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	<title>World news Archives - Lok Dastak</title>
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	<description>Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak</description>
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	<title>World news Archives - Lok Dastak</title>
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		<title>WORLD UPDATE : पाकिस्तान (PAKISTAN) के हाथ से फिसलता बलूचिस्तान     </title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 03:16:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[वर्ड न्यूज]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>प्रस्तुति &#8211; अरविंद जयतिलक पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और ब्लूचिस्तान लिबरेशन...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h3><span style="color: #ff0000"><strong>प्रस्तुति &#8211; अरविंद जयतिलक</strong></span></h3>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-thumbnail wp-image-11283" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-150x150.jpg 150w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-24x24.jpg 24w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-48x48.jpg 48w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-96x96.jpg 96w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-300x300.jpg 300w" sizes="(max-width: 150px) 100vw, 150px" /></p>
<p>पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों के बीच छिड़ी जंग से एक बात स्पष्ट है कि अब ब्लूचिस्तान बहुत अधिक समय तक पाकिस्तान का हिस्सा नहीं रहने वाला। जिस तरह ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाके सड़क पर उतरकर पाकिस्तानी सैनिकों से सीधा मोर्चा ले रहे हैं उससे साफ है कि वे आरपार की लड़ाई के मूड में हैं। निःसंदेह पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में बड़े पैमाने पर ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों को नुकसान हुआ है लेकिन जिस तरह पाकिस्तानी हूकुमत के खिलाफ उठी बगावत की लौ तेज हो रही है उससे साफ है कि पाकिस्तान का विखंडन निकट है। गौर करें तो यह पहली बार नहीं है जब ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों द्वारा अपनी आजादी का बिगुल फूंका गया है। वे पाकिस्तान के निर्माण के समय से ही अपनी आजादी की मांग कर रहे हैं।</p>
<p>आमतौर पर उनके आंदोलन का आधार लोकतांत्रिक है लेकिन जब पाकिस्तानी सरकार का अत्याचार बढ़ा तो उन्हें हथियार उठाने की जरुरत आन पड़ी। अब वे अपनी आजादी के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। देखा भी जा रहा है कि वे पाकिस्तान की सरकार और सेना दोनों को कड़ी चुनौती परोस रहे हैं। याद होगा अभी गत वर्ष ही बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों ने जाफर एक्सप्रेस टेªेन को हाइजैक कर पाकिस्तानी हुकूमत के माथे पर शिकन ला दिया था। इससे निपटने में पाकिस्तानी सेना के पसीने छूट गए थे। उस समय पाकिस्तान ने बीएलए लड़ाकों के हाथ तीस पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या की बात कबूली थी। ध्यान देना होगा कि बलोच लिबरेशन आर्मी लगातार मांग करता आ रहा है कि पाकिस्तान सरकार बलूच के राजनीतिक कैदियों, गायब हुए लोगों, अलगाववादी नेताओं, लड़ाकों और उनके कार्यकर्ताओं को बिना किसी शर्त के रिहा करे। अन्यथा उन्हें खतरनाक परिणाम भुगतना होगा।</p>
<p>लेकिन पाकिस्तान का अत्याचार जारी है। मौजू सवाल यह है कि फिर पाकिस्तान बलूचिस्तान में अलगाववाद की उठ रही लपटों से कैसे निपटेगा? जिस तरह बलूचिस्तान की डोर उसके हाथ से फिसलती जा रही है उससे तो यहीं रेखांकित होता है कि आने वाले कुछ वर्षों में बलूचिस्तान अपनी आजादी की जंग में कामयाब होगा। ऐसा इसलिए कि पाकिस्तान में चौतरफा अराजकता का माहौल है। खैबर पख्तुनवां में भी आग लगी है। सिंध प्रांत भी उबल रहा है। पाकिस्तान की भूमि पर फन फैलाए बैठे आतंकी संगठन भी अब पाकिस्तानी संप्रभुता के लिए नई चुनौती परोस रहे हैं। फिर बलूचिस्तान कब तक पाकिस्तान का अविभाजित अंग बना रहेगा। जानना आवश्यक है कि बलूचिस्तान तेल और खनिज से संपन्न पाकिस्तान का सबसे बड़ा और कम आबादी वाला राज्य है। यहां सर्वाधिक आबादी बलूचों की है और उनका आरोप है कि पाकिस्तान की सरकार उनके साथ भेदभाव और शोषण करती है।</p>
<p>उनके खनिज संपदा का जमकर दोहन करती है लेकिन उनकी बुनियादी जरुरतों का तनिक भी ख्याल नहीं रखती है। कहना गलत नहीं होगा कि राजनीतिक तौर पर बलूचों के साथ भेदभाव, नाइंसाफी और शोषण ने वहां के लोगों के मन में पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ नफरत का भाव भर दिया है। गौर करें तो पाकिस्तानी सेना दशकों से बलूचिस्तान में अलगावादियों का उत्पीड़न व हत्या कर रही है। अब तक पाकिस्तानी सेना के हाथों हजारों बलूच नागरिक मारे जा चुके हैं। पाकिस्तानी सेना द्वारा 2006 में बलोच नेता नवाब अकबर बुगती की हत्या के बाद बलूचियों पर अत्याचार पहले से बढ़ गया है। याद होगा 2005 में बलूच नेता नवाब अकबर बुगती और मीर बलाच मार्री द्वारा पाकिस्तान सरकार के समक्ष 15 सूत्री मांग रखी गयी थी। इस मांग में बलूचिस्तान प्रांत के संसाधनों पर ज्यादा नियंत्रण और सैनिक ठिकानों के निर्माण पर रोक का मुद्दा शीर्ष पर था। लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने इन मांगों को सिरे से खारिज कर दिया।</p>
<p>नतीजा टकराव बढ़ गया। जबकि हकीकत है कि बलूचिस्तान के नागरिक अलगाववादी नहीं बल्कि अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से लैस है। पाकिस्तान के कुल प्राकृतिक गैस का एक तिहाई यही से निकलता है। लेकिन विडंबना है कि उसका आनुपातिक लाभ बलूचिस्तान को नहीं मिलता है। उदाहरण के लिए 1952 में बलूचिस्तान के डेरा बुगती में गैस के भंडार का पता लगा और 1954 से गैस का उत्पादन शुरु हो गया। पाकिस्तान के अन्य तीनों प्रांतों को उसका लाभ तुरंत मिलने लगा लेकिन बलूचिस्तान को यह लाभ 1985 में मिला। इसी तरह चीन के साथ तांबा, सोना और चांदी उत्पादन करने की पाकिस्तानी चगाई मरुस्थल योजना 2002 में आकार ली। तय हुआ कि बलूचिस्तान को उसका वाजिब लाभ मिलेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस योजना के तहत प्राप्त लाभ में चीन का हिस्सा 75 फीसद और पाकिस्तान का 25 फीसद है। लेकिन इस 25 फीसद में बलूचिस्तान के हिस्से में सिर्फ 2 फीसद ही आता है। यह स्थिति तब है जब पाकिस्तानी संविधान के 18 वें संशोधन के मुताबिक बलूचिस्तान को विशेष अधिकार प्राप्त है। इसी नाइंसाफी का नतीजा है कि बलूचिस्तान के नागरिक आक्रोशित हैं और पाकिस्तान से अलग होने की मांग कर रहे हैं।</p>
<p>वैसे भी गौर करें तो बलूचिस्तान कभी भी पाकिस्तान का नैसर्गिक हिस्सा नहीं रहा है। इतिहास में जाएं तो 15 अगस्त, 1947 को भारत के साथ ही बलूचिस्तान ने भी अपनी आजादी का एलान किया था। लेकिन अप्रैल 1948 में पाकिस्तानी सेना ने मीर अहमद यार खान को अपना राज्य कलात छोड़ने पर मजबूर कर दिया। उनसे जबरन कलात की आजादी के खिलाफ समझौते पर हस्ताक्षर करवाया गया जबकि उनके भाई प्रिंस अब्दुल करीम खान इस समझौते के विरुद्ध थे। वे किसी भी कीमत पर बलूचिस्तान का 23 फीसद हिस्सा पाकिस्तान को देने को तैयार नहीं थे। लिहाजा उन्होंने 1948 में पाकिस्तान के खिलाफ अलगाव का बिगुल फूंक दिया। उनके नेतृत्व में बलूच नागरिकों ने अफगानिस्तान की जमीन से पाक सैनिकों के खिलाफ गुरिल्ला जंग छेड़ दिया। इस संघर्ष को नवाब नवरोज खान ने आगे बढ़ाया लेकिन इसकी कीमत उन्हें भारी चुकानी पड़ी। पाकिस्तान की सरकार ने उनके दोनों बेटों और भतीजों को फांसी पर लटका दिया। इस अत्याचार के बाद भी जब बलूचों का स्वर धीमा नहीं पड़ा तो यहां 1973-74 में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया और अलगाववादियों के विरुद्ध दमनात्मक कार्रवाई तेज हो गयी।</p>
<p>इस दौरान तकरीबन 8000 बलूची नागरिक मारे गए और हजारों घायल हुए। लेकिन गौर करें तो पाकिस्तानी सेना के जुल्म के बाद भी आजादी का स्वर थमा नहीं है। मौजूदा समय में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट, यूनाइटेड बलोच आर्मी, लश्कर ए बलूचिस्तान और बलूचिस्तान लिबरेशन यूनाइटेड फ्रंट जैसे संगठन बलूचिस्तान की आजादी के लिए आंदोलित हैं। पाकिस्तान के लिए यह मुसीबत पैदा करने वाला है कि भारत ही नहीं अमेरिका भी बलूचिस्तान पर पाकिस्तानी सेना द्वारा मानवाधिकार हनन और अत्याचारपूर्ण कार्रवाई का अनैतिक मान रहा है। याद होगा गत वर्ष पहले कैलिफोर्निया के रिपब्लिकन सांसद दाना रोहराबचेर ने दो अन्य सांसदों के समर्थन से अमेरिकी कांग्रेस में बलूचिस्तान के लोगों के लिए इन जुल्मों के खिलाफ ‘आत्मनिर्णयन’ के अधिकार की मांग वाला प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि बलूचिस्तान का प्रदेश पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान में फैला हुआ है और यहां के लोगों को संप्रभु अधिकार प्राप्त नहीं है।</p>
<p>याद होगा वर्ष 2016 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उलंघन का मुद्दा उठाए जाने से पाकिस्तान घिर गया था। तब उसकी बोलती बंद हो गयी थी। उसे इतना करारा झटका लगा था कि वह निर्वासित बलूच नेताओं से बातचीत को तैयार हो गया था। तब बलूचिस्तान प्रांत के मुख्यमंत्री नवाब सनाउल्ला जेहरी और पाकिस्तानी सेना के दक्षिणी कमान के कमांडर आमिर रियाज ने बलूच नेताओं से बातचीत का पैगाम भेजा। तब बलूच नेताओं ने भारतीय प्रधानमंत्री के समर्थन से उत्साहित होकर भारत का शुक्रिया जताया था। दो राय नहीं कि आने वाले दिनों दुनिया के अन्य देश भी बलूचिस्तान के मसले पर मुखर होंगें और पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ेगी।</p>
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		<title>SUMMIT IN AMERICA : लुइसविले में &#8220;विधायी शिखर सम्मेलन आयोजित</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 11 Aug 2024 02:52:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[वर्ड न्यूज]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY ADV. ANAND SINGH WORLD NEWS I  अमेरिका के लेजिस्लेटर्स की संस्था एनसीएसएल के...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY ADV. ANAND SINGH</strong></span></p>
<p><em><strong>WORLD NEWS I </strong></em></p>
<p>अमेरिका के लेजिस्लेटर्स की संस्था एनसीएसएल के तत्वाधान में 05 अगस्त 2024 से 07 अगस्त 2024 तक अमेरिका के केंटकी प्रांत के लुइसविले शहर में, दुनिया भर के लेजिस्लेटर के एक सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, परिवहन व्यवस्था, सार्वजनिक निजी हिस्सेदारी, चुनाव, शिक्षा आदि महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष सत्रों के आयोजन किए गए।</p>
<p>इस शिखर सम्मेलन में दुनिया के तकरीबन 20 देश के सांसदों, विधायी कार्यों से जुड़े कर्मचारियों, सार्वजनिक नीति बनाने वाले पेशेवरों सहित लगभग 45 सौ से भी अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। भारत के विभिन्न राज्यों के लगभग 37 विधायक भी इस सम्मेलन में शामिल रहे, जिसमें उत्तर प्रदेश से जेवर के विधायक धीरेन्द्र सिंह, जनपद बुलंदशहर की विधानसभा अनूपशहर से विधायक संजय शर्मा, जनपद फर्रुखाबाद के कायमगंज विधानसभा की विधायक डॉक्टर सुरभि भी उपस्थित रहे।</p>
<p>लुइसविले में आयोजित &#8220;विधायी शिखर सम्मेलन&#8221; में कई सत्र हुए, जिसमें शैक्षिक परिणामों को बढ़ाने और भविष्य की चुनौतियां के लिए छात्रों को तैयार करने की अभिनव रणनीतियों पर भी चर्चा हुई। साथ ही लोगों के जीवन स्तर की गुणवत्ता में सुधार करने और नए दृष्टिकोणों पर भी विचार किया गया।<img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-19985" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA1218.jpg" alt="" width="1280" height="687" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA1218.jpg 1280w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA1218-300x161.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA1218-1024x550.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA1218-768x412.jpg 768w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p>इस मौके पर जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने कहा कि &#8220;इन सत्रों में राज्यों के विधायकों के सामने आने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों पर, उनके समाधानों पर विशेषज्ञों से विस्तृत चर्चा करने का मौका प्राप्त हुआ।&#8221;</p>
<p>जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह ने आगे कहा कि *&#8221;2024 एनसीएलएस &#8220;विधायी शिखर सम्मेलन&#8221; में विधायी प्रक्रियाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के नैतिक और व्यवहारिक सुझावों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। सत्र में निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्रणालियों को विकसित करने के महत्व पर भी जोर दिया गया। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग से, किसी के डेटा की गोपनीयता भंग न हो तथा समाज पर इसके नकारात्मक प्रभाव न पड़े, उन्हें रोके जाने के लिए भी विस्तृत चर्चा की गई।&#8221;</p>
<p>इस शिखर सम्मेलन में इस बात पर भी चर्चा हुई कि &#8220;आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से किस प्रकार बेहतर शासन व्यवस्था निर्धारित की जा सकती है तथा किस तरीके से विधायक अपने दैनिक कार्यों के निष्पादन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग कर सकते हैं तथा समाज को कैसे, इस नई तकनीक से लाभ पहुंचाया जा सकता है। इस बारे में भी व्यापक चर्चा और उसके समाधान के विषय में विचार किया गया।&#8221;<img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-19986" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA1217.jpg" alt="" width="1280" height="597" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA1217.jpg 1280w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA1217-300x140.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA1217-1024x478.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA1217-768x358.jpg 768w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p>जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह ने बताया कि &#8220;पूरी दुनिया में पर्यावरण, शिक्षा, नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए जाना तथा लोकतंत्रीय संस्थाएं कैसे पारदर्शी तरीके से कार्य करें, इस विषय पर भी वृहद चर्चा हुई।&#8221;</p>
<p>निश्चित तौर से अमेरिका में हुआ यह सम्मेलन, चुने हुए जनप्रतिनिधियों को अपने चुनाव क्षेत्र, राज्यों और देश में बेहतर व्यवस्था के प्रबंधन और लोगों को आधुनिक परिपेक्ष में नई-नई तकनीक और सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक अनोखा प्रयोग था। <img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-19987" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA1219.jpg" alt="" width="1131" height="602" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA1219.jpg 1131w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA1219-300x160.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA1219-1024x545.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA1219-768x409.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1131px) 100vw, 1131px" /></p>
<p>इस मौके पर अनूपशहर के विधायक संजय शर्मा ने बताया कि  &#8220;इस आयोजन में एनएलसी भारत, जिसका कार्यालय हिंदुस्तान के पुणे में स्थित है, के सहयोग से ही भारत के जनप्रतिनिधियों का उपरोक्त कार्यक्रम में हिस्सा लेना संभव हो पाया। मैं एनएलसी भारत को धन्यवाद ज्ञापित करता हूं।&#8221;</p>
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