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	<title>Hindu minority Archives - Lok Dastak</title>
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	<description>Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak</description>
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		<title>BURNING ISSUE : बांग्लादेश में हिंदुओं पर कहर, वैश्विक समुदाय चुप !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Aug 2024 03:12:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>PRESENTED BY ARVIND JAYTILAK  बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफा के बाद उपजी अराजकता...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>PRESENTED BY ARVIND JAYTILAK </strong></span></p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-thumbnail wp-image-10534" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/04/photo-Arvind-Jaiteelak-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/04/photo-Arvind-Jaiteelak-150x150.jpg 150w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/04/photo-Arvind-Jaiteelak-24x24.jpg 24w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/04/photo-Arvind-Jaiteelak-48x48.jpg 48w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/04/photo-Arvind-Jaiteelak-96x96.jpg 96w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/04/photo-Arvind-Jaiteelak-300x300.jpg 300w" sizes="(max-width: 150px) 100vw, 150px" /></p>
<p><span style="font-weight: 400">बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफा के बाद उपजी अराजकता के बीच अल्पसंख्यक हिंदुओं पर अत्याचार बढ़ गया है। हिंदू घरों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और मंदिरों को लूटा जा रहा रहा है। आग के हवाले किया जा रहा है। हिंदू इलाकों में डर और भय का माहौल है। हिंदू महिलाएं बेहद असुरक्षित और असहाय हैं। हिंदू महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं बेचैन कर रही हैं। इस्कॉन मंदिर पर हमला करके उसे जला दिया गया है। हालात इस कदर बिगड़ चुका है कि हिंदुओं को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ रहा है। कई हिंदू नेताओं और व्यापारियों की हत्या हो गई है। कई हिंदुओं को जिंदा जलाने की खबरें हैं। सेना और पुलिस तमाशबीन हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400"> माना जा रहा है कि बांग्लादेश में जो अंतरिम सरकार का गठन होगा उसमें बीएनपी और जमाते इस्लामी सरीखे दलों का बोलबाला होगा। ऐसे में हिंदुओं पर अत्याचार में इजाफा होना तय है। ऐसा इसलिए भी कि बांग्लादेश में हूजी, जमातुल मुजाहिदीन बंगलादेश, द जाग्रत मुस्लिम जनता बंगलादेश (जेएमजेबी), पूर्व बांगला कम्युनिस्ट पार्टी (पीबीसीबी) व इस्लामी छात्र शिविर यानी आइसीएस जैसे बहुतेरे आतंकी और कट्टरपंथी संगठन हैं जिनका मकसद बांग्लादेश से हिंदू अल्पसंख्यकों को सफाया करना है। इसके लिए वे तीन रास्ते अपना रहे हैं-हत्या, बलात्कार और धर्म परिवर्तन। अभी गत वर्ष ही बांग्लादेश राष्ट्रीय हिंदू महाजोत द्वारा खुलासा किया गया था कि पिछले एक वर्ष में बांग्लादेश में हिंदू समुदायों की 39 महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया। इनमें 27 महिलाएं गैंगरेप का शिकार हुई हैं। 55 महिलाओं से बलात्कार की कोशिश हुई।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400"> रिपोर्ट के मुताबिक बलात्कार के बाद 14 महिलाओं की हत्या की गयी। हिंदू महाजोत संस्था के जिम्मेदार लोगों की मानें तो पिछले एक वर्ष में अल्पसंख्यक समुदाय के 424 लोगों को मारने का प्रयास किया गया। इनमें 60 लोग अभी भी लापता हैं। 849 लोगों को मौत की धमकी दी गयी है। तकरीबन 360 लोगों को बुरी तरह घायल हैं। 127 लोगों का अपहरण हुआ है। 445 अल्पसंख्यक परिवारों को देश छोड़ने पर मजबूर कर उनकी 89,990 एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। 3694 परिवारों को बेदखल कर उनकी जमीन हड़पने का प्रयास किया गया है। 15,115 परिवारों पर पलायन का खतरा मंडरा रहा है। 152 लोगों का धर्म परिवर्तन किया गया है। धार्मिक संस्थानों को अपवित्र करने के 179 मामले और धार्मिक समारोहों में बाधा डालने के 129 मामले सामने आए हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400"> पिछले एक वर्ष में 51 मंदिरों की जमीन पर कब्जा और 128 मंदिरों पर हमले, तोड़फोड़ एवं आगजनी की गयी है। मंदिरों से मूर्ति चोरी की 72 घटनाएं हुई हैं। अल्पसंख्यकों से 27 करोड़ 46 लाख 33 हजार रुपए की वसूली की गयी है। कुल नुकसान 220 करोड़ 89 लाख टका का हुआ है। विचार करें तो बांग्लादेश में देश के हिंदू समुदाय को आजादी नहीं है। नतीजा अल्पसंख्यक समुदाय पर अत्याचार जारी है। इसका दुष्परिणाम यह है कि बांग्लादेश में हिंदु अल्पसंख्यकों की आबादी तेजी से घट रही है। अभी गत वर्ष ही अमेरिकी मानवाधिकार कार्यकर्ता रिचर्ड बेंकिन ने खुलासा किया था कि पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी तेजी से घट रही है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">उनके मुताबिक शेख हसीना और खालिदा जिया के अंतर्गत बांग्लादेशी सरकारें उनलोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं कि है जो हिंदुओं के खिलाफ काम कर रहे हैं। बेंकिन के आंकड़ों पर गौर करें तो बांग्लादेश की कुल आबादी 15 करोड़ है जिसमें से 90 प्रतिशत मुसलमान हैं। हिंदू आबादी घटकर 9.5 प्रतिशत रह गयी है। जबकि 1974 में हिंदुओं की संख्या कुल आबादी में जहां एक तिहाई थी, वहीं 2016 में यह घटकर कुल आबादी का 15 वां हिस्सा रह गयी है। बेंकिन के आंकड़ों के इतर इतिहास में जाएं तो 1947 में भारत विभाजन के समय पूर्वी पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी 30 फीसद थी जो आज घटकर 8.6 फीसद रह गयी है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400"> बांग्लादेश जब पूर्वी पाकिस्तान हुआ करता था तो उस समय की पहली जनगणना में मुस्लिम आबादी 3 करोड़ 22 लाख और हिंदू आबादी 92 लाख 40 हजार थी। साढ़े छः दशक बाद आज मुस्लिम आबादी 16 करोड़ के पार पहुंच चुकी है जबकि हिंदू आबादी महज 1 करोड़ 20 लाख पर सिकुड़ी हुई है। सवाल उठना लाजिमी है कि अगर बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदु सुरक्षित हैं तो मुसलमानों की आबादी की तुलना में उनकी आबादी में आनुपातिक वृद्धि क्यों नहीं हुई है? गौर करें तो इसके दो मुख्य कारण हैं। एक सुनियोजित रणनीति के तहत अल्पसंख्यक हिंदुओं का कत्ल और दूसरा उनका धर्मांतरण। आमतौर पर बांग्लादेश का हिंदू जनमानस राजनीतिक और आर्थिक रुप से कमजोर है। संसद से लेकर विधानसभाओं में उसकी भागीदारी नामात्र है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400"> आतंकी व कट्टरपंथी संगठनों के अलावा बेगम खालिदा जिया के नेतृत्व वाले राजनीतिक संगठन बीएनपी के समर्थक भी उन्हें लगातार निशाना बनाते रहते हैं। यह तथ्य है कि जब भी बेगम खालिदा जिया की नेतृत्ववाली बीएनपी सत्ता में आयी है हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़ा है। खालिदा सरकार इस्लामिक कट्टरपंथियों को हिंदुओं के खिलाफ भड़काती है। यह तथ्य है कि 2001 में जब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार सत्ता में आयी तो योजना बनाकर हिंदुओं का नरसंहार किया गया। उसके समर्थक हिंदुओं के घर जलाए और संपत्तियों की लूटपाट की। हिंदू अल्पसंख्यक महिलाओं के साथ शर्मनाक कृत्य किए। बेगम खालिदा सरकार की डर से लाखों हिंदू बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गए।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400"> बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की सत्ता से विदाई के बाद जब अवामी लीग की सरकार सत्ता में आयी तो उसने हिंदू अल्पसंख्यकों को न्याय का भरोसा दिया। उसने खालिदा सरकार के दौरान नरसंहार की जांच के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया। आयोग ने 25 हजार से अधिक लोगों को हिंदुओं पर हमले का जिम्मेदार ठहराया और उन पर मुकदमा चलाने का निर्देश दिया। शर्मनाक तथ्य यह कि हमलावरों में खालिदा सरकार के 25 पूर्व मंत्री भी शामिल हैं। लेकिन अरसा गुजर जाने के बाद भी गुनाहगारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है। आज भी वे खुलेआम घूम कर रहे हैं। बांग्लादेश में न केवल अल्पसंख्यकों की निर्मम हत्याएं हो रही है बल्कि उनके संवैधानिक अधिकारों को भी सुनियोजित तरीके से समाप्त किया जा रहा है। खालिदा सरकार के दौरान एक साजिश के तहत हिंदुओं के प्रापर्टीज अधिकारों को सीमित किया गया।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400"> हालांकि  वामी लीग की सरकार ने 2011 में ‘वेस्टेज प्रापर्टीज रिटर्न (एमेंडमेंट) बिल 2011 पारित कर जब्त की गयी या मुसलमानों द्वारा कब्जाई गयी हिंदुओं की जमीन को वापस करने का कानून बनाया। लेकिन अभी तक उसका कोई सार्थक नतीजा सामने नहीं आया है। यानी हिंदुओं से छिनी गयी जमीन वापस नहीं की गयी है। कानून के जानकारों की मानें तो इस कानून के पारित होने के बाद भी अल्पसंख्यकों को 43 साल पुरानी अपनी जमीन वापस लेना टेढ़ी खीर है। सच तो यह है कि इस बिल के पारित होने के बाद मुस्लिम कट्टरपंथियों में हिंदुओं की जमीन कब्जाने की होड़ मच गयी है। अगर कट्टरपंथियों के समर्थन वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सरकार में आती है तो इस प्रवृत्ति को और बढ़ावा मिलेगा। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">उल्लेखनीय है कि 1960 में एक विवादित कानून के तहत हिंदुओं की जमीनें हड़प ली गयी थी। यह कानून पूर्वी पाकिस्तान प्रशासन ने लागू किया था और उसम समय बांग्लादेश पाकिस्तान का हिस्सा था। 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद इस कानून का विरोध हुआ और 2008 के चुनाव प्रचार में अवामी लीग ने वादा किया कि सत्ता में आने पर हिंदुओं की संपत्ति से जुड़े नियमों में बदलाव करेंगे। सरकार ने अपने वादे के मुताबिक ‘वेस्टेज प्रापर्टीज रिटर्न ( एमेंडमेंट) बिल 2011 पारित की है लेकिन अल्पसंख्यक हिंदू अपनी प्रापर्टीज पर काबिज नहीं हो सके हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400"> बेहतर होगा कि भारत सरकार बांग्लादेशी अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा के लिए बांग्लादेश पर दबाव बनाए। वैश्विक समुदाय को भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए कदम उठाना चाहिए। अन्यथा बांगलादेश में भी हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति पाकिस्तान बदतर हिंदू अल्पसंख्यकों जैसी होनी तय है।  </span></p>
<p><strong>(लेखक वरिष्ठ स्तंभकार हैं)</strong></p>
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