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AMETHI UPDATE : अधिवक्ताओं की महापंचायत को कांग्रेस व किसान यूनियनों का समर्थन, 48 घंटे का अल्टीमेटम  

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रिपोर्ट – विजय कुमार यादव

अमेठी, उप्र ।

स्थानीय तहसील में अधिवक्ताओं का आंदोलन 22वें दिन भी जारी रहा। तहसील प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच चल रहा गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहकर लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं और एसडीएम अभिनव कनौजिया पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उनके स्थानांतरण की मांग कर रहे हैं।

इस संबंध में कई बार जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। इसी कड़ी में बृहस्पतिवार को मुसाफिरखाना तहसील परिसर में अधिवक्ताओं ने महापंचायत का आयोजन किया। इसमें अमेठी जनपद की चारों तहसीलों के बार संघों के अध्यक्ष-पदाधिकारी, जिला बार एसोसिएशन, सेंट्रल बार एसोसिएशन के सदस्य शामिल हुए। साथ ही पड़ोसी जनपद सुलतानपुर, प्रतापगढ़, बाराबंकी, लखनऊ और प्रयागराज से भी बड़ी संख्या में अधिवक्ता पहुंचे।

महापंचायत में कांग्रेस पार्टी और किसान संगठनों ने आंदोलन को समर्थन दिया। कांग्रेस नेता एवं जगदीशपुर विधान सभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी विजय पासी सैकड़ों की संख्या में समर्थकों के साथ महा पंचायत में शामिल होकर अपना समर्थन दिया । पूर्व प्रत्याशी विजय पासी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी गरीबों और पीड़ितों की आवाज उठाती रही है, इसी क्रम में अधिवक्ताओं की मांगों के समर्थन में वे खड़े हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि एसडीएम अभिनव कनौजिया का तत्काल तबादला होना चाहिए और दावा किया कि वे पूर्व में भी मुसाफिरखाना में तैनात रह चुके हैं। विजय पासी ने यह भी आरोप लगाया कि एसडीएम को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिस पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

वहीं, किसान संगठनों के पदाधिकारी और सदस्य भी महापंचायत में शामिल हुए और अधिवक्ताओं की मांगों का समर्थन किया। वक्ताओं ने कहा कि न्यायिक कार्य ठप होने से आम जनता को परेशानी हो रही है, लेकिन प्रशासन की निष्क्रियता के कारण स्थिति और गंभीर होती जा रही है।

मुसाफिरखाना तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वेद प्रकाश शुक्ला ने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि इस अवधि में एसडीएम को नहीं हटाया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आगे उग्र प्रदर्शन, राजमार्ग जाम, ट्रेन रोकने और लखनऊ पहुंचकर विधानसभा के बाहर धरना-प्रदर्शन जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

फिलहाल, अधिवक्ताओं और तहसील प्रशासन के बीच तनातनी बनी हुई है। आंदोलन के लंबे खिंचने से क्षेत्र की जनता को हो रही परेशानियों के बीच अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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