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	<title>religion Archives - Lok Dastak</title>
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	<description>Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak</description>
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	<title>religion Archives - Lok Dastak</title>
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		<title>Religion Spirituality : भगवान अहंकार का मर्दन करते हैं &#8211; आचार्य शांतनु</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/25037</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Oct 2025 16:08:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[religion]]></category>
		<category><![CDATA[spirituality]]></category>
		<category><![CDATA[अहंकार]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य शांतनु महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[कथा]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान]]></category>
		<category><![CDATA[मर्दन]]></category>
		<category><![CDATA[श्रवण]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; रिपोर्ट &#8211; लोकदस्तक संवाददाता  अमेठी, उप्र । तिलोई क्षेत्र के गांव पूरे दान सिंह...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><strong><span style="color: #ff0000">रिपोर्ट &#8211; लोकदस्तक संवाददाता</span></strong></h3>
<h3><strong> अमेठी, उप्र । </strong></h3>
<p>तिलोई क्षेत्र के गांव पूरे दान सिंह वैस में ब्लाक प्रमुख तिलोई के आवास पर चल रही श्रीमद भागवत कथा के छठें दिवस पर कथा व्यास आचार्य शान्तनु जी ने कहा कि भगवान कृष्ण द्वारा जब इन्द्र की पूजा छोड़वाकर गोवर्धन की पूजा करवाया गया तो इन्द्र ने क्रोधित होकर सात दिन तक लगातार वर्षा करवाई तो भगवान नें सभी ग्वाल बालों के साथ मिलकर गोवर्धन को ही छाता बनाकर उठा लिया और इन्द्र का मान भंग कर दिया और अन्त में इन्द्र लज्जित होकर आकर भगवान की स्तुति करने लगे।</p>
<p>सभी ब्रजवासी इस घटना से यह मानने लगें कि कन्हैया अवश्य ही भगवान है परन्तु भगवान नें कहा कि नही यह सब आप लोगों के सहयोग से ही ये सम्भव हुआ है। कथा व्यास ने कहा कि एक बार एकादशी के दिन नंद बाबा रात में तीन बजे यमुना में स्नान करनें चले गये और वरुण देव के दूत नन्दबाबा को पकड़ कर वरुणलोक लेकर गये और फिर नन्दबाबा को कृष्ण जी छुड़वाकर लेकर आये।<img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone wp-image-25039 size-full" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0009.jpg" alt="" width="1280" height="576" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0009.jpg 1280w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0009-300x135.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0009-1024x461.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0009-768x346.jpg 768w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p>इसके बाद महाराज जी नें पवित्र महारास का वर्णन किया है और जब भगवान नें अपनी बंशी बजाई है तब सभी गोपियां जो जिस अवस्था में थी उसी अवस्था में भगवान से मिलने के लिये अपने घर से निकल पड़ी। और इस महारास का दर्शन करने भगवान शंकर भी माता पार्वती के संग आये थे।</p>
<p>अब कंस नें अक्रूर जी के माध्यम से मल्ल युद्ध के बहाने भगवान कृष्ण और बलराम को मथुरा बुलवाया। सभी गोपियां व माँ यशोदा भगवान के मथुरा जानें की सूचना पाकर विरह में व्याकुल हो गयीं भगवान नन्दबाबा और ग्वालों के साथ मथुरा आये। और यहां भगवान कृष्ण ने कंस का वध किया। और मथुरा के सभी असुरों का नाश किया है इसके पश्चात राजा उग्रसेन को मथुरा का राज्य सौंपा। और नन्द बाबा को विदा किया।और भगवान ने बलराम के साथ गुरुकुल में जाकर शिक्षा लिया।भगवान ने</p>
<p>उद्धव जी को गोकुल भेजकर गोकुल वासियों व गोपियों का हाल जाना है जरासंध आदि राक्षसों का आतंक बढ़ने के कारण भगवान नें द्वारिकापुरी का निर्माण कर समस्त प्रजा सहित द्वारिका को चले गये।कथा शुरुआत से पूर्व यजमान अर्चना सिंह कृष्ण कुमार सिंह ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ आरती पूजन किया। संचालन धर्मेश मिश्रा ने किया।</p>
<p><strong>इनकी रही मौजूदगी<img decoding="async" class="alignnone wp-image-25038 size-large" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0011-1024x461.jpg" alt="" width="640" height="288" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0011-1024x461.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0011-300x135.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0011-768x346.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251016-WA0011.jpg 1280w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></strong></p>
<p>इस मौके पर राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह,कुंवर मृगांकेश्वर शरण सिंह, उत्कर्ष शरण सिंह,मुकेश सिंह,दिनेश रावत विधायक हैदरगढ़,विवेक विक्रम सिंह,लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता रमेश चंद्र, हीरामणि पटेल, दिलीप गंगवार,हरिनाथ यादव, मनीष सिंह, इंद्रजीत सिंह,कृषि वैज्ञानिक डा लाल पंकज सिंह, दलजीत सिंह,नितेश यादव, सौरभ सिंह, मोहन लाल मौर्य, शिवांशु मिश्रा, सुशील सिंह, करुणा शंकर, गंगा विभूति सहित हजारों की संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।</p>
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		<title>Religion &#8211; Spirituality : ‘‘रामायण मानव मन के संशय दूर करती है।’’ -स्वामी अभयानंद सरस्वती</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 15:54:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[religion]]></category>
		<category><![CDATA[spirituality]]></category>
		<category><![CDATA[मन]]></category>
		<category><![CDATA[मानव]]></category>
		<category><![CDATA[रामायण]]></category>
		<category><![CDATA[संशय]]></category>
		<category><![CDATA[स्वामी अभयानंद सरस्वती]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; रिपोर्ट- अमित चावला लखनऊ, उप्र। चांसलर क्लब आशियाना में हो रही ‘‘रामकथा’’ के पहले...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h3><span style="color: #ff0000"><strong>रिपोर्ट- अमित चावला</strong></span></h3>
<h3><strong>लखनऊ, उप्र।</strong></h3>
<p>चांसलर क्लब आशियाना में हो रही ‘‘रामकथा’’ के पहले दिन महामण्डलेश्रवर स्वामी अभयानंद सरस्वती जी ने कहा सनातन शास्त्रों ने लोक कल्याण के लिए जीवन दृष्टि दी है। जैसे श्रीमद्भगवतगीता, जीवन जीने की कला सिखाती है। श्रीमद् भागवत महापुराण मरने की कला सिखाती है। उसी प्रकार श्री रामचरित मानस संशय दूर करने की कला सिखाती है।</p>
<p>सत्य सनातन सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में राम कथा के किष्किंधा कांड को स्वामी ने मानस का हृदय है। तीन कांड पहले और तीन कांड बाद में उनके मध्य में है किष्किंधा कांड। जैसे मनुष्य के शरीर में हृदय मध्य में होता है उसी प्रकार किष्किंधा कांड मानस का हृदय है।</p>
<p>कथा के आयोजन कर्ता अनुराग गुप्ता ने बताया कि कथा रोज सायं 4ः00 बजे से 6ः00 बजे तक 14 सितम्बर तक होगी। आज का व्यास पूजन आलोक गुप्ता, सीमा गुप्ता, अनुराग गुप्ता, संध्या गुप्ता, अर्चना गुप्ता और गुड्डन गुप्ता ने किया। इस अवसर पर त्रिवेणी अलमीरा के अध्यक्ष वरूण तिवारी जी भी उपस्थित थे।</p>
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		<item>
		<title>Religion Spirituality :  निरंकारी मिशन के ‘प्रोजेक्ट अमृत’ का तृतीय चरण 23 फरवरी से होगा शुरू</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Feb 2025 16:44:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[‘प्रोजेक्ट अमृत’]]></category>
		<category><![CDATA[religion]]></category>
		<category><![CDATA[religion and spirituality]]></category>
		<category><![CDATA[Spirituality : निरंकारी मिशन]]></category>
		<category><![CDATA[तृतीय चरण]]></category>
		<category><![CDATA[निरंकारी मिशन]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; REPORT BY LOK REPORTER AMETHI NEWS। संत निरंकारी मिशन की सेवा भावना और मानव...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY LOK REPORTER</strong></span></p>
<p><em><strong>AMETHI NEWS।</strong></em></p>
<p>संत निरंकारी मिशन की सेवा भावना और मानव कल्याण के संकल्प को साकार करने हेतु ‘प्रोजेक्ट अमृत’ के अंतर्गत ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ परियोजना के तृतीय चरण का भव्य शुभारंभ रविवार, 23 फरवरी  को अमेठी जनपद की समस्त छह शाखाएं छेत्र के विभिन्न जगहों पर स्वच्छता अभियान चलाकर करेंगी। जिसमें करौंदी शाखा मां कालिकन धाम स्थित सगरा की विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी सफ़ाई अभियान चलाया जाएगा।</p>
<p>गौरीगंज , शाहगढ़, परसावा, तीनों निरंकारी मिशन की शाखा मिलकर अहोरबन भवानी में स्थित सगरा की साफ सफ़ाई करेंगे। जगदीशपुर और अहुरी व बाबा झाम दास की कुटी स्थित तालाब में सफ़ाई अभियान चलाया जाएगा। उक्त प्रॉजेक्ट में अमेठी जनपद के सैकड़ों निरंकारी श्रद्धालु भाग लेकर अपनी निस्वार्थ सेवाओं से स्वच्छ जल स्वच्छ मन का संदेश देकर समाज एवं देश को जल संचय के प्रति जागरूक करने का प्रयास करेंगे।</p>
<p>उक्त परियोजना के बारे में जानकारी देते हुए करौंदी शाखा की मुखी  विद्या देवी एवं परसावा ब्रांच के मुखी मूलचंद्र ने संयुक्त रूप से बताया कि इस परियोजना का भव्य शुभारंभ निरंकारी मिशन की सतगुरू माता सुदीकच्छा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमिता जी द्वारा दिल्ली में यमुना नदी के छठ घाट आई टी ओ दिल्ली से किया जाएगा।इस परियोजना का उद्देश्य जल संरक्षण एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है, ताकि भावी पीढ़ियों को निर्मल जल और स्वस्थ पर्यावरण का वरदान प्राप्त हो सके।</p>
<p>संत निरंकारी मिशन ने बाबा हरदेव सिंह जी महाराज की प्रेरणादायक शिक्षाओं को आत्मसात करते हुए वर्ष 2023 में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से ‘प्रोजेक्ट अमृत’ का शुभारंभ किया था। इस दिव्य पहल का उद्देश्य केवल जल स्रोतों की स्वच्छता सुनिश्चित करना ही नहीं, बल्कि जल संरक्षण को मानव जीवन का अभिन्न अंग बनाने की सोच को विकसित करना है।</p>
<p>नदियों, झीलों, तालाबों, कुओं और झरनों जैसे प्राकृतिक जल स्रोतों की स्वच्छता एवं संरक्षण को समर्पित इस महाअभियान ने अपने पहले दो चरणों में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की। इसी प्रेरणा के साथ, इस वर्ष तृतीय चरण को और अधिक व्यापक, प्रभावी एवं दूरगामी दृष्टि से आगे बढ़ाया गया है, ताकि यह अभियान निरंतर विस्तार पाकर समाज में जागरूकता, सेवा और समर्पण की एक सशक्त लहर उत्पन्न करे।</p>
<p>करौंदी शाखा की मुखी विद्या देवी जी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह वृहद अभियान देशभर में 27 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के 900 से अधिक शहरों में 1600 से भी अधिक स्थानों पर एक साथ आयोजित किया जाएगा। इस महाअभियान की यह अभूतपूर्व व्यापकता इसे एक ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान करेगी, जिससे जल संरक्षण एवं स्वच्छता का संदेश और अधिक प्रभावशाली रूप से जन-जन तक पहुंचेगा।</p>
<p>संत निरंकारी मिशन के भारत वर्ष के लगभग 10 लाख समर्पित स्वयंसेवक एक साथ मिलकर जल संरक्षण और स्वच्छता का संदेश जन-जन तक पहुंचाएंगे। गीतों की संगीतमय प्रस्तुति, समूह गान, जागरूकता सेमिनार और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से जल जनित रोगों और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा रही है। यह पहल केवल सफाई तक सीमित न रहकर आज की युवा पीढ़ी को समाज कल्याण की दिशा में सकारात्मक कार्य करने के लिए प्रेरित करने का एक सशक्त माध्यम बनेगी।</p>
<p>सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज भी अक्सर यही प्रेरणा देते हैं कि हम इस धरती को और भी अधिक सुंदर स्वरूप में छोड़कर जाएं। यह अभियान उसी संकल्प का एक साकार स्वरूप है, जो समाज को जागरूकता, सेवा और समर्पण की दिशा में आगे बढ़ाने का कार्य करेगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/22386">Religion Spirituality :  निरंकारी मिशन के ‘प्रोजेक्ट अमृत’ का तृतीय चरण 23 फरवरी से होगा शुरू</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
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		<title>RELIGION-SPIRITUALITY :  मंत्र जाप जीवन का श्रृंगार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Sep 2024 05:53:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[religion]]></category>
		<category><![CDATA[spirituality]]></category>
		<category><![CDATA[जाप]]></category>
		<category><![CDATA[जीवन]]></category>
		<category><![CDATA[मंत्र]]></category>
		<category><![CDATA[वैदिक परम्परा]]></category>
		<category><![CDATA[वैदिक मंत्रोच्चारण]]></category>
		<category><![CDATA[श्रृंगार]]></category>
		<category><![CDATA[साधना]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY PRADEEP CHAJER  BORAVER,RAJSTHAN I  मंत्र-जप जीवन का श्रृंगार हैं ।इससे कई रोगों का...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY PRADEEP CHAJER </strong></span></p>
<p><em><strong>BORAVER,RAJSTHAN I </strong></em></p>
<p>मंत्र-जप जीवन का श्रृंगार हैं ।इससे कई रोगों का उपचार होता है ।अश्व सा चंचल मन ,लहरों सा चित्तवन आदि इसे साधने में मंत्र जाप का सहयोग सघन होता है । मंत्रों के प्रयोग हमारी सोयी हुई शक्तियों को जगाते हैं । यह एकाग्रता को सधवाकर , हममें आत्मविश्वास बढ़ाते हैं जो हमें ऊर्जा से भर देते हैं । शुद्ध मंत्रोच्चार से कष्टों का निवारण होता है ।</p>
<p>जब सश्रद्धा सही समय-सही स्थान पर इनका उच्चारण है होता हैं तो मंत्र नाद से वातावरण में निर्मलता आती है ,पवित्रता हर ओर छा जाती है ,<br />
मन को भीतर तक झंकृत कर जाती है ।मंत्र &#8211; जप , मन को साधने का सुन्दर उपक्रम है । इससे जीवन में शुद्ध भावों के योग से सकारात्मक परिवर्तन होता है ।</p>
<p>मन का उपवन मंत्रोच्चार से खिलता है , आध्यात्म की तरंग श्रद्धामय होती है ।जप बहुत तकनीकी विषय है । अति संक्षिप्त में साधारण समझ के लिए हम कह सकते हैं कि किसी निश्चित अवधि व निश्चित उद्देश्य के लिए मंत्रोच्चार जप है । किसी मंत्र या वाक्य का धीरे-धीरे , बार-बार बोल कर या मन ही मन जप किया जाता है ।</p>
<p>जप से मानसिक शक्ति बढ़ सकती है । अगर सविधि इसको किया जाए तो व्यक्ति को मानो उसके अन्दर स्वस्थ व शक्तिशाली परिधि निर्मित हो रही है यह महसूस होता हैं ।व्यक्ति बदलाव चाहता हैं । बदलाव का एक सूत्र हैं नादयोग का प्रयोग । एक शब्द की आवृति करना , उसे बार &#8211; बार दोहराना ।</p>
<p>व्यक्ति जो बनाना चाहता हैं , उसे सामने रखकर उसकी स्मृति करना , ऐसे शब्द को दोहराना । उस शब्द का नाम बन गया &#8211; मंत्र । जप का अर्थ हैं मंत्र की पुनरावृति । वैदिक परंपरा को देखे , जैन अथवा बौद्ध परंपरा को देखे , लौकिक परंपराओं को देखे, सबने मंत्रो का चुनाव किया हैं । भारतीय दर्शनों में मंत्र का बहुत विकास हुआ हैं और वह इसलिए हुआ हैं कि उससे कुछ उपलब्धियां अर्जित की जा सकती हैं ।</p>
<p>जप हमारे आत्म शोधन में बहुत सहयोगी होता है। हम मंत्रों के उच्चारण जप भौतिक उपलब्धि के लिए न करें बल्कि अपनी अंतरात्मा की शक्ति के उद्घाटन के लिए करें हमारी आत्म शुद्धि ही भव शुद्धि है । हमारे शुद्ध भावों का विकास हो जप के द्वारा तभी किये गए जप की सार्थकता है।</p>
<p>हम विवेकपूर्वक जप करें ,हमारे भावों की शुद्धि उसके साथ जुड़ें , तन्मयता हो मंत्र के अक्षर के साथ हमारी , सिर्फ उच्चारण ही न हो,बल्कि जपाजप जाप चलता रहे अंदर ही अंदर। जहां वाणी मौन हो जाती है हमारा तादात्म्य सिर्फ अंतरात्मा के साथ हो ,मन के तार-आत्मा के तार बन जाएं ,ऐसा हो जप।यही हमारे लिए काम्य हैं ।</p>
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		<title>RELIGION SPIRITUALITY : सफर चिंता से तनाव का</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/19183</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Jun 2024 03:09:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[religion]]></category>
		<category><![CDATA[spirituality]]></category>
		<category><![CDATA[चिंता]]></category>
		<category><![CDATA[डिप्रेशन]]></category>
		<category><![CDATA[तनाव]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म और अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[सफर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>PRESENTED BY PRADEEP CHHAJER  मानव जीवन में चिंता और तनाव साथ चलते है । चिंता...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>PRESENTED BY PRADEEP CHHAJER </strong></span></p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-thumbnail wp-image-19187" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240617-WA0212-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240617-WA0212-150x150.jpg 150w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240617-WA0212-24x24.jpg 24w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240617-WA0212-48x48.jpg 48w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240617-WA0212-96x96.jpg 96w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240617-WA0212-300x300.jpg 300w" sizes="(max-width: 150px) 100vw, 150px" /></p>
<p>मानव जीवन में चिंता और तनाव साथ चलते है । चिंता व तनाव<br />
इस कारण होते ही हैं कि वर्तमान को छोड़कर मन अतीत या भविष्य पर भटक जाता है। मन की लोभी तृष्णा का कोई अंत नहीं होता।जैसे-जैसे सोचा हुआ हाशिल होता है वैसे-वैसे और नयी चाहत बढ़ने लगती है।जिसका जीवन में कभी अंत ही नहीं होता।जीवन की इस आपा-धापी में जीवन के स्वर्णिम दिन कब बीत जाते हैं उसका हम्हें भान भी नहीं रहता।</p>
<p>आगे जीवन में कभी सपने अधूरे रह गये तो किसी के मुँह से यही निकलता है कि कास अमुक काम मैं अमुक समय कर लेता।उनके लिये बस बचता है तो किसी के कास तो किसी के जीवन में अगर।तृष्णा तो विश्व विजेता सिकंदर की कभी पूरी नहीं हुयी और जब विदा हुआ तो ख़ाली हाथ।इसलिये कर्म ज़रूर करो और जो कुछ प्राप्त हुआ उसमें संतोष करना सीखो।जीवन की इस भागम-भाग में आख़िरी साँस कौन सी होगी वो कोई नहीं जानता।</p>
<p>जिसने जीवन में संतोष करना सीख लिया उसका जीवन आनंदमय बन गया। जब हमारा मन पॉज़िटिव होगा, तब हमें दिव्यता का अनुभव होगा क्योंकि सकारात्मकता वह निर्मलता की निशानी है और मन की निर्मलता, वही परम सुख है।भगवान महावीर ने कहा है कि जो पॉज़िटिव रहेगा वही मोक्ष की ओर आगे बढ़ सकता है, इसलिए नेगेटिविटी से बाहर निकलना अत्यंत आवश्यक है।</p>
<p>अतः एक निराशावादी को हर अवसर में कठिनाई दिखाई देती है एक आशावादी को हर कठिनाई में अवसर दिखाई देता है। अतः हम समझें खतरे ही खतरे घर के बाहर हैं । वर्तमान क्षण ही हमारी चेतना का वास्तविक आधार है अतः रहिए आधिकाधिक इस घर में तो चिंता व तनाव रफू चक्कर हो जाएंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>Spirit to live&#8230;&#8230;..जीने का जज्बा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Mar 2023 04:11:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[life]]></category>
		<category><![CDATA[religion]]></category>
		<category><![CDATA[spirit to live]]></category>
		<category><![CDATA[spirituality]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उम्र का कोई भी पड़ाव हो हर समय हमको जीने का जज़्बा रखना चाहिये ।...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>उम्र का कोई भी पड़ाव हो हर समय हमको जीने का जज़्बा रखना चाहिये । कहते है की जिसने जीने का जज्बा(<span class="Y2IQFc" lang="en">spirit to live) </span>खो दिया मानो उसने अपना जीवन खो दिया । आत्मा का रूप है न रंग है ! ये तो महसूस करने का जज़्बा है ! कोशिश हर किसीकी है कि हर वो चीज़ हासिल करलूँ अपने प्रयास से मिलेगी ख़ुशी !सुख ! मन चाही !पर जाने क्यूँ फिर भी कुछ कमी सी है लगती</p>
<p>। आज के समय , सभी के लियें सबसे ज्यादा जरूरी हैं की बाहर से ज्यादा हम भीतर से मजबूत बने क्यूँकी भीतर की मजबूती हमें कभी भी किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होने देती आज के समय , सभी के लियें सबसे ज्यादा जरूरी हैं की बाहर से ज्यादा हम भीतर से मजबूत बने क्यूँकी भीतर की मजबूती हमें कभी भी किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होने देती है ।</p>
<p>हमारे में अगर आत्मविश्वास,दृढ़मनोबल,प्रामाणिकता आदि है तो हमे अपने जीवन के व जीने के जज्बे का मज़बूत लक्ष्यों पर स्थिर रहने में सहायक बनती है। इसलिए जीवन जीने का सकारात्मक सही जज़्बा हमेशा लगातार क़ायम रहे जीवन में आत्मविश्वास के साथ । स्वयं स्फूर्त चेतना ही अपने गंतव्य पथ पर अविराम गतिमान बनी रहती है। जल की प्रचंड तेजधार ही हर बाधा को चीर कर अंतिम सांस तक बहती है।</p>
<p>जब उद्देश्य केवल सात्विक, पारमार्थिक तथा सबजन हिताय के साथ जीने के जज्बा का होता है तब ही उस उत्साह की पवित्र श्रम बूंदे ,महोत्सव की गौरव गाथा कहती है। जीवन(Life)का भरपूर आनंद हर हाल में हर जगह में होगा यदि उत्साह की गाड़ी में सवार है। कहने को तो स्वर्ग भी हताश से भरा है पर जहाँ जोश है हौंसला है वह धरा भी स्वर्ग से कम नही। तभी तो टूटते नहीं मुसीबतों में यही अपनी पहचान है।हिलते नहीं हवाओं से हम तो एक चट्टान है।</p>
<p>बर्फ नहीं जो दो पल में पिघलने कि हमें आदत है।जज्बे से हर वक्त को बदलने कि हमें आदत है।हम ख़ुद को मजबूत माने और विकट परिस्थिति में भी नहीं हारे बल्कि और ताकत से लड़ते हुए जीत जाए । बस यही उत्साह सदा जीने के जज्बा का बना रहे |<br />
<span style="color: #ffcc00"><strong>प्रदीप छाजेड़</strong></span><br />
<span style="color: #ffcc00"><strong>( बोरावड़</strong></span> )</p>
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