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	<title>special Archives - Lok Dastak</title>
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	<description>Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak</description>
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	<title>special Archives - Lok Dastak</title>
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		<title>Special on Vijayadashami : कर्तव्य और मर्यादा के आदर्श हैं श्रीराम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Oct 2025 11:49:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; प्रस्तुति &#8211; अरविन्द जयतिलक आज ही के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने असुरराज...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h2><span style="color: #ff0000"><strong>प्रस्तुति &#8211; अरविन्द जयतिलक</strong></span></h2>
<p><img decoding="async" class="alignnone wp-image-11283 size-thumbnail" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-150x150.jpg 150w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-24x24.jpg 24w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-48x48.jpg 48w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-96x96.jpg 96w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-300x300.jpg 300w" sizes="(max-width: 150px) 100vw, 150px" /></p>
<p>आज ही के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने असुरराज रावण का वध कर पृथ्वी को उसके अत्याचारों से मुक्त किया। प्रभु श्रीराम ने असुराज रावण को सत्य और धर्म के मार्ग पर लाने के लिए हरसंभव प्रयास किया। उसे समझाने के लिए अपने भक्त हनुमान और अंगद को उसके पास लंका भेजा। लेकिन दुष्ट स्वभाव वाले रावण को यह सब रास नहीं आया। स्वयं उसके भाई विभिषण ने माता सीता को प्रभु श्रीराम को सौंपने के लिए अनुनय-विनय किया। लेकिन रावण माता सीता को वापस करने के लिए तैयार नहीं हुआ। उल्टे उसने विभिषण को अपमानित कर लंका से निर्वासित कर दिया। विभिषण भगवान श्रीराम के शरणागत हुए।</p>
<p>फिर भगवान श्रीराम ने विभिषण को लंका का राज्य सौंपकर माता जानकी के साथ अयोध्या लौट आए। इन लीलाओं के जरिए भगवान श्रीराम ने एक पुत्र, पिता, पति, भाई और एक राजा के रुप में जगत को महान संदेश दिया कि एक आदर्श, निष्पक्ष और बंधुतापूर्ण आचरण के जरिए एक सभ्य और सुसंस्कृत समाज का निर्माण किया जा सकता है। ऐसे विलक्षण आचरण के कारण ही संसार भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम मानता है। भगवान श्रीराम ने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी सत्य और मर्यादा का पालन करना नहीं छोड़ा। पिता का आदेश मान वन गए। मर्यादा के पालन के लिए राज्य, मित्र, माता-पिता और यहां तक कि पत्नी का भी साथ छोड़ा। इसीलिए भगवान श्री राम को कर्तव्यपरायणता के कारण भारतीय सनातन परिवार का आदर्श प्रतिनिधि कहा जाता है।</p>
<p>राम रघुकुल में जन्में थे जिसकी परंपरा ‘रघुकुल रीति सदा चलि आई, प्राण जाई पर बचन न जाई’ की थी। इसीलिए पिता का वचन मानकर वे जंगल को गए। उन्होंने अपने पराक्रम से दण्डक वन को राछस विहिन किया और साधु-संतों की सेवा की। उन्होंने गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या का उद्धार किया तथा पराई स्त्री पर कुदृष्टि रखने वाले बालि का संघार कर संसार को स्त्रियों के प्रति संवेदनशील होने की सीख दी। जंगल में रहने वाली शबरी माता को नवधा भक्ति का ज्ञान दिया। उन्होंने नवधा भक्ति के जरिए दुनिया को अपनी महिमा से सुपरिचित कराया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुझे वहीं प्रिय हैं जो संतों का संग करते हैं। मेरी कथा का रसपान करते हैं। जो इंद्रियों का निग्रह, शील, बहुत कार्यों से वैराग्य और निरंतर संत पुरुषों के धर्म में लगे रहते हैं। जगत को समभाव से मुझमें देखते हैं और संतों को मुझसे भी अधिक प्रिय समझते हैं।</p>
<p>उन्होंने शबरी को यह भी समझाया कि मेरे दर्शन का परम अनुपम फल यह है कि जीव अपने सहज स्वरुप को प्राप्त हो जाता है। भगवान श्रीराम सभी प्राणियों के लिए संवेदनशील थे। उन्होंने पंपापुर के वन्य जातियों को स्नेह से सीचिंत कर अपना मित्र बनाया। भगवान श्रीराम और वानरराज सुग्रीव की मित्रता आदर्श मित्रता का अनुपम उदाहरण है। पवनपुत्र हनुमान भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त हैं। उन्होंने कहा है कि-कुलीन न होते हुए भी भगवान श्रीराम ने मुझ जैसे सभी गुणों से हीन जीव को अपनाया। अधम प्राणी जटायु को पिता तुल्य स्नेह प्रदान कर जीव से जंतुओं के प्रति मानवीय आचरण को भलीभांति निरुपित किया। समुद्र पर सेतु बांधकर वैज्ञानिकता और तकनीकी का अनुपम मिसाल कायम की।</p>
<p>उन्होंने समुद्र के अनुनय-विनय पर निकट बसे खलमंडली का संघार किया। पत्नी सीता के हरण के बाद भी अपना धैर्य नहीं खोया। भगवान श्रीराम राजीव नयन धरें धनु सायक और भगत बिपति भंजन सुखदायक हैं। भक्तों के दुखों को हरने वाले राजीव नयन श्रीराम को शत-शत प्रणाम। भारत भूमि पर आई हर विपत्ति को हरने वाले दुखहरन प्रभु श्रीराम विष्णु के सातवें अवतार हैं। वाल्मीकि कृत रामायण और तुलसीकृत रामचरितमानस में भगवान श्रीराम की महिमा और उनके आदर्शों का खूब गुणगान किया गया है। उनके उपदेशों और आचरण को जगतकल्याण का मार्ग बताया गया है। वे दुष्टों के संधारक और संतों के रक्षक हैं।</p>
<p>श्री रामचरितमानस में उनके जन्म के बारे में कहा गया है कि-‘नौमि तिथि मधुमास पुनीता, शुकल पच्छ अभिजीत हरिप्रीता। मध्यदिवस अति सीत न घामा, पावन काल लोक विश्रामा।’ अर्थात पवित्र चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष के नवमी तिथि के पावन दिन भगवान श्रीराम का अयोध्या में पा्रकट्य हुआ। उनके प्रकट होते ही निर्मल आकाश देवताओं के समूहों से भर गया और गन्धर्वों का दल भगवान के गुणों का गान करने लगा। आकाश में घमाघम नगाड़े बजने लगे और नाग, मुनि और देवता भगवान की स्तुति और आराधना में लग गए। महान संत तुलसीदास रचित रामचरितमानस में उद्घृत है कि ‘बिप्र धेनु सुर संत हित लिन्ह मनुज अवतार, निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार।’ यानी पृथ्वी पर प्रभु श्रीराम का अवतार ब्राहमण, गौ, देवता, संतों और दीनजनों के कल्याण के लिए हुआ। उन्होंने दुष्टों का संघार कर पृथ्वी पर धर्म की स्थापना की और लोकमंगल के कार्य किए।</p>
<p>हिंदू सनातन शास्त्रों में भगवान श्रीराम को साक्षात परब्रह्म और ईश्वर कहा गया है। संसार के समस्त पदार्थों के बीज उनमें ही निहित है और वे संसार के सूत्रधार हैं। उन्हें वैदिक सनातन धर्म की आत्मा और परमात्मा कहा गया है। भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर मानव जाति को संदेश दिया कि सत्य और धर्म के मार्ग का अनुसरण कर जगत को आसुरी शक्तियों से मुक्त किया जा सकता है। सत्य के पर्याय भगवान श्रीराम सद्गुणों के भंडार हैं। इसीलिए भारतीय जनमानस उनके जीवन पद्धति को अपना उच्चतर आदर्श और पुनीत मार्ग मानता है। शास्त्रों में उद्घृत है कि जब-जब धरती पर अत्याचार बढ़ता है तब-तब भगवान धरा पर अवतरित होकर एवं मनुष्य रुप धारण कर दुष्टों का संघार करते हैं। भगवान श्री राम का जीवनकाल एवं पराक्रम महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत महाकाव्य रामायण के रुप में लिखा गया है।</p>
<p>महान संत तुलसीदास ने भी भगवान श्रीराम पर भक्ति काव्य रामचरितमानस की रचना की है जो केवल भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों की कई भाषाओं में अनुदित है। संत तुलसीदास ने भगवान श्रीराम की महिमा का गान करते हुए कहा है कि भगवान श्रीराम भक्तों के मनरुपी वन में बसने वाले काम, क्रोध, और कलियुग के पापरुपी हाथियों के मारने के लिए सिंह के बच्चे सदृश हैं। वे शिवजी के परम पूज्य और प्रियतम अतिथि हैं। दरिद्रता रुपी दावानल के बुझाने के लिए कामना पूर्ण करने वाले मेघ हैं। वे संपूर्ण पुण्यों के फल महान भोगों के समान हैं। जगत का छलरहित हित करने में साधु-संतो के समान हैं। सेवकों के मन रुपी मानसरोवर के लिए हंस के समान और पवित्र करने में गंगा जी की तरंगमालाओं के समान हैं।</p>
<p>श्रीराम के गुणों के समूह कुमार्ग, कुतर्क, कुचाल और कलियुग के कपट, दंभ और पाखंड के जलाने के लिए वैसे ही हैं जैसे ईंधन के लिए प्रचण्ड अग्नि होती है। श्रीराम पूर्णिमा के चंद्रमा की किरणों के समान सबको शीतलता और सुख देने वाले हैं। श्रीराम क्षमा, दया और दम लताओं के मंडप हैं। संसार भी भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम मानता है। वे एक आदर्श भाई, आदर्श स्वामी और प्रजा के लिए नीति कुशल व न्यायप्रिय राजा हैं। भगवान श्रीराम का रामराज्य जगत प्रसिद्ध है। हिंदू सनातन संस्कृति में भगवान श्रीराम द्वारा किया गया आदर्श शासन ही रामराज्य के नाम से प्रसिद्ध है। रामचरित मानस में तुलसीदास ने रामराज्य पर भरपूर प्रकाश डाला है।</p>
<p>उन्होंने लिखा है कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम के सिंहासन पर आसीन होते ही सर्वत्र हर्ष व्याप्त हो गया। समस्त भय और शोक दूर हो गए। लोगों को दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति मिल गयी। रामराज्य में कोई भी अल्पमृत्यु और रोगपीड़ा से ग्रस्त नहीं था। सभी जन स्वस्थ, गुणी, बुद्धिमान, साक्षर, ज्ञानी और कृतज्ञ थे। वाल्मीकि रामायण के एक प्रसंग में स्वयं भरत जी भी रामराज्य के विलक्षण प्रभाव की बखान करते हैं। गौर करें तो वैश्विक स्तर पर रामराज्य की स्थापना गांधी जी की भी चाह थी। गांधी जी ने भारत में अंग्रेजी शासन से मुक्ति के बाद ग्राम स्वराज के रुप में रामराज्य की कल्पना की थी। आज भी शासन की विधा के तौर पर रामराज्य को ही संसार का सर्वश्रेष्ठ शासन माना जाता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<item>
		<title>Independence Day Special : वो भूली दास्ताँ.. बकुलिहा: यूपी को पहला &#8216;नमक सत्याग्रही&#8217; देने वाला गांव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 Aug 2025 15:31:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>PRESENTED BY GAURAV AWASTHI लालगंज-उन्नाव फोरलेन हाईवे बनने के बाद कई गांव- कस्बों के नाम...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>PRESENTED BY GAURAV AWASTHI</strong></span></p>
<figure id="attachment_19981" aria-describedby="caption-attachment-19981" style="width: 150px" class="wp-caption alignnone"><img decoding="async" class="size-thumbnail wp-image-19981" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/फोटो-06-1-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/फोटो-06-1-150x150.jpg 150w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/फोटो-06-1-24x24.jpg 24w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/फोटो-06-1-48x48.jpg 48w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/फोटो-06-1-96x96.jpg 96w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/08/फोटो-06-1.jpg 300w" sizes="(max-width: 150px) 100vw, 150px" /><figcaption id="caption-attachment-19981" class="wp-caption-text"><strong>गौरव अवस्थी</strong></figcaption></figure>
<p>लालगंज-उन्नाव फोरलेन हाईवे बनने के बाद कई गांव- कस्बों के नाम लिखे दिखने लगे हैं। उनमें एक है- बकुलिहा। करीब 5 हज़ार की आबादी वाले इस गांव के लिए भी कटा है। आजकल गांव का रास्ता पक्का है। कुछ समय पहले यह कच्चा था। अन्य की तरह इसे साधारण गांव समझने की भूल मत कीजिएगा। स्वाधीनता संग्राम में इस गांव का खासा योगदान रहा है। हालांकि स्वाधीनता से जुड़े अन्य स्थानों की तरह यह भी अब भूला-बिसरा ही है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में नमक सत्याग्रह के लिए पहला &#8216;सत्याग्रही&#8217; देने का श्रेय लालगंज से 12 किलोमीटर दूर स्थित इसी गांव के नाम दर्ज है। दांडी में 7 अप्रैल 1930 को समुद्र के खारे जल से नमक बनाकर ब्रिटिश हुकूमत के &#8216;नमक कर&#8217; के आदेश का उल्लंघन करने के बाद महात्मा गांधी ने सारे देश में नमक सत्याग्रह का आग्रह किया। उत्तर प्रदेश में नमक सत्याग्रह की सफलता के लिए कानपुर से प्रकाशित होने वाले प्रताप अखबार के &#8216;प्रतापी&#8217; पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी की अध्यक्षता में समिति गठित की गई। इस समिति में पंडित जवाहरलाल नेहरू रफी अहमद किदवई और मोहनलाल सक्सेना सदस्य के रूप में शामिल किए गए।</p>
<p>इसी समिति ने उत्तर प्रदेश में नमक सत्याग्रह के शुभारंभ के लिए रायबरेली को चुना। तब यह सवाल उठा था कि आखिर रायबरेली ही क्यों? इस सवाल का जवाब पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इन शब्दों में दिया-&#8216; रायबरेली में अंगद, हनुमान, सुग्रीव जैसे कार्यकर्ता घड़ी भर की सूचना मिलते ही जान हथेली पर रखकर निकल पड़ते हैं।&#8217; इसकी दूसरी वजह रायबरेली का 1921 का किसान आंदोलन भी था। रायबरेली का &#8216;मुंशीगंज गोलीकांड&#8217; भारतीय स्वाधीनता इतिहास में मिनी जलियांवाला बाग कांड के रूप में याद किया जाता है। सई नदी के तट पर ब्रिटिश हुकूमत और जमींदार सरदार वीरपाल सिंह के कारिंदों द्वारा बरसाई गई गोलियों से सैकड़ो किसान शहीद हुए।</p>
<p>किसानों के खून से नदी का पानी लाल हो गया था। इस गोली कांड की सूचना पर रायबरेली आए पंडित जवाहरलाल नेहरू को नजर बंद कर दिया गया था। अपनी &#8216;आत्मकथा&#8217; में उन्होंने इस कांड का जिक्र भी किया है। गणेश शंकर विद्यार्थी को इस कांड की विस्तार से रिपोर्ट छापने के लिए दंडित भी किया गया था। बाराबंकी में जन्मे रफी अहमद किदवई की कर्मभूमि रायबरेली ही रही। यह तीनों उत्तर प्रदेश में नमक सत्याग्रह के शुभारंभ के लिए गठित की गई समिति के सदस्य थे।</p>
<p>रायबरेली को नमक सत्याग्रह के शुभारंभ के लिए चुने जाने की एक वजह यह भी हो सकती है। समिति ने अपने इस निर्णय की सूचना महात्मा गांधी को भी भेजी। महात्मा गांधी भी मुंशीगंज गोलीकांड भूल नहीं थे। इसलिए उन्होंने फैसले पर तुरंत मोहर लगाते हुए अपने साबरमती आश्रम में रहने वाले रायबरेली के शिवगढ़ के बाबू शीतला सहाय को एक पत्र देकर रायबरेली भी भेजा। यह पत्र था, राजा अवधेश सिंह और उनके भाई कुंवर सुरेश सिंह के नाम। पत्र में इन दोनों को रायबरेली के आंदोलन को नेतृत्व देने का निर्देश दिया गया था।</p>
<p>जिला स्तर पर रफी अहमद किदवई मोहनलाल सक्सेना और कुंवर सुरेश सिंह की समिति ने 8 अप्रैल 1930 को डलमऊ के गंगा तट पर नमक बनाने का ऐलान किया और प्रथम सत्याग्रही के रूप में बकुलिहा गांव में जन्मे बाबू सत्यनारायण श्रीवास्तव को चुना गया। डलमऊ के मेहंदी हसन ने सत्याग्रह के लिए शेख सखावत अली का मकान निश्चित किया लेकिन प्रशासन ने 7 अप्रैल को ही मेहंदी हसन को गिरफ्तार कर लिया।</p>
<p>रफी अहमद किदवई की तलाश में छापे मारे जाने लगे। ब्रिटिश पुलिस की सक्रियता को देखते ही बाबू सत्यनारायण श्रीवास्तव अंग्रेज हुकूमत की आंखों में धूल झोंकते हुए रफी अहमद किदवई के साथ रायबरेली आ गए। 1921 के मुंशीगंज गोलीकांड को ध्यान रखते हुए पंडित मोतीलाल नेहरू भी प्रयाग से रायबरेली पहुंच गए।</p>
<p>ब्रिटिश पुलिस और प्रशासन की सक्रियता के चलते डलमऊ में गंगा के किनारे नमक बनाने का प्लान फेल हो गया लेकिन पंडित मोतीलाल नेहरू की उपस्थिति में 8 अप्रैल 1930 को बाबू सत्यनारायण श्रीवास्तव ने लोनी मिट्टी से नमक बनाकर नमक कानून तोड़ कर प्रथम सत्याग्रही होने का गौरव प्राप्त किया। बाबू सत्यनारायण 1921 के असहयोग आंदोलन में नौकरी छोड़कर शामिल हुए।</p>
<p>कई वर्षों तक जिला कांग्रेस कमेटी के मंत्री रहे। नमक एवं व्यक्तिगत सत्याग्रह, लगान बंदी और भारत छोड़ो आंदोलन में करीब साढ़े 3 वर्ष से ज्यादा दिन जेल में बंद रहे। ₹200 जुर्माना भी हुआ। लगानबंदी आंदोलन के दौरान बकुलिहा को बारडोली जैसा बनाने का श्रेय भी बाबू सत्यनारायण श्रीवास्तव को ही है।</p>
<p>रायबरेली के कांग्रेस कार्यालय तिलक भवन में &#8216;नमक कर&#8217; के विरोध में नमक बनाकर उत्तर प्रदेश में नमक सत्याग्रह की शुरुआत 8 अप्रैल 1930 को हुई। इसके बाद रायबरेली समेत पूरे प्रांत में गांव-गांव नमक बनने का सिलसिला शुरू हो गया। नमक कर के खिलाफ सत्याग्रह प्रारंभ होने के बाद पंडित मोतीलाल नेहरू जैसे ही वापस गए रायबरेली में अंग्रेज पुलिस ने गिरफ्तारियां शुरू कर दी। बाबू सत्यनारायण श्रीवास्तव, महावीर, चतुर्थी तथा रामदुलारे को गिरफ्तार कर लिया गया। नमक कानून तोड़ने में बाबू सत्यनारायण श्रीवास्तव 6 महीने तक जेल में रहे।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-24139" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250811-WA0012.jpg" alt="" width="1280" height="749" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250811-WA0012.jpg 1280w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250811-WA0012-300x176.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250811-WA0012-1024x599.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250811-WA0012-768x449.jpg 768w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p>आजादी के आंदोलन में बकुलिया गांव स्वाधीनता संग्राम सेनानी के केंद्र में रहा। महात्मा गांधी पंडित जवाहरलाल नेहरू रफी अहमद किदवई से लेकर आजादी के राष्ट्रीय नायकों का गांव में आना-जाना रहा। गांव का कामामाई मंदिर आजादी के आंदोलन कार्यों के कार्यालय की तरह उपयोग में आता रहा। मंदिर से सटे बाग में सभाएं होती रही लेकिन सरकार और सरकारी अधिकारियों के लिए यह ऐतिहासिक गांव अब एक साधारण गांव की तरह ही है।</p>
<p>हालांकि, ग्राम प्रधान सुरेश त्रिवेदी ने आजादी के आंदोलन की याद दिलाने और बाबू सत्यनारायण श्रीवास्तव की स्मृतियों को जीवंत रखने के लिए गांव के एक प्रवेश द्वार पर &#8216;बाबू सत्यनारायण श्रीवास्तव द्वार&#8217; निर्मित कराया है। नमक सत्याग्रह के लिए प्रथम सत्याग्रही देने वाले बकुलिहा गांव के इतिहास से नई पीढ़ी अनजान है। अब नई पीढ़ी को आजादी के इतिहास से परिचित कराने की जरूरत है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>नोट &#8211; लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।</strong></span></p>
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		<title>Special Communicable Disease Control Campaign : ग्राम टिकरिया व सामु०स्वा० केन्द्र अमेठी का अपर निदेशक ने किया निरीक्षण</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Jul 2025 15:56:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; REPORT BY LOK REPORTER AMETHI NEWS। जिले में 01 जुलाई से 31 जुलाई तक...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/23748">Special Communicable Disease Control Campaign : ग्राम टिकरिया व सामु०स्वा० केन्द्र अमेठी का अपर निदेशक ने किया निरीक्षण</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY LOK REPORTER</strong></span></p>
<p><em><strong>AMETHI NEWS।</strong></em></p>
<p>जिले में 01 जुलाई से 31 जुलाई तक चलने वाले विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं 11 जुलाई से 31 जुलाई तक चलने वाले दस्तक अभियान के अन्तर्गत आज सामु०स्वा० केन्द्र गौरीगंज के अन्तर्गत ग्राम टिकरिया का चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, अयोध्या मण्डल अयोध्या के अपर निदेशक डॉ० वी०के० वर्मा द्वारा निरीक्षण किया गया।</p>
<p>निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ० अंशुमान सिंह, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी वी०बी०डी० डॉ० रामप्रसाद, अधीक्षक सामु०स्वा० केन्द्र गौरीगंज डॉ० राजीव सौरभ, जिला मलेरिया अधिकारी सुशील कुमार व ग्राम की आशा अनीता व आंगनबाडी सरोज मिश्रा उपस्थित थे।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-23749" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250711-WA0027.jpg" alt="" width="1600" height="1200" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250711-WA0027.jpg 1600w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250711-WA0027-300x225.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250711-WA0027-1024x768.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250711-WA0027-768x576.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250711-WA0027-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></p>
<p>निरीक्षण में पाया गया कि ग्राम में संचारी रोग नियंत्रण य दस्तक अभियान से सम्बन्धित प्रचार-प्रचार सामग्री पोस्टर व बैनर चस्पा किये गये थे, परिवार को दिमागी बुखार, क्षय रोग, दस्त तथा कुपोषण के विषय में जानकारी देते हुए उक्त रोगों के प्रभाव में आने पर नजदीकी चिकित्सालय में जाने हेतु सलाह दी जा रही थी व सोर्स रिडक्शन का कार्य भी आशा द्वारा सम्पादित किया जा रहा था।</p>
<p>लक्षणयुक्त रोगियों की लाईन-लिस्टिंग भी आशा द्वारा तैयार की जा रही थी। ग्राम में पंचायतीराज विभाग द्वारा नालियों की सफाई, झाडियों की कटाई व एन्टीलार्वा स्प्रे का कार्य सुचारू रूप से किया गया था। आम जनमानस से जानकारी लेने पर बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा संचारी रोग के प्रति जागरूक किया गया है।</p>
<p>मुख्य चिकित्सा अधिकारी अमेठी द्वारा उपस्थित टीम को लार्वीसाइडल छिडकाव एवं डेंगू निरोधात्मक कार्यवाही की प्रकिया के बारे में जागरूक किया गया एवं सम्भावित स्रोतो का विनष्टीकरण किया गया। उक्त निरीक्षण के उपरान्त चिकित्सा व्यवस्था की तैयारी हेतु सामु०स्वा० केन्द्र अमेठी का निरीक्षण किया गया।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-23750" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250711-WA0026.jpg" alt="" width="1600" height="1200" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250711-WA0026.jpg 1600w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250711-WA0026-300x225.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250711-WA0026-1024x768.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250711-WA0026-768x576.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250711-WA0026-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></p>
<p>चिकित्सालय में साफ-सफाई व्यवस्था संतोषजनक व चिकित्सालय में एक्स-रे एवं अल्ट्रासाउण्ड मशीन संचालित पायी गयी तथा चिकित्सालय में स्थापित एम०एन०सी०यू० व जे०एस०वाई० वार्ड की साफ-सफाई एवं चिकित्सा व्यवस्था सुदृढ पायी गयी, जिसके क्रम में अपर निदेशक द्वारा अधीक्षक सामु०स्वा० केन्द्र अमेठी की प्रशंसा करते हुए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा बनाये रखने हेतु प्रेरित किया गया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>Special in Shravan : अद्भुत व अनौखी होती है श्रावण मास में ब्रज की छटा</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/23745</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Jul 2025 13:52:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
		<category><![CDATA[Article]]></category>
		<category><![CDATA[Shravan]]></category>
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		<category><![CDATA[अद्भुत]]></category>
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		<category><![CDATA[ब्रज की छटा]]></category>
		<category><![CDATA[मांस]]></category>
		<category><![CDATA[वृन्दावन]]></category>
		<category><![CDATA[श्रावण]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाली तीज]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; REPORT BY DR GOPAL CHATURVEDI श्रावण (11 जुलाई से 09 अगस्त 2025) में विशेष...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/23745">Special in Shravan : अद्भुत व अनौखी होती है श्रावण मास में ब्रज की छटा</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY DR GOPAL CHATURVEDI</strong></span></p>
<p><strong>श्रावण (11 जुलाई से 09 अगस्त 2025) में विशेष</strong></p>
<p>ब्रज में श्रावण मास की छटा अद्भुत व अनौखी होती है। जो कि देखते ही बनती है। हर ओर अत्यंत हर्षोल्लास रहता है। वन-उपवन और कुंज लताओं की हरीतमा के मध्य नृत्य करते मयूरों के झुंड श्रावण के आगमन पर अपने पंख फैलाकर कुहुकने लगते हैं। वर्षा की नन्ही रिमझिम व बड़ी फुहारों के मध्य समूचा ब्रज प्रिया-प्रियतम में भाव निमग्न होकर झूमने लगता है।</p>
<p>यहां श्रावण का अर्थ है- झूले, कजरी, बरसते मेघ, भीगता मन, खनकती चूड़ियाँ और खिलती महंदी। प्रत्येक व्यक्ति यह चाहता है कि वह आकाश को छू ले। यहां के विभिन्न मंदिरों में झूलों, हिंडोलों, रासलीला, मल्हार गायन व सत्संग-प्रवचन आदि की विशेष धूम रहती है। देश-विदेश के विभिन्न दूरवर्ती स्थानों से आये भक्त-श्रद्धालुओं व पर्यटकों का जमघट इस धूम का और अधिक सम्वर्धन कर देता है।</p>
<p>इस माह में प्रायः प्रत्येक मन्दिर-देवालयों में हिंडोले सजाये जाते हैं। हिंडोले उन्हें कहते हैं कि जिनमें बैठकर ठाकुर जी झूला झूलते हैं। &#8220;भक्ति रसामृत सिंधु&#8221; ग्रंथ में यह लिखा है कि भक्ति के जो 64 अंग हैं उनमें एक अंग हिंडोला उत्सव भी है। साथ ही मन्दिरों को केले के पत्तों, फूल-पत्तियों, कांच की रंगीन पिछ्वाईयों व पर्दों आदि से सजाया जाता है, जिसे कि घटा कहते हैं। कभी काली घटा, कभी हरी घटा, कभी लाल घटा।</p>
<p>कुछ मन्दिरों में नित्य नए-नए प्रकार के हिंडोले सजाये जाते हैं। जिनमें ठाकुर विग्रह विराजित कर उनका मालपूए,घेवर व फैनी आदि से भोग लगाया जाता है। वस्तुतः ब्रज के प्रायः सभी ठाकुर विग्रह पूरे श्रावण मास यह मिष्ठान अगोरते रहते हैं। भगवान शिव को श्रावण मास अत्यंत प्रिय है।</p>
<p>जो व्यक्ति पूरे श्रावण मास भर उनकी पूजा-अर्चना व व्रत आदि के द्वारा उन्हें प्रसन्न कर लेते हैं,उनकी समस्त मनोकामनायें पूर्ण हो जातीं हैं। श्रीधाम वृन्दावन के वंशीवट क्षेत्र स्थित गोपीश्वर महादेव मंदिर में इस मास शिव भक्तों का तांता लगा रहता है। भक्तगण उनका रुद्राभिषेक कर भांति-भांति से उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।</p>
<p>ब्रज में श्रावण शुक्ल तृतीया को हरियाली तीज का त्योहार अत्यंत श्रद्धा व धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस पर्व में माँ पार्वती की पूजा का विधान है। ऐसा माना जाता है कि इसी व्रत के फल-स्वरूप पार्वती जी ने भगवान शिव को प्राप्त किया था। ब्रज में हरियाली तीज का त्योहार यहां की जीवन-शैली का एक अविभाजित हिस्सा है।</p>
<p>यहाँ यह त्योहार भगवान श्रीकृष्ण और उनकी आल्हादिनी शक्ति राधा रानी के &#8220;झूलनोत्सव&#8221; के रूप में तीज से लेकर रक्षा बंधन तक पूरे 13 दिनों अत्यंत धूमधाम के साथ मनाया जाता है। साथ ही यहाँ इन दिनों सर्वत्र हिंडोला उत्सव की बहार आ जाती है। इस उत्सव के दौरान यहां के हर एक मन्दिर में हिंडोला पड़ जाता है और उनमें नित्य-प्रति संगीत की मृदुल स्वर लहरियों के मध्य झूले के पदों का गायन प्रारंभ हो जाता है।</p>
<p>स्वर्ण व रजत मण्डित एवं विशाल व कलात्मक हिंडोले केवल ब्रज के मंदिरों में हीं दिखाई देते हैं। जो कि यहां के मंदिरों के वैभव व सम्पन्नता के प्रतीक हैं ।ब्रज के मन्दिरों में &#8220;हिंडोला उत्सव&#8221; अर्थात &#8220;झूलनोत्सव&#8221; का शुभारंभ महाप्रभु बल्लभाचार्य के समय में हुआ था।</p>
<p>हरियाली तीज पर वृन्दावन का विश्वविख्यात ठाकुर बाँके-बिहारी मंदिर सभी के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहता है। क्योंकि यहां वर्ष भर में केवल इसी एक दिन ठाकुर बाँके बिहारी जी महाराज को सोने व चांदी से बने अत्यंत भव्य व विशाल 218 किलो वजनी हिंडोले में झुलाया जाता है। यह हिंडोला सन 1947 में ठाकुर श्री बाँके बिहारी महाराज के अनन्य भक्त सेठ स्व. हरगुलाल बेरीवाला ने वाराणसी से कुशल कारीगरों को बुलाकर बनवाया था। यह हिंडोला उत्कृष्ट कारीगरी का नायाब नमूना है।</p>
<p>ठाकुर राधा-रमण मन्दिर वृन्दावन का प्रख्यात मन्दिर है। यहां हरियाली तीज के प्रथम तीन दिन सोने,अगले तीन दिन चांदी और फिर पूर्णिमा तक के शेष साथ दिन तक फूल-पत्ती आदि के भव्य हिंडोलों में लम्बे-लम्बे झोटे देकर ठाकुर जी को झुलाया जाता है।</p>
<p>वृन्दावन के ठाकुर राधादामोदर मन्दिर में हरियाली तीज से रक्षा बन्धन पर्यंत झूलन यात्रा महोत्सव की अत्यधिक धूम रहती है। इस दौरान ठाकुर जी को काष्ठ से सुसज्जित हिंडोले में झुलाया जाता है। इस दर्शन हेतु भक्त श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। साथ ही लोग-बाग इस मंदिर की चार परिक्रमा भी करते हैं। क्योंकि यह मान्यता है कि इस मंदिर की चार परिक्रमा करने गिरिराज गोवर्धन की सप्तकोसीय परिक्रमा का पुण्य फल प्राप्त होता है।</p>
<p>उत्तर को दक्षिण से जोड़ने वाले वृन्दावन के प्रख्यात ठाकुर रँगलक्ष्मी मन्दिर में चांदी और शाहजी मन्दिर में सोने के हिंडोले में ठाकुर जी को झुलाया जाता है। शाहजी मन्दिर में रक्षा बंधन के दिन भक्त-श्रद्धालुओं को झाड-फ़ानूश से सुसज्जित बसन्ती कमरे के दर्शन भी कराए जाते हैं। यह कमरा वर्ष भर में केवल रक्षा बंधन व बसंत पंचमी पर ही खोला जाता है।</p>
<p>राधारानी की क्रीड़ा स्थली बरसाना के श्रीजी मन्दिर में भी हिंडोला उत्सव हरियाली तीज से रक्षा बन्धन तक मनाया जाता है। इस दौरान राधारानी के श्रीविग्रह को भव्य स्वर्ण हिंडोले में गीत-संगीत की मृदुल स्वर लहरियों के साथ झुलाया जाता है। जबकि नंदगांव के नन्दबाबा मन्दिर में ठाकुर जी को विशालकाय चांदी के हिंडोले में झुलाया जाता है।</p>
<p>भगवान श्रीकृष्ण के अग्रज ठाकुर दाऊदयाल की नगरी बल्देव के दाऊजी मन्दिर में श्रावण शुक्ल एकादशी से श्रावण शुक्ल पूर्णिमा तक भगवान श्रीकृष्ण के अग्रज दाऊजी व उनकी भार्या रेवती मैया के श्रीविग्रहों के समक्ष जगमोहन में 15-15 फुट के स्वर्ण व रजत जड़ित हिंडोले स्थापित कर दिये जाते हैं। साथ ही स्वर्ण जड़ित दर्पण में पड़ने वाले दाऊजी और रेवती मैया के प्रतिविम्बों को उक्त हिंडोलों में झुलाया जाता है। क्योंकि इन दौनों के विग्रह बड़े होने के कारण हिंडोलों में विराजित नही किये जा सकते हैं।</p>
<p>मथुरा के ठाकुर द्वारिकाधीश मन्दिर एवं गोकुल के विभिन्न बल्लभकुलीय मन्दिरों में श्रावण के प्रारंभ से रक्षाबंधन तक निरन्तर एक माह प्रतिदिन ठाकुर जी को हिंडोले में अत्यंत भाव व श्रद्धा के साथ झुलाया जाता है।यहाँ सोने का एक एवं चांदी के दो विशालकाय हिंडोले हैं। द्वारिकाधीश मन्दिर में हिंडोला उत्सव प्रायः श्रावण कृष्ण द्वितीया से प्रारंभ होकर भाद्र कृष्ण द्वितीया तक चलता है। इस दौरान श्रावण शुक्ल अष्टमी को लाल घटा, श्रावण शुक्ल दशमी को गुलाबी घटा, श्रावण शुक्ल द्वादशी को काली घटा, श्रावण शुक्ल चतुर्दशी को लहरिया घटा सजाई जाती है।</p>
<p>इस अनूठे हिंडोला झूलनोत्सव के दर्शन करने के लिए अपने देश के सुदूर प्रांतों से और विदेशों से भी असँख्य दर्शनार्थी यहां प्रतिवर्ष आते हैं। जो कि यहां के विभिन्न मंदिरों में सजाये गए हिंडोलों और घटाओं के मध्य राधा-कृष्ण के अद्भुत रूप-माधुर्य का दर्शन सुख प्राप्त कर कृतार्थ होते हैं। इस प्रकार समूचा ब्रज पूरे श्रावण मास सोने, चांदी व पुष्पों से आच्छादित हिंडोलों के द्वारा श्यामा-श्याम मय रहता है।</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>(लेखक वरिष्ठ साहित्यकार व आध्यात्मिक पत्रकार हैं)</strong></span></p>
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		<item>
		<title>Special on World Poetry Day : ग्रीस कवि सोलोन की कविता का चमत्कारिक प्रभाव !</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/22738</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Mar 2025 14:46:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[Day]]></category>
		<category><![CDATA[poetry]]></category>
		<category><![CDATA[special]]></category>
		<category><![CDATA[WORLD]]></category>
		<category><![CDATA[कवि]]></category>
		<category><![CDATA[ग्रीस]]></category>
		<category><![CDATA[चमत्कारिक प्रभाव]]></category>
		<category><![CDATA[सोलोन की कविता]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>PRESENTED BY GAURAV AWASTHI  विश्व कविता दिवस (21 मार्च) पर विशेष ========================= ग्रीस के एथेन्स...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000">PRESENTED BY GAURAV AWASTHI </span></strong></p>
<p><em><strong><span style="color: #993300">विश्व कविता दिवस (21 मार्च) पर विशेष</span></strong></em></p>
<p><em><strong><span style="color: #993300">=========================</span></strong></em></p>
<p>ग्रीस के एथेन्स नगर के उच्च कुल (कबीले) में 630 ईसा पूर्व में जन्मे महान कवि सोलोन को दार्शनिक और समाज सुधारक के रूप में भी जाना जाता है। देशभक्ति और संवैधानिक सुधार पर उन्होने कई गीत लिखे। उनके एक गीत की पंक्तियां है-&#8216;कुछ दुष्ट लोग धनी होते हैं, कुछ अच्छे लोग निर्धन होते हैं,हम उनके भण्डार के बदले अपना पुण्य नहीं बदलेंगे, पुण्य ऐसी वस्तु है जिसे कोई छीन नहीं सकता, परन्तु धन तो दिन भर मालिक बदलता रहता है..&#8217; &#8216;..उन दोनों के सामने मैंने अपनी शक्ति की ढाल थामी और किसी को भी दूसरे के अधिकार को छूने नहीं दिया..&#8217;।</p>
<p>पुराने ज़माने में ग्रीस के एथेन्स नगरवाले मेगारावालों से वैरभाव रखते थे। सोरोनिक खाड़ी में सलामिस टापू पर कब्जे के लिए एथेंस और मेगारा वालों के बीच कई बार लड़ाइयां हुई पर हर बार एथेन्सवालों ही को हार का सामना करना पड़ता। इस पर सोलोन को बड़ी आत्मग्लानि हुई। उन्होने एक राष्ट्रवादी कविता लिखी-&#8220;आओ हम सलामिस चलें और उस द्वीप के लिए लड़ें जिसे हम चाहते हैं, और अपनी कड़वी शर्म से दूर भागें!&#8221;। अपनी इस कविता को सोलन ने एक ऊँची जगह पर चढ़कर एथेन्सवालों को सुनाया।</p>
<p>कविता का भावार्थ यह था- &#8220;मैं एथेन्स में न पैदा होता तो अच्छा था। मैं किसी और देश में क्यों न पैदा हुआ ? मुझे ऐसे देश में पैदा होना था जहाँ के निवासी मेरे देशवासियों से अधिक वीर, अधिक कठोर-हृदय और उनकी विद्या से बिलकुल बेखबर हों। मैं अपनी वर्तमान अवस्था की अपेक्षा उस अवस्था में अधिक सन्तुष्ट होता। यदि मैं किसी ऐसे देश में पैदा होता तो लोग मुझे देखकर यह तो न कहते कि यह आदमी लड़ाई में हार गये और लड़ाई के मैदान से भाग निकले। प्यारे देशबन्धु, अपने शत्रुओं से जल्द हार का बदला लो। अपने इस कलंक को धो डालो। लज्जाजनक पराजय के अपयश को दूर कर दो। जब तक अपने अन्यायी शत्रुओं के हाथ से अपना छिना हुआ देश न छुड़ा लो तब तक एक मिनट भी चैन से न बैठो।&#8221;</p>
<p>कहते हैं कि लोगों के दिल पर इस कविता का इतना असर हुआ कि फौरन मेगारावालों पर फिर चढ़ाई कर दी गयी और जिस टापू पर कब्जे के लिए बार-बार हार का सामना करना पड़ रहा था, उसे एथेन्सवालों ने जीत लिया। खास बात यह थी कि इस लड़ाई में सोलोन ही सेनापति भी थे। कवि सोलोन ग्रीस के सात संतों में से एक हैं। फूलदार पौधों की एक प्रजाति सोलोनिया का नाम सोलोन के नाम पर ही रखा गया है। सोलोन की मृत्यु साइप्रस में लगभग 70 वर्ष की आयु में हुई। उनकी इच्छा के अनुसार, उनकी राख को सलामिस के आसपास बिखेर दिया गया। यह वह द्वीप है जहाँ उनका जन्म हुआ था। दुनिया में बहुत कम कवि हैं, जिनकी कविता का इतना अधिक प्रभाव आम जनमानस पर हुआ।</p>
<p>आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने सरस्वती के जुलाई&#8217;1907 अंक में &#8216;कवि और कविता&#8217; नामक निबंध में कवि सोलोन के इस प्रसंग को उद्धृत करते हुए आधुनिक कविता के संदर्भ में कुछ मानक निर्धारित किए थे। यह आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होने लिखा था-&#8216;जिस पद्य के पढ़ने या सुनने से चित्त पर असर नहीं होता, वह कविता नहीं, वह नपी-तुली शब्द स्थापना मात्र है। गद्य और पद्य दोनों में कविता हो सकती है। तुकबन्दी और अनुप्रास कविता के लिए अपरिहार्य नहीं। संस्कृत का प्रायः सारा पद्य समूह बिना तुकबन्दी का है और संस्कृत से बढ़कर कविता शायद ही किसी और भाषा में हो। अरब में भी सैकड़ों अच्छे-अच्छे कवि हो गये हैं। वहाँ भी शुरू-शुरू में तुकबन्दी का बिलकुल ख़याल न था। अंग्रेज़ी में भी अनुप्रासहीन बेतुकी कविता होती है। हाँ, एक ज़रूरी बात है कि वज़न और क़ाफ़िये से कविता अधिक चित्ताकर्षक हो जाती है पर कविता के लिए यह बातें ऐसी ही हैं जैसे शरीर के लिए वस्त्राभरण।</p>
<p>उनका मानना है कि पद्य के लिए काफ़िये वगैरह की जरूरत है, कविता के लिए नहीं। कविता के लिए तो ये बातें एक. प्रकार से उलटी हानिकारक हैं। तुले हुए शब्दों में कविता करने और तुक, अनुप्रास आदि ढूँढ़ने से कवियों के विचार-स्वातन्त्र्य में बड़ी बाधा आती है। पद्य के नियम कवि के लिए एक प्रकार की बेड़ियों हैं। उनसे जकड़ जाने से कवियों को अपनी स्वाभाविक उड़ान में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कवि का काम है कि वह अपने मनोभावों को स्वाधीनता पूर्वक प्रकट करे। काफिया और वजन उसकी स्वाधीनता में विघ्न डालते हैं। अच्छी कविता की सबसे सबसे बड़ी परीक्षा यह है कि उसे सुनते ही लोग बोल उठें-&#8216; सच कहा&#8217;। जिस देश में ऐसे कई पैदा होते हैं, वह देश भी धन्य है। ऐसे कवियों की कविता ही चिरकाल तक जीवित रहती है।</p>
<p>यद्यपि आचार्य जी के साहित्यिक जीवन का आरंभ 1889 में बृजभाषा में लिखी कविताओं से ही हुआ पर उन्होने ईमानदारी से स्वीकार किया-&#8216;कविता करना आप लोग चाहे जैसा समझें हमें तो एक तरह दुस्साध्य ही जान पड़ता है। अज्ञता और अविवेक के कारण कुछ दिन हमने भी तुकबन्दी का अभ्यास किया था। पर कुछ समझ आते ही हमने अपने को इस काम का अनधिकारी समझा। अतएव उस मार्ग से जाना ही प्रायः बन्द कर दिया ।&#8221; अपने स्वाध्याय के बल पर उन्होने कविता को बृजभाषा की जकड़न से निकालने के लिए समय-समय पर &#8216;कविता&#8217;, &#8216;कवि कर्तव्य&#8217;, &#8216;कविता का भविष्य&#8217;, &#8216;कवियों की उर्मिला विषयक उदासीनता&#8217; और &#8216;आजकल के छायावादी कवि और कविता&#8217; लेखों के माध्यम से अपने समय के कवियों का मार्गदर्शन भी किया।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>HOLI SPECIAL : होली_के_रंग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Mar 2025 08:04:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[Holi]]></category>
		<category><![CDATA[special]]></category>
		<category><![CDATA[रंग]]></category>
		<category><![CDATA[रचना]]></category>
		<category><![CDATA[होली]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Composition By Kripa Shankar Vikram कुछ हमारी होली के मुहब्बत भरे रंग से जल जाते...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #993300"><strong>Composition By Kripa Shankar Vikram</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>कुछ हमारी होली के मुहब्बत भरे रंग से जल जाते हैं!</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>कुछ हमारी शोहबत और संग से जल जाते हैं !!</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>जिनको नफरत है मजहबी भाईचारे से !</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>वो हमारी कौम की रवायत के ढंग से जल जाते हैं !!</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>हिफाजत हम भी रखते हैं पर्वो में सभी मां और बहनों का !</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>अब जिनका मन ही गन्दा हो वो बजते हुए मृदंग से जल जाते हैं !!</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>रंग दुनिया में प्रकृति का सौहार्दिक पैगाम लाते हैं !</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>रंगों के आयाम में ईश्वर, अल्लाह, मुर्शिद मलंग बदल जाते हैं !!</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>जिस अबीर ,गुलाल को हम मस्तक पर लगाते हैं !</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>उससे यहां कुछ लोगों के नाज़ुक अंग जल जाते हैं !!</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f449.png" alt="👉" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" />जिन्हें रंग खेलना व्यक्तिगत् पसंद नहीं है वो किसी दूसरे के रंग में भंग न डालें!  </strong></span><strong style="color: #ff00ff"> </strong></p>
<p><strong style="color: #ff00ff">रंगोत्सव के पावन पर्व होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!<img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f940.png" alt="🥀" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f940.png" alt="🥀" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /></strong></p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>Special On International Women&#8217;s Day : विकलांगता को मात देकर बनीं प्रेरणा स्रोत बनी अमेठी की रोशनी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Mar 2025 16:06:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[International]]></category>
		<category><![CDATA[special]]></category>
		<category><![CDATA[Women's Day]]></category>
		<category><![CDATA[अमेठी की रोशनी]]></category>
		<category><![CDATA[प्रेरणा स्रोत]]></category>
		<category><![CDATA[मात]]></category>
		<category><![CDATA[विकलांगता]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY SHIVLAL YADAV  AMETHI NEWS। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिले के शाहगढ़...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><em><strong>REPORT BY SHIVLAL YADAV </strong></em></span></p>
<p><em><strong>AMETHI NEWS।</strong></em></p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिले के शाहगढ़ की एक दिव्यांग महिला रोशनी की प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। रोशनी ने अपनी विकलांगता को कभी भी अपनी प्रगति में बाधा नहीं बनने दिया और आज वह न केवल एक आत्मनिर्भर महिला हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं।</p>
<p>रोशनी को बचपन से ही विकलांगता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अपनी प्रारंभिक कठिनाइयों और समाज के उपहास के बावजूद, उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की और सिलाई, कढ़ाई और ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण लिया।</p>
<p>रोशनी ने अपने कौशल का उपयोग करके अपना खुद का स्वरोजगार शुरू किया और जल्द ही अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने में सफल रही।</p>
<p>रोशनी एक प्रतिभाशाली महिला हैं और सोशल मीडिया पर उनकी फैन फॉलोइंग बहुत बड़ी है। इसके अलावा, वह एक प्रतिभाशाली गायिका भी हैं और अवधी लोकगीतों में उनकी आवाज बहुत पसंद की जाती है।</p>
<p>&#8220;मैं अपनी विकलांगता को कभी भी अपनी प्रगति में बाधा नहीं बनने दूंगी। मैं अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार शुरू करने में मदद करना चाहती हूं,&#8221; रोशनी कहती हैं। <img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-22571" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250307-WA0025-1024x770.jpg" alt="" width="640" height="481" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250307-WA0025-1024x770.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250307-WA0025-300x226.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250307-WA0025-768x578.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250307-WA0025.jpg 1280w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>रोशनी की कहानी उन सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है जो अपनी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। यह हमें सिखाती है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से कुछ भी संभव है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>SPECIAL WEB STORY : अटकलों का बाजार गर्म&#8230;. भोजपुरी स्टार करेंगे तीसरी शादी !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Jan 2025 07:21:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[pawan Singh]]></category>
		<category><![CDATA[special]]></category>
		<category><![CDATA[WEB STORY]]></category>
		<category><![CDATA[अटकलों का बाजार]]></category>
		<category><![CDATA[गर्म]]></category>
		<category><![CDATA[तीसरी शादी]]></category>
		<category><![CDATA[भोजपुरी]]></category>
		<category><![CDATA[स्टार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>WEB STORY  भोजपुरी स्टार पवन सिंह अक्सर ही सोशल साइट पर छाए रहते हैं वह...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/21724">SPECIAL WEB STORY : अटकलों का बाजार गर्म&#8230;. भोजपुरी स्टार करेंगे तीसरी शादी !</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>WEB STORY </strong></span></p>
<p>भोजपुरी स्टार पवन सिंह अक्सर ही सोशल साइट पर छाए रहते हैं वह कंट्रोवर्सी का शिकार होते रहते हैं। इसके साथ ही विगत लोकसभा चुनाव में काराकाट सीट से चुनाव लड़कर खूब सुर्खियां बटोरी। इस बार किसी और वजह से नहीं वह अपनी तीसरी शादी को लेकर सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रहे हैं।</p>
<p>अब यह अफवाह है या कुछ और ही तो समय ही बताएगा। फिलहाल अटकलें की माने तो भोजपुरी स्&#x200d;टार पवन सिंह जल्&#x200d;द ही तीसरी शादी कर सकते हैं।भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह की मां ने बेटे के जीवन में नई शुरुआत के संकेत दिए हैं । पवन सिंह की मां ने कहना है कि 2025 में हल्&#x200d;ला मचेगा। इसके बाद अटकलें लगाई जा रही हैं कि भोजपुरी स्&#x200d;टार पवन सिंह तीसरी शादी कर सकते हैं।</p>
<p><strong><span style="color: #ff6600">अटकलों का बाजार ऐसे हुआ गर्म </span></strong></p>
<p>बता दें कि हाल ही में पांच जनवरी को पवन सिंह ने अपना जन्&#x200d;मदिन मनाया था। पवन सिंह के जन्&#x200d;मदिन पर लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्&#x200d;ठान में बर्थडे पार्टी का आयोजन किया गया था। इस दौरान दिग्&#x200d;गज कलाकारों के साथ अभिनेत्री चांदनी भी नजर आई थीं। चांदनी और पवन सिंह की मां प्रतिमा सिंह की तस्&#x200d;वीरें भी खूब वायरल हुई थीं।अभिनेत्री चांदनी हाथों में मेहंदी और लाल साड़ी पहनकर पहुंची थीं।</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>पवन सिंह की मां ने दिए ये संकेत </strong></span></p>
<p>इस दौरान पवन की मां प्रतिमा सिंह ने बेटे के जीवन में नई शुरुआत के संकेत दिए थे। पवन सिंह की मां ने कहा था कि 2025 में हल्ला मचेगा। पवन सिंह की मां ने एक इंटरव्यू में कहा कि बेटे का जीवन बदल जाए.. इहे आशीर्वाद बा.. 2025 में हल्ला मचेगा।हमारे बेटे को खुश रहने का पूरा हक है। अगर वह कोई नई शुरुआत करना चाहता है, तो हम उसका साथ देंगे।</p>
<p><strong><span style="color: #993300">पवन सिंह के बर्थडे पार्टी में साथ साथ नजर आई अभिनेत्री चांदनी </span></strong></p>
<p>विगत 5 जनवरी को पवन सिंह के बर्थडे पार्टी में अभिनेत्री चांदनी अन्य दिग्गज कलाकारों के साथ साथ दिखी लेकिन पवन सिंह के साथ ही पूरे समय दिखी। बर्थडे पार्टी पर पवन सिंह का हाथ पकड़कर चांदनी सिंह खड़ी नजर आई थी, सबकी नजरें उन्&#x200d;हीं पर थीं।</p>
<p>इनसे अटकलों का बाजार गर्म हो गया। चर्चा है कि पवन सिंह तीसरी शादी कर सकते हैं। पवन सिंह के बर्थडे पार्टी पर कई बीजेपी के नेता भी पहुंचे थे। इतना ही नहीं बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह भी पवन सिंह के साथ नजर आए थे।</p>
<p><span style="color: #800000"><strong>आईये पवन सिंह के बारे में जानते हैं <img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-21725 alignleft" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/01/images-3.jpeg" alt="" width="160" height="200" /></strong></span></p>
<p>पवन सिंह भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के एक जाने-माने गायक, अभिनेता और निर्माता हैं। उनका जन्म 5 जनवरी 1986 को बिहार के आरा जिले में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत भोजपुरी एल्बम &#8220;ओढ़निया वाली&#8221; (1997) से की थी, लेकिन उन्हें असली पहचान 2008 में आए उनके सुपरहिट गाने &#8220;लॉलीपॉप लागेलु&#8221; से मिली। यह गाना आज भी भोजपुरी म्यूजिक इंडस्ट्री का सबसे प्रसिद्ध गाना माना जाता है।</p>
<p>पवन सिंह ने गायकी के साथ-साथ फिल्मों में भी काम किया और कई सुपरहिट भोजपुरी फिल्मों का हिस्सा बने। उनकी प्रमुख फिल्मों में &#8220;सत्यमेव जयते&#8221;, &#8220;त्रिदेव&#8221;, &#8220;पवन राजा&#8221;, और &#8220;मैंने उनको सजन चुन लिया&#8221; शामिल हैं।</p>
<p>वे अपनी दमदार आवाज़, एक्शन से भरपूर अभिनय और लोकप्रियता के कारण भोजपुरी सिनेमा के &#8220;पावर स्टार&#8221; कहे जाते हैं। पवन सिंह ने कई अवॉर्ड भी जीते हैं और उनके फैंस उन्हें भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार के रूप में देखते हैं।</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>पवन सिंह की वैवाहिक स्थिति</strong> </span></p>
<p>पवन सिंह की वैवाहिक स्थिति ने हमेशा लोगों का ध्यान खींचा है। पवन सिंह ने 2014 में नीलम सिंह से पहली शादी की थी। हालांकि, 2015 में उनकी पत्नी नीलम सिंह ने आत्महत्या कर ली, जिससे पवन सिंह और उनके परिवार को गहरा आघात पहुंचा। इस घटना का कारण स्पष्ट नहीं हो सका, लेकिन इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गईं।</p>
<p>2018 में पवन सिंह ने ज्योति सिंह से दूसरी शादी की। ज्योति सिंह उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की रहने वाली हैं और एक सामान्य परिवार से आती हैं। यह शादी एक पारिवारिक और निजी समारोह में हुई थी।</p>
<p>हालांकि, 2022 के आसपास खबरें आईं कि पवन सिंह और ज्योति सिंह के रिश्ते में तनाव है, और पवन सिंह ने तलाक की अर्जी भी दी थी। पवन सिंह की व्यक्तिगत जिंदगी अक्सर चर्चा में रहती है, लेकिन उनके प्रशंसक उन्हें उनके गानों और अभिनय के लिए प्यार करते हैं।</p>
<p>पवन सिंह की तीसरी शादी को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म है। इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो आने वाला समय ही बता पाएगा कहते हैं। जब होती है तभी धुआं उठता है सितारा बिना कुछ बात के अफवाहों का बाजार गर्म नहीं हो रहा है</p>
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		<title>SPECIAL ON GANESHOTSAV : रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ, बुद्धि-विवेक, कीर्ति-वैभव और यश-ऐश्वर्य के दाता हैं भगवान गणेश </title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/20521</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Sep 2024 15:56:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
		<category><![CDATA[GANESHOTSAV]]></category>
		<category><![CDATA[special]]></category>
		<category><![CDATA[कीर्ति-वैभव]]></category>
		<category><![CDATA[गणेशजी]]></category>
		<category><![CDATA[दाता]]></category>
		<category><![CDATA[बुद्धि-विवेक]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान गणेश]]></category>
		<category><![CDATA[यश-ऐश्वर्य]]></category>
		<category><![CDATA[रिद्धि-सिद्धि]]></category>
		<category><![CDATA[शुभ-लाभ]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>PRESENTED BY DR GOPAL CHATURVEDI  वैदिक सनातन संस्कृति में भगवान गणेश को ही सर्वप्रथम पूज्य...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/20521">SPECIAL ON GANESHOTSAV : रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ, बुद्धि-विवेक, कीर्ति-वैभव और यश-ऐश्वर्य के दाता हैं भगवान गणेश </a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>PRESENTED BY DR GOPAL CHATURVEDI </strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-20492" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240909-WA0577.jpg" alt="" width="150" height="199" /></p>
<p>वैदिक सनातन संस्कृति में भगवान गणेश को ही सर्वप्रथम पूज्य देव माना गया है।किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले उन्ही की पूजा की जाती है।क्योंकि माता लक्ष्मी के आशीर्वाद से वे रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ, बुद्धि-विवेक, कीर्ति-वैभव और यश-ऐश्वर्य के दाता हैं। वे जब भी हमारे आवाहन पर हमारे घर में आते हैं,तो उनके साथ ये सब भी हमारे जीवन में प्रवेश करते हैं।इसलिए गणेशजी को कभी भी विदा नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि विघ्न हरता ही अगर विदा हो गए, तो हमारे विघ्न कौन हरेगा।</p>
<p>वर्तमान में अधिकतर लोग एक दूसरे की देखा-देखी गणेशजी की प्रतिमा स्थापित कर रहे हैं, और 3 या 5 या 7 या 11 दिन की पूजा के उपरांत उनका विसर्जन भी कर रहे हैं।</p>
<p>आप सब से निवेदन है कि आप गणपति की स्थापना करें पर विसर्जन नही। विसर्जन केवल महाराष्ट्र में ही होता हैं। क्योंकि गणपति वहाँ एक मेहमान बनकर गये थे।एक बार महाराष्ट्र में भयंकर अकाल पड़ा और भीषण आर्थिक तंगी हुई। तब कार्तिकेय ने अपने भाई गणेशजी को रिद्धि-सिद्धि सहित आमंत्रित करके कुछ दिन वहाँ रहने का आग्रह किया था।जितने दिन गणेशजी वहां रहे, उतने दिन माता लक्ष्मी और उनकी पत्नी रिद्धि व सिद्धि वहीँ रही। इनके रहने से लाल बाग धन धान्य से परिपूर्ण हो गया। तब कार्तिकेय ने उतने दिन का गणेशजी को लालबाग का राजा मानकर सम्मान दिया था। यही पूजन महाराष्ट्र में गणपति उत्सव के रूप में प्रतिवर्ष मनाया जाने लगा।</p>
<p>अब रही बात देश के अन्य स्थानों की तो गणेशजी हमारे घर के मालिक हैं और घर के मालिक को कभी विदा नही किया जाता। वहीं अगर हम गणपतिजी का विसर्जन करते हैं तो उनके साथ लक्ष्मी व रिद्धि सिद्धि भी चली जायेगी, तो जीवन में बचेगा ही क्या।</p>
<p>हम बड़े शौक से कहते हैं &#8220;गणपति बाप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ&#8221; इसका मतलब हमने एक वर्ष के लिए गणेशजी और लक्ष्मीजी आदि को जबरदस्ती पानी में बहा दिया, तो आप खुद सोचो कि आप किस प्रकार से नवरात्रि पूजा करोगे। किस प्रकार दीपावली पूजन करोगे और क्या किसी भी शुभ कार्य को करने का अधिकार रखते हो, क्योंकि आपने उन्हें एक वर्ष के लिए उन्हें विदा कर भेज दिया।</p>
<p>इसलिए गणेशजी की स्थापना करें पर विसर्जन कभी न करें।आधुनिक युग में बाहुबली गणेश, सेल्फ़ी लेते हुए, स्कूटर चलाते हुए, ऑटो चलाते हुए, बॉडी बिल्डर, सिक्स पैक या अन्य किसी प्रकार के अभद्र स्वरुप में गणेशजी को बिठाने का कोई औचित्य नहीं है।इससे केवल सनातन धर्म की हँसी उड़ाई जा रही है।</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>(लेखक प्रख्यात साहित्यकार एवं अध्यात्मविद हैं, लेख में उनके अपने विचार हैं ) </strong></span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/20521">SPECIAL ON GANESHOTSAV : रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ, बुद्धि-विवेक, कीर्ति-वैभव और यश-ऐश्वर्य के दाता हैं भगवान गणेश </a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
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		<item>
		<title>SPECIAL ON RAKSHA BANDHAN : भाई-बहन के अटूट रिश्ते और प्रेम का पर्व है रक्षाबंधन, जानिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/20078</link>
					<comments>https://www.lokdastak.com/archives/20078#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Aug 2024 02:52:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[#RAKSHABANDHAN]]></category>
		<category><![CDATA[#रक्षाबंधन]]></category>
		<category><![CDATA[special]]></category>
		<category><![CDATA[अटूट रिश्ते]]></category>
		<category><![CDATA[प्रेम का पर्व]]></category>
		<category><![CDATA[भाई-बहन]]></category>
		<category><![CDATA[राखी बांधने का शुभ मुहूर्त]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.lokdastak.com/?p=20078</guid>

					<description><![CDATA[<p>&#160; REPORT BY LOK REPORTER  रक्षाबंधन का शुभ मूहुर्त 01: 35 से 04: 20 मिनट...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/20078">SPECIAL ON RAKSHA BANDHAN : भाई-बहन के अटूट रिश्ते और प्रेम का पर्व है रक्षाबंधन, जानिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY LOK REPORTER </strong></span></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>रक्षाबंधन का शुभ मूहुर्त 01: 35 से 04: 20 मिनट तक </strong></span></p>
<p>आज देशभर में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा है I भाई-बहन के स्नेह का पर्व रक्षाबंधन प्रतिवर्ष श्रावण माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहनें, भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं तथा मस्तक पर तिलक लगा कर मुंह मीठा कराती हैं। भाई, बहन को उपहार देते है तथा उनकी रक्षा का वचन देते हैं।</p>
<p>रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट रिश्ते और प्रेम के उत्सव है I इस दिन बहनें भाई के माथे पर टीका और हाथ में रक्षा सूत्र बांधकर उनकी मंगल कामना करती हैं I बदले में भाई अपनी बहन को रक्षा का वचन देते हैं I</p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>रक्षा बंधन त्योहार की कथाएं </strong></span></p>
<p>पौराणिक आख्यानों के अनुसार एक बार देवताओं और असुरों के मध्य लगातार 12 वर्षों तक घमासान युद्ध हुआ। इस युद्ध में देवराज इंद्र पराजित हो गए। देवगण कांतिहीन होकर, देवराज इंद्र के साथ अमरावती चले गए। असुरों ने तीनों लोकों पर अपना कब्जा जमा लिया और राजपद से घोषित किया कि सभी लोग यज्ञादि न करके, सब मेरी पूजा करें।</p>
<p>असुरों के भय के कारण  यज्ञादि धार्मिक कर्म न होने से देवताओं का प्रभावक्षीण होने लगा। तब राजा इंद्र, देवगुरु बृहस्पति की शरण में गए तथा उनसे उपाय पूछा तब देव गुरु बृहस्पति में रक्षा विधान करने को कहा और दूसरे दिन श्रावणी पूर्णिमा थी।</p>
<p>उस दिन भोर होते ही देव गुरु बृहस्पति ने &#8220;येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।” के महामंत्र से रक्षा विधान संपन्न किया तथा इंद्राणी शचि ने ब्राह्मणों से स्वस्तिवाचन करवा कर देवराज इंद्र की दाहिनी भुजा पर रक्षा सूत्र बांध दिया। रक्षा सूत्र के प्रभाव से इस बार देवताओं को विजयश्री मिली तथा असुर भाग खड़े हुए। तभी से रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा चली आ रही है।</p>
<p>महाभारत में एक स्थान पर वर्णित है की एक बार भगवान श्रीकृष्ण को हाथ में चोट लग गईl जिससे रक्त निकलने लगाl द्रौपदी ने ज्यों ही देखा, अभिलंब अपनी साड़ी को फाड़ कर श्रीकृष्ण के हाथ पर बांध दिया। परिस्थितियों बस दु:शासन द्वारा चीरहरण के समय भगवान श्री कृष्ण ने अपनी बहन द्रोपदी के मान को सुरक्षित रखा।</p>
<p>प्राचीन काल में ऋषिगण श्रावणी पूर्णिमा को “उपाकर्म” करा कर विद्या अध्ययन आरम्भ कराते थे। वहीं एक ऐतिहासिक घटना के अनुसार रानी कर्णावती के राज्य को गुजरात के बादशाह बहादुर शाह ने घेर लिया। उस समय राजा का देहांत हो गया था।</p>
<p>असहाय रानी ने दिल्ली के मुगल शासक हुमायूँ को अपना भाई मानते हुए दूत के हाथों राखी भेजवाई। हुमायूं ने राखी का शिकार करते हुए रानी कर्णावती की मदद के लिए चल पड़ा और बहादुर शाह से युद्ध किया और बहन की रक्षा का फर्ज निभाया।</p>
<p>रक्षा की कामना किसी आत्मीय सम्बंधी द्वारा ही की जा सकती है। इसलिये रक्षा सूत्र बहने भाई को और पुरोहित अपने यजमान को बांधते है। परंतु वर्तमान में पुरोहित द्वारा यजमानो को आज के दिन रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा समाप्त सी हो गई है।</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>भद्रा काल में नहीं बांधी जाती है राखी क्या है कारण !</strong></span></p>
<p>कहा जाता है कि भद्रा शनिदेव की बहन थी। भद्रा को ब्रह्मा जी से यह श्राप मिला था कि जो भी भद्रा में शुभ या मांगलिक कार्य करेगा, उसका परिणाम अशुभ ही होगा। इसीलिए रक्षाबंधन पर भद्राकाल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है। ऐसा कहा जाता है कि लंकापति रावण की बहन ने भद्राकाल में ही उनकी कलाई पर राखी बांधी थी और एक वर्ष के अंदर उसका विनाश हो I</p>
<p><span style="color: #00ffff"><strong>रक्षाबंधन का शुभ मूहुर्त  </strong></span></p>
<p>इस वर्ष रक्षाबंधन पर कई तरह के संयोग बन रहे हैं। पूर्णिमा तिथि 3 बजकर 44 मिनट से शुरू होकर रात्रि  11 बजकर 55 मिनट पर समाप्त होगी। उदय तिथि के अनुसार 19 अगस्त को रक्षाबंधन मनाया जायेगा। इस दिन भद्रा भी है।</p>
<p>भद्रा सुबह 5  बजकर 53 मिनट से शुरू होकर 1 बजकर 32 मिनट तक है। जिससे रक्षा बंधन का पर्व दोपहर बाद 01.35 बजे के बाद मनाया जाएगा। इस वर्ष कई तरह के शुभ योग भी बन रहे हैं।</p>
<p>स्वार्थ सिद्वि योग, रवि योग, धनिष्ठा नक्षत्र समेत कई शुभ प्रभावकारी योगों का निर्माण हो रहा है। रक्षाबंधन का शुभ मूहुर्त समय 01 बजकर 35 मिनट से 04 बजकर 20 मिनट तक है।</p>
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