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	<title>International Archives - Lok Dastak</title>
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	<title>International Archives - Lok Dastak</title>
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		<title>International Widows Day : विधवाओं को सम्मान और आर्थिक सुरक्षा की जरुरत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Jun 2025 03:34:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; PRESENTED BY ARVIND JÀYTILAK &#160; आज अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस है। यह दिन दुनिया भर...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>PRESENTED BY ARVIND JÀYTILAK</strong></span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आज अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस है। यह दिन दुनिया भर में लाखों विधवाओं और उनके आश्रितों द्वारा सामना की जाने वाली गरीबी और अन्याय को संबोधित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की कार्यवाही का दिन है। यह दिन विधवाओं के लिए पूर्ण अधिकार और मान्यता प्राप्त करने के लिए कार्यवाही का अवसर का भी दिन है। यह दिन विधवाओं की उनकी विरासत, भूमि, उत्पादक संसाधनों, सामाजिक सुरक्षा, समान वेतन और पेंशन के उचित हिस्से तक पहुंच के संदर्भ में जनमत जुटाने का भी दिन है। उल्लेखनीय है कि 21 दिसंबर, 2010 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा औपचारिक रुप से 23 जून को अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस के रुप में अपनाया गया।</p>
<p>बहुचर्चित किताब ‘इनविजिबल फॉरगॉटन सफरर्सः द प्लाइट आफॅ विडो अराउंड द वर्ल्ड’ की मानें तो दुनिया भर में तकरीबन 250 मिलियन विधवाएं हैं जिनमें से 115 मिलियन विधवाएं गरीबी में जीवन-बसर करती हैं। वे अपने हक और सम्मान दोनों से वंचित हैं। भारत में भी लाखों विधवाएं हैं जो गरीबी समेत कई किस्म की गंभीर समस्याओं से अभिशप्त हैं। याद होगा गत वर्ष पहले सर्वोच्च न्यायालय ने वृंदावन सहित देश के अन्य शहरों में रह रही विधवाओं के मसले पर सुनवाई करते हुए गंभीर टिप्पणी की थी। उसने कम उम्र की विधवाओं के आश्रमों में रहने पर चिंता जताते हुए सरकार से जानना चाहा था कि विधवा विवाह को कल्याणकारी योजनाओं का हिस्सा क्यों नहीं होना चाहिए। तब न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर व न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा था कि विधवाओं के पुनर्वास की बात तो की जाती है लेकिन उनके विवाह के बारे में कोई बात नहीं करता।</p>
<p>सर्वोच्च अदालत ने दो टूक कहा था कि सामाजिक बंधनों से मुक्त होकर विधवाओं के पुनर्वास से पहले उनके विवाह को प्रोत्साहन देने की जरुरत है। सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार के सॉलिसिटर जनरल के इस आश्वासन पर कि विधवाओं के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना है और विधवा गृहों में रहने वाली महिलाओं के लिए वोकेशनल ट्रेनिंग की योजना है पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि आपकी योजनाएं सिर्फ कागजों पर दिखती हैं। जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। तब न्यायालय ने सुझाव दिया था कि विधवा गृहों में रह रही महिलाओं को पास के बाल सुधार गृह और वृद्धा आश्रमों में मौका दिया जाना चाहिए।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि देश में सर्वाधिक विधवाएं राधा-कृष्ण की नगरी वृंदावन में रहती हैं। उन्हें अपनी जीविकोपार्जन के लिए मंदिरों में भजन-कीर्तन करने के अलावा अन्य कई कार्य करने पड़ते हैं। ध्यान दें तो भजन-कीर्तन के एवज में उन्हें महज पांच रुपए से पचास रुपए तक मिलते हैं और वे इन पैसों से बमुश्किल अपनी जरुरतें पूरी कर पाती हैं। कई स्वयंसेवी संगठनों ने अपने सर्वेक्षण में पाया है कि विधवाऐं अपनी भूख मिटाने के लिए न सिर्फ भीख मांगती हैं बल्कि कुछ विधवाएं तो अपनी जरुरत पूरा करने के लिए कई घरों में चौका-बर्तन भी करती हैं। भरपेट भोजन न मिलने से वे एक जिंदा लाश के रुप में तब्दील होती जा रही हैं। इसी का कुपरिणाम है कि उन्हें कई तरह की गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>गत वर्ष पहले फोग्सी फेडरेशन ऑफ ओब्स्टेट्रिक एंड गायनकोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण शिविर में पाया गया कि वृंदावन में वास कर रही विधवा माताओं में तकरीबन 25 प्रतिशत महिलाओं में कैल्सियम की भारी कमी है और उनकी हड्डियां खोखली हैं। 10 प्रतिशत विधवाएं डायबिटिज और 60 प्रतिशत एनेमिक की शिकार हैं। 98 प्रतिशत विधवाएं रक्तचाप से पीड़ित हैं और 60 प्रतिशत विधवाएं पेट संबंधी गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं। वृंदावन धार्मिक नगरी है और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। वृंदावन का शाब्दिक अर्थ है तुलसी का वन।यहां आश्रमों में हजारों की तादाद में विधवाएं रहती हैं। यहां के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर का इलाका हो अथवा इस्कॉन मंदिर का इलाका, माथे पर तिलक और गले में कंठी धारण किए कम उम्र व उम्रदराज विधवाएं देखी जा सकती हैं।</p>
<p>आमतौर पर माना जाता है कि यहां रह रही विधवाएं कृष्ण भक्त हैं और मोक्ष के लिए आयी हैं। लेकिन एक सच यह भी है कि इनमें से कई विधवाएं ऐसी भी हैं जो स्वयं से यहां नहीं आयी हैं। अधिकांश परित्यक्ताएं हैं जो या तो अकेले होने के कारण या घरवालों के खराब व्यवहार के कारण परेशान होकर यहां आकर बस गयी हैं। ज्यादतर विधवाओं के परिवार में या तो कोई सदस्य नहीं बचा है या उनके परिवार वाले उनकी देखभाल को तैयार नहीं हैं। समाज के रिश्ते-नातों और दुनिया के रंगों से अलग कर दी गयी ये विधवाएं बदलते वक्त के साथ समाज की मुख्य धारा में लौटना चाहती हैं। इन विधवाओं में कई के मन में विवाह बंधन में बंधने की लालसा भी है।</p>
<p>लेकिन समाज की दकियानुसी बेड़ियों के कैद से मुक्त हो पाना इनके लिए पहाड़ लांघने जैसा है। हालांकि वेदों में कहा गया है कि वह एक विधवा को सभी अधिकार देने एवं दूसरा विवाह करने का अधिकार प्रदान करता है। वेदों में उल्लेख है कि-‘‘उदीर्ष्व नार्यभि जीवलोकम गतासुमेपमुप शेष एहि, हस्त ग्राभस्य दिधिषोस्तवेदं पत्युर्जनित्वमभि सम्बभूथ।’’ अर्थात पति की मृत्यु के बाद उसकी विधवा उसकी स्मृति में अपना सारा जीवन व्यतीत कर दे ऐसा कोई धर्म नहीं कहता। उस स्त्री को पूरा अधिकार है कि वह आगे बढ़कर किसी अन्य पुरुष से विवाह करके अपना जीवन सफल बनाए। ऐसा नहीं है कि विधवाओं के जीवन को सुधारने और सम्मान योग्य बनाने की पहल नहीं हुई।</p>
<p>1856 में ब्रिटिश सरकार ने विधवाओं पर होने वाले अत्याचार को रोकने और उनका मानवीय अधिकार वापस दिलाने के लिए हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम 1856 पारित किया। यह अधिनियम विधवाओं को पुनर्विवाह की इजाजत देता है। इस अधिनियम में स्पष्ट कहा गया है कि यदि दूसरे विवाह के समय किसी स्त्री के पति की मृत्यु हो चुकी है तो ऐसा विवाह वैध है। इस अधिनियम के मुताबिक ऐसे विवाह से उत्पन सभी संतानें भी वैध मानी जाएगी। ऐसे में आवश्यक हो जाता है कि भारतीय समाज विधवाओं को उचित सम्मान व आदर दे तथा सरकार भी ऐसे विधवाओं को पुनर्विवाह के लिए प्रेरित करे। विशेषकर वे जो कम आयु की हैं। अच्छी बात यह है कि सरकार और स्वयंसेवी संस्थाएं इस दिशा में सराहनीय पहल कर रही हैं।</p>
<p>इसके बावजूद भी विधवाओं को लेकर समाज का नजरिया दकियानुसी बना हुआ है। आज भी विधवाओं को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मसलन वे क्या करती हैं, कहां जाती हैं और उनके यहां कौन आता-जाता है ऐसे ढ़ेरों सवालों का सामना करना पड़ता है। उनकी गरिमा पर भी सवाल दागा जाता है। यही नहीं सामाजिक-धार्मिक कार्यक्रमों में भी उन्हें शिरकत करने से रोकने की कोशिश होती है। गौर करें तो उनके लिए केवल पति की मृत्यु का शोक ही त्रासदी नहीं होता। बल्कि उन्हें कट्टर रीति रिवाजों के अनुसार जीवन भी गुजारना पड़ता है। यह उचित नहीं है। यह सोच और प्रवृत्ति अमानवीय और मानवता के खिलाफ है।एक आंकड़े के मुताबिक देश में 5 करोड़ से भी अधिक विधवाएं हैं। उन्हें परंपरा और रीति-रिवाज की आड़ लेकर अधिकारों से वंचित और बेदखल कर दिया गया है।</p>
<p>कुछ साल पहले एक स्वयं सेवी संस्था ने उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल कर विधवाओं की दयनीय हालत सुधारने और उन्हें आवास उपलब्ध कराने की मांग की। सर्वोच्च अदालत ने इस पर गौर फरमाते हुए सरकार को निर्देशित किया कि वह विधवाओं को आवास उपलब्ध कराए और उनके जीवन निर्वाह के लिए निश्चित धनराशि मुकर्रर करे। सर्वोच्च अदालत के इस निर्देश के बाद सरकार ने वृंदावन में हजारों विधवाओं के रहने के लिए आवास बनवाने का भरोसा दिया और बजट आवंटित किया। यह स्वागतयोग्य पहल है। आज जरुरत इस बात की है कि सरकार के साथ-साथ समाज भी विधवाओं के प्रति मानवीय और उदार बने। विधवाओं के जीवन को सुगम बनाने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार के कंधे पर ठेलकर निश्चिंत नहीं हुआ जा सकता।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>International Yoga Day : &#8220;एक पृथ्वी-एक स्वास्थ्य के लिए योग&#8221; थीम पर आयोजित हुआ योगाभ्यास कार्यक्रम </title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Jun 2025 07:08:57 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[उत्‍तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; REPORT BY LOK REPORTER AMETHI NEWS । &#8220;एक पृथ्वी-एक स्वास्थ्य के लिए योग&#8221; थीम...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY LOK REPORTER</strong></span></p>
<p><em><strong>AMETHI NEWS ।</strong></em></p>
<p>&#8220;एक पृथ्वी-एक स्वास्थ्य के लिए योग&#8221; थीम पर आधारित 11वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आज जवाहर नवोदय विद्यालय गौरीगंज के प्रांगण में योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें राज्यमंत्री खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति विभाग उत्तर प्रदेश सतीश चंद्र शर्मा , नोडल अधिकारी डॉ रूपेश कुमार प्रबंध निदेशक उ0प्र0 राज्य विद्युत उत्पादन निगम, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश अग्रहरी,  विधायक गौरीगंज राकेश प्रताप सिंह, विधायक जगदीशपुर सुरेश पासी, जिलाधिकारी संजय चौहान, पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक, जिलाध्यक्ष भाजपा सुधांशु शुक्ला, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा राम प्रसाद मिश्र सहित अन्य जनपदीय अधिकारियों, कर्मचारियों, छात्र-छात्राओं व जन सामान्य ने सामूहिक रूप से योगाभ्यास किया।</p>
<p>योग प्रशिक्षक धर्मेंद्र कुमार वर्मा, प्रेम सुधा सिंह एवं शैलेश ओझा द्वारा सभी को योगाभ्यास कराया गया तथा योग के विभिन्न आसन सिखाए गए एवं योग करने से होने वाले लाभों की जानकारी भी दी गई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्बोधन व योगाभ्यास कार्यक्रम का सजीव प्रसारण किया गया, जिसके उपरांत यहां पर सभी ने सामूहिक रूप से योगाभ्यास किया है। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री ने उपस्थित सभी लोगों को 11वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की बधाई देते हुए योग को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करने का आवाहन किया तथा योग से होने वाले लाभों के बारे में बताया।<img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-23427" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250621-WA0020.jpg" alt="" width="1024" height="576" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250621-WA0020.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250621-WA0020-300x169.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250621-WA0020-768x432.jpg 768w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p>नोडल अधिकारी डॉ रूपेश कुमार ने भी सभी लोगों से नियमित योग करने की अपील किया तथा कहा कि नियमित योग करने से हम स्वस्थ रहने के साथ ही विभिन्न बीमारियों से भी बच सकते हैं इसलिए आवश्यक है कि आप सभी लोग योग को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करें। जिलाधिकारी संजय चौहान ने संबोधित करते हुए सभी को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की बधाई देते हुए कहा कि जिस प्रकार से हमारी केंद्र व प्रदेश की सरकारों ने योग और भारतीय परंपरा को जीवन पद्धति के तौर पर अपनाने की जो पहल की है उससे आने वाले समय में और इस आधुनिकता वाले युग में ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभ मिलेगा।</p>
<p>योगाभ्यास के उपरांत प्रभारी मंत्री सहित अन्य जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों ने नवोदय विद्यालय के परिसर में &#8220;एक पेड़ मां के नाम&#8221; से पौधारोपण कर जनपद वासियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। आज 11वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय के साथ ही जनपद की समस्त तहसीलों, विकासखंडों, थानों,  हेल्थ वेलनेस सेंटर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अमृत सरोवर, पंचायत भवन, विद्यालयों, वृद्धाश्रम, स्टेडियम आदि स्थानों पर भी योगाभ्यास के कार्यक्रम आयोजित कर जन सामान्य को योगाभ्यास कराया गया तथा योग के महत्व के बारे में बताया गया एवं नियमित योग करने की अपील भी की गई।<img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-23429" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250621-WA0039.jpg" alt="" width="1024" height="472" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250621-WA0039.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250621-WA0039-300x138.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250621-WA0039-768x354.jpg 768w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p>आज 11वें अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर पूरे जिले में योग की धूम रही सभी लोगों ने सामूहिक रूप से योगाभ्यास किया और योग को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करने का प्रण लिया। जवाहर नवोदय विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उक्त के अतिरिक्त अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अर्पित गुप्ता, अपर जिलाधिकारी न्यायिक अनिल चतुर्वेदी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अंशुमान सिंह, जिला विकास अधिकारी वीरभानु सिंह, परियोजना निदेशक डीआरडीए ऐश्वर्य यादव, आयुष विभाग के नोडल डॉक्टर अनुपम श्रीवास्तव, जिला कार्यक्रम प्रबंधक आयुष माधवेंद्र प्रताप सिंह सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं व जन सामान्य मौजूद रहे।<img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-23428" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250621-WA0042.jpg" alt="" width="1024" height="472" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250621-WA0042.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250621-WA0042-300x138.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250621-WA0042-768x354.jpg 768w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पुलिस अधीक्षक द्वारा  किया गया योगाभ्यास</strong></span></p>
<p>आज पुलिस अधीक्षक अमेठी अपर्णा रजत कौशिक के नेतृत्व में 11वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग (Yoga for One Earth, One Health)” थीम के तहत नवीन पुलिस लाइन गौरीगंज अमेठी में एक भव्य योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।</p>
<p>कार्यक्रम की शुरुआत  गुब्बारों को आकाश में उड़ाकर की गई, जो स्वास्थ्य, शांति और एकता का प्रतीक रहा । योग दिवस को एक उत्सव के रूप में मनाया गया, जिसमें रिक्रूट आरक्षियों द्वारा उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया गया।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-23430" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250621-WA0050-1024x432.jpg" alt="" width="640" height="270" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250621-WA0050-1024x432.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250621-WA0050-300x126.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250621-WA0050-768x324.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250621-WA0050-1536x648.jpg 1536w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250621-WA0050.jpg 1900w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>इस दौरान मौजूद योग प्रशिक्षक द्वारा समस्त अधिकारी कर्मचारीगण को योग से होने वाले फायदों के बारे में बताया गया तथा योग को अपनाकर कई शारीरिक और मानसिक कमियों को भी दूर किया जा सकता है, स्वस्थ रहने के लिए नियमित रूप से योग को जीवन में अपनाना जरूरी है, तन और मन दोनों को सेहतमंद बनाए रखने के लिए नियमित रूप से दिनचर्या में योगाभ्यास को शामिल करके लाभ प्राप्त किया जा सकता है ।</p>
<p>इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक अमेठी शैलेन्द्र कुमार सिंह, क्षेत्राधिकारी गौरीगंज अखिलेश वर्मा, क्षेत्राधिकारी तिलोई दिनेश कुमार मिश्र व अन्य अधिकारी/कर्म0गण मौजूद रहे ।</p>
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		<title>International Nursing Conference : इंदिरा गांधी नर्सिंग कॉलेज में अंतर्राष्ट्रीय नर्सिंग सम्मेलन का हुआ आयोजन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 08 Jun 2025 12:50:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अमेठी]]></category>
		<category><![CDATA[उत्‍तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; REPORT BY LOK REPORTER AMETHI NEWS। मुंशीगंज स्थित संजय गांधी मेमोरियल ट्रस्ट की प्रतिष्ठित...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY LOK REPORTER</strong></span></p>
<p><em><strong>AMETHI NEWS।</strong></em></p>
<p>मुंशीगंज स्थित संजय गांधी मेमोरियल ट्रस्ट की प्रतिष्ठित इकाई इंदिरा गांधी स्कूल एंड कॉलेज ऑफ नर्सिंग कॉलेज की ओर से एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय नर्सिंग सम्मेलन का आयोजन हुआ। जिसमें भविष्य की नर्स को शिक्षित करना विषय पर विस्तार से चर्चा की गई।</p>
<p>बताया गया कि शैक्षणिक और क्लीनिकल उत्कृष्टता के लिए परिवर्तनकारी शिक्षण मॉडल जरूरी है। जिसमें नर्सिंग शिक्षा में तकनीकी नवाचार, क्लीनिकल दक्षता और शिक्षण में परिवर्तनकारी दृष्टिकोण को बढ़ावा देना मुख्य उद्देश्य रहा है।</p>
<p>उद्घाटन सत्र में उपप्राचार्य डॉ. गोमति एम ने उक्त विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए नर्सिंग के बच्चों को इसे अपने शिक्षण कार्य में अपने की नसीहत दी । इस वैश्विक सम्मेलन में भारत समेत अमेरिका, सऊदी अरब और इथियोपिया के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। <img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-23397" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250608-WA0006-1024x768.jpg" alt="" width="640" height="480" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250608-WA0006-1024x768.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250608-WA0006-300x225.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250608-WA0006-768x576.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250608-WA0006.jpg 1440w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>सेमिनार कार्यक्रम की रूपरेखा प्रो. बेनाजीर इसराइल (अध्यक्ष) व पियूष गुंजन यादव (सचिव) के निर्देशन में बनी। सम्मेलन में प्रो. डॉ. कोप्पुला विक्टर बाबू (इथियोपिया), डॉ. एलिज़ाबेथ आरोन (यूएसए), प्रो. मरियम्मा सी. जॉन, डॉ. एस. वसंथकुमारी (केएस ए) और प्रो. डॉ. एम. भारती जैसे वक्ताओं ने विस्तार से संदर्भित विषय पर जानकारी दी ।</p>
<p>वक्ताओं ने सम्मेलन का उद्देश्य बताते हुए नर्सिंग शिक्षा में एआर व वीआर और सिमुलेशन तकनीक का समावेश क्रिटिकल थिंकिंग और मेंटरशिप को बढ़ावा देना बताया। इसके साथ ही वक्ताओं ने सैद्धांतिक और व्यावहारिक शिक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने की जानकारी दी।</p>
<p>गौरतलब हो कि संजय गांधी मेमोरियल ट्रस्ट की भूमिका 1980 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी। स्थापित यह ट्रस्ट ग्रामीण स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी है। इसके अंतर्गत संजय गांधी अस्पताल (350-बेड), इंदिरा गांधी स्कूल एंड कॉलेज ऑफ नर्सिंग कॉलेज में बीएससी, जीएनएम, एमएससी सहित कई कोर्स संचालित हैं।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-23398" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250608-WA0004-1024x768.jpg" alt="" width="640" height="480" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250608-WA0004-1024x768.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250608-WA0004-300x225.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250608-WA0004-768x576.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250608-WA0004.jpg 1280w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>जिले सहित कई अन्य जनपदों के बच्चे आज यहां शिक्षा ग्रहण कर नौकरी कर रहे हैं। कॉलेज प्राचार्य रमेश एस ने बताया कि यह सम्मेलन नर्सिंग शिक्षा के वैश्विक मानकों की ओर एक मजबूत कदम रहा है। जिसमें भविष्य के हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को नई दृष्टि और कौशल प्रदान करने पर ज़ोर दिया गया। कार्यक्रम के दौरान विदेश से आए विशेषज्ञों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया।</p>
<p>इसके साथ ही इस सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से बच्चों ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिभागी कर जानकारी अर्जित की। इस कार्यक्रम की सराहना और जानकारी की चर्चा छात्रों में जोर-जोर से है। क्योंकि यह विदेश स्तरीय ऐसा सम्मेलन हुआ है जिसमें नर्सिंग के छात्रों को देश के साथ ही कई अन्य देशों की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की जानकारियां मिली जो उनके लिए बहुत उपयोगी साबित होगी।</p>
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		<title>International Women’s Day नवाचारों का बीज रोपती आधी आबादी-</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 17:25:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
		<category><![CDATA[International]]></category>
		<category><![CDATA[Women's Day]]></category>
		<category><![CDATA[आधी आबादी]]></category>
		<category><![CDATA[नवाचारों]]></category>
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		<category><![CDATA[रोपती]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>PRESENTED BY ARVIND JÀYTILAK  आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है। दुनिया की सभी महिलाओं को आसमान...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>PRESENTED BY ARVIND JÀYTILAK </strong></span></p>
<p>आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है। दुनिया की सभी महिलाओं को आसमान भर बधाई और मंगल शुभकामनाएं। सिर्फ इसलिए नहीं कि आज उनका दिन है। इसलिए भी नहीं कि वे सृष्टि की निरंतरता की अनवरत व आधारभूत परमतत्व हैं। इसलिए भी नहीं कि उनके आंचल में दूध और आंखों में पानी है। इसलिए भी नहीं कि वे हौसलों की उड़ान से जहान भर की बुलंदियों से खेल रही हैं। उन्हें बधाई और मंगल शुभकामनाएं इसलिए कि वे सदियों से गढ़ी-बुनी वर्जनाओं के खोल को धूल-धुसरित कर एक नए मूल्य और प्रतिमान को गढ़ रही हैं। उन्हें बधाई इसलिए भी कि योनि के कठघरे की परिधि से बाहर निकल अपने हक-हकूक की प्रस्तावना का इंकलाब भर रही हैं।</p>
<p>उन्हें बधाई इसलिए भी कि हजारों साल से गढ़े-बुने गए समाज के एकध्रुवीय स्वरुप, चरित्र एवं चिंतन की दायरे का विस्तार कर रही हैं। उन्हें बधाई इसलिए भी कि वे स्वयं के मापने व परखने के पूर्वाग्रही सांचे व सोच को चकनाचूर कर पुरुषवादी कवच का विन्यास कर रही हैं। उन्हें बधाई इसलिए कि वे असमानता और अन्याय के खिलाफ तनकर खड़ा होने के नवाचारों का बीज रोप रही हैं। उन्हें बधाई इसलिए भी कि वे स्वयं के इतिहासपरक मूल्यांकन को रद्द कर नई व्याख्या को आयाम दे रही हैं। उन्हें बधाई इसलिए भी कि उनकी नई सोच और जीवन-मूल्य को अब दुनिया का हर समाज आत्मसात कर रहा है। बदलाव के गुणसूत्र को मान्यता दे रहा है। बदलाव की इस सहज प्रतिध्वनि से असमानता की लौह-बेड़ियां स्वतः पिघल रही हैं। नतीजा सामने हैं। कल तक हम लैंगिक असमानता, हिस्सेदारी व भागीदारी को लेकर चिंतित थे। लेकिन आज बदलाव को चक्र घुमता हुआ साफ दिख रहा है।</p>
<p>अब लैंगिक असमानता में तेजी से कमी दिखने लगी है। अभी गत वर्ष ही राष्ट्रीय परिवार सर्वेक्षण के आंकड़ों से खुलासा हुआ कि महिला स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार हुआ है। महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा की वारदातों में कमी आयी है। वैवाहिक हिंसा पिछले एक दशक में घटी है। सर्वोच्च अदालत ने बेटियों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की प्रवेश परीक्षा में शामिल होने की मंजूरी दे दी है। सरकार भी तैयार है। लेकिन मौंजू सवाल यह है कि क्या समानता के मीनार पर आधी-आबादी विराजमान हो गयी है? बिल्कुल नहीं। देखा जाए तो अभी भी राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों, व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में आधी-आबादी की मौजूदगी आनुपातिक रुप से कम है। अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वे (एआईएसएचई) की रिपोर्ट से उद्घाटित हो चुका है कि राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों और व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में बेटियों का नामांकन तुलनात्मक रुप से कम है।</p>
<p>शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक छात्राओं की मौजूदगी राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों, सरकारी डीम्ड विश्वविद्यालयों और राज्य एवं निजी विश्वविद्यालयों में पुरुषों के मुकाबले कम है। इसी तरह राज्य विधान अधिनियम के तहत आने वाले संस्थानों, सरकारी विश्वविद्यालयों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में भी उनकी भागीदारी कम है। आर्थिक उपक्रमों में भागीदारी की बात करें तो देश के कंपनी बोर्ड में महिला प्रतिनिधित्व की भागीदारी ऊंट के मुंह में जीरा समान है। मुठ्ठी भर महिलाएं नेतृत्वकर्ता की भूमिका में हैं। श्रम के क्षेत्र में नजर दौड़ाएं तो यहां भी पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का प्रतिनिधित्व दयनीय है। प्रशासनिक नौकरियों में महिलाओं की भागीदारी कम है।</p>
<p>आंकड़े बताते हैं कि आईएएस में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 20 फीसदी से भी कम है। बैंकों में 22 प्रतिशत के आसपास है। नौकरियों के मामले में विश्व बैंक अपनी रिपोर्ट में पहले ही कह चुका है कि दुनिया भर के कई देशों में महिलाओं की आर्थिक उन्नति में कानूनी बाधाएं हैं। इसी कारण महिलाओं को नौकरियां छोड़नी पड़ रही हैं। उन्हें अपने खर्च को सीमित करना पड़ रहा है। अच्छी बात है कि भारत में इस तरह का भेदभावकारी कानून नहीं है। लेकिन सच यह भी है कि भारतीय समाज पूरी तरह से दकियानूसी विचारों से अभी तक उबरा नहीं है। महिलाओं को आज भी नौकरी के मामले में अपने परिवारिजनों से इजाजत लेनी पड़ती है। फिलहाल सरकार और स्वयंसेवी संगठनों के प्रयास से देश में महिला सशक्तिकरण को लेकर जागरुकता बढ़ी है। नतीजतन महिलाएं जीवन के कई क्षेत्रों में परचम लहरा रही हैं।</p>
<p>गौर करें तो इसका श्रेय भारतीय संविधान और सर्वोच्च अदालत को जाता है जहां भारतीय संविधान स्त्री-पुरुष दोनों को समान अधिकार प्रदान करता है। सर्वोच्च अदालत संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करता है। भारतीय संविधान में शिक्षा, सेवा, राजनीति इत्यादि सभी क्षेत्रों में पुरुषों व महिलाओं को बराबर के अधिकार दिए हैं। भारतीय संविधान में लैंगिक असमानता को मिटाने यानी समानता को बल प्रदान करने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। संविधान में स्पष्ट कहा गया है कि धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर महिलाओं से भेदभाव नहीं किया जा सकता। दो राय नहीं कि इन संवैधानिक प्रावधानों और गत वर्षों में हुए सरकारी प्रयासों के परिणामस्वरुप भारत में लैंगिक विभेद में कमी आयी है। उसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।</p>
<p>उदाहरण के तौर पर देश के विभिन्न राज्यो की पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण प्रदान किया गया है। इस पहल से पंचायतों में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ी है। लेकिन यहां ध्यान रखना होगा कि संख्या के लिहाज से भले ही यह आंकड़ा प्रतिनिधित्व को मजबूती देता हो पर एक सच यह भी है कि बड़े पैमाने पर नेतृत्व की बागडोर अभी भी पुरुष अभिभावकों के ही हाथों में ही है। बात चाहे गांव, ब्लॉक या तहसील की हो अथवा जिला स्तर की सभी आवश्यक स्थानों पर निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के पति या अभिभावक ही उनके दायित्वों का निर्वहन करते देखे जा रहे हैं। यह स्थिति ठीक नहीं है। इससे निर्वाचित महिला सरपंचों की भूमिका महज एक रबर स्टैंप बनकर रह गयी है। यह हस्तक्षेप पंचायतों में महिलाओं की भूमिका को सीमित करने के साथ ही पंचायती राज के पावन उद्देश्यों को नष्ट करता है।</p>
<p>दूसरी ओर संसद और राज्यों की विधानसभाओं में भी महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के मुकाबले आनुपातिक रुप से कम है। लोकसभा में कुल महिला सदस्यों की संख्या तकरीबन 74 है जो कुल सदस्यों के 15 फीसदी के आसपास है। इसी तरह राज्यसभा में महिलाओं की संख्या तकरीबन 24 है यानी 10 फीसदी के आसपास है। इसी तरह केंद्रीय मंत्रिमंडल में कुल महिला मंत्रियों की संख्या सात है। विचार करें तो पुरुषों के मुकाबले कम है। लेकिन अच्छी बात है कि केंद्र की मोदी सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लगातार पहल कर रही है। विगत वर्ष ही मोदी सरकार ने ऐतिहासिक निणर्य लेते हुए संसद का विशेष सत्र आहुत कर दशकों से बर्फखाने में पड़े महिला आरक्षण बिल को पारित कराकर आधी आबादी को उनके अधिकारों से लैस किया। इस क्रांतिकारी फैसले से अब लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें सुरक्षित-आरक्षित हो गई हैं।</p>
<p>निःसंदेह इस पहल ने व्यवस्थापिका में महिला सशक्तिकरण को नया आयाम दिया है। इस उपलब्धि से देश भर की महिलाओं का इकबाल बुलंद हुआ है। गौर करें तो 11 वर्षों में मोदी सरकार ने महिलाओं के हित में ढ़ेर सारे निर्णय लिए हैं। इसके लिए उन्होंने महिला केंद्रित योजनाओं को आकार देने के की पहल शुरु की। मोदी सरकार ने 1 मई, 2016 को उत्तरप्रदेश राज्य के बलिया जिले से उज्ज्वला योजना का शुभारंभ किया। आज इसका लाभ देश भर की उन सभी गृहणियों को मिल रहा है जो आर्थिक रुप से कमजोर हैं। उज्जवला योजना के अमल में आने से महिलाओं के स्वास्थ्य को नया जीवनदान मिला है।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने बालिका लिंग अनुपात में गिरावट को रोकने एवं महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए 22 जनवरी, 2015 को हरियाणा के पानीपत से ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना का शुभारंभ किया। इसी तरह महिलाओं के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए तीन तलाक को खत्म किया। नतीजा सामने है। आज महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर न सिर्फ चैतन्य हैं बल्कि अपने लक्ष्य का प्रस्तावना भी खुद लिख रही हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>International Women&#8217;s Day : एक पढ़ी-लिखी महिला ही अपने बच्चों का बेहतर भविष्य बना सकती है-  डीएम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 16:16:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अमेठी]]></category>
		<category><![CDATA[उत्‍तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[International]]></category>
		<category><![CDATA[Women's Day]]></category>
		<category><![CDATA[अमेठी डीएम]]></category>
		<category><![CDATA[पढ़ी-लिखी महिला]]></category>
		<category><![CDATA[बच्चों]]></category>
		<category><![CDATA[बेहतर]]></category>
		<category><![CDATA[भविष्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY LOK REPORTER  AMETHI NEWS। जिले में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं,...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY LOK REPORTER </strong></span></p>
<p><em><strong>AMETHI NEWS।</strong></em></p>
<p>जिले में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं, बालिकाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से जनपद में विधिध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मुख्य कार्यक्रम कलेक्ट्रेट में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी निशा अनंत ने दीप प्रज्वलित कर व मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया।</p>
<p>इसके उपरांत जिलाधिकारी ने उपस्थित सभी महिलाओं व बालिकाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं दी तथा संबोधित करते हुए कहा कि हम सभी लोग संघर्ष करके यहां तक पहुंचे हैं आप भी संघर्ष करें और आगे बढ़े, उन्होंने समाज की महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि अपनी बेटियों को पढ़ाएं जरूर, क्योंकि एक पढ़ी-लिखी महिला ही अपने बच्चों का बेहतर भविष्य बना सकती है।</p>
<p>डीएम ने कहा कि हम सभी महिलाएं एक दूसरे को इज्जत दें, समस्याएं व चुनौतियां सभी के जीवन में आती हैं हम उन चुनौतियों को किस प्रकार स्वीकार करते हुए आगे बढ़ते हैं यह हमारी खुद की सोच पर निर्भर करता है हम अपने अंदर के डर को निकाल कर आगे बढ़े, अनावश्यक बातों को इग्नोर करते हुए सकारात्मक सोच के साथ अपने जीवन में आगे बढ़ें।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-22584" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250308-WA0028.jpg" alt="" width="1024" height="472" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250308-WA0028.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250308-WA0028-300x138.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250308-WA0028-768x354.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p>संघर्ष सभी के जीवन में होता है हमें संघर्षों से लड़ते हुए आगे बढ़ना चाहिए। आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 24 महिलाओं, बालिकाओं को प्रशस्ति पत्र व शील्ड देकर सम्मानित किया।</p>
<p><strong><span style="color: #993366">सम्मानित हुई ये महिलाएं</span> </strong></p>
<p>सम्मानित होने वाली महिलाओं में ममता नायक सीडीपीओ शाहगढ़, कृष्णलली व गायत्री सिंह आंगनबाड़ी कार्यकत्री, मीना देवी रोशनी समूह, रीना भोले शंकर समूह, ममता सोना समूह, डॉ पुलक यादव सीएचसी जगदीशपुर, सुनीता तिवारी एएनएम, अनीता आशा बहु, मिथिलेश सहायक अध्यापिका, रिचा सिंह सहायक अध्यापिका, प्रज्ञा शुक्ला सहायक अध्यापक, शैलजा गोंड प्रधानाध्यापक, मंजूबेन पांडे प्रधानाध्यापक, जया त्रिपाठी सहायक अध्यापिका, रुचि सिंह कबड्डी खिलाड़ी, फूलन सिंह एथलेटिक्स, रुचि सिंह निशानेबाज, कंचन सिंह निरीक्षक प्रभारी साइबर थाना, शकुंतला महिला आरक्षी, ज्योति सोनकर महिला आरक्षी, नेहा सिंह, हेमा सिंह व कीर्ति सिंह ग्राम पंचायत अधिकारी के नाम शामिल हैं।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-22585" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/फोटो-01-1.jpg" alt="" width="1024" height="472" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/फोटो-01-1.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/फोटो-01-1-300x138.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/फोटो-01-1-768x354.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong> जिलाधिकारी ने अमेठी प्रज्ञा अभियान का किया शुभारंभ</strong></span></p>
<p>अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी ने प्रज्ञा अभियान का शुभारंभ किया। इस अभियान के अंतर्गत प्रत्येक विद्यालय में प्रज्ञा क्लब का गठन किया जाएगा जिसमें बालिका शिक्षा/महिला सशक्तिकरण से जुड़े सभी विभाग यथा कौशल विकास, आत्मरक्षा प्रशिक्षण, औद्योगिक समूह, गैर सरकारी संगठन, कैरियर काउंसलर्स और विज्ञान/तकनीकी/सूचना प्रौद्योगिकी के विशेषज्ञ सदस्य होंगे।</p>
<p><span style="color: #008080"><strong>प्रज्ञा क्लब के माध्यम से होंगे ये कार्य </strong></span></p>
<p>प्रज्ञा क्लब के माध्यम से बालिकाओं द्वारा उनकी रुचि के अनुसार चयनित कैरियर के क्षेत्र में मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और प्रतिभाग के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे, प्रत्येक विद्यालय में साप्ताहिक प्रज्ञा वादन निर्धारित होगा, जिसमें प्रज्ञा क्लब के नोडल सदस्य अपने वर्ग की छात्राओं का मार्गदर्शन करेंगे और उनके प्रगति की समीक्षा करेंगे।</p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा विभाग की छात्राओं द्वारा स्वागत गीत, सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई एवं अन्य विद्यालय की छात्राओं द्वारा घरेलू हिंसा, मार्शल आर्ट जैसे अन्य नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए गए।</p>
<p>आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सैनिक स्कूल की प्रधानाचार्या गीता महाडीक, अंतरराष्ट्रीय शूटर रुचि सिंह, जिला सेवायोजन अधिकारी अनुपमा रानी, मिस यूपी फलकनाज, जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ राजेश द्विवेदी, बीएसए संजय तिवारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी अनिल कुमार मौर्य सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी, छात्राएं व महिलाएं उपस्थित रही।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-22586" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250308-WA0027.jpg" alt="" width="1024" height="472" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250308-WA0027.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250308-WA0027-300x138.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250308-WA0027-768x354.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>आइजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में जनपद अमेठी प्रदेश में अव्वल</strong></span></p>
<p>आइजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में जनपद अमेठी को प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त हुआ है। प्रदेश स्तर से माह फरवरी 2025 की जारी रैंकिंग में जनपद अमेठी को प्रदेश में प्रथम स्थान मिला है, जनपद को यह सफलता जिलाधिकारी निशा अनंत के कुशल निर्देशन एवं मार्गदर्शन से प्राप्त हुई है जिलाधिकारी द्वारा आइजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की नियमित समीक्षा की जा रही है तथा अधिकारियों को शिकायतों के समयबद्ध व गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को लेकर कड़े निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p>जिलाधिकारी की सतत निगरानी एवं उनके अथक प्रयास से जनपद को यह सफलता प्राप्त हुई है जिलाधिकारी द्वारा जनसुनवाई के दौरान भी शिकायतों को गंभीरता पूर्वक सुनकर तत्काल उनके निस्तारण हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है। शिकायतों के निस्तारण में जनपद को प्रथम स्थान आने पर जिलाधिकारी ने अधिकारियों, कर्मचारियों व आइजीआरएस टीम को बधाई दी है।</p>
<p>अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व/नोडल अधिकारी आइजीआरएस अर्पित गुप्ता द्वारा भी नियमित रूप से आइजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की मॉनिटरिंग की जाती है और संबंधित अधिकारियों को समय सीमा के अंतर्गत निस्तारण हेतु निर्देशित किया जाता है। एडीएम द्वारा प्रतिदिन लंबित शिकायतों को व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को भेज कर निस्तारण कराया जाता है।</p>
<p>आइजीआरएस पोर्टल के तकनीकी अधिकारी ई डिस्टिक मैनेजर अमित विश्वकर्मा ने बताया कि जिलाधिकारी के कुशल निर्देशन एवं मार्गदर्शन में शिकायतों के निस्तारण में जनपद अमेठी को माह फरवरी 2025 में प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि माह फरवरी 2025 में आइजीआरएस पोर्टल पर कुल 3753 शिकायतें प्राप्त हुई थी जिनका समयबद्ध व गुणवत्तापूर्ण निस्तारण संबंधित अधिकारियों द्वारा किया गया साथ ही शिकायतकर्ताओं द्वारा संतुष्ट फीडबैक दिया गया जिसका कारण रहा की जनपद अमेठी को प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।</p>
<p>बताते चलें कि जन शिकायतों के निस्तारण को लेकर माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा भी जनपदीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया है तथा उनके द्वारा लगातार इसकी समीक्षा भी की जाती है, जिसको लेकर जनपद स्तर पर जिलाधिकारी के निर्देशन में शिकायतों के निस्तारण को लेकर व्यापक व्यवस्था की गई है, शिकायतों के निस्तारण से लेकर उनकी स्थिति तक की मॉनिटरिंग अधिकारियों द्वारा की जाती है।</p>
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		<title>Special On International Women&#8217;s Day : विकलांगता को मात देकर बनीं प्रेरणा स्रोत बनी अमेठी की रोशनी</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/22569</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Mar 2025 16:06:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[International]]></category>
		<category><![CDATA[special]]></category>
		<category><![CDATA[Women's Day]]></category>
		<category><![CDATA[अमेठी की रोशनी]]></category>
		<category><![CDATA[प्रेरणा स्रोत]]></category>
		<category><![CDATA[मात]]></category>
		<category><![CDATA[विकलांगता]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY SHIVLAL YADAV  AMETHI NEWS। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिले के शाहगढ़...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><em><strong>REPORT BY SHIVLAL YADAV </strong></em></span></p>
<p><em><strong>AMETHI NEWS।</strong></em></p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिले के शाहगढ़ की एक दिव्यांग महिला रोशनी की प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। रोशनी ने अपनी विकलांगता को कभी भी अपनी प्रगति में बाधा नहीं बनने दिया और आज वह न केवल एक आत्मनिर्भर महिला हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं।</p>
<p>रोशनी को बचपन से ही विकलांगता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अपनी प्रारंभिक कठिनाइयों और समाज के उपहास के बावजूद, उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की और सिलाई, कढ़ाई और ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण लिया।</p>
<p>रोशनी ने अपने कौशल का उपयोग करके अपना खुद का स्वरोजगार शुरू किया और जल्द ही अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने में सफल रही।</p>
<p>रोशनी एक प्रतिभाशाली महिला हैं और सोशल मीडिया पर उनकी फैन फॉलोइंग बहुत बड़ी है। इसके अलावा, वह एक प्रतिभाशाली गायिका भी हैं और अवधी लोकगीतों में उनकी आवाज बहुत पसंद की जाती है।</p>
<p>&#8220;मैं अपनी विकलांगता को कभी भी अपनी प्रगति में बाधा नहीं बनने दूंगी। मैं अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार शुरू करने में मदद करना चाहती हूं,&#8221; रोशनी कहती हैं। <img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-22571" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250307-WA0025-1024x770.jpg" alt="" width="640" height="481" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250307-WA0025-1024x770.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250307-WA0025-300x226.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250307-WA0025-768x578.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250307-WA0025.jpg 1280w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>रोशनी की कहानी उन सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है जो अपनी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। यह हमें सिखाती है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से कुछ भी संभव है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>WORLD HOSPICE AND PALITIKA CARE DAY : पैलिएटिव केयर और होस्पिस का किया गया अनावरण</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/21106</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Oct 2024 12:33:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[AID]]></category>
		<category><![CDATA[Association]]></category>
		<category><![CDATA[Care]]></category>
		<category><![CDATA[CARE DAY]]></category>
		<category><![CDATA[doctors]]></category>
		<category><![CDATA[health news]]></category>
		<category><![CDATA[HOSPICE]]></category>
		<category><![CDATA[International]]></category>
		<category><![CDATA[Palitika]]></category>
		<category><![CDATA[unveiled]]></category>
		<category><![CDATA[WORLD]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY AMIT CHAWLA LUCKNOW NEWS I  विश्व हॉस्पिस और पैलिएटिव केयर दिवस पर अंतरराष्ट्रीय...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/21106">WORLD HOSPICE AND PALITIKA CARE DAY : पैलिएटिव केयर और होस्पिस का किया गया अनावरण</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY AMIT CHAWLA</strong></span></p>
<p><em><strong> LUCKNOW NEWS I </strong></em></p>
<p>विश्व हॉस्पिस और पैलिएटिव केयर दिवस पर अंतरराष्ट्रीय डॉक्टरों संघ &#8220;द साउथ एशियन जर्नल ऑफ जेरिएट्रिक मेडिसिन, सर्जरी, पैलिएटिव केयर एंड हॉस्पिस&#8221; का शुभारंभ किया।</p>
<p>वर्ल्ड होस्पिस एंड पैलिएटिव केयर डे के अवसर पर, एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल डॉक्टर्स (AID) और आस्था सेंटर फॉर जेरिएट्रिक मेडिसिन, पैलिएटिव केयर होस्पिस एवं समाज कल्याण समिति ने साउथ एशियाई जर्नल ऑफ जेरिएट्रिक मेडिसिन, सर्जरी, पैलिएटिव केयर और होस्पिस का अनावरण किया।</p>
<p>इस जर्नल का ध्यान वृद्धावस्था देखभाल, होस्पिस और पैलिएटिव केयर की अपूर्त जरूरतों को पूरा करने पर है, खासकर साउथ एशियाई के आठ देशों: अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका में।</p>
<p>इन क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती बुजुर्ग जनसंख्या के कारण जीवन-सीमा से जुड़ी बीमारियों के लिए विशेष देखभाल प्रदान करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो अब तक अनदेखा क्षेत्र रहा है। <img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-21107 size-full" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241012-WA1039.jpg" alt="" width="640" height="426" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241012-WA1039.jpg 640w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241012-WA1039-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>अनावरण कार्यक्रम की अध्यक्षता किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ की कुलपति प्रोफेसर डॉ. सोनिया नित्यानंद ने की, और इसका नेतृत्व एम्स भोपाल के पूर्व संस्थापक निदेशक एवं जर्नल के प्रधान संपादक डॉ. संदीप कुमार ने किया, साथ ही वरिष्ठ जेरिएट्रिशियन और पैलिएटिव केयर विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक शुक्ला, जो इस जर्नल के कार्यकारी संपादक के रूप में सेवारत हैं, भी उपस्थित थे।</p>
<p>प्रोफेसर डॉ. सोनिया नित्यानंद ने जर्नल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, &#8220;इस अंतरराष्ट्रीय जर्नल की शुरुआत निस्संदेह चिकित्सा पेशेवरों, शोधकर्ताओं, और नीति निर्माताओं को एक साथ लाने और दक्षिण एशिया में वृद्ध और जीवन-सीमा वाली बीमारियों से पीड़ित लोगों की देखभाल में सुधार के लिए नवीन समाधान विकसित करने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगी।&#8221;</p>
<p>जर्नल के प्रधान संपादक, डॉ. संदीप कुमार ने अनुसंधान और शिक्षा की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, &#8220;बुजुर्ग जनसंख्या, पुरानी बीमारियों, पैलिएटिव केयर पर ध्यान केंद्रित करने और अस्पताल में भर्ती होने की लागत को कम करते हुए मरीजों की संतुष्टि प्रदान करने की दिशा में अनुसंधान और शिक्षा की आवश्यकता है।</p>
<p>दक्षिण एशियाई जर्नल ऑफ जेरिएट्रिक मेडिसिन, सर्जरी, पैलिएटिव केयर और होस्पिस इस क्षेत्र में ज्ञान और सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया जा रहा है।&#8221;</p>
<p>प्रो. राजेंद्र प्रसाद (पूर्व निदेशक, पटेल चेस्ट, नई दिल्ली), डॉ. आर.के. शर्मा (पूर्व निदेशक, एसजीपीजीआई), तथा  डॉ. वी.के. पुरी (पूर्व विभागाध्यक्ष, लारी कार्डियोलॉजी) पत्रिका के संपादक मंडल के रूप में अपना मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।</p>
<p>होस्पिस और पैलिएटिव केयर जीवन-सीमा वाली बीमारियों से पीड़ित मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए विशेष चिकित्सा सेवाएँ हैं। जहाँ पैलिएटिव केयर किसी भी बीमारी के चरण में लक्षणों से राहत और समर्थन प्रदान करता है, वहीं होस्पिस केयर जीवन के अंतिम चरण में आराम और गरिमा प्रदान करता है। <img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-21108 size-full" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241012-WA1037.jpg" alt="" width="640" height="419" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241012-WA1037.jpg 640w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241012-WA1037-300x196.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>साउथ एशियाई जर्नल ऑफ जेरिएट्रिक मेडिसिन, सर्जरी, पैलिएटिव केयर और होस्पिस, जो , एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल डॉक्टर्स (AID) के बैनर तले और आस्था सेंटर फॉर जेरिएट्रिक मेडिसिन, पैलिएटिव केयर अस्पताल, होस्पिस एवं समाज कल्याण समिति के सहयोग से स्थापित किया गया है I</p>
<p>बुजुर्गों और जीवन-सीमा वाली बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए गुणवत्तापूर्ण देखभाल को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम है, विशेष रूप से दक्षिण एशिया में, जहाँ बुजुर्ग जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>डॉ. अभिषेक शुक्ला</strong></p>
<p>एम.डी., एफ.आर.सी.पी. (एडिनबर्ग), एम.एससी. (क्लिनिकल जेरियाट्रिक्स) कार्डिफ़</p>
<p><strong>कार्यकारी संपादक –</strong> दक्षिण एशियाई जर्नल ऑफ जेरियाट्रिक मेडिसिन, सर्जरी, पल्लियेटिव केयर और हॉस्पिस।</p>
<p><strong>सचिव जनरल</strong> – अंतरराष्ट्रीय डॉक्टरों संघ।, मोबाइल &#8211; 9415015050</p>
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