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	<title>story Archives - Lok Dastak</title>
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	<description>Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak</description>
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	<title>story Archives - Lok Dastak</title>
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		<title>Story of Durga Bhabhi : असाधारण साहस और राष्ट्रप्रेम की प्रतीक थीं दुर्गा भाभी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Oct 2025 09:05:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
		<category><![CDATA[Durga Bhabhi]]></category>
		<category><![CDATA[JAYNTI]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; प्रस्तुति &#8211; अरविन्द जय तिलक बात उन दिनों की है जब भगत सिंह और...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><strong><span style="color: #ff0000">प्रस्तुति &#8211; अरविन्द जय तिलक</span></strong></h3>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-thumbnail wp-image-11283" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-150x150.jpg 150w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-24x24.jpg 24w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-48x48.jpg 48w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-96x96.jpg 96w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-300x300.jpg 300w" sizes="(max-width: 150px) 100vw, 150px" /></p>
<p>बात उन दिनों की है जब भगत सिंह और उनके क्रांतिकारी साथियों को पकड़ने के लिए ब्रिटिश हुकूमत जमीन-आसमान एक कर दी थी। भगत सिंह और उनके साथियों पर पुलिस अधिकारी साण्डर्स की हत्या का आरोप था। वह साण्डर्स जिसने साइमन कमीशन का विरोध कर रहे लाला लाजपत राय को इस हद तक पीटा की चंद दिनों के बाद ही उनकी मृत्यु हो गयी। क्रांतिकारियों ने ठान लिया कि वे लाला लाजपत राय की शहादत का बदला लेकर रहेंगे। फिर क्या था चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में भगत सिंह, राजगुरु और जयगोपाल ने लाहौर में एक पुलिस स्टेशन के सामने ही साण्डर्स को गोलियों से उड़ा दिया। देश सोए से जाग उठा।</p>
<p>साण्डर्स की मौत के दूसरे दिन ही लाहौर शहर के दीवारों पर पोस्टर लग गए और पर्चे बांटे गए, जिनपर लिखा था कि साण्डर्स मारा गया और लालाजी की शहादत का बदला ले लिया गया। पर क्रांतिकारियों के समक्ष मौंजू सवाल यह था कि आखिर भगत सिंह को लाहौर से बाहर कैसे निकाला जाए। इसकी जिम्मेदारी दुर्गा देवी वोहरा जिन्हें दुर्गा भाभी भी कहा जाता है, ने अपने कंधो पर ली। उन्होंने कमाल की योजना बनायी। जिसके मुताबिक भगत सिंह ने अपना केश कटवायी और सिर पर हैट लगाकर अंग्रेजी दा बन गए। उनको इस नई वेशभूशा में देखकर कोई नहीं कह सकता था कि यह वही भगत सिंह हैं। दुर्गा भाभी ने बड़ी दिलेरी से भगत सिंह के साथ उनकी पत्नी बनकर लाहौर से कलकत्ता तक की सफर की और ब्रिटिश खुफिया तंत्र को इसकी हवा तक न लगी।</p>
<p>दुर्गा भाभी के साथ उनकी गोद से चिपका हुआ उनका तीन वर्षीय बेटा शची भी था। कलकत्ता पहुंचने पर उनके पति भगवती चरण बोहरा ने उनकी बहादुरी की जमकर दाद दी। 7 अक्टुबर 1907 को इलाहाबाद में जन्मी दुर्गा भाभी बचपन से ही असाधारण प्रतिभा की धनी थी। उनमें राष्ट्रप्रेम की भावना कूट-कूटकर भरी थी। युवा होने पर उनका विवाह महान क्रांतिकारी भगवती चरण बोहरा से हुआ। भगवती चरण वोहरा आजादी के उन नायकों में से एक हैं जिनके जीवन का उद्देश्य देश को आजादी दिलाना था। कहा जाता है कि उन्हें बम बनाने में महारत हासिल था। 28 मई, 1930 को रावी नदी के तट पर बम परीक्षण के दौरान वे षहीद हो गए। उस समय दुर्गा महज 27 साल की थी।</p>
<p>लेकिन इस कठिन घड़ी में भी उन्होंने अपना धैर्य नहीं छोड़ा। उन्होंने मन में ठान लिया कि वे अपने पति की शहादत और उनके मिशन को बेकार नहीं जाने देंगी। सो उन्होंने क्रांतिकारियों के साथ कदमताल मिलाना शुरु कर दिया। दुर्गा भाभी की बहादुरी के किस्से भारतीय इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं। कलकत्ता में रहते हुए उन्होंने क्रांतिकारियों के साथ मिलकर आजादी का ताना-बाना बुनना शुरु कर दिया। इसी दरम्यान 8 अप्रैल, 1929 को भगत सिंह ने संसद भवन में बम विस्फोट कर गुंगी-बहरी ब्रिटिश सरकार को अंदर से हिला दिया। कहा जाता है कि इस घटना को मूर्त रुप देने में दुर्गा भाभी का महान योगदान था। भगत सिंह चाहते तो संसद भवन से फरार हो सकते थे लेकिन उन्होंने अपनी गिरफ्तारी देना ज्यादा जरुरी समझा।</p>
<p>क्रांतिकारियों ने भगत सिंह को जेल से छुड़ाने की जुगत बनायी और योजना पर काम करना शुरु कर दिया। रणनीति के मुताबिक भगत सिंह को जबरदस्ती जेल से छुड़ाने के लिए बम विस्फोट की योजना बनी। लेकिन ईश्वर के विधान में कुछ और ही बदा था। दुर्गा भाभी के पति भगवती चरण बोहरा जो बम बनाने में दक्ष थे, बम परीक्षण के दौरान ही शहीद हो गए। दुर्गा भाभी पर विपत्ति का पहाड़ टुट पड़ा। लेकिन उन्होंने अपने आंसूओं को थाम लिया। वे लाहौर जाकर भगत सिंह से मिली और फिर दिल्ली वापस आकर गांधी जी से। गांधी जी ने भाभी को सुझाव दिया कि वे अपने आपको पुलिस के हवाले कर दे। लेकिन दुर्गा भाभी का मकसद तो कुछ और ही था।</p>
<p>उन्होंने गांधी जी से अपील की कि जिस तरह आप अन्य राजनीतिक बंदियों की रिहाई के लिए प्रयास कर रहे हैं, उसी तरह भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की रिहाई के लिए भी वायसराय पर दबाव डालें। लेकिन गांधी जी को क्रांतिकारियों के हिंसा दर्शन में विश्वास नहीं था। सो उन्होंने दुर्गा भाभी को मना कर दिया। लेकिन दुर्गा भी दुर्गा ठहरी। वह भला हार कैसे मान सकती थी। 9 अक्टुबर, 1930 को उन्होंने मुंबई में लेमिंग्टन रोड पर पृथ्वी सिंह आजाद उर्फ नाना साहब और सुखदेव राज से मिलकर गवर्नर पर गोलियां चला दी। लाख सिर पटकने के बाद भी पुलिस का खुफिया तंत्र इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाया कि इस कांड के पीछे किसका हाथ है।</p>
<p>पुलिस के हाथ सिर्फ यही सूत्र लगा कि गोली चलाने वालों में से एक लम्बे बाल वाला लड़का भी था। लेकिन एक षड़यंत्र के तहत दुर्गा भाभी को ब्रिटिश सरकार ने फरार घोषित कर दिया तकरीबन ढ़ाई वर्ष फरारी जीवन गुजारने के बाद उन्हें 12 सितंबर, 1931 को गिरफ्तार कर लाहौर जेल भेज दिया गया। रिमाण्ड की 15 दिन की अवधि पूरा होने पर मजिस्ट्रेट ने उन्हें रिहा तो कर दिया लेकिन ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें फिर गिरफ्तार कर नजरबंद कर दिया। तकरीबन एक वर्ष तक वह नजरबंद रही। दिसंबर 1932 में वह रिहा की गयी। लेकिन उन्हें लाहौर की म्यूनिसिपल सीमा में तीन वर्ष तक नजरबंद रखा गया। 1935 ई0 में उन्हें पंजाब और दिल्ली की सीमा से बाहर जाने का आदेश दिया गया।</p>
<p>इस दरम्यान दुर्गा भाभी ने गाजियाबाद के एक स्कूल में बतौर शिक्षिका अध्यापन कार्य किया। 1937 में उन्हें दिल्ली प्रांतीय कमेटी का अध्यक्ष चुना गया। बाद में उन्होंने अपनी सदस्यता उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी में स्थानांतरित करा ली। शिक्षा के प्रति उनका गहरा लगाव था। सो उन्होंने मद्रास के अड्यार में मांटेसरी शिक्षा पद्धति का प्रशिक्षण प्राप्त किया और जब वह 1940 में लखनऊ आयी तो कैण्ट रोड पर एक किराए के मकान में पांच बच्चों को लेकर ‘लखनऊ माण्टेसरी’ नामक एक शिक्षण संस्था की बुनियाद रखी। आज यह विद्यालय ‘लखनऊ माण्टेसरी इण्टर कालेज’ के नाम से जाना जाता है। दुर्गा भाभी इस विद्यालय को जीवन भर सींचा।</p>
<p>अब उनकी यादें भर शेष रह गयी हैं। आज से डेढ़ दशक पहले वह इस दुनिया से विदा हो चुकी हैं। आज भी देश उनकी असाधारण वीरता और राष्ट्रभक्ति पर गर्व करता है। हालांकि यह त्रासदी है कि आजादी के साढ़े सात दशक गुजर जाने के बाद भी दुर्गा भाभा के विचार और उनसे जुड़े दस्तावेज देश के आमजन तक नहीं पहुंच पाए हैं। नतीजा देश की युवा पीढ़ी उनके राष्ट्रवादी विचारों से पूरी तरह परिचित नहीं है। आज जरुरत है कि दुर्गा भाभी के विचार जन-जन तक पहुंचाया जाए। वैसे भी एक जिम्मेदार जनतांत्रिक राष्ट्र का कर्तव्य है कि वह देश की आजादी के लिए मर मिटने वाले क्रांतिकारियों के स्मृति शेष को जीवित रखने के लिए अपनी आने वाली पीढ़ी को उनके इतिहास व विचारों से देश को सुपरिचित कराए।</p>
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		<title>Shrimad Bhagvat Story : मानव जीवन को सार्थक बनाता है श्रीमद्भागवत महापुराण</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 06 Jul 2025 13:46:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[Shrimad Bhagvat]]></category>
		<category><![CDATA[story]]></category>
		<category><![CDATA[जीवन]]></category>
		<category><![CDATA[मानव]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीमद्भागवत महापुराण]]></category>
		<category><![CDATA[सार्थक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY DR.GOPAL CHATURVEDI VRINDAVAN NEWS। &#160; पण्डित रामांश पाराशर के श्रीमुख से भगवान श्रीकृष्ण...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY DR.GOPAL CHATURVEDI</strong></span></p>
<p><em><strong>VRINDAVAN NEWS।</strong></em></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>पण्डित रामांश पाराशर के श्रीमुख से भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण की कथा श्रवण कर भाव विभोर हुए भक्त-श्रद्धालु</strong></span></p>
<p>श्रीहित हरिवंश नगर स्थित वानप्रस्थ धाम फेस-1 में श्रीराधा माधव सेवा संस्थान ट्रस्ट के तत्वावधान में चल रहे अष्ट दिवसीय गुरुपूर्णिमा महोत्सव एवं श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन व्यास पीठाधीन पण्डित रामांश पाराशर महाराज ने देश-विदेश से आए समस्त भक्तों-श्रद्धालुओं को अपनी मधुर वाणी के द्वारा वामन अवतार, बलि प्रसंग, गंगा अवतरण, श्रीराम जन्म एवं श्रीकृष्ण जन्म की कथा श्रवण कराई।</p>
<p>व्यासपीठ से पण्डित रामांश पाराशर महाराज ने कहा कि अखिल कोटि ब्रह्मांड नायक भगवान श्रीकृष्ण ने पृथ्वी पर जन्म लेकर न केवल पापियों, अत्याचारियों व दैत्यों का संघार किया बल्कि उन तमाम भक्तों, ऋषियों-मुनियों एवं साधु-संतों की वाणियों को साकार किया, जिन्होंने पूर्व जन्मों में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं में संलग्न होने का वरदान प्राप्त किया था।</p>
<p>उन्होंने भगवान के दिव्य स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान ने श्रीकृष्ण के रूप में ब्रज में अवतार लेकर पूरब से लेकर पश्चिम तक धर्म की स्थापना के लिए समस्त राक्षसों का उद्धार कर सभी जीवों को सुख प्रदान किया।</p>
<p>श्रद्धेय रामांश पाराशर ने कहा कि पृथ्वी पर जब-जब अधर्म बढ़ता है और धर्म की हानि होने लगती है,तब-तब अधर्म का नाश करने के लिए और धर्म की रक्षा व पुनःस्थापना के लिए भगवान नारायण पृथ्वी पर अवतरित होते हैं।इसीलिए वे तारणहार कहे जाते हैं।<img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-23676" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0056.jpg" alt="" width="772" height="616" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0056.jpg 772w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0056-300x239.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0056-768x613.jpg 768w" sizes="(max-width: 772px) 100vw, 772px" /></p>
<p>इस अवसर पर भव्य नंदोत्सव आयोजित किया गया।साथ ही भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की दिव्य झांकी सजाई गई।इसके अलावा जन्म से संबंधित बधाईयों व भजनों का संगीत की मृदुल स्वर लहरियों के मध्य गायन किया गया।जिसके अंतर्गत रुपए-पैसे, खेल-खिलौने, वस्त्र-आभूषण आदि लुटाए गए।</p>
<p>महोत्सव में वानप्रस्थ धाम के संस्थापक डॉ. चतुर नारायण पाराशर महाराज, पुराणाचार्य डॉ. मनोज मोहन शास्त्री, डॉ. अशोक शास्त्री, आचार्य सुरेशचंद्र शास्त्री, मुख्य यजमान श्रीमती किरण शुक्ला, डॉ. अमरेश चंद्र शुक्ला सुशील राजवंशी (बीकानेर), आचार्य पवन पाराशर आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।</p>
<p><strong style="color: #ff6600">श्रीमद्भागवत महापुराण का वाचन, श्रवण एवं अध्ययन तीनों ही मंगलकारी एवं कल्याणकारी है &#8211;  डॉ. शिवम साधक महाराज </strong></p>
<p>सुनरख रोड़-श्रीजी पुरम् स्थित श्रीगौरी शंकर धाम में गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में एवं ब्रह्मलीन भक्ति सम्राट संत शिवानंद साधक महाराज (डेरा वाले बाबा) की पावन स्मृति में चल रहे अष्टदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ महोत्सव में व्यास पीठ से प्रख्यात भागवत प्रवक्ता डॉ. शिवम साधक महाराज ने अपनी सरस वाणी के द्वारा देश-विदेश से कथा श्रवणार्थ पधारे सैकड़ों भक्तों-श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतमयी कथा सुनाते हुए कहा कि मनुष्यों के जब कई-कई जन्मों के पुण्यों का उदय होता है, तब ही उसे हरि कथा व सत्संग आदि श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त होता है।</p>
<p>श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतमयी कथा श्रवण करने से मनुष्यों के ऊपर आने वाली सभी विपदाओं का नाश हो जाता है। उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यासजी द्वारा रचित और शुकदेव भगवान के श्रीमुख से निकली श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा मानव जीवन को सार्थक बनाती है।इसका श्रवण मनुष्य के सभी प्रकार के अरिष्टों को दूर करता है।इसका वाचन, श्रवण एवं अध्ययन तीनों ही मंगलकारी एवं कल्याणकारी है।इसमें समस्त धर्म ग्रंथों का सार समाहित है।इसीलिए इसे पंचम वेद कहा गया है।<img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-23677" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0062.jpg" alt="" width="776" height="612" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0062.jpg 776w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0062-300x237.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0062-768x606.jpg 768w" sizes="(max-width: 776px) 100vw, 776px" /></p>
<p>महोत्सव में पधारे श्रीपीपाद्वाराचार्य जगद्गुरु बाबा बलरामदास देवाचार्य महाराज, प्रख्यात साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी एवं संत रामदास महाराज (अयोध्या) ने कहा कि श्रीगौरी शंकर धाम के संस्थापक ब्रह्मलीन भक्ति सम्राट संत शिवानंद साधक महाराज (डेरा वाले बाबा) अत्यंत सहज, सरल, उदार व परोपकारी थे।उन्होंने गौ, संत, ब्रजवासी, निर्धन-निराश्रित एवं रोगी आदि की सेवा के लिए अनेकों सेवा प्रकल्प संचालित किए।</p>
<p>जिनका निर्वाह आज भी डॉ. शिवम साधक महाराज के निर्देशन में पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ किया जा रहा है।साथ ही वे श्रीमद्भागवत महापुराण, श्रीराम कथा और अन्य धर्मग्रंथों के माध्यम से विश्वभर में जो भारतीय वैदिक सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार करने का कार्य कर रहे हैं,वो अति प्रशंसनीय है। श्रीगौरी शंकर धाम के प्रबंधक विष्णुकांत शास्त्री ने सभी अतिथियों का उत्तरीय ओढ़ा कर और माल्यार्पण कर स्वागत किया।</p>
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		<title>SUCCESS STORY : किसान के बेटे ने सीए बनकर लिखी सफलता की कहानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Jan 2025 15:44:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[story]]></category>
		<category><![CDATA[SUCCESS]]></category>
		<category><![CDATA[किसान का बेटा]]></category>
		<category><![CDATA[लिखी]]></category>
		<category><![CDATA[सफलता की कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[सीए]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY LOK REPORTER AMETHI NEWS। गांव चिलौली के निवासी रितेश साहू ने चार्टर्ड अकाउंटेंट...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY LOK REPORTER</strong></span></p>
<p><em><strong>AMETHI NEWS।</strong></em></p>
<p>गांव चिलौली के निवासी रितेश साहू ने चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की कठिन परीक्षा पास कर जिले का नाम रोशन किया है। किसान परिवार में पले-बढ़े रितेश ने सीमित संसाधनों के बावजूद 600 में 317 अंक हासिल किए। उनकी सफलता ने साबित कर दिया कि कड़ी मेहनत, परिवार का सहयोग और भगवान की कृपा से कोई भी सपना पूरा हो सकता है।</p>
<p>रितेश का कहना है, &#8220;यह सफलता माता-पिता की मेहनत, उनके आशीर्वाद और भगवान की असीम कृपा का परिणाम है। मेरा सपना था कि मैं सीए बनूं, और आज वह सपना पूरा हो गया।&#8221;</p>
<p>उनके पिता महादेव साहू, जो एक किसान हैं, ने कहा, &#8220;हमने भगवान पर भरोसा रखा और अपने बेटे को हमेशा प्रोत्साहित किया। आज उसकी मेहनत और भगवान की कृपा से हमें यह खुशी मिली है। यह पूरे गांव के लिए गर्व की बात है।&#8221;</p>
<p>रितेश ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा आदित्य बिड़ला पब्लिक स्कूल, जगदीशपुर से की और फिर काशी हिंदू विश्वविद्यालय से बीकॉम की डिग्री ली। अब वे किसी प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी करके अपने गांव और जिले का नाम और ऊंचा करना चाहते हैं।</p>
<p>रितेश की सफलता यह साबित करती है कि भगवान पर विश्वास, माता-पिता का सहयोग और खुद की मेहनत से कोई भी सपना साकार हो सकता है। उनकी सफलता आज न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे जिले के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।</p>
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		<title>विवादों में घिर गई फिल्म &#8220;आदि पुरुष&#8221;&#8230;!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 Jun 2023 13:24:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[#AadiPurush]]></category>
		<category><![CDATA[#ManojMuntshirShukla]]></category>
		<category><![CDATA[story]]></category>
		<category><![CDATA[डायरेक्टर]]></category>
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		<category><![CDATA[विवाद]]></category>
		<category><![CDATA[विवादास्पद डायलॉग]]></category>
		<category><![CDATA[श्री राम]]></category>
		<category><![CDATA[सनातन धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[स्टार्स]]></category>
		<category><![CDATA[हज़रत गंज]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दू महा सभा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; हाल में रिलीज हुई फिल्म आग पुरुष को लेकर एक बार फिर देश में...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p>हाल में रिलीज हुई फिल्म आग पुरुष को लेकर एक बार फिर देश में एक बार फिर बवाल मचा हुआ है फिल्म की कहानी स्क्रिप्ट डायलॉग वेशभूषा आदि को लेकर सवाल उठने लगे हैं बॉलीवुड एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है I इसी कड़ी में<br />
हिंदू महासभा द्वारा फिल्म आदि पुरुष के खिलाफ उत्तर प्रदेश के लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है, जिसमें कहा गया है कि इस फिल्म में सनातन धर्म, प्रभु श्री राम, सीता मैया, हनुमान जी, भगवा ध्वज का अपमान किया गया है I फिल्म का चित्रण, कलाकारों के भेषभूसा ,डायलॉग, शब्दों का चयन असल रामायण का गलत प्रस्तुतीकरण किया गया है I इससे प्रतीत होता है कि ये फ़िल्म सनातन धर्म को अपमानित करने के उद्देश्य से ही बनाई गई है I सनातन धर्म को अपमानित करने का कार फिल्म इंडस्ट्री लगातार चल रही है I किसी अन्य धर्म पर फिल्म बनाने की हिम्मत इन डायरेक्टरों में नहीं होती है I हिंदू महासभा के शशि चतुर्वेदी ने हजरतगंज कोतवाली में पहुंचकर आदि पुरुष फिल्म के डायरेक्टर प्रोड्यूसर स्टार एवं संबंधित टीम के खिलाफ शिकायती पत्र देकर मुकदमा पंजीकृत करने की मांग की है उनका कहना है की इस तरह की फिल्में देश के बाहर बैठे दुश्मन दाऊद इब्राहिम का पैसा लगा है जिससे फिल्म बनाकर सनातन धर्म को बदनाम किया जा सके इस अवसर पर सुमित कश्यप जगदीश जोशी राहुल सोनकर, सौरभ श्रीवास्तव, अशोक सिंह, विक्रम गुप्ता सहित दर्जनभर हिंदू महासभा के कार्यकर्ता मौजूद रहे I</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मनोज मुन्तशिर और &#8216;आदिपुरुष&#8217; के निर्माता-निर्देशक ने दिया डॉयलॉग्स बदलने का आश्वासन&#8230;&#8230;!</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-11727" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230618-WA0816-225x300.jpg" alt="" width="225" height="300" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230618-WA0816-225x300.jpg 225w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230618-WA0816.jpg 740w" sizes="auto, (max-width: 225px) 100vw, 225px" /></p>
<p>साउथ स्टार प्रभास, कृति सेनन, सैफ अली खान और सनी सिंह के अभिनय से सजी फिल्म रिलीज के बाद से ही फिल्म में शामिल संवादों को एकर विवादों में घिर गई है लेकिन बॉक्सऑफिस की खिड़की पर इसका जलवा बरकरार है। &#8216;आदिपुरुष&#8217; को दुनिया भर में शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है और  हर उम्र के दर्शकों का दिल जीत रहा है। इस फिल्म को एक यादगार सिनेमाई अनुभव बनाते हुए टीम ने जनता और दर्शकों के इनपुट को महत्व देते हुए फिल्म के संवादों में बदलाव करने का फैसला किया। निर्मातागण इस फिल्म में शामिल कुछ संवादों पर फिर से विचार कर रहे हैं I यह सुनिश्चित करते हुए कि यह फिल्म के मूल सार के साथ प्रतिध्वनित हो और जो अगले कुछ दिनों में सिनेमाघरों में दिखाया जायेगा। यह निर्णय इस बात का प्रमाण है कि बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कलेक्शन के बावजूद, टीम प्रतिबद्ध है और कुछ भी उनके दर्शकों की भावनाओं और बड़े पैमाने पर सद्भाव से परे नहीं है।</p>
<p>आदिपुरुष को लेकर मनोज मुन्तशिर</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-11726" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/06/Screenshot_20230618-184206_Twitter-175x300.jpg" alt="" width="175" height="300" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/06/Screenshot_20230618-184206_Twitter-175x300.jpg 175w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/06/Screenshot_20230618-184206_Twitter-598x1024.jpg 598w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/06/Screenshot_20230618-184206_Twitter-768x1315.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/06/Screenshot_20230618-184206_Twitter-897x1536.jpg 897w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/06/Screenshot_20230618-184206_Twitter-1024x1753.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/06/Screenshot_20230618-184206_Twitter.jpg 1080w" sizes="auto, (max-width: 175px) 100vw, 175px" /></p>
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		<title>STORY OF CRANE&#8230;. हे नीतिनियंता दया करो&#8230;.</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Mar 2023 04:09:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[story]]></category>
		<category><![CDATA[आरिफ- सारस]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ फूल कली]]></category>
		<category><![CDATA[सारस]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>देवदत्त: सिद्धार्थ यह हंस तुम्हारे पास है और मैं इसे कब से इधर उधर ढूंँढ़...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>देवदत्त: सिद्धार्थ यह हंस तुम्हारे पास है और मैं इसे कब से इधर उधर ढूंँढ़ रहा था,यह मेरा शिकार है अब जाकर मिला है।<br />
सिद्धार्थ: नहीं देवदत्त यह हंस मेरा है,यह तो कब का दम तोड़ देता अगर मैं समय पर इसका इलाज़ न करता ।<br />
देवदत्त: दम तोड़ देता तो क्या? यह तो मेरा शिकार है मैंने इसे इसलिए तो मारा है, तुम जबरदस्ती मेरे शिकार को हड़पना चाहते हो।<br />
इस तरह विवाद बढ़कर राजा शुद्धोधन के पास गया।<br />
राजा शुद्धोधन विचार करके बोले:<br />
चूंकि यह हंस देवदत्त का शिकार है इसलिए इस पर पहला अधिकार देखा जाये तो देवदत्त का है परन्तु सिद्धार्थ ने इसकी जान बचाई है और मारने वाले से बड़ा बचाने वाला होता है इसलिए यह हंस सिद्धार्थ का है।<br />
सिद्धार्थ भावपूर्ण होकर उस हंस (SWAN) को सहलाने लगे</p>
<p><strong><span style="color: #00ffff">*हे नीतिनियंता दया करो*</span></strong></p>
<p>इक सारस आया धरती पर मानव को प्रेम सिखाने को।<br />
उसे राम,रहीम ने भेजा है बस थाती अपनी बचाने को।।</p>
<p>जब दोस्त से अपने बिछड़ा वो मानवता उस दिन रोई थी,<br />
अम्बर के कोने कोने पर सूरज ने पीड़ा बोई थी,<br />
जल बिन मछली सा तड़प रहा सामर्थ्य नहीं बतलाने को।<br />
इक सारस आया धरती पर मानव को प्रेम सिखाने को।।</p>
<p>तू कौन कहांँ से आया है चल रही निशानी बस तेरी,<br />
तेरे हाल पे सब बेहाल हुये कह रहे कहानी बस तेरी,<br />
हम दुआ करें तेरा मीत मिले प्रीत की रीत निभाने को।<br />
इक सारस आया धरती पर मानव को प्रेम सिखाने को।।</p>
<p>सबको इक दिन उठ जाना है ये धरा किसी की नहीं हुई,<br />
यह सांँस यहीं रह जानी है ये हवा किसी की नहीं हुई,<br />
क्यों ज़ुल्म करे ऐ सृष्टि श्रेष्ठ क्या कारण मिला बताने को।<br />
इक सारस आया धरती पर मानव को प्रेम सिखाने को।।</p>
<p>करबद्ध प्रार्थना *पूनम* की हे राजन अब स्वीकार करो,<br />
उस पक्षिश्रेष्ठ की आज़ादी करुणानिधि अंगीकार करो,<br />
इतिहास क्षमा कर सकता न, अनमोल का मोल बताने को।<br />
इक सारस आया धरती पर मानव को प्रेम सिखाने को।।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-9803" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/03/FB_IMG_1679975705303-1-139x300.jpg" alt="" width="139" height="300" /></p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>डॉ.फूलकली&#8221;पूनम&#8221; </strong></span><br />
<span style="color: #ff0000"><strong>शायरा, कवयित्री,कहानीकार</strong></span><br />
<span style="color: #ff0000"><strong>व्हाइट हाउस अमेठी</strong></span><br />
<span style="color: #ff0000"><strong>उ.प्र.,भारत</strong></span></p>
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