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	<title>spirituality Archives - Lok Dastak</title>
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	<description>Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak</description>
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	<title>spirituality Archives - Lok Dastak</title>
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		<title>Religion Spirituality : भगवान अहंकार का मर्दन करते हैं &#8211; आचार्य शांतनु</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/25037</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Oct 2025 16:08:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[religion]]></category>
		<category><![CDATA[spirituality]]></category>
		<category><![CDATA[अहंकार]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य शांतनु महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[कथा]]></category>
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		<category><![CDATA[श्रवण]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; रिपोर्ट &#8211; लोकदस्तक संवाददाता  अमेठी, उप्र । तिलोई क्षेत्र के गांव पूरे दान सिंह...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><strong><span style="color: #ff0000">रिपोर्ट &#8211; लोकदस्तक संवाददाता</span></strong></h3>
<h3><strong> अमेठी, उप्र । </strong></h3>
<p>तिलोई क्षेत्र के गांव पूरे दान सिंह वैस में ब्लाक प्रमुख तिलोई के आवास पर चल रही श्रीमद भागवत कथा के छठें दिवस पर कथा व्यास आचार्य शान्तनु जी ने कहा कि भगवान कृष्ण द्वारा जब इन्द्र की पूजा छोड़वाकर गोवर्धन की पूजा करवाया गया तो इन्द्र ने क्रोधित होकर सात दिन तक लगातार वर्षा करवाई तो भगवान नें सभी ग्वाल बालों के साथ मिलकर गोवर्धन को ही छाता बनाकर उठा लिया और इन्द्र का मान भंग कर दिया और अन्त में इन्द्र लज्जित होकर आकर भगवान की स्तुति करने लगे।</p>
<p>सभी ब्रजवासी इस घटना से यह मानने लगें कि कन्हैया अवश्य ही भगवान है परन्तु भगवान नें कहा कि नही यह सब आप लोगों के सहयोग से ही ये सम्भव हुआ है। कथा व्यास ने कहा कि एक बार एकादशी के दिन नंद बाबा रात में तीन बजे यमुना में स्नान करनें चले गये और वरुण देव के दूत नन्दबाबा को पकड़ कर वरुणलोक लेकर गये और फिर नन्दबाबा को कृष्ण जी छुड़वाकर लेकर आये।<img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone wp-image-25039 size-full" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0009.jpg" alt="" width="1280" height="576" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0009.jpg 1280w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0009-300x135.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0009-1024x461.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0009-768x346.jpg 768w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p>इसके बाद महाराज जी नें पवित्र महारास का वर्णन किया है और जब भगवान नें अपनी बंशी बजाई है तब सभी गोपियां जो जिस अवस्था में थी उसी अवस्था में भगवान से मिलने के लिये अपने घर से निकल पड़ी। और इस महारास का दर्शन करने भगवान शंकर भी माता पार्वती के संग आये थे।</p>
<p>अब कंस नें अक्रूर जी के माध्यम से मल्ल युद्ध के बहाने भगवान कृष्ण और बलराम को मथुरा बुलवाया। सभी गोपियां व माँ यशोदा भगवान के मथुरा जानें की सूचना पाकर विरह में व्याकुल हो गयीं भगवान नन्दबाबा और ग्वालों के साथ मथुरा आये। और यहां भगवान कृष्ण ने कंस का वध किया। और मथुरा के सभी असुरों का नाश किया है इसके पश्चात राजा उग्रसेन को मथुरा का राज्य सौंपा। और नन्द बाबा को विदा किया।और भगवान ने बलराम के साथ गुरुकुल में जाकर शिक्षा लिया।भगवान ने</p>
<p>उद्धव जी को गोकुल भेजकर गोकुल वासियों व गोपियों का हाल जाना है जरासंध आदि राक्षसों का आतंक बढ़ने के कारण भगवान नें द्वारिकापुरी का निर्माण कर समस्त प्रजा सहित द्वारिका को चले गये।कथा शुरुआत से पूर्व यजमान अर्चना सिंह कृष्ण कुमार सिंह ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ आरती पूजन किया। संचालन धर्मेश मिश्रा ने किया।</p>
<p><strong>इनकी रही मौजूदगी<img decoding="async" class="alignnone wp-image-25038 size-large" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0011-1024x461.jpg" alt="" width="640" height="288" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0011-1024x461.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0011-300x135.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0011-768x346.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0011.jpg 1280w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></strong></p>
<p>इस मौके पर राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह,कुंवर मृगांकेश्वर शरण सिंह, उत्कर्ष शरण सिंह,मुकेश सिंह,दिनेश रावत विधायक हैदरगढ़,विवेक विक्रम सिंह,लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता रमेश चंद्र, हीरामणि पटेल, दिलीप गंगवार,हरिनाथ यादव, मनीष सिंह, इंद्रजीत सिंह,कृषि वैज्ञानिक डा लाल पंकज सिंह, दलजीत सिंह,नितेश यादव, सौरभ सिंह, मोहन लाल मौर्य, शिवांशु मिश्रा, सुशील सिंह, करुणा शंकर, गंगा विभूति सहित हजारों की संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।</p>
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		<item>
		<title>Religion &#8211; Spirituality : ‘‘रामायण मानव मन के संशय दूर करती है।’’ -स्वामी अभयानंद सरस्वती</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 15:54:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[religion]]></category>
		<category><![CDATA[spirituality]]></category>
		<category><![CDATA[मन]]></category>
		<category><![CDATA[मानव]]></category>
		<category><![CDATA[रामायण]]></category>
		<category><![CDATA[संशय]]></category>
		<category><![CDATA[स्वामी अभयानंद सरस्वती]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; रिपोर्ट- अमित चावला लखनऊ, उप्र। चांसलर क्लब आशियाना में हो रही ‘‘रामकथा’’ के पहले...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><span style="color: #ff0000"><strong>रिपोर्ट- अमित चावला</strong></span></h3>
<h3><strong>लखनऊ, उप्र।</strong></h3>
<p>चांसलर क्लब आशियाना में हो रही ‘‘रामकथा’’ के पहले दिन महामण्डलेश्रवर स्वामी अभयानंद सरस्वती जी ने कहा सनातन शास्त्रों ने लोक कल्याण के लिए जीवन दृष्टि दी है। जैसे श्रीमद्भगवतगीता, जीवन जीने की कला सिखाती है। श्रीमद् भागवत महापुराण मरने की कला सिखाती है। उसी प्रकार श्री रामचरित मानस संशय दूर करने की कला सिखाती है।</p>
<p>सत्य सनातन सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में राम कथा के किष्किंधा कांड को स्वामी ने मानस का हृदय है। तीन कांड पहले और तीन कांड बाद में उनके मध्य में है किष्किंधा कांड। जैसे मनुष्य के शरीर में हृदय मध्य में होता है उसी प्रकार किष्किंधा कांड मानस का हृदय है।</p>
<p>कथा के आयोजन कर्ता अनुराग गुप्ता ने बताया कि कथा रोज सायं 4ः00 बजे से 6ः00 बजे तक 14 सितम्बर तक होगी। आज का व्यास पूजन आलोक गुप्ता, सीमा गुप्ता, अनुराग गुप्ता, संध्या गुप्ता, अर्चना गुप्ता और गुड्डन गुप्ता ने किया। इस अवसर पर त्रिवेणी अलमीरा के अध्यक्ष वरूण तिवारी जी भी उपस्थित थे।</p>
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		<title>SPIRITUALITY : आत्म सुख ही सबसे बड़ा सुख है-शांतनु ज़ी महराज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 15 May 2025 03:42:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[spirituality]]></category>
		<category><![CDATA[आत्म सुख]]></category>
		<category><![CDATA[आध्यात्मिक]]></category>
		<category><![CDATA[शांतनु ज़ी महराज]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीमदभागवत कथा]]></category>
		<category><![CDATA[सुख]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY LOK REPORTER AMETHI NEWS। आत्म सुख ही सबसे बड़ा सुख है और वह...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY LOK REPORTER</strong></span></p>
<p><em><strong>AMETHI NEWS।</strong></em></p>
<p>आत्म सुख ही सबसे बड़ा सुख है और वह हमारे भीतर ही है बस हम उसका अनुभव नहीं कर पा रहे हैं। सुख की खान भगवान ही हैं इसलिये उनसे ही नाता जोड़ना होगा&#8217;।यह उद्गार सुप्रसिद्ध कथा वाचक आचार्य शांतनु महराज ने जामो क्षेत्र के लालपुर गांव में उत्तर प्रदेश पूर्वांचल बोर्ड के सदस्य विजय विक्रम सिंह के यहाँ चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन की कथा में श्रोताओं को कथा सुनते हुए व्यक्त किए।</p>
<p>आचार्य शांतनु ने  कहा कि राजा परीक्षित नेशुकदेव महराज से पूछा कि मरने वाले मनुष्य को क्या करना चाहिये तो शुकदेव जी ने कहा कि उन्ही गोविन्द के पदकमलों का ध्यान करो गोविन्द ही इस कलिकाल से मुक्ति दे सकते हैं। इसके बाद आचार्य ने सृष्टि की प्रक्रिया की चर्चा करते हुए कहा कि सृष्टि के आदि दम्पति मनु और शतरूपा की रोचक कथा सुनाई। इसके बाद भगवान के वाराह अवतार की कथा सुनाई।</p>
<p>देवहूति मॉ और कर्दम मुनि की कथा सुनाई जिनके यहाँ भगवान कपिल का जन्म हुआ जिन्होनें सांख्य शास्त्र का उपदेश दिया और अपनी माँ देवहूति  को भी उपदेशित किया। जिसे श्रीमद्भागवत में कपिल अध्यायी कहते हैं उन्होंने कहा कि कपिल भगवान कहते हैं कि आत्मा की तृप्ति सांसारिक संसाधनो से नही होती आत्मा की तृप्ति के लिये उसे पूर्ण परमात्मा में लगाना पड़ता है।कथा व्यास ने कहा ऐसे लोगों का संग करो जिनका मन भगवान के चरणों में लगा हो।<img decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-23239" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/फोटो-01-1024x619.jpg" alt="" width="640" height="387" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/फोटो-01-1024x619.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/फोटो-01-300x181.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/फोटो-01-768x464.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/फोटो-01.jpg 1043w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /> <img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-23240" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/FB_IMG_1747280332112-575x1024.jpg" alt="" width="575" height="1024" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/FB_IMG_1747280332112-575x1024.jpg 575w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/FB_IMG_1747280332112-168x300.jpg 168w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/FB_IMG_1747280332112-768x1367.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/FB_IMG_1747280332112-863x1536.jpg 863w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/FB_IMG_1747280332112-1024x1823.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/FB_IMG_1747280332112.jpg 1080w" sizes="auto, (max-width: 575px) 100vw, 575px" /></p>
<p>सन्तों के लक्षण के बारे में शांतनु जी महराज ने बताया कि जिसके अन्दर धैर्य, करुणा, और सबमें भगवान का दर्शन करता हो वही सन्त है। इसी प्रकार भक्तों के बारे में चर्चा करते हुए कथा व्यास ने कहा कि उत्तम कोटि का भक्त वही है जो कभी भगवान से कुछ नही मांगता इसलिये बस केवल भगवान के चरणों का आश्रय लीजिये इसी में आनंद है।इसके बाद शांतनु जी ने दक्ष प्रजापति और भगवान शंकर और माता सती की कथा सुनाई।</p>
<p>उन्होंने कहा कि दक्ष को बड़ा पद मिलने के कारण उसे अभिमान हो गया और उसने ब्रहमा जी की सभा में भगवान शंकर का अपमान कर दिया इसके बाद भगवान के गणों नें दक्ष को बकरे के मुंह वाला होने का श्राप दे दिया। इसी का बदला लेनें के लिये उसने यज्ञ का आयोजन किया और भगवान शिव को नहीं बुलाया। परन्तु माता सती शिव जी के मना करनें के बाद भी अपने मायके गयी लेकिन यज्ञ में भगवान शिव का अपमान देख उन्हें बहुत क्रोध आया और अपने आप को योग की अग्नि में जलाकर स्वयं को राख कर लिया।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-23238" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/फोटो-03-1024x768.jpg" alt="" width="640" height="480" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/फोटो-03-1024x768.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/फोटो-03-300x225.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/फोटो-03-768x576.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/फोटो-03.jpg 1280w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>सती के दहन को सुनकर भगवान शंकर नें वीरभद्र को प्रकट किया वीरभद्र नें जाकर यज्ञ को विध्वंस करते हुए दक्ष के गर्दन को काटकर यज्ञ कुंड में ही डाल दिया और सम्पूर्ण यज्ञ को नष्ट कर दिया।अन्त में शांतनु जी नें ध्रुव चरित्र सुनाया। ध्रुव की विमाता के दुर्वचनों नें ध्रुव को परमात्मा को प्राप्त करने के लिये मन में लगन लगा दिया।और नारद जी नें आकर भक्त ध्रुव  के वैराग्य की परीक्षा ली।</p>
<p>ध्रुव के परीक्षा में पास होने पर नारद जी नें द्वादश अक्षर का गुरुमन्त्र दिया है और पाँच वर्ष की अवस्था में अत्यन्त कठिन साधना की। और भगवान नें आकर ध्रुव को दर्शन दिया और भगवान के आशीर्वाद से छत्तीस हजार वर्षों के राज्य के बाद अपने ध्रुव लोक को प्रस्थान किया।</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>इन विशिष्ट जनों की रही उपस्थिति</strong></span></p>
<p>आज की कथा में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री शब्द कर्म और ज्ञान की एकरूपता से हिंदुत्व के जागरण और उत्थान के लिए समर्पित परम श्रद्धेय अम्बरीष जी, विधायक गौरीगंज राकेश प्रताप सिंह, करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीर प्रताप सिंह वीरू जी, राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष सनी सिंह जी,ब्लॉक प्रमुख जगदीशपुर राजेश विक्रम सिंह , ब्लॉक प्रमुख तिलोई मुन्ना सिंह, ब्लॉक प्रमुख भादर प्रवीण सिंह , भाजपा अमेठी के वरिष्ठ नेता रविन्द्र सिंह l,भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष कालीबक्स सिंह , भाजपा जिला मंत्री प्रभात शुक्ला जी, जिला पंचायत सदस्य राजेंद्र बहादुर सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रमुख सिंहपुर  अमर बहादुर सिंह पूर्व प्रमुख तिलोई, सुंदर लाल जायसवाल मौजूद रहे।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-23237" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250515-WA0004-776x1024.jpg" alt="" width="640" height="845" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250515-WA0004-776x1024.jpg 776w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250515-WA0004-227x300.jpg 227w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250515-WA0004-768x1013.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250515-WA0004.jpg 970w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>लखनऊ से आये भारत सिंह सचिव मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन, तिरछी कटारी और भड़ास कालम के लेखक वरिष्ठ पत्रकार अनिल कुमार सिंह, डी डी न्यूज के वरिष्ठ पत्रकार  रामेंद्र सिंह, पूर्व विधायक सरेनी अशोक सिंह के सुपुत्र अविनाश सिंह काकू जी सहित हजारों लोगों ने श्रीमद्भागवत कथा को श्रवण कर जीवन को कृतार्थ किया।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>Business and Spirituality : व्यवसाय और आध्यात्मिकता को जोड़कर सफलता का नया मार्ग दिखाने की दिशा में अग्रसर : माइंड ट्रेनर देवीदास श्रवण नाइकरे</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/23092</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Apr 2025 15:47:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; REPORT BY KALI DAS PANDEY MUMBAI NEWS। देवीदास ग्रुप ऑफ़ कंपनी के निदेशक और...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000">REPORT BY KALI DAS PANDEY</span></strong></p>
<p><em><strong>MUMBAI NEWS।</strong></em></p>
<p>देवीदास ग्रुप ऑफ़ कंपनी के निदेशक और संस्थापक देवीदास श्रवण नाइकरे द्वारा पिछले दिनों प्राकृतिक सौंदर्य से आच्छादित महाराष्ट्र के लोनावाला की मनोहारी वादियों में व्यवसायिक दुनिया से जुड़े पेशेवरों के मार्गदर्शन के लिए चार दिवसीय कार्यशाला &#8216;Ultimate Millionaire Blueprint&#8217; का आयोजन किया गया।</p>
<p>इस कार्यशाला के क्रम में एक भव्य अवॉर्ड समारोह के दौरान महाराष्ट्र के चुनिंदा उद्यमियों को उनके नवाचार, साहसिक दृष्टिकोण और सामाजिक विकास की दिशा में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारतीय फिल्म जगत के मशहूर अभिनेता मुश्ताक खान की उपस्थिति में सम्मानित किया गया। अभिनेता मुश्ताक खान ने सभी विजेताओं को हार्दिक बधाई दी और कहा, &#8220;यह पुरस्कार आपकी मेहनत और सोच का प्रतीक है&#8230; आगे बढ़ते रहिए..।&#8221;</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में देवीदास ग्रुप ऑफ़ कंपनी के निदेशक और संस्थापक देवीदास श्रवण नाइकरे ने देश के अन्य उद्यमियों को अपने ऑनलाइन मंच www.devidasnaikare.in से जुड़ने का आह्वान करते हुए संदेश दिया &#8220;जब आपके अंदर विश्वास, आपकी सोच में स्पष्टता, और आपके कर्मों में समर्पण हो, तो कोई भी सीमा आपको रोक नहीं सकती।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-23093 size-full" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0023.jpg" alt="" width="718" height="474" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0023.jpg 718w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0023-300x198.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 718px) 100vw, 718px" /></p>
<p>विदित हो कि देवीदास ग्रुप ऑफ कंपनी एक व्यावसायिक निगम है जिसमें विभिन्न उद्यम शामिल हैं, जैसे कि सिटीधन कैपिटल, नैपर शॉप, वेदांत ट्रेनिंग एकेडमी, एस. एम. सर्विसेज, डी. के फाउंडेशन, देवीदास पब्लिकेशन्स, ऑल-इन-वन सर्विसेज, डिजिटल शॉप, इंस्टीट्यूट ऑफ़ बिज़नेस मैनेजमेंट और देवीदास करियर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट।</p>
<p>इनमें से प्रत्येक उद्यम देश की जनता को अलग-अलग सेवाएँ और समाधान प्रदान कर रहा है। देवीदास ग्रुप ऑफ़ कंपनी के संस्थापक निदेशक श्री देवीदास श्रवण नाइकरे भारत के पहले आध्यात्मिक बिजनेस कोच और माइंड ट्रेनर हैं और उन्होंने देश के उद्यमियों को प्रेरित करने के लिए दो भाषा इंग्लिश और हिंदी में भारत में पहली बार &#8216;साहस&#8217; विषय पर 12 प्रेरणादायक पुस्तकें लिखी हैं, जो हजारों युवाओं और उद्यमियों को आत्म-विकास और सफलता की राह दिखा रही हैं।</p>
<p>माइंड ट्रेनिंग और सशक्तिकरण पहल के साथ भारत में क्रांति लाने की दिशा में अग्रसर  देवीदास श्रवण नाइकरे को यंग एंटरप्रेन्योर 2022, महाराष्ट्र बिजनेस आइकन अवार्ड 2023, इंस्पायरिंग लीडर अवार्ड 2023, पुणे एंटरप्रेन्योर और श्री महात्मा गांधी राष्ट्रीय सम्मान अवार्ड 2023 जैसे 30 से अधिक राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। देवीदास ग्रुप ऑफ कंपनी का मिशन आत्म-प्रचार की सीमाओं से कहीं आगे तक फैला हुआ है। कंपनी ने 2028 तक भारत में 5,000 मजबूत उद्यमी बनाने का लक्ष्य रखा है।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-23094 size-full" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0022.jpg" alt="" width="606" height="472" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0022.jpg 606w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0022-300x234.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 606px) 100vw, 606px" /></p>
<p>देवीदास श्रवण नाइकरे व्यवसायिक दुनिया में आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए जाने जाते हैं।उनकी शिक्षाओं का मुख्य बिंदु है, साधारण व्यक्तियों को असाधारण पेशेवरों में बदलना, जिसमें ध्यान, माइंडफुलनेस और आध्यात्मिक तकनीकों को व्यवसायिक रणनीतियों के साथ एकीकृत किया जाता है।</p>
<p>देवीदास श्रवण नाइकरे का मानना है कि नेक इरादे और कर्म की शक्ति से असंभव भी संभव बन जाता है। सच्ची सफलता केवल धन अर्जित करने में नहीं, बल्कि मानसिक शांति, अच्छा स्वास्थ्य और मजबूत रिश्तों को बनाए रखने में भी है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>RELIGION-SPIRITUALITY :  मंत्र जाप जीवन का श्रृंगार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Sep 2024 05:53:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[religion]]></category>
		<category><![CDATA[spirituality]]></category>
		<category><![CDATA[जाप]]></category>
		<category><![CDATA[जीवन]]></category>
		<category><![CDATA[मंत्र]]></category>
		<category><![CDATA[वैदिक परम्परा]]></category>
		<category><![CDATA[वैदिक मंत्रोच्चारण]]></category>
		<category><![CDATA[श्रृंगार]]></category>
		<category><![CDATA[साधना]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY PRADEEP CHAJER  BORAVER,RAJSTHAN I  मंत्र-जप जीवन का श्रृंगार हैं ।इससे कई रोगों का...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY PRADEEP CHAJER </strong></span></p>
<p><em><strong>BORAVER,RAJSTHAN I </strong></em></p>
<p>मंत्र-जप जीवन का श्रृंगार हैं ।इससे कई रोगों का उपचार होता है ।अश्व सा चंचल मन ,लहरों सा चित्तवन आदि इसे साधने में मंत्र जाप का सहयोग सघन होता है । मंत्रों के प्रयोग हमारी सोयी हुई शक्तियों को जगाते हैं । यह एकाग्रता को सधवाकर , हममें आत्मविश्वास बढ़ाते हैं जो हमें ऊर्जा से भर देते हैं । शुद्ध मंत्रोच्चार से कष्टों का निवारण होता है ।</p>
<p>जब सश्रद्धा सही समय-सही स्थान पर इनका उच्चारण है होता हैं तो मंत्र नाद से वातावरण में निर्मलता आती है ,पवित्रता हर ओर छा जाती है ,<br />
मन को भीतर तक झंकृत कर जाती है ।मंत्र &#8211; जप , मन को साधने का सुन्दर उपक्रम है । इससे जीवन में शुद्ध भावों के योग से सकारात्मक परिवर्तन होता है ।</p>
<p>मन का उपवन मंत्रोच्चार से खिलता है , आध्यात्म की तरंग श्रद्धामय होती है ।जप बहुत तकनीकी विषय है । अति संक्षिप्त में साधारण समझ के लिए हम कह सकते हैं कि किसी निश्चित अवधि व निश्चित उद्देश्य के लिए मंत्रोच्चार जप है । किसी मंत्र या वाक्य का धीरे-धीरे , बार-बार बोल कर या मन ही मन जप किया जाता है ।</p>
<p>जप से मानसिक शक्ति बढ़ सकती है । अगर सविधि इसको किया जाए तो व्यक्ति को मानो उसके अन्दर स्वस्थ व शक्तिशाली परिधि निर्मित हो रही है यह महसूस होता हैं ।व्यक्ति बदलाव चाहता हैं । बदलाव का एक सूत्र हैं नादयोग का प्रयोग । एक शब्द की आवृति करना , उसे बार &#8211; बार दोहराना ।</p>
<p>व्यक्ति जो बनाना चाहता हैं , उसे सामने रखकर उसकी स्मृति करना , ऐसे शब्द को दोहराना । उस शब्द का नाम बन गया &#8211; मंत्र । जप का अर्थ हैं मंत्र की पुनरावृति । वैदिक परंपरा को देखे , जैन अथवा बौद्ध परंपरा को देखे , लौकिक परंपराओं को देखे, सबने मंत्रो का चुनाव किया हैं । भारतीय दर्शनों में मंत्र का बहुत विकास हुआ हैं और वह इसलिए हुआ हैं कि उससे कुछ उपलब्धियां अर्जित की जा सकती हैं ।</p>
<p>जप हमारे आत्म शोधन में बहुत सहयोगी होता है। हम मंत्रों के उच्चारण जप भौतिक उपलब्धि के लिए न करें बल्कि अपनी अंतरात्मा की शक्ति के उद्घाटन के लिए करें हमारी आत्म शुद्धि ही भव शुद्धि है । हमारे शुद्ध भावों का विकास हो जप के द्वारा तभी किये गए जप की सार्थकता है।</p>
<p>हम विवेकपूर्वक जप करें ,हमारे भावों की शुद्धि उसके साथ जुड़ें , तन्मयता हो मंत्र के अक्षर के साथ हमारी , सिर्फ उच्चारण ही न हो,बल्कि जपाजप जाप चलता रहे अंदर ही अंदर। जहां वाणी मौन हो जाती है हमारा तादात्म्य सिर्फ अंतरात्मा के साथ हो ,मन के तार-आत्मा के तार बन जाएं ,ऐसा हो जप।यही हमारे लिए काम्य हैं ।</p>
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		<title>RELIGION SPIRITUALITY : सफर चिंता से तनाव का</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Jun 2024 03:09:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[religion]]></category>
		<category><![CDATA[spirituality]]></category>
		<category><![CDATA[चिंता]]></category>
		<category><![CDATA[डिप्रेशन]]></category>
		<category><![CDATA[तनाव]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म और अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[सफर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>PRESENTED BY PRADEEP CHHAJER  मानव जीवन में चिंता और तनाव साथ चलते है । चिंता...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>PRESENTED BY PRADEEP CHHAJER </strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-thumbnail wp-image-19187" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240617-WA0212-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240617-WA0212-150x150.jpg 150w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240617-WA0212-24x24.jpg 24w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240617-WA0212-48x48.jpg 48w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240617-WA0212-96x96.jpg 96w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240617-WA0212-300x300.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 150px) 100vw, 150px" /></p>
<p>मानव जीवन में चिंता और तनाव साथ चलते है । चिंता व तनाव<br />
इस कारण होते ही हैं कि वर्तमान को छोड़कर मन अतीत या भविष्य पर भटक जाता है। मन की लोभी तृष्णा का कोई अंत नहीं होता।जैसे-जैसे सोचा हुआ हाशिल होता है वैसे-वैसे और नयी चाहत बढ़ने लगती है।जिसका जीवन में कभी अंत ही नहीं होता।जीवन की इस आपा-धापी में जीवन के स्वर्णिम दिन कब बीत जाते हैं उसका हम्हें भान भी नहीं रहता।</p>
<p>आगे जीवन में कभी सपने अधूरे रह गये तो किसी के मुँह से यही निकलता है कि कास अमुक काम मैं अमुक समय कर लेता।उनके लिये बस बचता है तो किसी के कास तो किसी के जीवन में अगर।तृष्णा तो विश्व विजेता सिकंदर की कभी पूरी नहीं हुयी और जब विदा हुआ तो ख़ाली हाथ।इसलिये कर्म ज़रूर करो और जो कुछ प्राप्त हुआ उसमें संतोष करना सीखो।जीवन की इस भागम-भाग में आख़िरी साँस कौन सी होगी वो कोई नहीं जानता।</p>
<p>जिसने जीवन में संतोष करना सीख लिया उसका जीवन आनंदमय बन गया। जब हमारा मन पॉज़िटिव होगा, तब हमें दिव्यता का अनुभव होगा क्योंकि सकारात्मकता वह निर्मलता की निशानी है और मन की निर्मलता, वही परम सुख है।भगवान महावीर ने कहा है कि जो पॉज़िटिव रहेगा वही मोक्ष की ओर आगे बढ़ सकता है, इसलिए नेगेटिविटी से बाहर निकलना अत्यंत आवश्यक है।</p>
<p>अतः एक निराशावादी को हर अवसर में कठिनाई दिखाई देती है एक आशावादी को हर कठिनाई में अवसर दिखाई देता है। अतः हम समझें खतरे ही खतरे घर के बाहर हैं । वर्तमान क्षण ही हमारी चेतना का वास्तविक आधार है अतः रहिए आधिकाधिक इस घर में तो चिंता व तनाव रफू चक्कर हो जाएंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/19183">RELIGION SPIRITUALITY : सफर चिंता से तनाव का</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
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		<title>Spirit to live&#8230;&#8230;..जीने का जज्बा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Mar 2023 04:11:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[life]]></category>
		<category><![CDATA[religion]]></category>
		<category><![CDATA[spirit to live]]></category>
		<category><![CDATA[spirituality]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उम्र का कोई भी पड़ाव हो हर समय हमको जीने का जज़्बा रखना चाहिये ।...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/9889">Spirit to live&#8230;&#8230;..जीने का जज्बा</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>उम्र का कोई भी पड़ाव हो हर समय हमको जीने का जज़्बा रखना चाहिये । कहते है की जिसने जीने का जज्बा(<span class="Y2IQFc" lang="en">spirit to live) </span>खो दिया मानो उसने अपना जीवन खो दिया । आत्मा का रूप है न रंग है ! ये तो महसूस करने का जज़्बा है ! कोशिश हर किसीकी है कि हर वो चीज़ हासिल करलूँ अपने प्रयास से मिलेगी ख़ुशी !सुख ! मन चाही !पर जाने क्यूँ फिर भी कुछ कमी सी है लगती</p>
<p>। आज के समय , सभी के लियें सबसे ज्यादा जरूरी हैं की बाहर से ज्यादा हम भीतर से मजबूत बने क्यूँकी भीतर की मजबूती हमें कभी भी किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होने देती आज के समय , सभी के लियें सबसे ज्यादा जरूरी हैं की बाहर से ज्यादा हम भीतर से मजबूत बने क्यूँकी भीतर की मजबूती हमें कभी भी किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होने देती है ।</p>
<p>हमारे में अगर आत्मविश्वास,दृढ़मनोबल,प्रामाणिकता आदि है तो हमे अपने जीवन के व जीने के जज्बे का मज़बूत लक्ष्यों पर स्थिर रहने में सहायक बनती है। इसलिए जीवन जीने का सकारात्मक सही जज़्बा हमेशा लगातार क़ायम रहे जीवन में आत्मविश्वास के साथ । स्वयं स्फूर्त चेतना ही अपने गंतव्य पथ पर अविराम गतिमान बनी रहती है। जल की प्रचंड तेजधार ही हर बाधा को चीर कर अंतिम सांस तक बहती है।</p>
<p>जब उद्देश्य केवल सात्विक, पारमार्थिक तथा सबजन हिताय के साथ जीने के जज्बा का होता है तब ही उस उत्साह की पवित्र श्रम बूंदे ,महोत्सव की गौरव गाथा कहती है। जीवन(Life)का भरपूर आनंद हर हाल में हर जगह में होगा यदि उत्साह की गाड़ी में सवार है। कहने को तो स्वर्ग भी हताश से भरा है पर जहाँ जोश है हौंसला है वह धरा भी स्वर्ग से कम नही। तभी तो टूटते नहीं मुसीबतों में यही अपनी पहचान है।हिलते नहीं हवाओं से हम तो एक चट्टान है।</p>
<p>बर्फ नहीं जो दो पल में पिघलने कि हमें आदत है।जज्बे से हर वक्त को बदलने कि हमें आदत है।हम ख़ुद को मजबूत माने और विकट परिस्थिति में भी नहीं हारे बल्कि और ताकत से लड़ते हुए जीत जाए । बस यही उत्साह सदा जीने के जज्बा का बना रहे |<br />
<span style="color: #ffcc00"><strong>प्रदीप छाजेड़</strong></span><br />
<span style="color: #ffcc00"><strong>( बोरावड़</strong></span> )</p>
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