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	<title>Less Said The Better Archives - Lok Dastak</title>
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	<description>Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak</description>
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		<title>जीवन की आध्यात्मिक बातें&#8230;..</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Feb 2023 04:16:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[Less Said The Better]]></category>
		<category><![CDATA[अध्यात्म जगत]]></category>
		<category><![CDATA[आध्यात्मिक लेखन]]></category>
		<category><![CDATA[जीवन शैली]]></category>
		<category><![CDATA[सही सोच अंत समय की]]></category>
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					<description><![CDATA[<p> सही सोच अंत समय की जन्म लिया है तो मृत्यु निश्चित है । यही सोच...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h3> <strong>सही सोच अंत समय की</strong></h3>
<p>जन्म लिया है तो मृत्यु निश्चित है । यही सोच हर समय मानव को रखकर अपने जीवन को जीना चाहिये । इसके पीछे एक मेरा उद्देश्य यह भी है की मृत्यु होना निश्चित है लेकिन कब , कहाँ आदि होगी इसके बारे में हमको अभी वर्तमान में नहीं पता है । यह केवली भगवान या साधना से लब्धि प्राप्त साधु आदि ही बता सकते है । विगत और आगत दो शब्दों के बीच हमारी जीवन नैया चलती रहती है । हर रोज का जीवन का ये एक हिस्सा है ।हम प्रति पल सावधान रहते हुए अपनी आत्मविशुद्धि के लिए कषायों को उपशान्त करने का प्रयत्न करें ।</p>
<p>हमारा चिंतन ये चले कि हमारा प्रमाद हम पर हावी तो नहीं हो रहा है । हम ने जो करना है इसी पल करने की आदत बनाएं बाद में करेंगे कि हमारी भावना न पनपे हम में।समय की कीमत को जानते हुए हर पल अपना सिंहावलोकन करते रहे।पता नहीं कौनसा पल हमारे जीवन का आखिरी पल हो।काल का पहिया तो अनावरत चलता रहता है । यह कभी रुकने वाला नहीं होता हमारे मनुष्य क्षेत्र में। दिन-रात,साल आदि काल परिवर्तनशील है ।</p>
<p>समय जो काल की सबसे सूक्ष्म अविभाज्य इकाई है ,वह वर्तमान समय ध्रुव,नित्य व शाश्वत है।हम उसमें जीना सीखें और अपने प्रमाद पर काबू पाते हुए कषायों को उपशान्त करते हुए आत्मकल्याण करें।विगत और आगत ,नूतन और पुरातन हम इसमें न उलझकर अपना कर्मों से मुक्त होने की दिशा में अग्रसर होने के लिए प्रयासरत हो निरन्तर। सर्वोत्तम तो है हो कर निर्भय, प्रसन्न मन, अपनाना चाहिए हमें पंडित मरण जान अंत समय में ताकि हमारा जीवन हो जाए सफलतम।</p>
<h3> <span style="color: #ffcc00"><strong>Less Said The Better</strong></span></h3>
<p>भौतिक पदार्थों की चकाचौंध में फंसकर आदमी महत्वाकांक्षी होकर आपाधापी के भंवरजाल में भटकता रहता है और दुःखों को प्राप्त करता है । भावनाओं में सन्तुष्टि नही होती है ।और और कि आपाधापी सुख औरशान्ति को लील जाती है । अजीब विडंबना है की भौतिकवाद और उपभोक्तावादी चकाचौंध मे लोग जितनी चादर उससे अधिक पैर पसार तुलना की होड़ में लग गए। मे सेर तो अगला सवा सेर अगर सच्चा सुख चाहिए तो बस<br />
ना किसी से ईर्ष्या , ना किसी से होड़ , मेरी अपनी मंजिलें , मेरी अपनी दौड़ ।</p>
<p>आज भी बेचैन सांसे चढ़ती या उतरती है तो पल में पलको के चिलमन से अश्कों का प्रवाह शुरू हो जाता है।ना मिट्टी की ख़ुशबू.है । ना कोयल की कूकूं । ना घरों में फुदकती चिड़ियों ।पंखे ,ए सी, कूलर होते हुए भी बेचैन से रहते है। घरौंदों की रौनक़ तक काफ़ूर हो गयी। कहते फिरते है हम क्या ज़माना आ गया है । पर मानते नही हम ही लाए अपने स्वार्थ के लिए। मनुष्य जन्म अनमोलरे मिट्टी में मत रोल रे ।</p>
<p>अब जो मिला है फिर ना मिलेगा,कभी नही-कभी नही । फिर भी इच्छा पूर्ति के लिए आदमी समुद्र पार दौड़ रहा है । समझ ही नही रहा और स्वर्ग पाताल राज करो तिसना अधिकी अति आग लगेगी ।इस मानव जन्म रूपी स्वर्णथाल का उपयोग धूल फेंकने के लिए व अमृत का उपयोग पैर धोने के लिए । उत्तम हाथी का उपयोग लकड़ियों की ढुलाई के लिए तथा चिंतामणिरत्न क़ौआ उड़ाने के लिए फेंकने वाला कर रहा हैं।</p>
<p>मानव भव मिला।ज्ञानी संतो की वाणी मिली। सत्य और अहिंसा की शक्ती मिली। फिर भी भौतिकवाद और उपभोक्तावादी चकाचौंध मे हम फँस गये है । क्यों इतना जानने के बाद समझने के बाद हम जीवन में दिशाहीन है।</p>
<p>क्योंकि ख़ुद को हमने जकड़ लिया संसार की इस क्षणभंगुरता में कोई डर-भय नही है । कहने को तो बातें और भी बहुत हैं पर जितना कम कहा जाए उतना ही ठीक है। <span style="color: #ffffff"><strong>LESS SAID THE BETTER ।</strong></span></p>
<h3><span style="color: #00ffff">प्रदीप छाजेड़</span><br />
<span style="color: #00ffff">( बोरावड़ ,राजस्थान )</span></h3>
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