spirituality]]></category>
		<category><![CDATA[मन]]></category>
		<category><![CDATA[मानव]]></category>
		<category><![CDATA[रामायण]]></category>
		<category><![CDATA[संशय]]></category>
		<category><![CDATA[स्वामी अभयानंद सरस्वती]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; रिपोर्ट- अमित चावला लखनऊ, उप्र। चांसलर क्लब आशियाना में हो रही ‘‘रामकथा’’ के पहले...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><span style="color: #ff0000"><strong>रिपोर्ट- अमित चावला</strong></span></h3>
<h3><strong>लखनऊ, उप्र।</strong></h3>
<p>चांसलर क्लब आशियाना में हो रही ‘‘रामकथा’’ के पहले दिन महामण्डलेश्रवर स्वामी अभयानंद सरस्वती जी ने कहा सनातन शास्त्रों ने लोक कल्याण के लिए जीवन दृष्टि दी है। जैसे श्रीमद्भगवतगीता, जीवन जीने की कला सिखाती है। श्रीमद् भागवत महापुराण मरने की कला सिखाती है। उसी प्रकार श्री रामचरित मानस संशय दूर करने की कला सिखाती है।</p>
<p>सत्य सनातन सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में राम कथा के किष्किंधा कांड को स्वामी ने मानस का हृदय है। तीन कांड पहले और तीन कांड बाद में उनके मध्य में है किष्किंधा कांड। जैसे मनुष्य के शरीर में हृदय मध्य में होता है उसी प्रकार किष्किंधा कांड मानस का हृदय है।</p>
<p>कथा के आयोजन कर्ता अनुराग गुप्ता ने बताया कि कथा रोज सायं 4ः00 बजे से 6ः00 बजे तक 14 सितम्बर तक होगी। आज का व्यास पूजन आलोक गुप्ता, सीमा गुप्ता, अनुराग गुप्ता, संध्या गुप्ता, अर्चना गुप्ता और गुड्डन गुप्ता ने किया। इस अवसर पर त्रिवेणी अलमीरा के अध्यक्ष वरूण तिवारी जी भी उपस्थित थे।</p>
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