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	<title>Supreme Court Archives - Lok Dastak</title>
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	<description>Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak</description>
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		<title>रेप पीड़िता सिपाही को मिली सुप्रीम राहत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 03 Dec 2022 16:58:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[DIG AYODHYA]]></category>
		<category><![CDATA[SP SULTANPUR]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
		<category><![CDATA[रेप पीड़िता]]></category>
		<category><![CDATA[सिपाही]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; सुलतानपुर/अयोध्या/दिल्ली। रेप पीड़िता सिपाही को देश की सबसे बड़ी अदालत से सुप्रीम राहत मिली...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><strong>सुलतानपुर/अयोध्या/दिल्ली।</strong> रेप पीड़िता सिपाही को देश की सबसे बड़ी अदालत से सुप्रीम राहत मिली हैI महिला सिपाही की याचिका को स्वीकार कर सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने गैर जनपद ट्रांसफर आदेश पर रोक लगाई है I डीआईजी अयोध्या के आदेश के क्रम में सुलतानपुर एसपी ने बीते 17 अगस्त को इंस्पेक्टर नीशू तोमर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला सिपाही व पुलिस कर्मी विपिन मिश्रा एवं नवनीत द्विवेदी का गैर जनपद स्थानान्तरण कर दिया था I मिली जानकारी के मुताबिक दोनों सिपाहियों ने नई तैनाती वाले जिले में कार्यभार ग्रहण कर लिया था I किंतु महिला सिपाही ने ट्रांसफर आदेश को चुनौतीदे दी थी I सूत्रों के मुताबिक किसी की तैनाती की वजह से प्रकरण की जांच प्रभावित न हो इसी इरादे से डीआईजी ने ट्रांसफर का आदेश दिया था I इंस्पेक्टर नीशू तोमर ने बीते मई माह में महिला सिपाही व उसके साथ पुलिस कर्मी विपिन कुमार मिश्र व नवनीत द्विवेदी के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में रुपयों के लेन-देन के विवाद को लेकर मारपीट करने व धमकाने सहित अन्य आरोपो में 156(3) अर्जी दाखिल की थी I इसी के करीब ढाई माह बाद महिला सिपाही ने कोतवाली में बीते 14 जुलाई को इंस्पेक्टर नीशू तोमर के खिलाफ यौन शोषण का मुकदमा दर्ज कराया था I अपनी-अपनी पैरवी दोनों ही पक्ष कर रहे हैं I<br />
डीआईजी अयोध्या के आदेश के क्रम में पुलिस अधीक्षक सुलतानपुर के जरिये जारी ट्रांसफर आदेश को रेप पीड़िता सिपाही ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी I फिलहाल पीड़िता सिपाही को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिल सकी थी I जिसके बाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पीड़िता सिपाही ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी I जिस पर सुनवाई के पश्चात जस्टिस संजय किशन कौल व जस्टिस अभय एस. ओका की बेंच ने महिला सिपाही की अपील स्वीकार करते हुए ट्रांसफर पर स्टे आदेश दिया है I सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अब पीड़िता सिपाही की तैनाती सुलतानपुर जनपद में ही रहेगी I</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>सुप्रीम कोर्ट की मुहर से सवर्ण समाज को कुछ राहत: डॉ.आशीष श्रीवास्तव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Nov 2022 06:47:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[EWS]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
		<category><![CDATA[ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ आशीष श्रीवास्तव]]></category>
		<category><![CDATA[सवर्ण आरक्षण]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; जयहिंद नेशनल पार्टी, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करती है, और केंद्र...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p>जयहिंद नेशनल पार्टी, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करती है, और केंद्र सरकार को भी बधाई देती है।<br />
जनवरी 2019 में केंद्र सरकार ने 103 वें संविधान संशोधन के तहत EWS कोटा लागू किया था। EWS का मतलब है आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण। यह आरक्षण सिर्फ जनरल कैटेगरी यानी सामान्य वर्ग के लोगों के लिए है।सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के खंड 6 में इस कोटे को जोड़ा जो नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण देता है। इसके तहत राज्य सरकार शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण और नौकरी पर आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (EWS) को 10 फीसदी आरक्षण दे सकती है। साथ ही अनुच्छेद 30 (1) के तहत आने वाले अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को छोड़कर किसी भी शैक्षणिक संस्थान (प्राइवेट भी) में इस तरह का आरक्षण दिया जा सकता है।</p>
<p>जयहिंद नेशनल पार्टी देश की जनता को EWS आरक्षण के बारे में और उसके उपर्युक्त फायदो से अवगत कराना चाहती हैं :-<br />
1-ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट के लिए वह लोग आवेदन कर सकते हैं, जिनकी वार्षिक आय 8 लाख या उससे कम है। इसमें स्रोतों में सिर्फ सैलरी ही नहीं, कृषि, व्यवसाय और अन्य पेशे से मिलने वाली आय भी शामिल हैं।<br />
2-वहीं अगर कोई व्यक्ति गांव में रहता है। ऐसे में उसके पास पांच एकड़ से कम आवासीय भूमि होनी चाहिए, साथ ही 200 वर्ग मीटर से अधिक आवासीय जमीन नहीं होनी चाहिए।<br />
3-वहीं शहरों में रहने वाले लोगों के पास भी 200 वर्ग मीटर से अधिक आवासीय जमीन नहीं होनी चाहिए।<br />
4-EWS के पात्र के पास आरक्षण का दावा करने के लिए &#8216;आय और संपत्ति प्रमाण पत्र&#8217;होना जरूरी है। यह प्रमाण पत्र तहसीलदार या उससे ऊपर पद के राजपत्रित अधिकारी ही जारी करते हैं। इसकी वैधता एक साल तक ही रहती है।<br />
5-अगर आप ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करने जा रहे हैं। ऐसे में आपके पास पहचान पत्र, राशन कार्ड, स्वयं घोषित प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, आयु प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, मूल निवास प्रमाण पत्र, मोबाइल नंबर, पैन कार्ड और दूसरे दस्तावेजों की जरूरत होगी।<br />
जिस भी सामान्य वर्ग की परिवार, इस आरक्षण का फ़ायदा लेना चाहती है और उन्हें किसी भी प्रकार की मदद की आवश्यकता,तो वो जयहिंद नेशनल पार्टी से संपर्क कर सकते  हैं I</p>
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		<title>सन्तुष्ट नहीं गुजरात सरकार के जवाब से सुप्रीम कोर्ट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Oct 2022 09:34:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[rape]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
		<category><![CDATA[गुजरात सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[बिलकिस बानो]]></category>
		<category><![CDATA[माकपा]]></category>
		<category><![CDATA[सुभाषिनी अली]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; देश के चर्चित बिलकिस बानो केस में उस समय एक नया मोड़ आया ,जब...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/3280">सन्तुष्ट नहीं गुजरात सरकार के जवाब से सुप्रीम कोर्ट</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p>देश के चर्चित बिलकिस बानो केस में उस समय एक नया मोड़ आया ,जब सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के दाखिल किए हुए संतुष्ट नहीं हुई I इस मामले में गुजरात सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से जवाब तलब किया था I जिसके जवाब में गुजरात सरकार ने दायर हलफनामे पर सुप्रीम कोर्ट ने असहमति जताते हुए कहा कि मैं इस जवाब से संतुष्ट नहीं हूं I मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मैंने ऐसा कोई जवाबी हलफनामा नहीं देखा है जहां निर्णय की एक संख्या उद्धत की गई हो, तथ्यात्मक बयान दिया जाना चाहिए था I यह बहुत ही अलग जवाब है I उन्होंने पूछा तथ्यात्मक बयान कहां है, दिमाग का उपयोग कहां है ? इतना ही नहीं उसने निर्देश दिया कि गुजरात सरकार का जवाब सभी पक्षों को उपलब्ध कराया जाए I कोर्ट ने कहा कि 29 नवंबर को सुनवाई करेगी I 2002 के मामले में दोषियों को सजा में छूट और उनकी रिहाई को चुनौती दी गई है I बताते चलें कि बिलकिस बानो मामले में दोषियों की जेल से रिहाई के गुजरात सरकार के फैसलों को माकपा के वरिष्ठ नेता सुभाषिनी अली और दो अन्य महिलाओं ने दोषियों को सजा में छूट दिए जाने और उनकी रिहाई के खिलाफ जनहित याचिका दायर की है I वर्ष 2002 में गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई बिलकिस बानो के मामले में 11 लोगों को छूट दिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी I सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के जवाब से अपनी असंतुष्ट जताई है I</p>
<p><strong>गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को क्या दिया था जवाब</strong></p>
<p>गुजरात सरकार ने हलफनामे में तर्क दिया है कि 9 जुलाई 1992 की नीति के अनुसार संबंधित अधिकारियों से राय ली गई और 28 जून 2022 के पत्र के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपी गई, उससे अनुमोदन आदेश मांगे गए I हलफनामे में यह भी लिखा है कि दोषियों ने 14 साल से अधिक जेल की सजा पूरी कर ली थी और उनका आचरण अच्छा पाया गया था I</p>
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