<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Holi Archives - Lok Dastak</title>
	<atom:link href="https://www.lokdastak.com/archives/tag/holi/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.lokdastak.com/archives/tag/holi</link>
	<description>Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak</description>
	<lastBuildDate>Sun, 23 Mar 2025 16:21:26 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-lok-fb-32x32.png</url>
	<title>Holi Archives - Lok Dastak</title>
	<link>https://www.lokdastak.com/archives/tag/holi</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>Virtual Holi Milan : होली एक-रंग अनेक _ छाई भारतीय परंपराओं की रंग-बिरंगी छटा</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/22814</link>
					<comments>https://www.lokdastak.com/archives/22814#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 23 Mar 2025 16:21:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[Holi]]></category>
		<category><![CDATA[Milan]]></category>
		<category><![CDATA[Virtual]]></category>
		<category><![CDATA[अनेक]]></category>
		<category><![CDATA[छाई]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय परंपराओं]]></category>
		<category><![CDATA[रंग]]></category>
		<category><![CDATA[रंग-बिरंगी छटा]]></category>
		<category><![CDATA[होली]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.lokdastak.com/?p=22814</guid>

					<description><![CDATA[<p>&#160; REPORT BY GAURAV AWASTHI RAEBARELI NEWS। होली, सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि उमंग,...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/22814">Virtual Holi Milan : होली एक-रंग अनेक _ छाई भारतीय परंपराओं की रंग-बिरंगी छटा</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY GAURAV AWASTHI</strong></span></p>
<p><strong>RAEBARELI NEWS।</strong></p>
<p><img decoding="async" class="alignnone wp-image-22739 size-thumbnail" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250320-WA0019-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" /></p>
<p>होली, सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि उमंग, भाईचारे और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है। इस बार जब आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की अमेरिका इकाई ने वर्चुअल मंच पर ‘होली एक-रंग अनेक’ कार्यक्रम का आयोजन किया, तो मानो डिजिटल दुनिया में भी रंगों की बौछार हो गई।</p>
<p>डिजीटल प्लेटफॉर्म ZOOM पर आयोजित इस कार्यक्रम ने भारत की अलग-अलग परंपराओं, लोकगीतों और सांस्कृतिक विविधताओं को जीवंत कर दिया। अमेरिका में बसे प्रवासी भारतीयों की सहभागिता ने इस आयोजन को और खास बना दिया।</p>
<p>कार्यक्रम का प्रारंभ समिति की अध्यक्ष मंजु मिश्रा द्वारा प्रतिभागियों के स्वागत से हुआ। उन्होंने भारतीय त्योहारों की प्राचीनता, उनकी संस्कृति में गहराई और प्रवासी भारतीयों के लिए इन त्योहारों के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके बाद कुशल संचालन की बागडोर रचना श्रीवास्तव ने संभाली। उनकी सहजता और प्रभावी वक्तृत्व शैली ने पूरे कार्यक्रम में ऊर्जा का संचार बनाए रखा।</p>
<p>इस होली मिलन समारोह का का मुख्य आकर्षण था भारत के 6 अलग-अलग राज्यों में होली मनाने की अनूठी परंपराओं का परिचय। इन परंपराओं ने यह दिखाया कि भले ही हर राज्य में होली मनाने का तरीका अलग है, लेकिन प्रेम, आनंद और उल्लास का भाव हर जगह समान है। सबसे पहले भगवान जगन्नाथ की धरती ओडिशा की बारी आई।</p>
<p>कोलकाता में हिंदी विश्वविद्यालय की कुलपति नंदिनी साहू ने बताया कि ओडिशा में होली ‘रंग’ से अधिक ‘भक्ति’ पर आधारित है। यहां होली जगन्नाथ संस्कृति से प्रेरित है, जिसमें भगवान कृष्ण की रास लीला और भक्तिमय भजनों के माध्यम से त्योहार मनाया जाता है। पुरी में होली भक्ति और आराधना का पर्व है, जहां प्राकृतिक सुंदरता और रास लीला का वर्णन विशेष रूप से किया जाता है।</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>अरुणाचल और उत्तराखंडी होली नहीं खेली, तो क्या खेली</strong></span></p>
<p>जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय, पासीघाट में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. हरिनिवास पांडेय ने बताया कि पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश में होली से मिलता-जुलता एक त्योहार मनाया जाता है। यहां की गालो जनजाति में धान की फसल पकने की खुशी में एक-दूसरे के चेहरों पर चावल का पिसा हुआ लेप लगाने की परंपरा है।<img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-22815" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250323-WA0062-1024x512.jpg" alt="" width="640" height="320" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250323-WA0062-1024x512.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250323-WA0062-300x150.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250323-WA0062-768x384.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250323-WA0062-1536x768.jpg 1536w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250323-WA0062.jpg 1600w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>उत्तराखंड में बैठकी होली और खड़ी होली की परंपरा है, जो कुमाऊं और गढ़वाल मंडलों में अलग-अलग अंदाज में मनाई जाती है। इसके बारे में एमबी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हल्द्वानी की प्रोफेसर प्रभा पंत ने बताया। उन्होंने बताया, &#8220;कुमाऊं क्षेत्र में पूस महीने के पहले रविवार से लेकर बसंत पंचमी तक होली गीतों की गूंज रहती है।</p>
<p>रात में चौपाल लगती है, जहां लोकगीतों के साथ ठंडाई और उत्सव का आनंद लिया जाता है। कुमाऊं के होली गीतों में मथुरा, ब्रज और गोकुल की गाथाएं भी सुनाई देती हैं, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को उत्तर प्रदेश से जोड़ती हैं।&#8221;</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>तेलंगाना में कामदेव और तमिलनाडु में भगवान मुरुगन के दर्शन की अनूठी परंपरा</strong></span></p>
<p>तेलंगाना में होली अलग तरह से मनाई जाती है। यहां होलिका दहन की बजाय कामदेव की पूजा होती है। गांवों में अल्पना से सजे घरों में होली की धूम रहती है। कामदेव की मूर्ति को गांव भर में घुमाने के बाद होली का आयोजन किया जाता है। लोग होली की राख को शुभ मानते हैं और अबीर-गुलाल में मिलाकर इसे चेहरे पर लगाते हैं।</p>
<p>तमिलनाडु में होली के समय राजा अपने शरीर पर टैटू जैसे चित्र उकेरवाते थे, जो उनकी शक्ति का प्रतीक होते थे। यहां मुरुगन भगवान के दर्शन को शुभ माना जाता है। पोंगल की तरह यहां भी लोग सड़कों पर फूलों से होली खेलते हैं और एक-दूसरे पर फूल फेंककर स्नेह जताते हैं।</p>
<p>डॉ. सुरभि दत्त ने तेलंगाना में होली की परंपरा पर बात करते हुए बताया कि हैदराबाद जैसे शहरों में विभिन्न राज्यों के लोग मिलकर होली में भाग लेते हैं, जिससे यह त्योहार सांस्कृतिक संगम का प्रतीक बन गया है। वहीं, RBS कला एवं विज्ञान महाविद्यालय, सुलूर-कोयंबटूर की प्रोफेसर ललिता रवींद्र एन ने बताया कि तमिलनाडु की होली प्रेम और सादगी की प्रतीक है।</p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>अवधी लोकगीतों से सजी सांस्कृतिक संध्या</strong></span></p>
<p>इस अनोखे डिजीटल होली मिलन का एक और आकर्षण था शुभ्रा ओझा की ओर से प्रस्तुति। उन्होंने ‘उड़े रे गुलाल..’ नामक डिजिटल प्रेजेंटेशन में अमेरिका में बसे प्रवासी भारतीयों की होली की तस्वीरों और वीडियो क्लिप्स ने यह दिखाया कि देश से दूर रहकर भी वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से कितने जुड़े हुए हैं। इस प्रस्तुति को सभी ने खूब सराहा।</p>
<p>कार्यक्रम में अवधी और भोजपुरी लोकगीतों ने समां बांध दिया। अयोध्या की प्रसिद्ध लोकगायिका संजोली पांडेय ने अपने 2000 से अधिक लोकगीतों में से चुनिंदा गीतों की प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके गीत ‘सिया निकली अवध की ओर, होलिया खेले रामलला’ ने सभी के दिलों में उत्साह भर दिया।</p>
<p>कैलिफोर्निया में रहने वाली शोनाली श्रीवास्तव ने ढोलक की थाप पर ‘सखी री देखो श्याम खेलन आए होली’, ‘सरजू तट राम खेले होली’ जैसे गीतों से सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। कक्षा 8 की छात्रा और रायबरेली की दृष्टि पांडेय ने अपनी प्रस्तुति ‘मसाने में होरी खेलत..’ से कार्यक्रम की शुरुआत की और अपने भजन ‘मैहर की सारदा भवानी..’ से समापन किया। उनकी मासूमियत और मधुर आवाज ने हर किसी का मन मोह लिया।</p>
<p>कार्यक्रम का समापन संयोजक गौरव अवस्थी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। उन्होंने सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों और दर्शकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ये आयोजन भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता का अद्भुत उदाहरण है। कुलमिलाकर, ‘होली एक-रंग अनेक’ कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि होली सिर्फ रंगों का नहीं, बल्कि विविध संस्कृतियों का संगम है।</p>
<p>भले ही स्थान और परंपराएं बदल जाएं, लेकिन प्रेम, उल्लास और भाईचारे का रंग हर जगह एक समान रहता है। इस वर्चुअल होली मिलन ने तकनीक के माध्यम से भारतीय परंपराओं को जीवंत कर दिया और प्रवासी भारतीयों के दिलों में भी त्योहार की उमंग भर दी।</p>
<p>आयोजन में भारत इकाई के अध्यक्ष विनोद शुक्ल, नीलम राकेश(लखनऊ), करुणालक्ष्मी (मैसूर-कर्नाटक), डाॅ सुमन फुलारा(उत्तराखंड), अक्षय नामदेव(छत्तीसगढ), गणेशदत्त बजाज(अमेरिका), पुष्पा राजगोपाल (तमिलनाडु), देवांशु तिवारी, करुणा शंकर मिश्र विशेष रूप से उपस्थित रहे।</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/22814">Virtual Holi Milan : होली एक-रंग अनेक _ छाई भारतीय परंपराओं की रंग-बिरंगी छटा</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.lokdastak.com/archives/22814/feed</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>HOLI SPECIAL : होली_के_रंग</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/22648</link>
					<comments>https://www.lokdastak.com/archives/22648#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Mar 2025 08:04:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[Holi]]></category>
		<category><![CDATA[special]]></category>
		<category><![CDATA[रंग]]></category>
		<category><![CDATA[रचना]]></category>
		<category><![CDATA[होली]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.lokdastak.com/?p=22648</guid>

					<description><![CDATA[<p>Composition By Kripa Shankar Vikram कुछ हमारी होली के मुहब्बत भरे रंग से जल जाते...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/22648">HOLI SPECIAL : होली_के_रंग</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #993300"><strong>Composition By Kripa Shankar Vikram</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>कुछ हमारी होली के मुहब्बत भरे रंग से जल जाते हैं!</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>कुछ हमारी शोहबत और संग से जल जाते हैं !!</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>जिनको नफरत है मजहबी भाईचारे से !</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>वो हमारी कौम की रवायत के ढंग से जल जाते हैं !!</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>हिफाजत हम भी रखते हैं पर्वो में सभी मां और बहनों का !</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>अब जिनका मन ही गन्दा हो वो बजते हुए मृदंग से जल जाते हैं !!</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>रंग दुनिया में प्रकृति का सौहार्दिक पैगाम लाते हैं !</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>रंगों के आयाम में ईश्वर, अल्लाह, मुर्शिद मलंग बदल जाते हैं !!</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>जिस अबीर ,गुलाल को हम मस्तक पर लगाते हैं !</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong>उससे यहां कुछ लोगों के नाज़ुक अंग जल जाते हैं !!</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff00ff"><strong><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f449.png" alt="👉" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" />जिन्हें रंग खेलना व्यक्तिगत् पसंद नहीं है वो किसी दूसरे के रंग में भंग न डालें!  </strong></span><strong style="color: #ff00ff"> </strong></p>
<p><strong style="color: #ff00ff">रंगोत्सव के पावन पर्व होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!<img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f940.png" alt="🥀" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f940.png" alt="🥀" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /></strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/22648">HOLI SPECIAL : होली_के_रंग</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.lokdastak.com/archives/22648/feed</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Holi Celebration : आज बिरज में होरी रे रसिया.. खेली गई फूलों की होली</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/22598</link>
					<comments>https://www.lokdastak.com/archives/22598#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 13:12:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्‍तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[रायबरेली]]></category>
		<category><![CDATA[CELEBRATION]]></category>
		<category><![CDATA[Holi]]></category>
		<category><![CDATA[आज]]></category>
		<category><![CDATA[खेली]]></category>
		<category><![CDATA[फ़ूलों की होली]]></category>
		<category><![CDATA[बिरज में होरी]]></category>
		<category><![CDATA[रसिया]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.lokdastak.com/?p=22598</guid>

					<description><![CDATA[<p>RIPORT BY GAURAV AWASTHI  RAEBARELI NEWS। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति न्यास की ओर से...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/22598">Holi Celebration : आज बिरज में होरी रे रसिया.. खेली गई फूलों की होली</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>RIPORT BY GAURAV AWASTHI </strong></span></p>
<p><em><strong>RAEBARELI NEWS।</strong></em></p>
<p>आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति न्यास की ओर से आयोजित पुस्तक में आठवें दिन संगीत और भजन संध्या का समापन फूलों की होली से हुआ। होली गीतों पर लोग देर शाम झूमते रहे।</p>
<p>लखनऊ के वे-राग बैंड के सिंगर अंकुर कक्कड़ ने बांके बिहारी लाल भजन के साथ संगीत संध्या की शुरुआत की। कई बाॅलीवुड गीत प्रस्तुत कर लोगों को झुमा दिया। गिटार पर उनका साथ विक्रांत श्रीवास्तव और ड्रम पर डाॅ शैलांक ने दिया। आधे घंटे तक गीतों पर लोग थिरकते रहे।</p>
<p>इसके बाद फूलों की होली का दौर शुरू हुआ। अंकुर, अमित सिंह की जोड़ी ने होली गीतों से ऐसा समां बांधा कि सभी लोग स्टेज पर चढ़कर डांस करने लगे। फूलों की बारिश के बीच होली गीतों का देर रात तक दौर चलता रहा।<img decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-22602" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250309-WA0013-1024x768.jpg" alt="" width="640" height="480" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250309-WA0013-1024x768.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250309-WA0013-300x225.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250309-WA0013-768x576.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250309-WA0013.jpg 1280w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p><span style="color: #993300"><strong>संगीत संध्या का आयोजन </strong></span></p>
<p>संगीत संध्या का प्रारंभ उन्नाव से आए युवा गायक हरिओम मिश्र के गीतों और भजनों से हुआ। अपने मधुर गीतों से उन्होने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने &#8220;रंग डारों न बीच बाजार, श्याम मै तो बीच बाजार&#8221; और &#8220;हाय पकड़ो न बैयां हमार, आज ही पहनी नई नई चूनर&#8221; जैसे गीतों को अपनी मधुर आवाज में प्रस्तुत किया।</p>
<p>गायक मो फैज ने फिल्मी गीत सुनाकर समां बांध दिया। शिवानी सिंह ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। संचालन पंकज चौधरी ने किया। सोनम पांडेय, योगेश मिश्र ने भी अपने गीतों से माहौल संगीतमय कर दिया। अतुल कक्कड़ ने मां पर गीत सुनाकर विश्व महिलायें को सार्थक कर दिया।</p>
<p>संयोजक गौरव अवस्थी ने कहा कि रायबरेली का संगीत के क्षेत्र में 4 सदियों पुराना इतिहास है। काॅलेज के प्रबंध मंत्री अतुल भार्गव, रेयान इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल सदफ, लल्लन मिश्र, गिरीश चंद्र मिश्र, अमर द्विवेदी, शशिकांत अवस्थी, मधु कक्कड़, प्राची मिश्रा ने कलाकारों को उपहार देकर सम्मानित किया।</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>नवोदित गायिका दृष्टि ने बहाई भजनों की गंगा<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-22600" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250309-WA0012-1024x478.jpg" alt="" width="640" height="299" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250309-WA0012-1024x478.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250309-WA0012-300x140.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250309-WA0012-768x358.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250309-WA0012.jpg 1280w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></strong></span></p>
<p>जिले की नवोदित गायिका दृष्टि पांडेय देवांशी ने सुमधुर स्वर में कई भजन सुनाकर भजनों की गंगा बहा दी। उन्होंने &#8220;मैहर की शारदा भवानी तुम्हार गुण कैसे बखानी&#8221; और &#8220;ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन&#8221; जैसे भजनों को अपनी मधुर आवाज में प्रस्तुत किया।</p>
<p>उनके भजनों ने श्रोताओं को खूब पसंद आया और उन्हें देर तक तालियां बजती रहीं। पुस्तक मेला में विश्व महिला दिवस के अवसर पर दृष्टि को विनोद शुक्ल और अनिल मिश्र द्वारा सम्मानित किया गया।</p>
<p><span style="color: #800080"><strong>निफ्ट के राॅक बैंड के लाइव कंसर्ट पर दर्शक झूमे</strong></span></p>
<p>फिरोज गांधी काॅलेज सभागार परिसर में चल रहे आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी पुस्तक मेले में निफ्ट के बच्चों के राॅक बैंड का लाइव कंसर्ट में दर्शक झूम गए। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच छात्रा अनन्या प्रसाद और छात्र प्रशांत ने जैसे ही परफार्मेंस शुरू की तो समां बंध गया।</p>
<p>निफ्ट के करीब 20 छात्र-छात्राएं शाम पांच बजे पुस्तक मेले में मीडिया हेड हर्ष और एकेडमिक हेड प्रवीन श्रीवास्तव के साथ पहुंचे। ड्रम पर सचिन मनोज और गिटार पर नव्या शर्मा के साथ निफ्ट के छात्र प्रशांत, अनन्या प्रसाद ने हर लम्हा..तुझसे कहता रहता हूं..गाना शुरू किया तो सब वाह वाह कर उठे।</p>
<p>तालियों की गड़गड़ाहट से मैदान गूंज उठा। ड्रमिस्ट सचिन मनोज की ड्रम पर सोलो परफार्मेंस ने भी लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। करीब एक घंटे तक चली प्रस्तुतियों का समापन गायक अंकुर कक्कड़ द्वारा गाए गए गए कैलाश खेर के चर्चित गीत के साथ हुआ।</p>
<p>अंत में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति न्यास की तरफ से राॅक बैंड के साथ प्रस्तुति देने वाले छात्र छात्राओं को अतुल भार्गव, संध्या भार्गव, डाॅ आदर्श कुमार, दीपमाला तिवारी, श्रीपति नारायण सिंह द्वारा सम्मानित किया गया।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-22601" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250309-WA0010-1024x549.jpg" alt="" width="640" height="343" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250309-WA0010-1024x549.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250309-WA0010-300x161.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250309-WA0010-768x412.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250309-WA0010.jpg 1028w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>इस मौके पर जेपी त्रिपाठी, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अजय त्रिपाठी, रघुनाथ द्विवेदी, ठाकुर प्रसाद सिंह, महेंद्र अग्रवाल, शैलेंद्र अग्निहोत्री, रागिनी सिंह, डाॅ रीता श्रीवास्तव, केके सिंह, मुन्नालाल साहू आदि मौजूद रहे।</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/22598">Holi Celebration : आज बिरज में होरी रे रसिया.. खेली गई फूलों की होली</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.lokdastak.com/archives/22598/feed</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
