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	<title>WORLD Archives - Lok Dastak</title>
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	<description>Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak</description>
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	<title>WORLD Archives - Lok Dastak</title>
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		<title>World Skills Day : विश्व युवा कौशल दिवस का किया गया आयोजन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Jul 2025 12:49:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अमेठी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY LOK REPORTER  AMETHI NEWS। आज आईटीआई गौरीगंज में विश्व युवा कौशल दिवस का...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY LOK REPORTER </strong></span></p>
<p><em><strong>AMETHI NEWS।</strong></em></p>
<p>आज आईटीआई गौरीगंज में विश्व युवा कौशल दिवस का आयोजन किया गया। जिसमें कौशल विकास केंद्र तथा आईटीआई के छात्र-छात्राओं द्वारा मॉडल प्रदर्शनी लगाई गई, जिसका उद्घाटन जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश अग्रहरि, जिलाधिकारी संजय चौहान व मुख्य विकास अधिकारी सूरज पटेल द्वारा फीता काटकर एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया तदोपरांत प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया एवं छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन किया।</p>
<p>इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष, जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी ने 11 यूथ आइकॉन को प्रशस्ति पत्र, 11 युवाओं को नियुक्ति पत्र एवं पांच उद्यमियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि दूरदर्शी, पक्का इरादा, कड़ी मेहनत और ईमानदारी यह चार चीज होंगी तो आपको सफलता जरूर मिलेगी।</p>
<p>शासन द्वारा युवाओं के लिए अपना निजी स्टार्टअप स्थापित करने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की गई है जिससे युवा तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करते हुए अपना निजी व्यवसाय प्रारंभ कर सकते हैं इसके लिए उन्हें ऋण की भी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।<img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-23801" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250715-WA0018.jpg" alt="" width="1024" height="472" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250715-WA0018.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250715-WA0018-300x138.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250715-WA0018-768x354.jpg 768w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p>जिलाधिकारी संजय चौहान ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि हम अपने हाथ में हुनर को पैदा करें और हमारे हुनर से चार और लोगों को रोजगार मिले इसी दशा में कार्य करें। मुख्य विकास अधिकारी सूरज पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री का उद्देश्य है कि हमारे युवा अपना निजी स्टार्टअप प्रारंभ कर अन्य युवाओं को रोजगार देने वाले बने। इस अवसर पर मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना के अंतर्गत लाभ पाकर अपना स्टार्टअप चलाने वाले युवाओं ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को अपनी सफलता की कहानी बताई।<img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-23800" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250715-WA0019.jpg" alt="" width="1600" height="1066" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250715-WA0019.jpg 1600w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250715-WA0019-300x200.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250715-WA0019-1024x682.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250715-WA0019-768x512.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250715-WA0019-1536x1023.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></p>
<p>कार्यक्रम का संचालन प्रधानाचार्य राजकीय आईटीआई जायस शिवाकांत द्विवेदी के द्वारा किया गया। इस अवसर पर जिला सेवायोजन अधिकारी अनुपमा रानी, जीएमडीआईसी दिनेश कुमार चौरसिया, प्रधानाचार्य राजकीय आईटीआई गौरीगंज विवेक कुमार, संजय सिंह सीटेड, एसीसी टिकरिया के प्रतिनिधि सहित अन्य संबंधित अधिकारी, उद्यमी व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>World Homeopathy Day : बीमारी को जड़ से खत्म करती है होम्योपैथी &#8211; डॉ रमेश श्रीवास्तव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 27 Apr 2025 13:09:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्‍तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[रायबरेली]]></category>
		<category><![CDATA[Homeopathy Day]]></category>
		<category><![CDATA[Raebareli news]]></category>
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		<category><![CDATA[जड़]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ रमेश श्रीवास्तव]]></category>
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		<category><![CDATA[होम्योपैथी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY GAURAV AWASTHI RAEBARELI NEWS। इंटलेक्चुअल होम्योपैथिक ऑब्जेक्टिव समिति की ओर से शहर के...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY GAURAV AWASTHI</strong></span></p>
<p><em><strong>RAEBARELI NEWS।</strong></em></p>
<p>इंटलेक्चुअल होम्योपैथिक ऑब्जेक्टिव समिति की ओर से शहर के एक होटल में 270वां विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया गया। समारोह में जर्मनी के तृतीय होम्योपैथिक समिति में सम्मानित हुए संस्था के अध्यक्ष डॉ रमेश श्रीवास्तव एवं वैज्ञानिक सलाहकार डा रफत आलम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिले सम्मान को लेकर उन्हें बधाई के साथ स्वागत किया गया।</p>
<p>कार्यक्रम का शुभारंभ होम्योपैथिक के जनक डॉक्टर हैनीमैन की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष डॉ रमेश श्रीवास्तव ने कहा कि आज डॉक्टर के साथ-साथ बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसा इसलिए है कि आधुनिक चिकित्सा बीमारियों के एडजस्टमेंट और मैनेजमेंट पर काम करती हैं जबकि होम्योपैथ बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए काम कर रहा है।</p>
<p>बहुत सी बीमारियां जिनका इलाज आधुनिक चिकित्सा पद्धति में नहीं है उसे होम्योपैथी ठीक कर रही है। उन्होने कहा कि होम्योपैथी भले ही जर्मनी से चली हो लेकिन भारत में सबसे तेजी के साथ इसका विकास हो रहा है। डॉ श्रीवास्तव ने आमजन से होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति को अपनाने की अपील की। कार्यक्रम में बच्चों, महिलाओं व चिकित्सकों द्वारा रंगारंग प्रस्तुति दी गई। संचालन डा प्रभात श्रीवास्तव ने किया।</p>
<p>इस दौरान बड़ी संख्या में जिले भर से होम्योपैथी के डॉक्टर और अन्य क्षेत्रों के विशिष्ट जन उपस्थित रहे। संस्था की ओर से आए हुए अतिथियों को माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया।</p>
<p>कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ राजीव सिंह, डॉ प्रशांत श्रीवास्तव, डॉ सुनील त्रिवेदी, डॉ मनीष गुप्ता, डॉ आशीष श्रीवास्तव, डॉ अमर शुक्ला, डॉ के सी चौधरी, डॉ क्रांति कुमार सिंह, डॉ सुशील सोमवंशी, डॉ दिलीप गुप्ता, डॉ खालिदा, डॉ आशुतोष श्रीवास्तव, डॉ पवन वर्मा, अजमेरी बाबू आदि का सराहनीय योगदान रहा। अंत में डॉ राजीव सिंह एवं डॉ सुनील त्रिवेदी द्वारा आभार व्यक्त किया गया।</p>
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		<title>Special on World Poetry Day : ग्रीस कवि सोलोन की कविता का चमत्कारिक प्रभाव !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Mar 2025 14:46:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[Day]]></category>
		<category><![CDATA[poetry]]></category>
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		<category><![CDATA[WORLD]]></category>
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		<category><![CDATA[सोलोन की कविता]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>PRESENTED BY GAURAV AWASTHI  विश्व कविता दिवस (21 मार्च) पर विशेष ========================= ग्रीस के एथेन्स...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000">PRESENTED BY GAURAV AWASTHI </span></strong></p>
<p><em><strong><span style="color: #993300">विश्व कविता दिवस (21 मार्च) पर विशेष</span></strong></em></p>
<p><em><strong><span style="color: #993300">=========================</span></strong></em></p>
<p>ग्रीस के एथेन्स नगर के उच्च कुल (कबीले) में 630 ईसा पूर्व में जन्मे महान कवि सोलोन को दार्शनिक और समाज सुधारक के रूप में भी जाना जाता है। देशभक्ति और संवैधानिक सुधार पर उन्होने कई गीत लिखे। उनके एक गीत की पंक्तियां है-&#8216;कुछ दुष्ट लोग धनी होते हैं, कुछ अच्छे लोग निर्धन होते हैं,हम उनके भण्डार के बदले अपना पुण्य नहीं बदलेंगे, पुण्य ऐसी वस्तु है जिसे कोई छीन नहीं सकता, परन्तु धन तो दिन भर मालिक बदलता रहता है..&#8217; &#8216;..उन दोनों के सामने मैंने अपनी शक्ति की ढाल थामी और किसी को भी दूसरे के अधिकार को छूने नहीं दिया..&#8217;।</p>
<p>पुराने ज़माने में ग्रीस के एथेन्स नगरवाले मेगारावालों से वैरभाव रखते थे। सोरोनिक खाड़ी में सलामिस टापू पर कब्जे के लिए एथेंस और मेगारा वालों के बीच कई बार लड़ाइयां हुई पर हर बार एथेन्सवालों ही को हार का सामना करना पड़ता। इस पर सोलोन को बड़ी आत्मग्लानि हुई। उन्होने एक राष्ट्रवादी कविता लिखी-&#8220;आओ हम सलामिस चलें और उस द्वीप के लिए लड़ें जिसे हम चाहते हैं, और अपनी कड़वी शर्म से दूर भागें!&#8221;। अपनी इस कविता को सोलन ने एक ऊँची जगह पर चढ़कर एथेन्सवालों को सुनाया।</p>
<p>कविता का भावार्थ यह था- &#8220;मैं एथेन्स में न पैदा होता तो अच्छा था। मैं किसी और देश में क्यों न पैदा हुआ ? मुझे ऐसे देश में पैदा होना था जहाँ के निवासी मेरे देशवासियों से अधिक वीर, अधिक कठोर-हृदय और उनकी विद्या से बिलकुल बेखबर हों। मैं अपनी वर्तमान अवस्था की अपेक्षा उस अवस्था में अधिक सन्तुष्ट होता। यदि मैं किसी ऐसे देश में पैदा होता तो लोग मुझे देखकर यह तो न कहते कि यह आदमी लड़ाई में हार गये और लड़ाई के मैदान से भाग निकले। प्यारे देशबन्धु, अपने शत्रुओं से जल्द हार का बदला लो। अपने इस कलंक को धो डालो। लज्जाजनक पराजय के अपयश को दूर कर दो। जब तक अपने अन्यायी शत्रुओं के हाथ से अपना छिना हुआ देश न छुड़ा लो तब तक एक मिनट भी चैन से न बैठो।&#8221;</p>
<p>कहते हैं कि लोगों के दिल पर इस कविता का इतना असर हुआ कि फौरन मेगारावालों पर फिर चढ़ाई कर दी गयी और जिस टापू पर कब्जे के लिए बार-बार हार का सामना करना पड़ रहा था, उसे एथेन्सवालों ने जीत लिया। खास बात यह थी कि इस लड़ाई में सोलोन ही सेनापति भी थे। कवि सोलोन ग्रीस के सात संतों में से एक हैं। फूलदार पौधों की एक प्रजाति सोलोनिया का नाम सोलोन के नाम पर ही रखा गया है। सोलोन की मृत्यु साइप्रस में लगभग 70 वर्ष की आयु में हुई। उनकी इच्छा के अनुसार, उनकी राख को सलामिस के आसपास बिखेर दिया गया। यह वह द्वीप है जहाँ उनका जन्म हुआ था। दुनिया में बहुत कम कवि हैं, जिनकी कविता का इतना अधिक प्रभाव आम जनमानस पर हुआ।</p>
<p>आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने सरस्वती के जुलाई&#8217;1907 अंक में &#8216;कवि और कविता&#8217; नामक निबंध में कवि सोलोन के इस प्रसंग को उद्धृत करते हुए आधुनिक कविता के संदर्भ में कुछ मानक निर्धारित किए थे। यह आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होने लिखा था-&#8216;जिस पद्य के पढ़ने या सुनने से चित्त पर असर नहीं होता, वह कविता नहीं, वह नपी-तुली शब्द स्थापना मात्र है। गद्य और पद्य दोनों में कविता हो सकती है। तुकबन्दी और अनुप्रास कविता के लिए अपरिहार्य नहीं। संस्कृत का प्रायः सारा पद्य समूह बिना तुकबन्दी का है और संस्कृत से बढ़कर कविता शायद ही किसी और भाषा में हो। अरब में भी सैकड़ों अच्छे-अच्छे कवि हो गये हैं। वहाँ भी शुरू-शुरू में तुकबन्दी का बिलकुल ख़याल न था। अंग्रेज़ी में भी अनुप्रासहीन बेतुकी कविता होती है। हाँ, एक ज़रूरी बात है कि वज़न और क़ाफ़िये से कविता अधिक चित्ताकर्षक हो जाती है पर कविता के लिए यह बातें ऐसी ही हैं जैसे शरीर के लिए वस्त्राभरण।</p>
<p>उनका मानना है कि पद्य के लिए काफ़िये वगैरह की जरूरत है, कविता के लिए नहीं। कविता के लिए तो ये बातें एक. प्रकार से उलटी हानिकारक हैं। तुले हुए शब्दों में कविता करने और तुक, अनुप्रास आदि ढूँढ़ने से कवियों के विचार-स्वातन्त्र्य में बड़ी बाधा आती है। पद्य के नियम कवि के लिए एक प्रकार की बेड़ियों हैं। उनसे जकड़ जाने से कवियों को अपनी स्वाभाविक उड़ान में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कवि का काम है कि वह अपने मनोभावों को स्वाधीनता पूर्वक प्रकट करे। काफिया और वजन उसकी स्वाधीनता में विघ्न डालते हैं। अच्छी कविता की सबसे सबसे बड़ी परीक्षा यह है कि उसे सुनते ही लोग बोल उठें-&#8216; सच कहा&#8217;। जिस देश में ऐसे कई पैदा होते हैं, वह देश भी धन्य है। ऐसे कवियों की कविता ही चिरकाल तक जीवित रहती है।</p>
<p>यद्यपि आचार्य जी के साहित्यिक जीवन का आरंभ 1889 में बृजभाषा में लिखी कविताओं से ही हुआ पर उन्होने ईमानदारी से स्वीकार किया-&#8216;कविता करना आप लोग चाहे जैसा समझें हमें तो एक तरह दुस्साध्य ही जान पड़ता है। अज्ञता और अविवेक के कारण कुछ दिन हमने भी तुकबन्दी का अभ्यास किया था। पर कुछ समझ आते ही हमने अपने को इस काम का अनधिकारी समझा। अतएव उस मार्ग से जाना ही प्रायः बन्द कर दिया ।&#8221; अपने स्वाध्याय के बल पर उन्होने कविता को बृजभाषा की जकड़न से निकालने के लिए समय-समय पर &#8216;कविता&#8217;, &#8216;कवि कर्तव्य&#8217;, &#8216;कविता का भविष्य&#8217;, &#8216;कवियों की उर्मिला विषयक उदासीनता&#8217; और &#8216;आजकल के छायावादी कवि और कविता&#8217; लेखों के माध्यम से अपने समय के कवियों का मार्गदर्शन भी किया।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>WORLD HOSPICE AND PALITIKA CARE DAY : पैलिएटिव केयर और होस्पिस का किया गया अनावरण</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Oct 2024 12:33:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[AID]]></category>
		<category><![CDATA[Association]]></category>
		<category><![CDATA[Care]]></category>
		<category><![CDATA[CARE DAY]]></category>
		<category><![CDATA[doctors]]></category>
		<category><![CDATA[health news]]></category>
		<category><![CDATA[HOSPICE]]></category>
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		<category><![CDATA[WORLD]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY AMIT CHAWLA LUCKNOW NEWS I  विश्व हॉस्पिस और पैलिएटिव केयर दिवस पर अंतरराष्ट्रीय...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/21106">WORLD HOSPICE AND PALITIKA CARE DAY : पैलिएटिव केयर और होस्पिस का किया गया अनावरण</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY AMIT CHAWLA</strong></span></p>
<p><em><strong> LUCKNOW NEWS I </strong></em></p>
<p>विश्व हॉस्पिस और पैलिएटिव केयर दिवस पर अंतरराष्ट्रीय डॉक्टरों संघ &#8220;द साउथ एशियन जर्नल ऑफ जेरिएट्रिक मेडिसिन, सर्जरी, पैलिएटिव केयर एंड हॉस्पिस&#8221; का शुभारंभ किया।</p>
<p>वर्ल्ड होस्पिस एंड पैलिएटिव केयर डे के अवसर पर, एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल डॉक्टर्स (AID) और आस्था सेंटर फॉर जेरिएट्रिक मेडिसिन, पैलिएटिव केयर होस्पिस एवं समाज कल्याण समिति ने साउथ एशियाई जर्नल ऑफ जेरिएट्रिक मेडिसिन, सर्जरी, पैलिएटिव केयर और होस्पिस का अनावरण किया।</p>
<p>इस जर्नल का ध्यान वृद्धावस्था देखभाल, होस्पिस और पैलिएटिव केयर की अपूर्त जरूरतों को पूरा करने पर है, खासकर साउथ एशियाई के आठ देशों: अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका में।</p>
<p>इन क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती बुजुर्ग जनसंख्या के कारण जीवन-सीमा से जुड़ी बीमारियों के लिए विशेष देखभाल प्रदान करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो अब तक अनदेखा क्षेत्र रहा है। <img decoding="async" class="alignnone wp-image-21107 size-full" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241012-WA1039.jpg" alt="" width="640" height="426" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241012-WA1039.jpg 640w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241012-WA1039-300x200.jpg 300w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>अनावरण कार्यक्रम की अध्यक्षता किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ की कुलपति प्रोफेसर डॉ. सोनिया नित्यानंद ने की, और इसका नेतृत्व एम्स भोपाल के पूर्व संस्थापक निदेशक एवं जर्नल के प्रधान संपादक डॉ. संदीप कुमार ने किया, साथ ही वरिष्ठ जेरिएट्रिशियन और पैलिएटिव केयर विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक शुक्ला, जो इस जर्नल के कार्यकारी संपादक के रूप में सेवारत हैं, भी उपस्थित थे।</p>
<p>प्रोफेसर डॉ. सोनिया नित्यानंद ने जर्नल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, &#8220;इस अंतरराष्ट्रीय जर्नल की शुरुआत निस्संदेह चिकित्सा पेशेवरों, शोधकर्ताओं, और नीति निर्माताओं को एक साथ लाने और दक्षिण एशिया में वृद्ध और जीवन-सीमा वाली बीमारियों से पीड़ित लोगों की देखभाल में सुधार के लिए नवीन समाधान विकसित करने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगी।&#8221;</p>
<p>जर्नल के प्रधान संपादक, डॉ. संदीप कुमार ने अनुसंधान और शिक्षा की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, &#8220;बुजुर्ग जनसंख्या, पुरानी बीमारियों, पैलिएटिव केयर पर ध्यान केंद्रित करने और अस्पताल में भर्ती होने की लागत को कम करते हुए मरीजों की संतुष्टि प्रदान करने की दिशा में अनुसंधान और शिक्षा की आवश्यकता है।</p>
<p>दक्षिण एशियाई जर्नल ऑफ जेरिएट्रिक मेडिसिन, सर्जरी, पैलिएटिव केयर और होस्पिस इस क्षेत्र में ज्ञान और सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया जा रहा है।&#8221;</p>
<p>प्रो. राजेंद्र प्रसाद (पूर्व निदेशक, पटेल चेस्ट, नई दिल्ली), डॉ. आर.के. शर्मा (पूर्व निदेशक, एसजीपीजीआई), तथा  डॉ. वी.के. पुरी (पूर्व विभागाध्यक्ष, लारी कार्डियोलॉजी) पत्रिका के संपादक मंडल के रूप में अपना मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।</p>
<p>होस्पिस और पैलिएटिव केयर जीवन-सीमा वाली बीमारियों से पीड़ित मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए विशेष चिकित्सा सेवाएँ हैं। जहाँ पैलिएटिव केयर किसी भी बीमारी के चरण में लक्षणों से राहत और समर्थन प्रदान करता है, वहीं होस्पिस केयर जीवन के अंतिम चरण में आराम और गरिमा प्रदान करता है। <img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-21108 size-full" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241012-WA1037.jpg" alt="" width="640" height="419" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241012-WA1037.jpg 640w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241012-WA1037-300x196.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>साउथ एशियाई जर्नल ऑफ जेरिएट्रिक मेडिसिन, सर्जरी, पैलिएटिव केयर और होस्पिस, जो , एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल डॉक्टर्स (AID) के बैनर तले और आस्था सेंटर फॉर जेरिएट्रिक मेडिसिन, पैलिएटिव केयर अस्पताल, होस्पिस एवं समाज कल्याण समिति के सहयोग से स्थापित किया गया है I</p>
<p>बुजुर्गों और जीवन-सीमा वाली बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए गुणवत्तापूर्ण देखभाल को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम है, विशेष रूप से दक्षिण एशिया में, जहाँ बुजुर्ग जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>डॉ. अभिषेक शुक्ला</strong></p>
<p>एम.डी., एफ.आर.सी.पी. (एडिनबर्ग), एम.एससी. (क्लिनिकल जेरियाट्रिक्स) कार्डिफ़</p>
<p><strong>कार्यकारी संपादक –</strong> दक्षिण एशियाई जर्नल ऑफ जेरियाट्रिक मेडिसिन, सर्जरी, पल्लियेटिव केयर और हॉस्पिस।</p>
<p><strong>सचिव जनरल</strong> – अंतरराष्ट्रीय डॉक्टरों संघ।, मोबाइल &#8211; 9415015050</p>
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