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	<title>TEACHER Archives - Lok Dastak</title>
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	<description>Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak</description>
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	<title>TEACHER Archives - Lok Dastak</title>
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		<title>Teacher Recruitment : डीएलएड प्रशिक्षितों का महाधरना, सात वर्षों से शिक्षक भर्ती न होने पर फूटा आक्रोश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Jun 2025 03:01:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैरियर]]></category>
		<category><![CDATA[Recruitment डीएलएड]]></category>
		<category><![CDATA[TEACHER]]></category>
		<category><![CDATA[प्रयागराज]]></category>
		<category><![CDATA[प्रशिक्षितों]]></category>
		<category><![CDATA[फूटा आक्रोश]]></category>
		<category><![CDATA[महाधरना]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षक भर्ती]]></category>
		<category><![CDATA[सात वर्ष]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY LOK REPORTER PRAYAGRAJ NEWS। नई प्राथमिक शिक्षक भर्ती को लेकर डीएलएड प्रशिक्षित अभ्यर्थियों...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY LOK REPORTER</strong></span></p>
<p><strong>PRAYAGRAJ NEWS।</strong></p>
<p>नई प्राथमिक शिक्षक भर्ती को लेकर डीएलएड प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का धरना सोमवार को छठे दिन भी जारी रहा। यह धरना उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग कार्यालय के सामने लगातार चल रहा है। अभ्यर्थियों ने हाथों में रोटियां लेकर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया और कहा कि वे दो जून की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।खबर लिखे जाने तक आयोग की ओर से कोई आश्वासन नहीं मिला।</p>
<p>प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय से प्राथमिक शिक्षक भर्ती की प्रतीक्षा की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।उन्होंने मांग की कि जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया के लिए विज्ञापन जारी किया जाए, ताकि वे रोजगार पा सकें और अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकें।</p>
<p>धरने पर बैठे एक अभ्यर्थी ने कहा, हमने डीएलएड की पढ़ाई इसलिए की थी कि हमें प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने का अवसर मिलेगा। लेकिन सरकार और आयोग की चुप्पी ने हमारे सपनों को अधर में लटका दिया है।धरने में शामिल अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछले सात वर्षों से कोई भी नई शिक्षक भर्ती नहीं निकाली गई, जबकि राज्य में हर साल डीएलएड प्रशिक्षण दिया जा रहा है।<img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-23366" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250603-WA0008.jpg" alt="" width="345" height="523" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250603-WA0008.jpg 345w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250603-WA0008-198x300.jpg 198w" sizes="(max-width: 345px) 100vw, 345px" /></p>
<p>उनका तर्क है कि हर वर्ष लगभग 2.35 लाख प्रशिक्षु डीएलएड कर रहे हैं, लेकिन प्रशिक्षण के बाद रोजगार का कोई विकल्प नहीं होता। इसके साथ ही प्रत्येक वर्ष 10 से 12 हजार शिक्षक सेवानिवृत्त भी हो जाते हैं, जिससे पद खाली होने के बावजूद भर्ती नहीं हो रही है।रायबरेली से आए अभ्यर्थी रजत सिंह ने सरकार की नीतियों पर कटाक्ष करते हुए कहा, सरकार हर साल डीएलएड करवा रही है लेकिन भर्ती देने के नाम पर चुप्पी साधे हुए है। अगर नौकरी नहीं देनी तो प्रशिक्षण क्यों करवा रही है?</p>
<p>यह बेरोजगारी को बढ़ावा देने की साजिश है।अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार शीघ्र शिक्षक भर्ती का विज्ञापन जारी नहीं करती है तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप लेगा। प्रशिक्षितों की मांग है कि प्राथमिक विद्यालयों में रिक्त पदों को देखते हुए बड़ी संख्या में भर्ती प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए।<img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-23367" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250603-WA0010.jpg" alt="" width="614" height="696" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250603-WA0010.jpg 614w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250603-WA0010-265x300.jpg 265w" sizes="(max-width: 614px) 100vw, 614px" /></p>
<p>सरकार की चुप्पी और बेरोजगारों की पीड़ा के बीच यह आंदोलन प्रदेशभर में एक बड़ा जनांदोलन बनता जा रहा है।धरने में रजत सिंह, अभिषेक तिवारी, विशु यादव, जितेन्द्र सिंह,पवन पांडे,शिवम् मिश्रा,कपेंद्र,विनीत, पुष्पेंद्र, दीपेंद्र, मोहित आदि बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल रहे।</p>
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		<title>BREAKING NEWS :  एक ही परिवार के चार लोगों की गोली मारकर हत्या, सीएम योगी ने घटना पर जताया दुःख</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Oct 2024 16:05:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्‍तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[AMETHI]]></category>
		<category><![CDATA[Armed miscreants]]></category>
		<category><![CDATA[breaking news]]></category>
		<category><![CDATA[crime]]></category>
		<category><![CDATA[four people]]></category>
		<category><![CDATA[Murder]]></category>
		<category><![CDATA[same family.]]></category>
		<category><![CDATA[shot dead]]></category>
		<category><![CDATA[TEACHER]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY LOK REPORTER AMETHI NEWS I  उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में बड़ी घटना...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/20954">BREAKING NEWS :  एक ही परिवार के चार लोगों की गोली मारकर हत्या, सीएम योगी ने घटना पर जताया दुःख</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY LOK REPORTER</strong></span></p>
<p><em><strong> AMETHI NEWS I </strong></em></p>
<p>उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में बड़ी घटना होने की सूचना प्राप्त हो रही है, जिसमें घर में घुसकर एक ही परिवार के चार सदस्यों की हत्या कर दी गई है I परिवार का मुखिया शिक्षक पद पर कंपोजिट विद्यालय पन्हौना कार्यरत था I</p>
<p>मिल रही जानकारी के अनुसार आज देर शाम अज्ञात हथियार बंद  बदमाशों द्वारा घर में घुस कर शिक्षक सुनील कुमार (35) व उसकी पत्नी तथा दो छोटी छोटी बच्चियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई है I शिक्षक रायबरेली के जिले का मूल निवासी था I</p>
<p>जिले के शिवरतनगंज थाना अंतर्गत अहोरवा भवानी चौराहे पर किराए के मकान पर रहता था I घटना को अंजाम देने के बाद हथियार पर बदमाश भाग निकले सभी घायलों को लोगों द्वारा सीएससी लाया गया लेकिन तब तक चारों की मृत्यु हो चुकी थी I<img decoding="async" class="alignnone wp-image-20955 size-full" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/Amethi-1.jpg" alt="" width="408" height="300" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/Amethi-1.jpg 408w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/Amethi-1-300x221.jpg 300w" sizes="(max-width: 408px) 100vw, 408px" /></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>घटना स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात</strong></span></p>
<p>घटना की सूचना मिलती ही जिले के एसपी अनूप कुमार सिंह मौके पर पहुंचे  उसके साथ ही कई थानों की फोर्स एवं पीएसी बल मौके पर तैनात कर दिया गया है I आसपास के इलाकों में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है I</p>
<p>घटना से क्षेत्र में दहशत का माहौल है I इस दिल दहलाने वाली घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है वहीं जिले की पुलिस पर भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवालिया निशान लग रहे हैं I</p>
<p>पुलिस की माने तो विगत 18 अगस्त को सुनील कुमार ने रायबरेली में चंदन वर्मा के नाम एससी एसटी एक्ट के तहत छेड़छाड़ का मुकदमा भी दर्ज कराया था I पुलिस उस मुकदमे का इस घटना से संबद्ध होने के बारे में भी जांच पड़ताल कर रही है I</p>
<p><span style="color: #800080"><strong>घटना के संबंध में बोले एसपी अमेठी </strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-20958 size-full" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241003-211053_WhatsApp-2.jpg" alt="" width="426" height="243" /></p>
<p>पुलिस अधीक्षक अमेठी अनूप सिंह ने घटना के संबंध में बताया है कि थानाक्षेत्र शिवरतनगंज जनपद अमेठी अन्तर्गत अहोरवा भवानी में एक परिवार के 04 लोगों पर अज्ञात व्यक्ति द्वारा फायर करने की सूचना पर पुलिस द्वारा परिवार के चारों व्यक्तियों को अस्पताल भेजा गया जहां डॉक्टरों द्वारा चारों को मृत घोषित किया गया।</p>
<p>घटना के अनावरण हेतु पुलिस द्वारा टीमों का गठन कर की जा रही I मृतक सुनील कुमार पुत्र रामगोपाल निवासी सुदामापुर रायबरेली का निवासी है I अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस टीमों का गठन किया गया है I</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>हत्यारों ने 6 साल,डेढ़ साल के बच्चों को भी मारा </strong></p>
<p>मृतक टीचर जनपद रायबरेली के रहने वाले हैं। जिनका नाम सुनील कुमार पुत्र रामगोपाल उम्र 36 वर्ष है। उनके साथ सुनील कुमार की पत्नी पूनम उम्र 32 वर्ष, छ वर्षीय पुत्री सृष्टि  व समीक्षा उम्र 3 वर्ष की भी मृत्यु हो गई है। मामले की संगीनता को देखते हुए आईजी अयोध्या अमेठी मौके पर पहुंच गए है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #00ffff"><strong>सीएम योगी ने घटना पर जताया दुःख, कहा दोषियों पर होगी कड़ी कार्यवाई </strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-20967 size-full" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241003-215850_X-1.jpg" alt="" width="428" height="630" /></p>
<p>आज जनपद अमेठी में हुई घटना घोर निंदनीय और अक्षम्य है। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिजनों के साथ हैं। दुःख की इस घड़ी में @UPGovt पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। इस घटना के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा, उन पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई होगी।</p>
<p><span style="color: #993366"><strong>घटना स्थल पर पहुंचे एडीजी जोन, चार टीम गठित </strong></span></p>
<p>घटना की सूचना मिलते ही एडीजी जोन एस बी सिरोडकर, मंडला आयुक्त गौरव दयाल,आईजी अयोध्या प्रवीण कुमार,डीएम निशा अनंत , एसपी अनूप सिंह ,एएसपी हरेंद्र कुमार, बीएस ए संजय तिवारी  आदि अधिकारी मौके पर पहुंचकर मामले की गहनता  से जांच पड़ताल कर रहे हैं।</p>
<p>खुलासे के लिए चार टीमें गठित शिक्षक और उनके पूरे परिवार की हत्या का मामले में आईजी प्रवीण कुमार ने परिवार के करीबियों पर जताई हत्या की आशंका I आई जी ने कहा-घटना के खुलासे के लिए लगाई गई है चार टीमें फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्यों को संकलित किया है।</p>
<p>घर मे किसी फोर्सफुल इंट्री के निशान नही है।बहुत जल्द घटना का खुलासा किया जाएगा।बच्चो की हत्या का मतलब होता है कि आप किसी को पहचान रहे है। जल्द ही इस मामले का खुलासा कर दिया जाएगा ।घटना में कुछ महत्त्वपूर्ण साक्ष्य मिले है।साक्ष्य संकलित कर घंटना का अनावरण किया जायेगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>TEACHER,S DAY शिक्षक दिवस पर विशेष _____ ऐसे भी दिन थे: जमीन पर खाना परोसकर खाना पड़ा</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/14131</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Sep 2023 17:05:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
		<category><![CDATA[_____ ऐसे भी दिन थे]]></category>
		<category><![CDATA[S DAY]]></category>
		<category><![CDATA[TEACHER]]></category>
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		<category><![CDATA[जमीन पर खाना]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ राधाकृष्णन]]></category>
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		<category><![CDATA[दिवस विशेष]]></category>
		<category><![CDATA[परोसकर खाना पड़ा]]></category>
		<category><![CDATA[महान]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षाविद्]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; डॉ राधाकृष्णन को महान शिक्षाविद् एवं दार्शनिक के रूप में आज पूरी दुनिया जानती...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p>डॉ राधाकृष्णन को महान शिक्षाविद् एवं दार्शनिक के रूप में आज पूरी दुनिया जानती है। गरीब परिवार में जन्मे डॉक्टर राधाकृष्णन ने परिश्रम, एकाग्रता और स्वाध्याय के बल पर राष्ट्रपति पद प्राप्त किया। नई पीढ़ी को यह पता ही नहीं होगा कि डॉ राधाकृष्णन का बचपन किन हालत में गुजरा?</p>
<p>गरीबी में पले-बढ़े राधाकृष्णन के लिए वही गरीबी वरदान भी साबित हुई और उसी ने जीवन भी दिया। उनके जीवन में एक वक्त ऐसा भी आया जब माता-पिता भाई-बहन और पत्नी बच्चों के भरण- पोषण के लिए उन्हें जमीन पर खाना परोसकर तक खाना पड़ा। गरीबी न होती तो देश और दुनिया के फलक पर डॉक्टर राधाकृष्णन न होते। हम सबको शिक्षक दिवस मनाने का अवसर भी नसीब न होता। आइए! डॉ राधाकृष्णन के अभाव में गुजरे जीवन को भी जानें।</p>
<p>सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को चेन्नई से 200 किलोमीटर दूर तिरुतानी नामक एक छोटे से कस्बे में हुआ था। पिता का नाम सर्वपल्ली वीरास्वामी और मां का नाम सीतम्मा था। उनके पिता तिरुतानी के जमींदार के अधीन एक साधारण कर्मचारी थे। 6 भाई-बहनों वाले भरे पूरे परिवार का भरण-पोषण एक साधारण कर्मचारी पिता के लिए बहुत ही मुश्किल था।</p>
<p>डॉ राधाकृष्णन घूमने फिरने के शौकीन थे।  किशोरवस्था में पैसा बचाकर घूमने निकल गए। एक बार सुनसान रास्ते पर यात्रा कर रहे थे तभी लुटेरे की नजर पड़ी। वक्त लुटेरे ब्राह्मण बच्चों को उठाकर सोने के आभूषण इत्यादि छीनने के बाद मारकर कुएं में फेंक देते थे। लुटेरों ने उन्हें भी पकड़ा तलाशी में कुछ भी न मिलने पर धक्का देकर छोड़ दिया।</p>
<p>दर्शनशास्त्र उनका प्रिय विषय कभी नहीं रहा। इस विषय में उनका कोई आकर्षण भी नहीं था। चचेरे भाई ने दर्शनशास्त्र में स्नातक की परीक्षा पास की थी। उन्होंने अपनी सारी किताबें डॉ राधाकृष्णन को देने का वादा किया। गरीबी के चलते डॉक्टर राधाकृष्णन ने उधार में मिली किताबें के चलते बीए में दर्शनशास्त्र को मुख्य विषय के रूप में लिया और दुनिया के जाने-माने दार्शनिक बन गए।</p>
<p>बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के डॉक्टर राधाकृष्णन कानून की पढ़ाई करना चाहते थे। गरीबी के चलते कानून की डिग्री हासिल नहीं कर पाए लेकिन गरीबी उनकी पढ़ाई में बाधक नहीं बन पाई। 25 रुपए प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्राप्त कर दर्शनशास्त्र से एमए किया। दर्शनशास्त्र से एमए की परीक्षा पास करने के बाद उनकी इच्छा लंदन जाकर उच्च अध्ययन की थी लेकिन पैसे की कमी के कारण वह लंदन जाकर उच्च अध्ययन नहीं कर पाए।</p>
<p>उनकी ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ने की भी इच्छा अधूरी रह गई। तब उन्होंने कहा कि मैं भले ही ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ा नहीं पाया लेकिन एक दिन ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाऊंगा। स्वाध्याय के बल पर उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय में नौकरी के दौरान ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भी पढ़ाया।</p>
<p>अनेक संस्थाओं में नौकरी के लिए उन्होंने प्रार्थना पत्र भेजे लेकिन कहीं नौकरी नहीं मिली। तब उन्होंने अपनी समस्या अपने प्रोफेसर स्नेकर के सामने रखी। प्रोफेसर स्नेकर ने सिफारशी पत्र लिखकर पब्लिक इंस्ट्रक्शन के डायरेक्टर के पास भेजा। उसके आधार पर उन्हें प्रेसीडेंसी कॉलेज चेन्नई में मलयालम के मास्टर की नौकरी मिली जबकि वह मलयालम भाषा जानते ही नहीं थे। स्थान रिक्त होने पर उन्हें दर्शनशास्त्र का प्रवक्ता नियुक्त किया गया।</p>
<p>वर्ष 1910 में उन्हें प्रशिक्षण के लिए भेजा गया। आर्थिक अभाव का आलम यह था कि वह भोजन के लिए थाली के रूप में इस्तेमाल होने वाले केले के पत्ते भी खरीद नहीं पाते थे। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने भोजन जमीन पर परोस कर भी खाया।</p>
<p>परिवार के भरण पोषण के लिए उन्होंने अपने जीते हुए जिन मेडल को गिरवी रखा था उनका ब्याज चुकाना भी उनके सामने मुश्किल था। बास न चुकाने पर 1913 में साहूकार ने उन पर मुकदमा भी कर दिया। पुणे कोर्ट के कटघरे में खड़ा होना पड़ा। तब उन्होंने कोर्ट में माफी मांग कर दिन-रात मेहनत कर कर्ज चुकाने का वादा किया। दिन-रात की मेहनत ने उन्हें बीमार भी कर दिया।</p>
<p>डॉ राधाकृष्णन 1939 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलाधिपति नियुक्त हुए। उस समय भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हो चुका था। विश्वविद्यालय गवर्नर के दबाव में था। गवर्नर युद्ध के अस्पताल के रूप में विश्वविद्यालय कैंपस को बदलना चाहता था लेकिन डॉक्टर राधाकृष्णन के नैतिक बल की बदौलत वह सफल नहीं हुआ तो उसने विश्वविद्यालय को अनुदान देना बंद कर दिया। इसके बाद राधा कृष्ण ने चंदा वसूल कर विश्वविद्यालय को कर्ज मुक्त करके आगे भी बढ़ाया।</p>
<p>यह भी ऐतिहासिक तथ्य है कि डॉक्टर राधाकृष्णन ने कभी कांग्रेस की सदस्यता नहीं ली लेकिन गांधी जी के आंदोलन को आगे बढ़ाने में उन्होंने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी और दो बार उपराष्ट्रपति व एक बार राष्ट्रपति चुने गए।</p>
<p>ऐसे सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन को 125वीं जयंती पर शत-शत नमन।</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>साभार: डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन</strong></span><br />
<span style="color: #ff0000"><strong>लेखक- बृजकिशोर</strong></span></p>
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		<title>TEACHER,S DAY SPECIAL ____ भारतीय जनमानस के प्रतिनिधि हैं शिक्षक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Sep 2023 03:15:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[special]]></category>
		<category><![CDATA[TEACHER]]></category>
		<category><![CDATA[TEACHER DAY]]></category>
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		<category><![CDATA[प्रतिनिधि]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय जनमानस]]></category>
		<category><![CDATA[मार्गदर्शक]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षक दिवस]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; आज गुरुओं के सम्मान का दिन है। 5 सितंबर को देश भर में शिक्षक...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/14120">TEACHER,S DAY SPECIAL ____ भारतीय जनमानस के प्रतिनिधि हैं शिक्षक</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><span style="font-weight: 400">आज गुरुओं के सम्मान का दिन है। 5 सितंबर को देश भर में शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है। 1962 में जब डा0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारतीय गणतंत्र के दूसरे राष्ट्रपति बने तब उनके विद्यार्थियों ने उनका जन्मोत्सव मनाने का विचार किया। लेकिन उन्होंने इस अनुरोध को अस्वीकार कर सुझाव दिया कि अगर वे उनके जन्मोत्सव को शिक्षक दिवस के रुप में मनाएं तो ज्यादा खुशी होगी। तभी से इस दिन को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400"> डा0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन अकसर कहा करते थे कि शिक्षक का कार्य केवल शिक्षण संस्थानों की परिधि तक ही सीमित नहीं है। समाज व राष्ट्र के गुणसूत्र को बदलने की जिम्मेदारी भी उसके कंधे पर होती है। इसलिए कि वह राष्ट्रीय जनमानस का प्रतिनिधि होता है। उसके आदर्शवादी मूल्य और सारगर्भित विचारधारा समाज व देश के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं। राधाकृष्णन एक उत्कृष्ट विद्वान, महान शिक्षाशास्त्री के अलावा कुशल वक्ता भी थे। अंग्रेजी और संस्कृत पर उन्हें असामान्य अधिकार था। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">भारत में सत्ता हस्तांतरित होने के गौरवशाली अवसर पर जो गिने-चुने महापुरुषों ने अपने विचार व्यक्त किए उनमें डा0 राधाकृष्णन भी थे। उनकी विद्वता और ज्ञान सिर्फ कोरी शास्त्रीय नहीं थी बल्कि इसे अपने जीवन में उतारा भी। शिक्षा में महान योगदान को देखते हुए ही भारत सरकार ने उन्हें 1954 में भारत रत्न की उपाधि से विभुषित किया। आज के घोर भौतिकवादी और आचरणविहिन आधुनिकता की दौड़ में जब सभ्य समाज के निर्माण का सवाल पीछे छूट रहा है ऐसे में शिक्षकों को आगे बढ़कर अपना उत्तरदायित्व निभाना चाहिए।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400"> एक शिक्षक ही अपने गुरुत्तर उत्तरदायित्वों एवं संवेदनायुक्त आचरण से भारत राष्ट्र व समाज को संस्कारित कर सकता है। डा0 राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को मद्रास के निकट तिरुतानी में हुआ। शिक्षा प्राप्ति के तदोपरांत डा0 राधाकृष्णन ने सर्वप्रथम एक शिक्षक के रुप में मद्रास में लेक्चरर नियुक्त हुए। 1911 में वे मद्रास के प्रेसीडेंसी कालेज में असिस्टेंट प्रोफेसर और 1916 में प्रोफेसर बने।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400"> 1918 में वह मैसूर विश्वविद्यालय में चले गए और वहां 1921 तक रहे। 1926 और 1929-30 में आक्सफोर्ड के मानचेस्टर कालेज और 1926 में शिकागो विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे। 1927 में भारतीय दर्शन परिषद के बंबई अधिवेशन के अध्यक्ष बने और 1936 में आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्राच्य धर्मों और नीतिशास्त्र के प्रोफेसर बने। दर्शनशास्त्र उनका प्रिय विषय था। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">सर आशुतोष मुखर्जी के निवेदन पर वे कलकत्ता विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर पद  पर कार्य करना स्वीकार किया। वे वहां 1921 से 1931 तथा 1937 से 1941 तक अध्यापन कार्य किए। इसके बाद वे आंध्रप्रदेश विश्वविद्यालय में 1939 से 1948 तक उपकुलपति रहे। 1931 से 1941 तक राष्ट्रसंघ की बौद्धिक सहकारिता संबंधी अंतर्राष्ट्रीय समिति के सदस्य रहे। बंगाल की रायल एशियाटिक सोसायटी के फैलो और भारतीय विश्वविद्यालय कमीशन के अध्यक्ष के पद का भी उन्होंने शोभा बढ़ाया। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">1916 महामना मदन मोहन मालवीय द्वारा बनारस में स्थापित काशी हिंदू विश्वविद्यालय में भी उन्होंने बतौर कुलपति अपनी भूमिका का गौरवपूर्ण निर्वहन किया। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब गांधी जी ने करो या मरो का नारा दिया उस दौरान काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों ने इसमें बढ़ चढ़कर हिंसा लिया। अपने ज्ञान-विज्ञान, दर्शन और चिंतन से भारतीय समाज और राष्ट्र के जीवन में नवीन प्राणों का संचार करने के कारण ही शिक्षक यानी गुरुओं की तुलना ब्रह्मा, विष्णु व महेश से की गयी है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">गुरु अर्थात ज्ञान का वो प्रकाशपूंज जो शिष्य के अंधकार रुपी अज्ञान समाप्त करके उसे और सार्थक मनुष्य बनाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि ‘ऊं अज्ञान तिमिररान्धस्य ज्ञानाञजनशलाकया, चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः’। अर्थात् ‘मैं घोर अंधकार में उत्पन हुआ था और मेरे गुरु ने अपने ज्ञान रुपी प्रकाश से मेरी आंखे खोल दी और मैं उन्हें प्रणाम करता हूं।’ गोस्वामी तुलसीदासजी ने रामचरितमानस में लिखा है कि-गुरु बिनुभवनिधि तरइ न कोई, जों बिरंचि संकर सम होई। अर्थात भले ही कोई ब्रह्मा और शंकर के समान क्यों न हो, वह भवसागर के बिना जीवन रुपी भवसागर पार नहीं कर सकता।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400"> जीवन के आरंभ से ही गुरु की महत्ता को रेखांकित किया गया है। संत कबीर कहते हैं कि ‘हरि रुठे गुरु ठौर हैं, गुरु रुठे नहीं ठौर’। अर्थात भगवान के रुठने पर तो गुरु की शरण रक्षा कर सकती है लेकिन गुरु के रुठने पर कहीं भी शरण नहीं मिलेगा। कबीर कहते हैं कि ‘कुमति कीच चेला भरा, गुरु ज्ञान जल होय, जनम-जनम का मोरचा, पल में डाले धोय’ अर्थात कुबुद्धि रुपी कीचड़  से शिष्य भरा है और गुरु का ज्ञान जल है। इनमें इतना सामर्थ्य है कि वे शिष्यों के जन्म-जन्म का अज्ञान पल भर में दूर कर देते हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400"> कबीर आगे कहते हैं कि ‘गुरु कुम्हार शिष्य कुंभ है, गढ़ि-गढ़ि काढ़ै खोट, अन्तर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट’ अर्थात मिट्टी के बर्तन समान शिष्य के लिए गुरु कुम्हार की तरह होते हैं। शास्त्रों में गुरु को तीर्थ से भी बड़ा कहा गया है। तीरथ गए तो एक फल, संत मिले फल चार, सदगुरु मिले तो अनंत फल , कहे कबीर विचार। गुरु शिष्य का मार्गदर्शन कर उसके जीवन को उर्जा से भर देता है। लीलारस के रसिकों का दाता श्रीकृष्ण भी सद्गुरु ही है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु रुप में शिष्य अर्जुन को संदेश दिया था कि ‘सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज, अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यिा माम शुचः। अर्थात सभी साधनों को छोड़कर केवल नारायण स्वरुप गुरु की शरणागत हो जाना चाहिए। वे उसके सभी पापों को नाश कर देंगे। शोक नहीं करना चाहिए। भारतीय संस्कृति और सभ्यता में कहा गया है कि जिनके दर्शन मात्र से मन प्रसन्न होता है वह परमसत गुरु है। गुरु के बिना न आत्मदर्शन संभव है और न ही परमात्मा दर्शन। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">जप, तप, यज्ञ और ज्ञान में गुरु का मार्गदर्शन आवश्यक है। किसी भी प्रकार की विद्या हो अथवा ज्ञान वह गुरु से ही प्राप्त होता है। सद्गुरु लोककल्याण के निमित्त पृथ्वी पर अवतार स्वरुप हैं। सभी ग्रंथों में गुरु तत्व की उपादेयता का गान किया गया है। वैदिककालीन महान विदुषियां लोपामुद्रा, घोषा, सिकता, अपाला, गार्गी और मैत्रेयी की रचित ऋचाओं में भी गुरुओं के प्रति सम्मान है। सद्गुरु की महिमा अनंत और अपरंपार है। उपनिषदों और स्मृति ग्रंथों में गुरु की महिमा का खूब बखान किया गया है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400"> ईश्वर की सत्ता में विश्वास न रखने वाले जैन व बौद्ध धर्मग्रंथ भी गुरुओं के प्रति श्रद्धावान हैं। वशिष्ठ, याज्ञवल्क्य, पतंजलि और अगस्तय से लेकर तक्षशिला के महान गुरु चाणक्य तक गुरुओं की ऐसी आदर्श परंपरा रही है जिन्होंने अपनी ज्ञान उर्जा से राष्ट्र व समाज की अंतश्चेतना को जाग्रत व समृद्ध किया। प्रत्येक गुरु ने दूसरे गुरुओं को आदर-प्रशंसा एवं पूजा सहित पूर्ण सम्मान दिया है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400"> वशिष्ठ, विश्वामित्र और सांदिपनी जैसे गुरुओं ने राम व कृष्ण को परमशक्ति व परम वैभव से लैस किया। सनातन धर्म में गुरु शिष्य की परंपरा अनंतकाल पूर्व से चली आ रही है। रामायण, महाभारत और परवर्ती कालों में बड़े-बड़े राजाओं ने गुरु से शिक्षा प्राप्त कर शास्त्र और शस्त्र विद्या का ज्ञान प्राप्त कर अपने जीवन को धन्य किया है। भारत में गुरुओं की भूमिका केवल अध्यात्म और धार्मिकता तक ही सीमित नहीं रही। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">देश पर जब भी विपदा आन पड़ी गुरुओं ने राजसत्ता का मार्गदर्शन किया। रामायण व महाभारत काल ही नहीं हर युग में गुरुओं ने अपनी गुरुता का लोहा मनवाया है। परवर्ती काल के गुरुओं ने तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशीला विश्वविद्यालय को वैश्विक ऊंचाई दी। चीनी यात्री ह्नेनसांग ने अपने विवरण में 5 वीं शताब्दी के महान शिक्षकों-धर्मपाल, चंद्रपाल, गुणपति, स्थिरमति, प्रभामित्र, जिनमित्र, आर्यदेव, दिगनाग और ज्ञानचंद्र इत्यादि का उल्लेख किया है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">ये शिक्षक अपने विषयों के साथ-साथ समाज, राज्य, अर्थ, परराष्ट्र, दर्शन व संस्कृति संबंधी विषयों में भी पारंगत, निपुण और ज्ञानवान थे। नागार्जून, असंग, वसुबंधु जैसे महान बौद्ध शिक्षकों की महत्ता को कोई कैसे भूला सकता है जिन्होंने समाज व राष्ट्र को महती दिशा दी। आदिकाल से ही शिक्षक भारतीय शिक्षा, संस्कृति, चिंतन और दर्शन के प्रवाह रहे हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400"> आज के आधुनिक युग में भी गुरु की महत्ता में तनिक भी कमी नहीं आयी है। एक बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए आज भी गुरु का सानिध्य आवश्यक है।</span></p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>अरविंद जयतिलक (लेखक/स्तंभकार)</strong></span></p>
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