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	<title>Literature Archives - Lok Dastak</title>
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	<description>Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak</description>
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	<title>Literature Archives - Lok Dastak</title>
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		<title>Literature : समकालीन हिंदी कथा साहित्य में रेणु गुप्ता की सशक्त लेखनी</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/25462</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 15:17:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[Literature]]></category>
		<category><![CDATA[कथा]]></category>
		<category><![CDATA[रेणु गुप्ता]]></category>
		<category><![CDATA[समकालीन]]></category>
		<category><![CDATA[सशक्त लेखनी]]></category>
		<category><![CDATA[हिंदी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; प्रस्तुति- कपिलदेव सिंह (वरिष्ठ पत्रकार) रेणु गुप्ता समकालीन हिंदी कथा साहित्य की एक संवेदनशील...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h2><span style="color: #ff0000"><strong>प्रस्तुति- कपिलदेव सिंह (वरिष्ठ पत्रकार)</strong></span></h2>
<p>रेणु गुप्ता समकालीन हिंदी कथा साहित्य की एक संवेदनशील और सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनकी लेखनी जीवन के यथार्थ से उपजी हुई है, जिसमें स्त्री-मन की जटिलताओं, सामाजिक विसंगतियों और मानवीय संवेदनाओं का सूक्ष्म चित्रण मिलता है। सरल भाषा, प्रभावी शिल्प और गहरे भावबोध के कारण उनकी कहानियाँ पाठक के मन को सहज ही छू जाती हैं।</p>
<p>रेणु गुप्ता का कथा साहित्य समाज के उन अनकहे सचों को स्वर देता है, जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। उनके लेखन में संवेदना के साथ-साथ विचार की स्पष्टता दिखाई देती है, जो पाठक को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है। यही कारण है कि उनका रचनाकर्म आधुनिक हिंदी साहित्य में अपनी अलग पहचान बनाता है।</p>
<h3><span style="color: #993300"><strong>रेणु गुप्ता का परिचय&#8230;.</strong></span></h3>
<p>लेखिका कथा साहित्य | लेख |</p>
<p>सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापिका, वॉरेन अकादमी, जयपुर</p>
<p>शिक्षा &#8211; बी.एससी., एम.ए.(अंग्रेज़ी), बी.एड., सी.लिब.</p>
<p>संप्रति &#8211; स्वतंत्र लेखन</p>
<p>लेखन विधा &#8211; कहानी, लेख, लघुकथा, लघु कथा, व्यंग्य, ब्लॉग, उपन्यास, वेब सीरीज़ आदि।</p>
<p><strong>प्रकाशित साहित्य-</strong></p>
<p>• लघुकथा संकलन: ‘आधा है चंद्रमा’ (सन 2023)</p>
<p>• उपन्यास: ‘अंजुरी भर नेह’ (सन 2024)</p>
<p>• कहानी संकलन: ‘कैसी पहेली ज़िंदगानी’ (सन 2025)</p>
<p>• ई बुक: (लंबी कहानी): ‘एहसास –ए –जुनून’ (9,000 शब्द) अमेज़ॉन पर स्वप्रकाशित।</p>
<p>• प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में लघुकथा, लेख और कहानियाँ: ‘मधुमती’ (राजस्थान साहित्य अकादमी), ‘हरिगंधा’ (हरियाणा साहित्य अकादमी), ‘राजस्थान पत्रिका’, ‘पंजाब केसरी’, ‘अमर उजाला’, ‘लघुकथा वृत’, ‘वनिता’, ‘सांध्य टाइम्स’, ‘लोकमित्र’, ‘स्वदेश’, ‘कलम हस्ताक्षर’, ‘संपर्क भाषा भारती’, ‘सरस्वती सुमन’, ’नेशनल एक्सप्रेस, ‘नवभारत’, ‘ट्यूलिप टुडे’, ‘पलाश’, ‘लघुकथा कलश’, ‘लोकमत समाचार’, ‘ग्वालियर किरण,’ ‘सरिता’, ‘मुक्ता’, ‘गृहशोभा’, ‘मेरी सहेली’, ‘मेरी निहारिका’, ‘पूर्वांचल प्रहरी’, ‘साहित्य सांदीपनि’, ‘जन टाइम्स’, ‘जागरण सखी’ में लगभग तीन सौ कहानियों, लघुकथाओं तथा लेखों का प्रकाशन</p>
<p>• साझा संकलन (लघुकथा एवं कहानियाँ):</p>
<p>‘संरचना’, ‘समय की दस्तक’, ‘बाल मन की लघुकथाएँ’, ‘रजत शृंखला लघुकथा संकलन’, ‘रत्नावली’, ‘मनमुक्ता’, ‘खाकीधारी’, ‘मानवता की लड़ाई’, ‘मां’, ‘दीया तले अंधेरा,’ ‘बूंद में सागर,’ ‘अदहने क आखर,’ ‘दमकते लम्हे’, ‘स्वरांजलि’, ‘मुट्ठी में जुगनू’, ‘21वीं सदी की लघुकथाएँ’, ‘बसंत आने को है’ आदि</p>
<p>• ई लघुकथा संकलन: ‘हिंदी के प्रमुख लघुकथाकार’ एवं ‘एक लेखक की ग्यारह लघुकथाएँ’ शृंखला के अंतर्गत ई–लघुकथा संकलन में कुछ लघुकथाएँ</p>
<p>• वेब पोर्टल:</p>
<p>नेट पर कई पोर्टल यथा स्टोरीमिरर, मातृभारती पर लघुकथाएँ एवं कहानियां प्रकाशित।</p>
<p>• ई-पत्रिका: dusbus.com पर एक सौ सत्तावन लेखों एवं कहानियों का प्रकाशन।</p>
<p>• 20 मार्च, 2022 को विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी, मुंबई द्वारा आज़ादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत ‘एक चिड़िया, अनेक चिड़ियाँ’ कार्यक्रम में मेरी एक लघुकथा का वाचन हुआ।</p>
<p>• वार्ता एवं कहानियाँ:</p>
<p>अनेक वार्ताएं आकाशवाणी, गुवाहाटी से प्रसारित।</p>
<p>अनेक कहानियाँ. आकाशवाणी जयपुर अजमेर के आमेर चैनल से प्रसारित</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>लेखिका को मिले सम्मान :</strong></span></p>
<p>Ø एकल लघुकथा संग्रह- ‘आधा है चंद्रमा’ हेतु:</p>
<p>• हिन्दी गौरव सम्मान 2023 (साहित्य अर्पण मंच द्वारा)</p>
<p>• लघुकथा श्री सम्मान-2023 (लघुकथा शोध केंद्र, समिति भोपाल द्वारा)</p>
<p>• श्रीमती देवकी सूर्यवंशी स्मृति सम्मान 2024 (साहित्य अर्चन मंच, नागपूर द्वारा)</p>
<p>• माँ राजपती देवी स्मृति साहित्य सम्मान 2024</p>
<p>Ø उपन्यास ‘अंजुरी भर नेह’ हेतु</p>
<p>• कादंबरी सम्मान-स्वर्गीय राजेश दुबे पुरस्कार-2024 ( संस्कारधानी, जबलपुर की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था कादंबरी द्वारा)</p>
<p>• शब्द श्री सम्मान 2025</p>
<p>• लोकरंजन सम्मान (श्रेष्ठ श्रेणी)</p>
<p><strong>कहानी हेतु:</strong></p>
<p>• शब्द निष्ठा पुरस्कार-2024 (आचार्य रत्न लाल ‘विद्यानुग’ स्मृति अखिल भारतीय कहानी प्रतियोगिता- 2024 में)</p>
<p><strong>लघुकथा हेतु:</strong></p>
<p>• लघुकथा श्री सम्मान-2019 (लघुकथा के क्षेत्र में मेरे योगदान हेतु)</p>
<p>• प्रथम पुरस्कार (कथा दर्पण साहित्य मंच द्वारा आयोजित श्री कमल चंद वर्मा स्मृति राष्ट्रीय लघुकथा लेखन त्रैमासिक प्रतियोगिता क्र. 42 के अंतर्गत)</p>
<p><strong>संपर्क: ईमेल: renugupta2066@gmail.com</strong></p>
<p><strong> फ़ेसबुक: facebook.com\renu.gupta.1276</strong></p>
<p><strong>इंस्टाग्राम: @renu.gupta.1276</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
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		<item>
		<title>Literature : वर्तमान पीढ़ी को बेहतर करने की प्रेरणा देता है इतिहास &#8212; डॉ. अंगद सिंह निशीथ</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/25410</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Jan 2026 04:01:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[Literature]]></category>
		<category><![CDATA[इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ. अंगद सिंह निशीथ]]></category>
		<category><![CDATA[पुस्तक विमोचन]]></category>
		<category><![CDATA[प्रेरणा]]></category>
		<category><![CDATA[वर्तमान पीढ़ी]]></category>
		<category><![CDATA[स्वतंत्रता संग्राम]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; रिपोर्ट &#8211; लोक संवाददाता  अमेठी/नई दिल्ली। किसी भी देश-समाज का इतिहास, उसका आईना होता...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><span style="color: #ff0000"><strong>रिपोर्ट &#8211; लोक संवाददाता </strong></span></h3>
<h3><strong>अमेठी/नई दिल्ली।</strong></h3>
<p>किसी भी देश-समाज का इतिहास, उसका आईना होता है, जिससे वर्तमान पीढ़ी को कुछ अच्छा करने की प्रेरणा मिलती है।</p>
<p>यह बात अमेठी के सांसद किशोरी लाल शर्मा ने ‘उत्तर प्रदेश का स्वतंत्रता संग्राम-अमेठी’ पुस्तक का लोकार्पण करते हुए कही। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में आहुति देने वाले सभी सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित किया।</p>
<p>उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ एवं वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित पुस्तक का लोकार्पण कार्यक्रम भारत मण्डप्म, प्रगति मैदान नई दिल्ली में वाणी प्रकाशन द्वारा आयोजित एक भव्य समारोह में संपन्न हुआ।</p>
<p>इस अवसर पर अमेठी के सांसद श्री किशोरी लाल शर्मा ने अमेठी संसदीय क्षेत्र से जुड़े अपने विभिन्न अनुभवों भी साझा किया। आज़ादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में लिखित इस पुस्तक के लेखक एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ.राकेश पांडेय ने पुस्तक लेखन संबंधी तथ्यों के संकलन हेतु विभिन्न पुस्तकालयों की पुस्तकों, संग्रहालय एवं गजेटियर आदि से प्राप्त सामग्री पर विस्तृत प्रकाश डाला।</p>
<p>लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में अवकाश प्राप्त प्रोफेसर अंगद सिंह ने पुस्तक की गुणवत्ता की तारीफ़ करते हुए कहा कि इतिहास लेखन तथ्यों पर आधारित होता है और इतिहास लेखन हेतु तथ्य संकलन एक कठिन कार्य है। उन्होने पुस्तक में वर्णित विभिन्न पक्षों की चर्चा करते हुए आज़ादी के संग्राम और इसमें सर्वस्व न्योछावर करने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दोहराया कि शहीदों की ‘चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाक़ी निशाँ होगा’..।</p>
<p>डॉ. सिंह ने अमेठी जनपद के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए, अमेरिकन क्रांति, फ़्रांसीसी क्रांति, रूसी क्रांति और चीन की क्राँतियों का भी ज़िक्र किया, जहाँ से हमें उपनिवेशवाद एवं गुलामी से मुक्ति संदेश के साथ ही स्वतन्त्रता, समानता और बंधुत्व का व्यापक संदेश प्राप्त हुआ।<img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone wp-image-25411 size-large" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260116-WA0001-1024x711.jpg" alt="" width="640" height="444" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260116-WA0001-1024x711.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260116-WA0001-300x208.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260116-WA0001-768x533.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260116-WA0001.jpg 1280w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>उक्त महत्वपूर्ण कार्यक्रम में सूत्रधार एवं संचालक प्रख्यात साहित्यकार डॉ. ओम निश्चल ने वर्तमान समाज में डॉ. राकेश पाण्डेय द्वारा लिखित पुस्तक की उपादेयता की विशेष ढंग से चर्चा की और साथ ही अवधी के विख्यात कवि जमुई खाँ आजाद द्वारा शहीदों के सम्मान में रचित महत्वपूर्ण रचना ‘फूल टूटी जवान वतन के बरे,शीश चरणन मा मैया झुकावत रहब’ का सस्वर पाठ किया।</p>
<p>इस अवसर पर वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली के संचालक अरुण माहेश्वरी ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया और आभार प्रदर्शन किया इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से पधारे विद्वान श्रोताओं का समूह उपस्थित रहा।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<item>
		<title>Historical Facts In Literature : कबीर के दोहे में साबुन: साहित्य और इतिहास का अद्भुत संगम</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/24177</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 Aug 2025 17:20:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[Facts]]></category>
		<category><![CDATA[Historical]]></category>
		<category><![CDATA[Literature]]></category>
		<category><![CDATA[अद्भुत]]></category>
		<category><![CDATA[इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[कबीर के दोहे]]></category>
		<category><![CDATA[संगम]]></category>
		<category><![CDATA[साबुन]]></category>
		<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; PRESENTED BY VIVEKANAND SINGH कबीरदास के दोहे केवल आध्यात्मिक ज्ञान और जीवन दर्शन के...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>PRESENTED BY VIVEKANAND SINGH</strong></span></p>
<p>कबीरदास के दोहे केवल आध्यात्मिक ज्ञान और जीवन दर्शन के प्रतीक नहीं, बल्कि अपने समय के सामाजिक, सांस्कृतिक और भौतिक जीवन के साक्षी भी हैं। कुछ दिनों पहले सारण ज़िला के मढ़ौरा निवासी सिद्धेश सिंह जी से बातचीत के दौरान यह रोचक तथ्य सामने आया कि प्रसिद्ध दोहा &#8220;निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय&#8221; में कबीर ने उदाहरण स्वरूप “साबुन” का उल्लेख किया है।</p>
<p>यह संदर्भ न केवल लोकभाषा में प्रचलित वस्तुओं की उपस्थिति को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि उस दौर में साबुन का ज्ञान और उसका प्रयोग समाज में प्रचलित था। इतिहास और साहित्य की यह अनूठी संगति, भारतीय जीवन के बहुआयामी स्वरूप पर नई रोशनी डालती है।</p>
<p>कुछ दिनों पहले सारण जिला के मढ़ौरा निवासी, सिद्धेश सिंहजी ने बात की बात में कबीरदास के दोहा, &#8216;निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय&#8230;</p>
<p>कुछ दिनों पहले सारण जिला के मढ़ौरा निवासी, सिद्धेश सिंहजी ने बात की बात में कबीरदास के दोहा, &#8216;निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय। बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।&#8217; का ज़िक्र किया और पूछा कि कबीरदास का निधन कब हुआ था?, मैने बताया कि 1518 में, तब उन्होंने पूछा कि भारत में साबुन 1897 में आया तो फिर कबीरदास ने 1518 के पहले लिखे गए अपने दोहा में साबुन शब्द का ज़िक्र कैसे कर दिया?</p>
<p>प्रश्न वाकई पेंचदार था, जिसका उत्तर पुराभिलेखों के साथ ही डॉ. विनुप्रिया सक्करवर्ती, सहायक प्रोफेसर, त्वचाविज्ञान विभाग (एम्स, मदुरै) के एक लेख में मिला।वर्तमान समय में शरीर को स्वच्छ करने, कपड़े धोने और अन्य साफ़सफ़ाई के कार्यों के लिए प्रयुक्त होनेवाले साबुन की उत्पत्ति लगभग 2800 ईसापूर्व में प्राचीन मेसोपोटामिया के बेबीलोन (जिसका खण्डहर इराक के बगदाद से लगभग 80 किमी दूर हिल्ला शहर के निकट स्थित है) में हुई थी, उन दिनों साबुन पशुओं की चर्बी या वनस्पति तेलों को क्षारीय पदार्थों के साथ मिलाकर बनाया जाता था।</p>
<p>सोप (sope), यानी साबुन का सबसे पहला उल्लेख रोमन विद्वान्, प्लिनी द एल्डर की 37 खण्डों में प्रकाशित विश्वकोश, नेचुरल हिस्ट्री, जो सन् 77 में लिखी गई थी, के खण्ड आठ में उपलब्ध है; स्वाभाविकरुप से उन दिनों साबुन वैसा नहीं रहा होगा, जैसा आज है। कालान्तर में इटली, स्पेन, फ्रांस, इंग्लैण्ड और यूरोप के अन्य देशों में साबुन का उत्पादन होने लगा, जिसमें स्थानीय तेलों यथा &#8211; जैतून का तेल, ताड़ या नारियल के तेल का प्रयोग किया जाता था।</p>
<p>विवरण हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड द्वारा 1888 की गर्मियों में, कोलकाता बंदरगाह पर आने वाले पर्यटकों ने सनलाइट साबुन की टिकियों से भरे टोकरे देखे, जिन पर &#8220;लीवर ब्रदर्स द्वारा इंग्लैंड में निर्मित&#8221; लिखा हुआ था। इसके बाद 1895 में लाइफबॉय बाज़ार में आया। तत्पश्चात नॉर्थ-वेस्टर्न प्रोविंसेस (अब उत्तर प्रदेश) के मेरठ में 1897 में नॉर्थ-वेस्ट सोप कम्पनी द्वारा भारत का पहला साबुन फ़ैक्टरी स्थापित किया गया।</p>
<p>एच. आर. मचीराजू की पुस्तक मर्चेंट बैंकिंग, प्रिंसिपल्स एण्ड प्रैक्टिस के विवरणानुसार सर दोराबजी टाटा ने कोच्चि में 10 दिसम्बर, 1917 को द टाटा ऑयल मिल्स कम्पनी लिमिटेड की स्थापना की, जहाँ साबुन, डिटर्जेंट, ग्लिसरीन आदि उत्पादों का निर्माण होने लगा। आगे चलकर इस कम्पनी ने पहला स्वदेशी साबुन बाज़ार में उतारा, जिसका नाम ओके था।</p>
<p>12 मई, 2023 को भोपाल समाचार में प्रकाशित एक लेख के अनुसार इतिहासकारों का कहना है कि साबुन, फ़ारसी शब्द है और कबीरदासजी के समय भारत में अरबी एवं फ़ारसी भाषा का प्रचलन था। अतः यह माना जाता है कि कबीरदास ने फ़ारसी शब्द साबुन का उपयोग अपने दोहे में किया है।</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>नोट &#8211; लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तम्भकार हैं। बलिया जिले के मूल निवासी हैं।</strong></span></p>
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