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	<title>Anniversary Archives - Lok Dastak</title>
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	<description>Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak</description>
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	<title>Anniversary Archives - Lok Dastak</title>
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		<title>Bhagat Singh&#8217;s Birth Anniversary : भारत राष्ट्र के क्रांतिनायक भगत सिंह</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Sep 2025 05:48:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>प्रस्तुति &#8211; अरविन्द जयतिलक युवाओं के क्रांतिनायक भगत सिंह के जीवन की अनेक ऐसी बातें...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h2><span style="color: #ff0000"><strong>प्रस्तुति &#8211; अरविन्द जयतिलक</strong></span></h2>
<p><img decoding="async" class="alignnone wp-image-11283 size-thumbnail" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-150x150.jpg 150w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-24x24.jpg 24w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-48x48.jpg 48w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-96x96.jpg 96w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-300x300.jpg 300w" sizes="(max-width: 150px) 100vw, 150px" /></p>
<p>युवाओं के क्रांतिनायक भगत सिंह के जीवन की अनेक ऐसी बातें हैं जो देश के युवाओं को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा से भर देती है। 23 वर्ष की उम्र में ही भगत सिंह ने अपने लेखन और राष्ट्रभक्ति के बरक्स एक ऐसा आंदोलन खड़ा कर दिया जिससे दशकों तक भारत की युवा पीढ़ी प्रेरणा लेती रहेगी। भगत सिंह ने अपनी गरिमामय शहादत और आंदोलित विचारों से देश-दुनिया को संदेश दिया कि क्रांतिकारी आंदोलन के पीछे उनका मकसद अंध राष्ट्रवाद नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की परिकल्पना थी। हालांकि यह त्रासदी है कि आजादी के चार दशक बाद तक भगत सिंह के विचार और उनसे जुड़े दस्तावेज देश के आमजन तक नहीं पहुंच पाए और देश की युवा पीढ़ी उनके आंदोलित व राष्ट्रवादी विचारों से अपरिचित रही।</p>
<p>भगत सिंह के विचारों और क्रांतिकारिता को समझने के लिए जेल के दिनों में उनके लिखे खतों और लेखों को पढ़ना-समझना आवश्यक है। उन खतों और लेखों के माध्यम से समझा जा सकता है कि भगत सिंह रक्तपात के कतई पक्षधर नहीं थे। वे और उनके साथियों ने पुलिस सुपरिटेण्डेंट स्कॉट को निशाना तब बनाया जब 1928 में साइमन कमीशन के बहिष्कार के लिए भयानक प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शन में भाग लेने वाले प्रदर्शनकारियों पर ब्रिटिश हुकुमत ने लाठियां बरसायी जिसमें लाला लाजपत राय बुरी तरह घायल हुए और अंततः मृत्यु को प्राप्त हुए। भगत सिंह समाजवाद और मानववाद के पोषक थे और इसी कारण उन्होंने ब्रिटिश हुकुमत की भारतीयों के प्रति शोषण की नीति का विरोध किया।</p>
<p>भारतीयों के प्रति अत्याचार से उनका विरोध लाजिमी था ठीक उसी तरह जिस तरह एक महान देशभक्त का होता है। भगत सिंह कतई नहीं चाहते थे कि ब्रिटिश संसद से मजदूर विरोधी नीतियां पारित हो। उनकी सोच थी कि अंग्रेजों को पता चलना चाहिए कि हिंदुस्तानी जाग चुके हैं और वे अधिक दिनों तक गुलामी के चंगुल में नहीं रह सकते। उन्होंने अपने विचारों से अंग्रेजों को यह बात समझानी चाही लेकिन अंग्रेज समझने को तैयार नहीं थे। तब उन्होंने अपनी बात उन तक पहुंचाने के लिए 8 अप्रैल, 1929 को अपने साथी क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त से मिलकर ब्रिटिश सरकार की केंद्रीय असेंबली में बम फेंका। उन्होंने यह बम खाली स्थान पर फेंका ताकि किसी को नुकसान न पहुंचे। बम फेंकने के बाद उन्होंने इंकलाब-जिंदाबाद के नारे लगाए और पर्चे फेंके। बम फेंकने का मकसद खून-खराबा करना नहीं था।</p>
<p>उन्होंने कहा भी कि ‘यदि बहरों को सुनना है तो आवाज को बहुत जोरदार होना होगा, जब हमने बम गिराया तो हमारा ध्येय किसी को मारना नहीं था, हमने अंग्रेजी हुकुमत पर बम गिराया था, अंग्रेजों को भारत छोड़ना चाहिए और उसे आजाद करना चाहिए।’ उल्लेखनीय तथ्य यह कि बम गिराने के बाद वे चाहते तो भाग सकते थे लेकिन उन्होंने भागना स्वीकार नहीं किया। बल्कि बहादुरी से गिरफ्तारी दी। सच कहें तो भगत सिंह ने यह साहस दिखाकर अंग्रेजों को समझा दिया कि एक हिंदुस्तानी क्या-क्या कर सकता है। उनका यह साहस दर्शाता है कि वे शांति के पैरोकार थे और हिंसा में उनका विश्वास रंचमात्र भी नहीं था। उन्होंने अपनी क्रांतिकारिता को रेखांकित करते हुए कहा भी है कि ‘जरुरी नहीं था कि क्रांति में अभिशप्त संघर्ष शामिल हो। यह बम और पिस्तौल का पंथ नहीं था।’</p>
<p>भगत सिंह का अहिंसा में कितना अधिक विश्वास था वह इसी से समझा जा सकता है कि एक स्थान पर उन्होंने कहा कि ‘अहिंसा को आत्मबल के सिद्धांत का समर्थन प्राप्त है जिसमें अंततः प्रतिद्वंदी पर जीत की आशा में कष्ट सहा जाता है, लेकिन तब क्या हो जब ये प्रयास अपना लक्ष्य प्राप्त करने में असफल हो जाए? तभी हमें आत्मबल को शारीरिक बल से जोड़ने की जरुरत पड़ती है ताकि हम अत्याचारी और क्रुर दुश्मन के रहमोंकरम पर ना निर्भर करें।’ क्या ऐसे विचार वाले एक महान क्रांतिकारी को हिंसावादी कहना उचित होगा? कतई नहीं। ध्यान देना होगा कि 1919 में जब जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ तो भगत सिंह का खून खौल उठा था। लेकिन उन्होंने हिंसा का रास्ता अख्तियार करने के बजाए महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदालन का समर्थन किया।</p>
<p>जेल में भगत सिंह ने बहुत यातनाएं सही। न तो उन्हें अच्छा खाना दिया जाता था और न ही पहनने को साफ-सुथरे कपड़े दिए जाते थे। उन्हें बुरी तरह पीटा जाता था और गालियां दी जाती थी। लेकिन वे तनिक भी विचलित नहीं हुए। उन्होंने जेल में रहते हुए ही अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंक दिया। भगत सिंह की जनमानस में व्याप्त लोकप्रियता से अंग्रेज इस कदर डरे हुए थे कि 24 मार्च, 1931 को उन्हें फांसी पर लटकाने के बाद उनके मृत शरीर को टुकड़े-टुकड़े कर दिए। उन्हें भय था कि अगर उनके मृत शरीर को उनके परिजनों को सौंपा गया तो देश में क्रांति की ज्चाला भड़क उठेगी जिसे संभालना मुश्किल होगा। भगत सिंह ने क्रांति के बारे में स्पष्ट कहा है कि ‘किसी को क्रांति शब्द की व्याख्या शाब्दिक अर्थ में नहीं करनी चाहिए, जो लोग इस शब्द का उपयोग या दुरुपयोग करते हैं उनके फायदे के हिसाब से इसे अलग-अलग अर्थ और अभिप्राय दिए जाते हैं।’</p>
<p>बिडंबना यह है कि भगत सिंह को कुछ इसी तरह के फ्रेम में फिट कर उनके क्रांतिकारी विचारों की व्याख्या की गयी है जो एक किस्म से उनकी अहिंसक विचारधारा के साथ छल है। बिडंबना यह भी कि इतिहास के पन्नों में भी उनके जीवन और बलिदान को सही रुप में दिखाने के बजाए विकृत करने की कोशिश की गयी। उदाहरण के तौर पर देश के जाने-माने इतिहासकार विपिन चंद्रा और मृदुला मुखर्जी की किताब में शहीद भगत सिंह को कथित रुप से क्रांतिकारी आतंकवादी के तौर पर उद्घृत किया गया है। यह न सिर्फ एक महान क्रांतिकारी का अपमान भर है बल्कि विकृत इतिहास लेखन की परंपरा का एक शर्मनाक बानगी भी है। विकृत इतिहास लेखन की ऐसी शरारतपूर्ण बानगियां इतिहास में और भी दर्ज हैं जिससे भारतीय इतिहास के नायकों की छवि धूमिल हुई है। महान लेखक और राजनीतिज्ञ सिसरो ने इतिहास के बारे में कहा था कि इतिहास समय के व्यतीत होने का साक्षी होता है।</p>
<p>वह वास्तविकताओं को रोशन करता है और स्मृतियों को जिंदा रखता है। देश जानना चाहता है कि औपनिवेशिक गुलामी और शोषण के विरुद्ध आवाज बुलंद करने वाले शहीद-ए-आजम भगत सिंह किस तरह क्रांतिकारी आतंकवादी थे और इतिहास का यह विकृतिकरण किस तरह विद्यार्थियों के लिए पठनीय है। कोई भी इतिहासकार या विचारक अपने युग की उपज होता है। उसकी जिम्मेदारी होती है कि वह अपनी लेखनी से कालखंड की सच्चाई का ईमानदारी से दुनिया के सामने रखे। राष्ट्र को सुपरिचित कराए। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण कि अंग्रेज और मार्क्सवादी इतिहासकार भारतीय इतिहास लेखन की मूल चेतना को समझ नहीं सके और भारतीय इतिहास के सच की हत्या कर दी।</p>
<p>अगर भारतीय इतिहास को भारतीय चेतना व मानस के प्रकाश में लिखा गया होता तो आज भगत सिंह को क्रांतिकारी आतंकवादी या शिवाजी को पहाड़ी चूहिया अथवा चंद्रगुप्त मौर्य की सेना को डाकुओं का गिरोह नहीं कहा जाता। विलियम कैरे, अलेक्जेंडर डफ, जॉन मुअर, और चार्ल्स ग्रांट जैसे इतिहासकारों ने भारत के इतिहास को अंधकारग्रस्त और हिंदू धर्म को पाखंड और झूठ का पर्याय कहा। भारत में अंग्रेजी शिक्षा के जनक और ईसाई धर्म को बढ़ावा देने वाले मैकाले ने तो यहां तक कहा कि भारत और अरब के संपूर्ण साहित्य का मुकाबला करने के लिए एक अच्छे यूरोपिय पुस्तकालय की एक आलमारी ही काफी है।</p>
<p>1834 में भारत के शिक्षा प्रमुख बने लार्ड मैकाले ने भारतीयों को शिक्षा देने के लिए बनायी अपनी नीति के संदर्भ में अपने पिता को एक पत्र लिखा जिसमें कहा कि मेरी बनायी शिक्षा पद्धति से भारत में यदि शिक्षा क्रम चलता रहा तो आगामी 30 वर्षों में एक भी आस्थावान हिंदू नहीं बचेगा। या तो वे ईसाई बन जाएंगे या नाम मात्र के हिंदू रह जाएंगे। समझा जा सकता है कि इतिहास लेखन की आड़ में अंग्रेजी इतिहासकारों और उनसे प्रभावित भारतीय इतिहासकारों के मन में क्या था।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>नोट &#8211; लेखक एक वरिष्ठ स्तम्भकार हैं।</strong></p>
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		<title>Death Anniversary of Vivekananda : भारत के वक्ष पर धड़कता स्वामी जी के विचार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Jul 2025 13:46:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; PRESENTED BY ARVIND JAYTILAK आज स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि है। उन्होंने अपने विचारों...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000">PRESENTED BY ARVIND JAYTILAK</span></strong></p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-thumbnail wp-image-11283" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-150x150.jpg 150w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-24x24.jpg 24w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-48x48.jpg 48w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-96x96.jpg 96w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-300x300.jpg 300w" sizes="(max-width: 150px) 100vw, 150px" /></p>
<p>आज स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि है। उन्होंने अपने विचारों से अतीत के अधिष्ठान पर वर्तमान का और वर्तमान के अधिष्ठान पर भविष्य का बीजारोपण किया। स्वामी जी का उदय ऐसे समय में हुआ जिस समय भारत के सामाजिक पुनरुत्थान के लिए राजाराम मोहन राय और शिक्षा के विकास के लिए ईश्वरचंद विद्यासागर जैसे अनगिनत मनीषी भारतीय समाज में नवचेतना का संचार कर रहे थे। स्वामी जी अपने विचारों के जरिए स्वधर्म और स्वदेश के लिए अप्रतिम प्रेम और स्वाभिमान का उर्जा प्रवाहित कर जाग्रत-शक्ति का संचार किया जिससे भारतीय जन के मन में अपनी ज्ञान, परंपरा, संस्कृति और विरासत का गर्वपूर्ण बोध हुआ। स्वामी जी की दृष्टि में समाज की बुनियादी इकाई मनुष्य था और उसके उत्थान के बिना वे देश व समाज के उत्थान को अधूरा मानते थे।</p>
<p>उनका दृष्टिकोण था कि राष्ट्र का वास्तविक पुनरुद्धार मनुष्य-निर्माण से प्रारंभ होना चाहिए। मनुष्य में शक्ति का संचार होना चाहिए जिससे कि वह मानवीय दुर्बलताओं पर विजय प्राप्त करने में और प्रेम, आत्मसंयम, त्याग, सेवा एवं चरित्र के अपने सद्गुणों के जरिए उठ खड़ा होने का सामर्थ्य जुटा सके। वे सर्वसाधारण जनता की उपेक्षा को एक बड़ा राष्ट्रीय पाप मानते थे। 1893 में शिकागो में धर्म सम्मेलन (पार्लियामेंट आफॅ रिलीजन ) के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि ‘मेरी यह धारणा वेदान्त के इस सत्य पर आधारित है कि विश्व की आत्मा एक और सर्वव्यापी है। पहले रोटी और फिर धर्म। लाखों लोग भूखों मर रहे हैं और हम उनके मस्तिष्क में धर्म ठूंस रहे हैं। मैं ऐसे धर्म और ईश्वर में विश्वास नहीं करता, जो अनाथों के मुंह में एक रोटी का टुकड़ा भी नहीं रख सकता।’</p>
<p>उन्होंने सम्मेलन में उपस्थित अमेरिका और यूरोप के धर्म विचारकों व प्रचारकों को झकझोरते हुए कहा कि ‘भारत की पहली आवश्यकता धर्म नहीं है। वहां इस गिरी हुई हालत में भी धर्म मौजूद हैं। भारत की सच्ची बीमारी भूख है। अगर आप भारत के हितैषी हैं तो उसके लिए धर्म प्रचारक नहीं अन्न भेजिए।’ स्वामी जी गरीबी को सारे अनर्थों की जड़ मानते थे। इसलिए उन्होंने दुनिया को सामाजिक-आर्थिक न्याय और समता-समरसता पर आधारित समाज गढ़ने का संदेश दिया। वे ईश्वर-भक्ति और धर्म-साधना से भी बड़ा काम गरीबों की गरीबी दूर करने को मानते थे। एक पत्र में उन्होंने ने लिखा है कि ‘ईश्वर को कहां ढुंढ़ने चले हो। ये सब गरीब, दुखी और दुर्बल मनुष्य क्या ईश्वर नहीं है? इन्हीं की पूजा पहले क्यों नहीं करते ?’</p>
<p>उन्होंने स्पष्ट घोषणा की थी कि ‘गरीब मेरे मित्र हैं। मैं गरीबों से प्रीती करता हूं। मैं दरिद्रता को आदरपूर्वक अपनाता हूं। गरीबों का उपकार करना ही दया है।’ वे इस बात पर बल देते थे कि हमें भारत को उठाना होगा, गरीबों को भोजन देना होगा और शिक्षा का विस्तार करना होगा। स्वामी जी ने भारत के लोगों को संबोधित करते हुए शिकागो से एक पत्र में लिखा कि याद रखो की देश झोपड़ियों में बसा हुआ है, परंतु शोक! उन लोगों के लिए कभी किसी ने कुछ नहीं किया।’ स्वामी जी गरीबों को लेकर बेहद संवेदनशील थे। उन्होंने गुरु रामकृष्ण परमहंस के स्वर्गारोहण के बाद उनकी स्मृति में ‘रामकृष्ण मिशन’ की स्थापना की। मिशन का उद्देश्य गरीबों, अनाथों, बेबसों और रोगियों की सेवा करना था।</p>
<p>जब उन्होंने मठ के सन्यासियों के समक्ष यह प्रस्ताव रखा तो उनका भारी विरोध हुआ। सन्यासियों ने तर्क दिया कि हम सन्यासियों को ईश्वर की आराधना करना चाहिए न कि दुनियादारी में पड़ना चाहिए। स्वामी जी सन्यासियों के उत्तर से बेहद दुखी हुए। उन्होंने कहा कि आपलोग समझते हैं कि ईश्वर के आगे बैठने से वह प्रसन्न होगा और हाथ पकड़कर स्वर्ग ले जाएगा तो यह भूल है। आंखे खोलकर देखों की तुम्हारे पास कौन है। स्वामी जी ने दरिद्र को दरिद्र नारायण कहा। उन्होंने कहा कि ‘आप अपना शरीर, मन, वचन सब कुछ परोपकार में लगा दो। तुमको पता है ‘मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, अर्थात माता में ईश्वर का दर्शन करो। पिता में ईश्वर का दर्शन करो’ लेकिन मैं कहता हूं ‘दरिद्र देवो भव, मूर्ख देवो भव।</p>
<p>अनपढ़, नादान और पीड़ित को अपना भगवान मानो और जानो कि इन सबकी सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है।’ उनका मानना था कि मानवता के सत्य को पहचानना ही वास्तव में वेदांत है। वेदांत का संदेश है कि यदि आप अपने बांधवों अर्थात साक्षात ईश्वर की पूजा नहीं कर सकते तो उस ईश्वर की पूजा कैसे करोगे जो निराकार है। एक व्याख्यान में स्वामी जी ने कहा कि जब तक लाखों लोग भूखे और अज्ञानी हैं तब तक मैं उस प्रत्येक व्यक्ति को कृतध्न समझता हूं, जो उनके बल पर शिक्षित बना और उनकी ओर ध्यान नहीं देता है। उन्होंने सुझाव दिया कि इन गरीबों, अनपढ़ों, अज्ञानियों एवं दुखियों को ही अपना भगवान मानो। स्मरण रखो, इनकी सेवा ही तुम्हारा परम धर्म है। स्वामी जी आम आदमी के उत्थान के लिए धन का समान वितरण आवश्यक मानते थे।</p>
<p>वे इस बात के विरुद्ध थे कि धन कुछ लोगों के हाथों में केंद्रीत हो। स्वामी जी अंग्रेजों द्वारा भारत के संसाधनों के शोषण से चिंतित थे और भारत की दुर्दशा का इसे एक बड़ा कारण मानते थे। स्वामी जी देश की तरक्की के लिए कषि और उद्योग का विकास चाहते थे। वे अकसर परामर्श देते थे कि रामकृष्ण मिशन जैसी संस्थाओं को निःस्वार्थ भाव से गरीबी से जुझ रहे किसानों की दशा में सुधार लाने वाले कार्यक्रम एवं परियोजनाएं हाथ में लेनी चाहिए। स्वामी जी इस मत के प्रबल हिमायती थे कि भारत का औद्योगिक विकास जापान की तरह विशेषताओं को सुरक्षित रखते हुए होना चाहिए। वे चाहते थे कि देश में स्वदेशी उद्योगों की स्थापना हो। एक बार उन्होंने उद्योगपति जमशेद जी टाटा से पूछा था कि आप थोड़े से फायदे के लिए विदेश से माचिस मंगाकर यहां क्यों बेचते हैं?</p>
<p>स्वामी जी ने सुझाव दिया कि आप देश में ही माचिस की फैक्टरी और शोध संस्थान स्थापित करें। स्वामी जी के सुझाव का परिणाम रहा कि आगे चलकर जमशेद जी टाटा ने ‘टाटा इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन फंडामेंटल साईंसेज’ की स्थापना की। स्वामी जी देश के आर्थिक विकास और नैतिक मूल्यों को एकदूसरे से आबद्ध चाहते थे। उनकी इच्छा थी कि भारत के उच्च शिक्षण संस्थाओं के पाठ्यक्रमों में विज्ञान व प्रौद्योगिकी के साथ वेदांत दर्शन भी समाहित हो। उनकी दृष्टि में वेदांत आधारित जीवन और आर्थिक विकास के बीच गहरा संबंध है। उनका मानना था कि भौतिक विज्ञान केवल लौकिक समृद्धि दे सकता है परंतु अध्यात्म विज्ञान शास्वत जीवन के लिए परम आवश्यक है। आध्यात्मिक विचारों का आदर्श मनुष्य को वास्तविक सुख देता है।</p>
<p>भौतिकवाद की स्पर्धा, असंतुलित महत्वकांक्षा व्यक्ति तथा देश को अंतिम मृत्यु की ओर ले जाती है। स्वामी जी भारत को विकास के मार्ग पर ले जाने के लिए शिक्षा, आत्मसुधार, कल्याण केंद्रीत संगठन और क्रियाशीलता की प्रवृत्ति को आवश्यक मानते थे। स्वामी जी को देश से असीम प्रेम था। शिकागो से वापसी की समुद्री यात्रा के दौरान जब वह 15 जनवरी, 1897 को श्रीलंका का समुद्री किनारे पर पहुंचे और उन्हें बताया गया कि उस तरफ जो नारियल और ताड़-खजूर के पेड़ दिखायी दे रहे हैं वो भारत के हैं, स्वामी जी इतने भावुक हो गए कि जहाज के बोर्ड पर ही मातृभूमि की ओर साष्टांग प्रणाम करने लगे।</p>
<p>स्वामी जी ने तीन भविष्यवाणियां की थी, जिनमें से दो-भारत की स्वतंत्रता और रुस में श्रमिक क्रांति सत्य सिद्ध हो चुकी हैं। स्वामी जी ने तीसरी भविष्यवाणी की है कि भारत एक बार फिर समृद्धि व शक्ति की महान ऊंचाइयों तक उठेगा। स्वामी जी का मातृभूमि से तादातम्य संपूर्ण था। वे स्वयं को ‘घनीभूत भारत’ कहते थे। स्वामी जी की शिष्या भगिनी निवेदिता ने अपनी मातृभूमि से उनके सम्मिलन को अभिव्यक्त करते हुए कहा है कि ‘भारत स्वामी जी का गहनतम अनुराग रहा है, भारत उनके वक्ष पर धड़कता है, भारत उनकी नसों में स्पंदन करता है, भारत उनका दिवास्वप्न है, भारत उनका निशाकल्प है, वे भारत का रक्त-मज्जा से निर्मित साक्षात शरीररुप हैं, वे स्वयं ही भारत हैं।’</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>Anniversary Celebration : के0डी0 पब्लिक स्कूल में हुआ वार्षिकोत्सव का आयोजन </title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Mar 2025 08:25:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY LOK REPORTER AMETHI NEWS। विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी जामों क़स्बा...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY LOK REPORTER</strong></span></p>
<p><span style="color: #000000"><em><strong>AMETHI NEWS।</strong></em></span></p>
<p>विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी जामों क़स्बा स्थित के0डी0 पब्लिक स्कूल में बड़े धूमधाम के साथ वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के नन्हे मुन्ने बच्चों ने मंत्रमुग्ध करने वाली शानदार सांस्कृतिक कार्यकर्मो की प्रस्तुति दी।</p>
<p>वार्षिकोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृष्णा पाण्डेय (किशन ) समाजसेवी एवं विशिष्ट अतिथि बीजेपी मंडल अध्यक्ष अजय द्विवेदी ने फीता काट कर किया। सर्वप्रथम कक्षा 08 की छात्राएं अंशिका, आरुषि, प्रज्ञा व अनु ने माँ सरस्वती, शारदे की वंदना पर नृत्य प्रस्तुत किया।<img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone wp-image-22655 size-large" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250311-WA0010-1024x768.jpg" alt="" width="1024" height="768" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250311-WA0010-1024x768.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250311-WA0010-300x225.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250311-WA0010-768x576.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250311-WA0010.jpg 1280w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p>इस तरह विद्यालय के बच्चों आशुतोष, शिवान्या, दीक्षांत, वैष्णवी ने अपने साथियों के साथ केशरी के लाल.. चुट्टियां कळइयाँ.. मै निकला गड्डी लेकर&#8230;आजा नच ले&#8230;. आदि गानों पर परफार्मेस से मौजूद लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा लुंगी डांस, ड्रामा की शानदार प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के उपरांत गणमान्य लोगों को विद्यालय के प्रबंधक दिलीप कुमार अग्रहरि द्वारा शाल ओढ़ा कर सम्मानित किया।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-22654 size-full" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/FunPic_20250313_134859636.jpg" alt="" width="384" height="307" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/FunPic_20250313_134859636.jpg 384w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/FunPic_20250313_134859636-300x240.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 384px) 100vw, 384px" /></p>
<p>इस अवसर सुरेश अग्रहरि, प्रधानाध्यापिका पूनम अग्रहरि, अमित मिश्र, शिवम द्विवेदी, अखंड प्रताप सिंह,अदिति, कोमल, रितु, कशिश, संगीता दीपक, अश्विनी सहित बड़ी संख्या में अभिभावक गण मौजूद रहे। इस मौके पर विद्यालय में प्ले ग्रुप की कक्षाओं का संचालन की शुरुआत की गई।</p>
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		<title>Anniversary Celebration : वार्षिकोत्सव में अपनी प्रस्तुति से बच्चों ने कर दिया भाव विभोर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Feb 2025 11:12:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अमेठी]]></category>
		<category><![CDATA[उत्‍तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Anniversary]]></category>
		<category><![CDATA[CELEBRATION]]></category>
		<category><![CDATA[प्रस्तुति बच्चों]]></category>
		<category><![CDATA[भाव विभोर]]></category>
		<category><![CDATA[वार्षिकोत्सव]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY LOK REPORTER  AMETHI NEWS। “शिक्षित समाज विकास की रीढ़ है,जिस देश में साक्षरता...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY LOK REPORTER </strong></span></p>
<p><em><strong>AMETHI NEWS।</strong></em></p>
<p>“शिक्षित समाज विकास की रीढ़ है,जिस देश में साक्षरता प्रतिशत अधिक होती है। वह राष्ट्र उतना ही विकसित होता है।जहां पर शिक्षित लोगों की बहुतायत संख्या होती है वहां पर जागरूकता के साथ-साथ विकास की किरणें तेजी से फैलती हैं”यह उदगार खण्ड शिक्षा अधिकारी तिलोई राम किशुन कश्यप ने सेमरौता स्थित ज्ञान दायिनी शिक्षण संस्थान में आयोजित वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए|</p>
<p>कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम प्रधान देवी शरण बाजपेई ने की।।<br />
कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं मुख्य अतिथि ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण करते हुए दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।खण्ड शिक्षा अधिकारी ने कहा कि तिलोई विकास क्षेत्र के इस अति पिछड़े क्षेत्र में शिक्षा की अलख ज्ञान दायिनी शिक्षण संस्थान द्वारा जलाई जा रही है यह आने वाले दिनों में मील का पत्थर साबित होगी।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-22330" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250217-WA0013-768x1024.jpg" alt="" width="640" height="853" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250217-WA0013-768x1024.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250217-WA0013-225x300.jpg 225w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250217-WA0013-1152x1536.jpg 1152w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250217-WA0013-1024x1365.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250217-WA0013.jpg 1200w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>क्षेत्र इस विद्यालय के अनुशासित शिक्षण माहौल में शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों की प्रतिभा देखकर लगता है कि ये छात्र क्षेत्र व प्रदेश का नाम रोशन करेंगे|वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने दो दर्जन से अधिक गीत,नाटक,एकांकी के कार्यक्रम प्रस्तुत किए।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-22331" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250217-WA0014-1024x768.jpg" alt="" width="640" height="480" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250217-WA0014-1024x768.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250217-WA0014-300x225.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250217-WA0014-768x576.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250217-WA0014-1536x1152.jpg 1536w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250217-WA0014.jpg 1600w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>इस अवसर पर अरुण मिश्रा,बद्री नारायण,संजय अवस्थी, रामू सैनी,शुभम मिश्रा,दयानंद मिश्रा,प्राची सिंह, विश्राम,बनवारी लाल,सुधा शर्मा,ज्ञानवती,सोनाली,सोनम,निशा,आरती चौरसिया,कीर्ति,दीपाली, नेहा ,शीतांशु मिश्रा,राज नारायण यादव,महेंद्र यादव,शैलेश शुक्ला,शिवांशु दीक्षित,प्रदीप मिश्रा,कुलदीप,जितेंद्र,पंकज,ज्ञानेंद्र,ऋतिक जायसवाल नेहा मौर्या,लोकपति पाण्डेय आदि सैकड़ों गणमान्य लोग मौजूद रहे|विद्यालय की प्रबंधक मनोरमा मिश्रा ने आगंतुकों का आभार जताया।</p>
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		<title>Gandhi&#8217;s death anniversary : गांधी विचार से ही विश्व कल्याण संभव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Jan 2025 04:23:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
		<category><![CDATA[Anniversary]]></category>
		<category><![CDATA[death]]></category>
		<category><![CDATA[Gandhi']]></category>
		<category><![CDATA[गाँधी]]></category>
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		<category><![CDATA[विश्व कल्याण]]></category>
		<category><![CDATA[संभव]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>PRESENTED BY ARVIND JÀYTILAK  गांधी का शश्वत विचार ही विश्व कल्याण का मार्ग है। उनके...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>PRESENTED BY ARVIND JÀYTILAK </strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-11283 size-thumbnail" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-150x150.jpg 150w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-24x24.jpg 24w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-48x48.jpg 48w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-96x96.jpg 96w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-300x300.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 150px) 100vw, 150px" /></p>
<p>गांधी का शश्वत विचार ही विश्व कल्याण का मार्ग है। उनके बताए रास्ते का अनुसरण करके ही विश्व को हिंसा से बचाया जा सकता है। इसलिए कि उन्होंने अपने विचारों को स्वयं के आचरण में ढालकर सिद्ध किया है। उन विचारों को सत्य और अहिंसा की कसौटी पर जांचा-परखा है। 1920 का असहयोग आंदोलन जब जोरों पर था उस दौरान चौरी-चौरा में भीड़ ने आक्रोश में एक थाने को अग्नि की भेंट चढ़ा दी। इस हिंसक घटना में 22 सिपाही जीवित जल गए। गांधी जी द्रवित हो उठे। उन्होंने तत्काल आंदोलन को स्थगित कर दिया। उनकी खूब आलोचना हुई लेकिन वे अपने इरादे से टस से मस नहीं हुए। वे हिंसा को एक क्षण के लिए भी बर्दाश्त करने को तैयार नहीं थे। उनकी दृढ़ता कमाल की थी।</p>
<p>जब उन्होंने महसूस किया कि ब्रिटिश सरकार अपने वादे के मुताबिक भारत को आजादी देने में हीलाहवाली कर रही है तो उन्होंने भारतीयों को टैक्स देने के बजाए जेल जाने का आह्नान किया। विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का आंदोलन चलाया। ब्रिटिश सरकार द्वारा नमक पर टैक्स लगाए जाने के विरोध में दांडी यात्रा की और समुद्र तट पर नमक बनाया। उनकी दृढ़ता को देखते हुए उनके निधन पर अर्नोल्ड टोनी बी ने अपने लेख में उन्हें पैगंबर कहा। प्रसिद्ध वैज्ञानिक आइंस्टीन का यह कथन लोगों के जुबान पर है कि आने वाले समय में लोगों को सहज विश्वास नहीं होगा कि हांड़-मांस का एक ऐसा जीव था जिसने अहिंसा को अपना हथियार बनाया। हिंसा भरे वैश्विक माहौल में गांधी के विचारों की ग्राहयता बढ़ती जा रही है। जिन अंग्रेजों ने विश्व के चतुर्दिक हिस्सों में युनियन जैक को लहराया और भारत में गांधी की अहिंसा को चुनौती दी, आज वे भी गांधी के अहिंसात्मक आचरण को अपनाने की बात कर रहे हैं।</p>
<p>विश्व का पुलिसमैन कहा जाने वाला अमेरिका जो अपनी धौंस-पट्टी से विश्व समुदाय को उपदेश देता है अब उसे भी लगने लगा है कि गांधी की विचारधारा की राह पकड़कर ही विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है। सच तो यह है कि गांधी के शाश्वत मूल्यों की प्रासंगिकता बढ़ी है। गांधी अहिंसा के न केवल प्रतीक भर हैं बल्कि मापदण्ड भी हैं जिन्हें जीवन में उतारने की कोशिश हो रही है। अभी गत वर्ष पहले ही अमेरिका पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ह्वाइट हाउस में अफ्रीकी महाद्वीप के 50 देशों के युवा नेताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि आज के बदलते परिवेश में युवाओं को गांधी जी से प्रेरणा लेने की जरुरत है। गत वर्ष पहले अमेरिका की प्रतिष्ठित टाइम पत्रिका ने महात्मा गांधी की अगुवाई वाले नमक सत्याग्रह को दुनिया के सर्वाधिक दस प्रभावशाली आंदोलनों में शुमार किया।</p>
<p>याद होगा अभी कुछ साल पहले जाम्बिया के लोकसभा सचिवालय द्वारा विज्ञान भवन में संसदीय लोकतंत्र पर एक सेमिनार आयोजित किया गया जिसमें राष्ट्रमंडल देशों के लोकसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों ने शिरकत की। जाम्बिया की नेशनल असेम्बली के अध्यक्ष असुमा के. म्वानामवाम्बवा ने इस सम्मेलन के दौरान गांधी के सिद्धान्तों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और कहा कि भारत के साथ हम भी महात्मा गांधी की विरासत में साझेदार हैं। उन्होनें बताया कि अहिंसा के बारे में गांधी जी की शिक्षाओं ने जाम्बिया के स्वतंत्रता आन्दोलन को बेहद प्रभवित किया। सच तो यह है कि अब गांधी के वैचारिक विरोधियों को भी लगने लगा है कि गांधी के बारे में उनकी अवधारणा संकुचित थी। उन्हें विश्वास होने लगा है कि गांधी के नैतिक नियम पहले से कहीं और अधिक प्रासंगिक और प्रभावी हैं और उनका अनुपालन होना चाहिए। गांधी जी राजनीतिक आजादी के साथ सामाजिक-आर्थिक आजादी के लिए भी चिंतित थे।</p>
<p>समावेशी समाज की संरचना को कैसे मजबूत आधार दिया जाए उसके लिए उनका अपना स्वतंत्र चिंतन था। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में विषमता रहेगी, हिंसा भी रहेगी। हिंसा को खत्म करने के लिए विषमता मिटाना जरुरी है। विषमता के कारण समृद्ध अपनी समृद्धि और गरीब अपनी गरीबी में मारा जाएगा। इसलिए ऐसा स्वराज हासिल करना होगा, जिसमें अमीर-गरीब के बीच खाई न हो। शिक्षा के संबंध में भी उनके विचार स्पष्ट थे। उन्होंने कहा है कि मैं पाश्चात्य संस्कृति का विरोधी नहीं हूं। मैं अपने घर के खिड़की दरवाजों को खुला रखना चाहता हूं जिससे बाहर की स्वच्छ हवा आ सके। लेकिन विदेशी भाषाओं की ऐसी आंधी न आ जाए कि मैं औंधें मुंह गिर पड़ूं। गांधी जी नारी सशक्तीकरण के प्रबल पैरोकार थे। उन्होंने कहा कि जिस देश अथवा समाज में स्त्री का आदर नहीं होता उसे सुसंस्कृत नहीं कहा जा सकता।</p>
<p>आज के दौर में भारत ही नहीं बल्कि विश्व समुदाय को भी समझना होगा कि उनके सुझाए रास्ते पर चलकर ही एक समृद्ध, सामर्थ्यवान, समतामूलक और सुसंस्कृत विश्व का निर्माण किया जा सकता है। आधुनिक भारतीय चिंतन प्रवाह में गांधी के विचार सार्वकालिक हैं। सच तो यह है कि गांधी भारतीय उदात्त सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत के अग्रदूत के साथ-साथ सहिष्णुता, उदारता और तेजस्विता के प्रमाणिक तथ्य हैं। सत्यशोधक संत भी हैं तो शाश्वत सत्य के यथार्थ समाज वैज्ञानिक भी। राजनीति, साहित्य, संस्कृति, धर्म, दर्शन, विज्ञान और कला के अद्भूत मनीषी भी तो मानववादी विश्व निर्माण के आदर्श मापदण्ड भी। सम्यक प्रगति मार्ग के चिंह्न भी तो भारतीय संस्कृति के परम उद्घोषक भी।</p>
<p>गांधी के लिए वेद, पुराण एवं उपनिषद का सारतत्व ही उनका ईश्वर है और बुद्ध, महावीर की करुणा ही उनकी अहिंसा है। सत्य, अहिंसा, ब्रहमचर्य, अस्तेय, अपरिग्रह, शरीर श्रम, आस्वाद, अभय, सर्वधर्म समानता, स्वदेशी और समावेशी समाज निर्माण की परिकल्पना ही उनके जीवन का परम लक्ष्य है। गांधी के आदर्श विचार उनके निजी जीवन तक ही सीमित नहीं रहे। उन्होंने अपने आदर्श विचारों को आजादी की लड़ाई से लेकर समाज निर्माण जैसे जीवन के विविध पक्षों में भी आजमाया। उस समय लोग कहा करते थे कि आजादी के लक्ष्य में सत्य और अहिंसा नहीं चलेगी और न ही इससे सभ्य समाज का निर्माण होगा। लेकिन गांधी ने दिखा दिया कि सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलकर भी आजादी और समाज निर्माण के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। आजादी के आंदोलन के दौरान गंाधी ने लोगों को संघर्ष के तीन मंत्र दिए-सत्याग्रह, असहयोग और बलिदान। उन्होंने खुद इसे समय की कसौटी पर कसा भी।</p>
<p>सत्याग्रह को सत्य के प्रति आग्रह बताया। यानी आदमी को जो सत्य दिखे उस पर पूरी शक्ति और निष्ठा से डटा रहे। बुराई, अन्याय और अत्याचार का किन्हीं भी परिस्थितियों में समर्थन न करे। सत्य और न्याय के लिए प्राणोत्सर्ग करने को बलिदान कहा। अहिंसा के बारे में उनके विचार सनातन भारतीय संस्कृति की प्रतिध्वनि है। गांधी पर गीता के उपदेशों का व्यापक असर रहा। वे कहते थे कि हिंसा और कायरता पूर्ण लड़ाई में मैं कायरता की बजाए हिंसा को पसंद करुंगा। मैं किसी कायर को अहिंसा का पाठ नहीं पढ़ा सकता वैसे ही जैसे किसी अंधे को लुभावने दृश्यों की ओर प्रलोभित नहीं किया जा सकता। उन्होंने अहिंसा को शौर्य का शिखर माना।</p>
<p>उन्होंने अहिंसा की स्पष्ट व्याख्या करते हुए कहा कि अहिंसा का अर्थ है ज्ञानपूर्वक कष्ट सहना। उसका अर्थ अन्यायी की इच्छा के आगे दबकर घुटने टेक देना नहीं। उसका अर्थ यह है कि अत्याचारी की इच्छा के विरुद्ध अपनी आत्मा की सारी शक्ति लगा देना। अहिंसा के माध्यम से गांधी ने विश्व को यह भी संदेश दिया कि जीवन के इस नियम के अनुसार चलकर एक अकेला आदमी भी अपने सम्मान, धर्म और आत्मा की रक्षा के लिए साम्राज्य के सम्पूर्ण बल को चुनौती दे सकता है। गांधी के इन विचारों से विश्व की महान विभुतियों ने स्वयं को प्रभावित बताया। आज भी उनके विचार विश्व को उत्प्रेरित कर रहे हैं। लोगों द्वारा उनके अहिंसा और सविनय अवज्ञा जैसे अहिंसात्मक हथियारों को आजमाया जा रहा है। ऐसे में उनके विचार बरबस ही प्रासंगिक हो जाते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>नोट -आलेख में लेखक के अपने निजी विचार हैं.</strong></span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>ANNIVERSARY CELEBRATION : जनता इंटर कॉलेज अहद में वार्षिकोत्सव में बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतीकरण</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/21654</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Jan 2025 16:12:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अमेठी]]></category>
		<category><![CDATA[उत्‍तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Anniversary]]></category>
		<category><![CDATA[CELEBRATION]]></category>
		<category><![CDATA[अहद]]></category>
		<category><![CDATA[जनता इंटर कॉलेज]]></category>
		<category><![CDATA[प्रस्तुतीकरण]]></category>
		<category><![CDATA[बच्चों की मनमोहक]]></category>
		<category><![CDATA[वार्षिकोत्सव]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; REPORT BY LOK REPORTER  AMETHI NEWS। जनता इंटर कॉलेज अहद में वार्षिकोत्सव का आयोजन...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY LOK REPORTER </strong></span></p>
<p><em><strong>AMETHI NEWS।</strong></em></p>
<p>जनता इंटर कॉलेज अहद में वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया। बच्चों ने शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश कर उपस्थिति लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया। विगत वर्षों की भांति जिले के विकास खंड जामो स्थिति जनता इंटर कॉलेज अहद में वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें विद्यालय के बच्चों द्वारा साँस्कृतिक कार्यक्रम मनमोहक प्रस्तुतीकरण ने मौजूद दर्शकों को मन्त्रमुग्ध कर दिया ।</p>
<p>कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व प्रवक्ता सजन बहादुर सिंह ने की। मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधायक तेजभान सिंह मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। इसके उपरांत बच्चों द्वारा ओ री चिरैया, कृष्ण सुदामा प्रसंग, राजस्थानी लोकनृत्य आदि कार्यक्रमों का मंचन किया गया।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-21655" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250110-WA0253-689x1024.jpg" alt="" width="640" height="951" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250110-WA0253-689x1024.jpg 689w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250110-WA0253-202x300.jpg 202w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250110-WA0253-768x1141.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250110-WA0253.jpg 969w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>अपने प्रस्तुतीकरण से बच्चों ने समाँ बांध दिया। राजस्थानी लोकनृत्य की विशेष रूप से सराहना की गई। कार्यक्रम के दौरान उपस्थिति दर्शकों को शानदार प्रस्तुतीकरण से बार बार तालियां बजाने पर मजबूर होना पड़ा। कृष्ण -सुदामा प्रसंग भी लोगों को खूब पसंद आया।</p>
<p>कार्यक्रम में सेजल पांडेय, शुभी सिंह, मनीषा, आदित्य, पंकज आदि छात्र छात्राएं प्रतिभाग किया। इस अवसर पर राजा कान्ह पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वीरेश प्रताप सिंह, कालेज प्रबंधक शीतला बख़्श सिंह,अवधेश सिंह, राजबक्स सिंह गणमान्य लोग उपस्थिति रहे।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-21656" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/01/फोटो-02-1.jpg" alt="" width="553" height="290" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/01/फोटो-02-1.jpg 553w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/01/फोटो-02-1-300x157.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 553px) 100vw, 553px" /></p>
<p>वहीं विद्यालय के प्रधानाचार्य सुरेश तिवारी सुरजीत सिंह, अतुल सिंह, प्रदीप शर्मा, रवि सिंह,,नीलिमा सिंह , मिथिलेश, विकास, शिवम, अतुल सिंह सहित समस्त स्टॉफ कार्यक्रम को सफल बनाने में सरहानीय योगदान रहा। कार्यक्रम बड़ी संख्या में अभिभावकगण एवं विद्यालय के सैकड़ो बच्चे व क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>BIRTH ANNIVERSARY FAIR : लोक कला और संस्कृति को समर्पित होगा पं० दीनदयाल जन्मोत्सव मेला</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Sep 2024 15:36:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्‍तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY MUKESH SHARMA DEENDAYAL DHAM (FARAH) ,MATHURA I  भारत माता के अमर सपूत, एकात्म...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/20842">BIRTH ANNIVERSARY FAIR : लोक कला और संस्कृति को समर्पित होगा पं० दीनदयाल जन्मोत्सव मेला</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY MUKESH SHARMA</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>DEENDAYAL DHAM (FARAH) ,MATHURA I </strong></span></p>
<p>भारत माता के अमर सपूत, एकात्म मानव दर्शन के प्रणेता, पं० दीनदयाल उपाध्याय जी की स्मृति में आयोजित चार दिवसीय विराट जन्मोत्सव मेला का शुभारंभ हवन और कलश यात्रा के साथ होगा। जन्मोत्सव समारोह 29, 30 सितंबर, 1 एवं 2 अक्टूबर को दीनदयाल धाम में उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया जायेगा। जन्मोत्सव समारोह का शुभारम्भ घोष के साथ कलश यात्रा और हवन के साथ 29 सितंबर को और समापन 2 अक्टूबर की देर रात्रि संस्कृति विभाग उ०प्र० के सौजन्य चित्र विचित्र महाराज द्वारा भजन संध्या के साथ होगा।</p>
<p>शुक्रवार को यह जानकारी स्मारक समिति निदेशक सोनपाल ने दीनदयाल धाम में पत्रकारों को दी। उन्होंने बताया कि चार दिवसीय जन्मोत्सव मेला का शुभारम्भ 29 सितंबर की प्रातः 7:30 बजे से स्मारक समिति से मंदिर परिसर तक कलश यात्रा और 8:30 बजे से दीनदयाल धाम राधाकृष्ण मंदिर पर सामूहिक हवन के साथ होगा। इसी दिन रंगोली प्रतियोगिता, लोकगायन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। आध्यात्मिक प्रवचन सतपाल महाराज मंत्री उत्तराखंड सरकार द्वारा होंगे। सायं को विद्यार्थियों का रंग मंचीय कार्यक्रम और रात्रि को रसिया दंगल होगा।</p>
<p>पं० दीनदयाल उपाध्याय स्मृति महोत्सव समिति संरक्षक अशोक कुमार टैंटीवाल ने बताया कि दूसरे दिन पंडित जी का जन्मोत्सव हिंदू सनातन तिथि अनुसार आश्विन कृष्ण त्रयोदशी संवत 2081तदनुसार 30 सितंबर को प्रातः स्मारक भवन में हवन व बधाई गीत के साथ मनाया जाएगा। सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता होगी। पडित जी के जीवन पर आधारित नाटय, ध्येय गीत, उत्तर प्रदेश के जनपदों की कला पर आधारित कार्यक्रम होंगे। एकात्ममानव दर्शन विषय पर गोष्ठी दोपहर एक बजे से और सायंकाल संस्कृति विभाग द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंर्तगत बृजवंदना, महारास, चरकुला, मयूर नृत्य, फूलों की होली एवं अन्य जनपदीय लोक नृत्य अयोजित होंगे। राष्ट्रीय कवि सम्मलेन रात्रि 8 बजे से होगा, जिसमें मुख्य अतिथि जयवीर सिंह कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार होंगे।</p>
<p>कोषाध्यक्ष नरेंद्र पाठक ने बताया कि तीसरे दिन प्रातः गौ पूजन एवं स्वस्थ गौवंश प्रतियोगिता, भगवान श्रीराम स्वरूप सज्जा प्रतियोगिता, विश्व पर्यावरण संरक्षण पर गोष्ठी एवं परिचर्चा, अपरान्ह 2 बजे से महिला लोकगीत प्रतियोगिता, सायं 3 बजे विराट कुश्ती दंगल में मुख्य अतिथि सूर्य प्रताप शाही कैबिनेट कृषि मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार होंगे। सायं को सांस्कृतिक कार्यक्रम में डाडिया नृत्य एवं गायन की संगीतमय प्रस्तुति होगी। रात्रि 10 से बजे जिकड़ी भजन होंगे।</p>
<p>सर्व व्यवस्था प्रमुख नीरज कुमार गर्ग ने बताया कि मेला के अंतिम दिन मेधावी छात्र सम्मान समारोह, बृज श्री सम्मान एवं संत समागम कार्यक्रम दोपहर एक बजे होगा। सांयकाल राष्ट्र निर्माण में मातृ शक्ति की भूमिका पर गोष्ठी, किसान एवं ग्रामीण विकास संगोष्ठी, सम्मान एवं समापन समारोह में समस्त कार्यक्रमों एवं प्रतियोगिता के विजेताओं का सम्मान होगा। इसमें चौ० लक्ष्मी नारायण सिंह कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार रहेंगे। मेला का समापन सायं 7 बजे से चित्र विचित्र की भजन संध्या के साथ होगा।</p>
<p>मुकेश शर्मा समिति प्रचार विभाग ने बताया कि लोक कला और लोक संस्कृति को समर्पित इस जन्मोत्सव मेला समारोह में खान-पान की दुकानें, झूला और कृषि प्रदर्शनी मेला का खास आकर्षण होंगे। जन्मोत्सव पर दीनदयाल धाम में जगह- जगह दीप प्रज्जवलित किये जायेंगे।<br />
प्रेस वार्ता में सह मंत्री बृजमोहन गौड़ , मुकेश शर्मा प्रचार विभाग उपस्थित रहे।</p>
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