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	<title>health care Archives - Lok Dastak</title>
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	<description>Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak</description>
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	<title>health care Archives - Lok Dastak</title>
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		<title>HEALTH CARE PROBLEM :प्रशासनिक लापरवाही से हेल्थ वेलनेस सेंटर और एएनएम सेंटर निर्माण अधूरा !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Jan 2025 03:32:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[health care]]></category>
		<category><![CDATA[problem]]></category>
		<category><![CDATA[एएनएम सेंटर]]></category>
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		<category><![CDATA[प्रशासनिक लापरवाही]]></category>
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		<category><![CDATA[हेल्थ वेलनेस सेंटर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY LOK REPORTER AMETHI NEWS। अमेठी जिले के जगदीशपुर के ग्रामसभा मंगौली में प्रस्तावित...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/21955">HEALTH CARE PROBLEM :प्रशासनिक लापरवाही से हेल्थ वेलनेस सेंटर और एएनएम सेंटर निर्माण अधूरा !</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY LOK REPORTER</strong></span></p>
<p><em><strong>AMETHI NEWS।</strong></em></p>
<p>अमेठी जिले के जगदीशपुर के ग्रामसभा मंगौली में प्रस्तावित हेल्थ वेलनेस सेंटर का निर्माण डेढ़ महीने से रुका हुआ है, जिससे ग्रामवासियों में गहरी नाराजगी और असंतोष बढ़ रहा है। प्रशासन की घोर लापरवाही और निष्क्रियता के कारण यह परियोजना अधर में लटकी हुई है। ग्रामवासियों का कहना है कि यह सेंटर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था, लेकिन भूमि पैमाइश और निर्माण कार्य में कोई प्रगति नहीं हुई है।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण के लिए जिस जमीन का चयन किया गया था, उस पर पहले नींव निर्माण कार्य शुरू किया गया था। ग्राम प्रतिनिधि रामगोपाल तिवारी ने इस पर आपत्ति जताई और अधिकारियों से बार-बार संपर्क किया कि हेल्थ वेलनेस सेंटर का निर्माण प्रस्तावित भूमि पर ही किया जाए। इसके बावजूद प्रशासन की उदासीनता के चलते कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।</p>
<p>पूर्व उपजिलाधिकारी प्रीति तिवारी ने मौखिक आश्वासन दिया था कि निर्माण कार्य प्रस्तावित भूमि पर ही होगा, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद नए उप जिला अधिकारी पंकज कुमार ने कार्यभार ग्रहण किया, फिर भी भूमि पैमाइश सीमांकन और टीम गठन की प्रक्रिया में कोई प्रगति नहीं हुई। इससे ग्रामीणों में प्रशासन की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी है।</p>
<p>ग्राम सभा मंगौली के ग्राम प्रतिनिधि रामगोपाल तिवारी का कहना है कि उन्होंने कई बार उपजिलाधिकारी मुसाफिरखाना अपर जिलाधिकारी और जिलाधिकारी से संपर्क किया, प्रस्तावित जमीन पर निर्माण करने के लिए लिखित पत्र भी दिया गया लेकिन कोई परिणाम सामने नहीं आया। उनका कहना है कि वे लगातार इस मुद्दे को उठाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं देख पा रहे हैं। प्रशासन की घोर लापरवाही और अधिकारियों के फोन न उठाने से यह मामला और जटिल हो गया है।</p>
<p>इस देरी के बीच, ग्राम मंगौली में एएनएम सेंटर की स्थिति भी बेहद जर्जर है। यह सेंटर तीन ग्राम पंचायतों—मंगौली, डोमाड़ीह, और परवेजपुर—के लिए काम करता है, लेकिन एएनएम सेंटर की जर्जर हालत के कारण वहाँ के एएनएम (स्वास्थ्य कार्यकर्ता) का निवास भी नहीं हो पा रहा है। जर्जर स्थिति के बावजूद प्रशासन की अनदेखी से स्वास्थ्य सेवाओं पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।</p>
<p>ग्रामवासियों का कहना है कि हेल्थ वेलनेस सेंटर और एएनएम सेंटर का निर्माण दोनों के लिए अत्यंत आवश्यक है। हेल्थ वेलनेस सेंटर के बिना क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की संभावना कम हो जाती है। साथ ही, एएनएम सेंटर की जर्जर हालत के कारण तीनों ग्राम पंचायतों के लोग बिना सही स्वास्थ्य सुविधाओं के जूझ रहे हैं।</p>
<p>ग्रामवासियों ने जिला प्रशासन से इस मामले में शीघ्र कार्रवाई की अपील की है और इस देरी के कारण बढ़ रहे असंतोष और समस्याओं को दूर करने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है। वे प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर क्यों स्वास्थ्य सेवाओं जैसी जरूरी परियोजनाओं में इतनी लापरवाही बरती जा रही है।</p>
<p>इस मुद्दे पर तहसीलदार और कानूनगो से भी कई बार संपर्क किया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश उनका फोन नहीं उठाया गया, जिससे ग्रामवासियों की नाराजगी और बढ़ गई है। अधिकारियों का ऐसा रवैया प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>बोले सीएमओ -भूमि उपलब्ध होते ही निर्माण शुरू हो जायेगा </strong></span></p>
<p>मुख्य चिकित्सा अधिकारी अंशुमान सिंह ने इस पर बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने 4 दिसंबर को उपजिलाधिकारी मुसाफिरखाना से भूमि पैमाइश कर सीमांकन करवाने का अनुरोध किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक भूमि का सीमांकन नहीं होगा, तब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सकता है। उनका कहना है कि जैसे ही भूमि उपलब्ध होगी, काम शुरू कर दिया जाएगा।</p>
<p>ग्रामवासियों ने प्रशासन की घोर लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि अधिकारियों ने समय रहते ध्यान दिया होता, तो यह समस्या आज पैदा न होती।</p>
<p>प्रशासन की निष्क्रियता ने ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया है। हेल्थ वेलनेस सेंटर और एएनएम सेंटर का निर्माण जल्द से जल्द शुरू न हुआ तो इसका असर पूरे क्षेत्र के स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा।</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>जल्द होगी भूमि की पैमाइश &#8211; एसडीएम </strong></span></p>
<p>उपजिलाधिकारी पंकज कुमार से फोन पर बात की गई, तो उन्होंने बताया कि जल्द ही भूमि पैमाइश करवाई जाएगी, जिससे परियोजना की दिशा में शीघ्र प्रगति हो सकेगी। इस बयान से ग्रामवासियों को थोड़ी उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन अब तक की देरी के कारण उनका असंतोष बढ़ता जा रहा है।</p>
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		<title>सांसद प्रतिनिधि ने 10 क्षय रोगियों को लिया गोद</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Sep 2023 15:54:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[health care]]></category>
		<category><![CDATA[health news]]></category>
		<category><![CDATA[क्षय रोगी]]></category>
		<category><![CDATA[प्रतिनिधि]]></category>
		<category><![CDATA[सांसद सोनिया गांधी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY SATISH SHUKLA  RAEBARELI NEWS। राष्ट्रीय क्षय(टीबी) उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सूर्य नर्सिंग होम...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/14691">सांसद प्रतिनिधि ने 10 क्षय रोगियों को लिया गोद</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY SATISH SHUKLA </strong></span></p>
<p><em><strong>RAEBARELI NEWS।</strong></em><br />
राष्ट्रीय क्षय(टीबी) उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सूर्य नर्सिंग होम में आयोजित कार्यक्रम में सांसद प्रतिनिधि के एल शर्मा ने 10 क्षय रोगियों को गोद लिया और उन्हें पोषण पोटली दी गई जिसमें दलिया, दाल, मूंगफली आदि खाद्य सामग्री थी |</p>
<p>इस अवसर पर जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनुपम सिंह ने बताया कि टीबी के इलाज में जितना महत्व नियमित दवाओं के सेवन का होता है उतना ही महत्व प्रोटीनयुक्त खाद्य सामग्री के सेवन का होता है | इसी को ध्यान में रखते हुए क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सरकार समाजसेवियों स्वयंसेवी संस्थाओं, औद्योगिक एवं शैक्षिक संस्थानों के माध्यम से रोगियों को गोद लेकर पोषाहार तो वितरित करवा ही रही है साथ ही में उन्हें भावनात्मक सहयोग भी दे रही है |</p>
<p>इसके साथ ही निक्षय पोषण योजना के तहत इलाज के दौरान टीबी मरीज को पोषण के लिए 500 रुपये की राशि उसके बैंक खाते में आती है |जिला क्षय रोग अधिकारी ने उपस्थित लोगों से कहा कि टीबी के इलाज में सबसे महत्वपूर्ण बात है समय से बीमारी की पहचान और इलाज तभी हम प्रधानमंत्री के साल 2025 तक टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को पूरा कर सकते हैं |</p>
<p>सांसद प्रतिनिधि ने कहा कि क्षय उन्मूलन कार्यक्रम में भागीदार बनकर हम अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं यह लाइलाज बीमारी नहीं है और इसकी जांच और इलाज स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है |लाभार्थी कन्हैया (परिवर्तित नाम) ने बताया कि ठेला लगाते हैं खान-पान में इतना ध्यान नहीं दे पाते हैं | इस पोषाहार पोटली से स्वस्थ होने में सहायता मिलेगी क्योंकि इस पोषण पोटली में दलिया, मूंगफली आदि खाने का समान दिया गया है वह ताकत देने वाला है |</p>
<p>इस कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष सत्रोहन सोनकर युवा कांग्रेस नेता अतुल सिंह, जिला कार्यक्रम समन्वय अभय मिश्रा, पीएमडीटी अतुल कुमार, जिला पब्लिक प्राइवेट समन्वयक मनीष श्रीवास्तव एसटीएस के के श्रीवास्तव, दीपू पटेल अवधेश द्विवेदी दिलीप सिंह अमित राजीव प्रताप विक्रांत गुप्ता एवं समस्त जिला क्षय रोग इकाई के कर्मचारी और नर्सिंग होम का स्टाफ उपस्थित रहा ।</p>
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		<title>नौ जनवरी से चलेगा विशेष टीकाकरण अभियान &#8211; सीएमओ</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/6709</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Jan 2023 11:56:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[health care]]></category>
		<category><![CDATA[health news]]></category>
		<category><![CDATA[नौ जनवरी से चलेगा विशेष टीकाकरण अभियान]]></category>
		<category><![CDATA[नौ से पांच साल तक की आयु के बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य]]></category>
		<category><![CDATA[विशेष टीकाकरण अभियान आयोजित]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; रायबरेली I मीजल्स(खसरा) एवं रूबेला के उन्मूलन तथा नियमित टीकाकरण में गुणात्मक सुधार एवं...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p style="text-align: left">रायबरेली I<br />
मीजल्स(खसरा) एवं रूबेला के उन्मूलन तथा नियमित टीकाकरण में गुणात्मक सुधार एवं सुदृढ़ीकरण के लिए शून्य से पाँच साल तक के बच्चों के लिए नौ जनवरी से विशेष टीकाकरण पखवारा चलाया जाएगा | यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. वीरेन्द्र सिंह ने दी | उन्होंने बताया कि विशेष टीकाकरण पखवारा तीन चरणों में जनवरी, फरवरी और मार्च माह में चलेगा |</p>
<p style="text-align: left">
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि सरकार बच्चों में एम आर सहित अन्य सभी बीमारियों की रोकथाम के लिए प्रतिबद्ध है | पखवारे में पाँच वर्ष तक की आयु के बच्चों को एम आर की दो डोज एवं किसी भी वैक्सीन से छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण किया जायेगा ।<br />
इस पखवारे के आयोजन का उद्देश्य एम आर उन्मूलन के लिए एम आर वैक्सीन की अतिरिक्त डोज दिया जाना है| इसके अलावा जो बच्चे टीकाकरण से छूटे हैं उनका टीकाकरण किया जाना है और जिन बच्चों का टीकाकरण अधूरा है उनका टीकाकरण करना है|<br />
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा.अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि इस अभियान में कुल 20308 बच्चों का टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है</p>
<p style="text-align: left">। खसरे से बचाने के लिए 9441 को रूबेला टीका ,वहीं गला घोटू निमोनिया काली खांसी सहित पांच गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए 10567 बच्चों को पेंटावेलेंट का टीका लगाया जाएगा ।इन बच्चों का कोरोना संक्रमण बढ़ने के कारण नियमित टीकाकरण प्रभावित हो गया था।</p>
<p style="text-align: left">
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने बताया कि इस पखवारे में ईंट भट्ठों,घुमंतू परिवारों, निर्माणाधीन स्थलों, मलिन बस्तियों औरकम टीकाकरण कवरेज वाले क्षेत्रों में ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जाएगा | इसके साथ ही उन क्षेत्रों पर भी जोर दिया जाएगा जहां एएनएम की नियुक्ति नहीं है, एएनएम लंबी छुट्टी पर हैं, छोटे पुरवा और गाँव जहां टीकाकरण सत्र आयोजित नहीं होते हैं |</p>
<p style="text-align: left">
बुधवार व शनिवार के अलावा 456 अतिरिक्त सत्रों के माध्यम से टीकाकरण किया जायेगा । जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी डी. एस.अस्थाना ने बताया कि टीबी, पोलियो, हेपेटाईटिस बी, काली खांसी, गलघोंटू, मीजल्स, खसरा, टिटेनस, मस्तिष्क ज्वर, निमोनिया, और डायरिया से बचाव के लिए बीसीजी, ओपीवी, हेपेटाइटीस बी, मीजल्स, जेई, पीसीवी, पेन्टावेलेंट और रोटा वायरस का टीका लगाया जाता है I</p>
<h3 style="text-align: left"><span style="color: #ffff00"><strong>ये है टीकाकरण कार्यक्रम </strong></span></h3>
<p style="text-align: left">
&#8211; नौ जनवरी से चलेगा विशेष टीकाकरण अभियान<br />
&#8211; शून्य से पाँच साल तक के बच्चों के लिए चलेगा अभियान<br />
&#8211; फरवरी और मार्च में भी चलेगा विशेष टीकाकरण पखवारा<br />
&#8211; नौ से पांच साल तक की आयु के 20308 बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य<br />
<span style="color: #ff9900"><strong>इन जरूरी आंखों से वंचित मासूम</strong></span><br />
<span style="color: #ff9900"><strong>टीके का नाम</strong></span></p>
<p>वंचित बच्चे<br />
पेंटावैलेंट प्रथम डोज 3729<br />
पेंटावैलेंट द्वितीय डोज 3631<br />
पेंटावैलेंट तृतीय डोज 3507<br />
मीजल्स प्रथम डोज 4602<br />
मीजल्स द्वितीय डोज 4829<br />
कुल 20308</p>
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			</item>
		<item>
		<title>निजी अस्पतालों के दलालों का मकड़जाल में उलझे हुए हैं सरकारी अस्पताल</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/4513</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Nov 2022 04:17:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्‍तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[health care]]></category>
		<category><![CDATA[health news]]></category>
		<category><![CDATA[उलझे हुए हैं सरकारी अस्पताल]]></category>
		<category><![CDATA[दलालों का मकड़जाल]]></category>
		<category><![CDATA[निजी अस्पताल]]></category>
		<category><![CDATA[बृजेश पाठक स्वास्थ्य मंत्री]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य विभाग]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; उत्तर प्रदेश  I प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा मंत्री बृजेश पाठक द्वारा भले ही...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/4513">निजी अस्पतालों के दलालों का मकड़जाल में उलझे हुए हैं सरकारी अस्पताल</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p>उत्तर प्रदेश  I<br />
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा मंत्री बृजेश पाठक द्वारा भले ही स्वास्थ्य विभाग के बारे में दावे किए जा रहे हो कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवा साफ-सुथरी एवं बेहतर है, लेकिन हकीकत में कुछ और ही दिखता है प्रदेश के अधिकांश सरकारी अस्पतालों का हाल काफी बुरा है स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों पर निजी अस्पतालों के दलालों का बोलबाला है अनेक डॉक्टर ऐसे हैं जिनका अपना निजी नर्सिंग होम है जो कि मरीजों को अच्छे इलाज के नाम पर बहका कर उन्हीं नर्सिंग होम में भेज दिया जाता है और वहां मरीजों के साथ जमकर लूट का खसोट की जाती है I</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-4515" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2022/11/images-2.jpeg" alt="" width="255" height="150" /></p>
<p>बानगी के तौर पर प्रदेश के सबसे वीवीआईपी जिले यही चर्चा कर लेते हैं यानी कि वाराणसी जहां प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र है I पीएम मोदी के वाराणसी में निजी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर इलाज दिलाने के नाम पर खुलेआम लूट-खसोट की जा रही है। यहां मौत के सौदागर कमीशन के बदले खुलेआम मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इन दलालों का जाल शहर के सरकारी अस्पतालों में बहुत ही अंदर तक फैला हुआ है। सरकारी अस्पतालों से ही निजी नर्सिंग होम एवं पैथालॉजी सेंटर के दलाल मरीजोंं को बहकाकर अपने साथ ले जाते हैं। उसके बदले मिलने वाला कमीशन लेकर भूल जाते हैं। यह खेल पूरे प्रदेश में चल रहा है लेकिन स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासन के अधिकारी दलालों पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं। जबकि प्रदेश सरकार ने हर आम और खास नागरिकों के लिए सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त एवं विशिष्ट सेवाएं मुहैया कराई हैं। प्रतिदिन हजारों लोग इन सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने आते है। जिनमें अधिकतर गरीब और कम पढ़े लिखे लोग होते हैं। इसी वजह से निजी नर्सिंग होम के दलालों की नजर कम पढ़े-लिखे और गरीब लोगों पर ही रहती है। वही आसानी से शिकार बनते हैं। पूर्वांचल और बिहार से आने वाले मरीजो की सबसे बड़ी उम्मीद बीएचयू दलालों का गढ़ बन गया है। यहां रोजाना लगभग पांच हजार मरीज आते हैं। जिसमें औसतन 90 प्रतिशत मरीज गरीब होते हैं। इन मरीजों में बहुत से अशिक्षित भी होते हैं। इसलिए जब बीएचयू के जूनियर डॉक्टर मरीजों और तीमारदारों से तीखी भाषा मे बातें करते हैं तो उन्हें बहुत बुरा लगता है। इसी बीच वहां मौजूद दलाल मरीजों और तीमारदारों के शुभचिंतक बनकर आते हैं। वे उनको अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों में उलझाकर निजी अस्पताल जाने के लिए तैयार करते हैं। उसके बाद तत्काल निजी नर्सिंग होम की एंबुलेंस आती है जो मरीज को अस्पताल ले जाती है। यहां मरीज के भर्ती होने तक काफी ध्यान रखा जाता है। लेकिन भर्ती होने के बाद मरीज और तीमारदार को केवल आश्वासन ही मिलता है। उसकेे अलावा यदि कुछ मिलता है तो दवाओं के खर्च का मोटा बिल और जल्द अस्पताल से छुट्टी मिलने का आश्वासन। जबकि बीएचयू के चिकित्सक चाहें तो दलालों पर अंकुश लगा सकते हैं लेकिन निजी पैथॉलॉजी सेंटर और मेडिकल स्टोर से मिलने वाले मोटे कमीशन के चक्कर में जिम्मेदार लोग सब कुछ जानकर भी अंजान बने रहते हैं। सूत्रों की मानें तो कई स्त्री रोग विशेषज्ञ मरीजों को ऑपरेशन करवाने के लिए अपना रिफरेंस देकर निजी अस्पताल में भेजते हैं। ये चिकित्सक खुद भी मेहनताना लेकर चोरी-छिपे निजी अस्पतालों में अपनी सेवाएं देेते हैं। मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में दूर-दराज से सैकड़ों मरीज इलाज कराने आते हैं। इसलिए अस्पताल परिसर में पर्चा काउंटर के बाहर शहर के निजी अस्पतालों के दलाल डेरा जमाये रहते हैं। जो पर्चा बनवाने की आड़ में मरीजों से जान पहचान बनाकर उन्हें निजी नर्सिंग होम और अस्पताल में अच्छे इलाज का सब्जबाग दिखाते हैं। उसके बाद मामला तय हो जाने पर निजी अस्पताल तक मरीज को पहुंचाकर और अपना कमीशन लेकर रफूचक्कर हो जाते हैं। वहीं निजी अस्पताल कमीशनखोरी के चक्कर में अस्पताल पुहंचने वाले ऐसे मरीजों से इलाज के नाम पर जमकर लूट-खसोट करते हैं। उन्हें मरीज की आर्थिक स्थिति से कोई मतलब नहीं होता है। कई बार तो मरीजों की मौत भी हो जाती है I लेकिन अस्पताल संचालक इलाज का बिल वसूले बिना लाश भी नहीं देते हैं। दलालों को इन सब बातों से कोई सरोकार नही होता है। उन्हें केवल निजी अस्पताल से प्रति मरीज मिलने वाले 500 से लेकर 2000 रुपए तक के कमीशन की चिंता रहती है। हालांकि कई निजी अस्पतालों में यह कमीशन मरीज की बीमारी पर तय होता है। जितनी बड़ी बीमारी का मरीज आता है उतना ही बड़ा कमीशन तय होता है। इसलिए सरकारी अस्पतालों में घूमने वाले दलाल गंभीर बीमारी के मरीजों को ही फांसने की जुगत में लगे रहते हैं। सभी सरकारी अस्पतालों की पार्किंग स्टैंड से भी यह काला धंधा चलाया जाता है। बीएचयू के पार्किंग स्टैंड पर आसपास के निजी अस्पतालों के डॉक्टर व एजेंट अक्सर आते रहते है जो कि स्टैंड मालिकों और नौकरों से कहते है कि दिन भर में छह से सात मरीज हमारे अस्पताल भी भेज दिया करो ताकि हमारी और तुम्हारी रोजी-रोटी अच्छी तरह चल सके। ये लोग मरीज भेजने वाले पार्किंग स्टैंड के कर्मचारियों को प्रति मरीज 500-1000 रुपये तक देते हैं। यह धंधा उस वक्त और बड़ा हो जाता है जब किसी मरीज को खून की जरूरत होती है। स्टैंड वाले परेशान मरीजों को खून दिलवाकर हजारों रुपये भी कमा लेते हैं। महिला चिकित्सालय एवं प्रसूति गृह में आई प्रसूताओं को परिसर में मौजूद दलाल अच्छे इलाज का झांसा देकर फंसा लेते हैं। इन मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी नर्सिंग होम में ले जाया जाता है। सूत्रों केअनुसार निजी नर्सिंग होम में प्रसूताओं को ऑपरेशन के माध्यम से अच्छा व आराम दायक प्रसव कराने की बात कहकर बरगलाया जाता है। इसकी एवज में मरीजों से मोटी रकम ली जाती है। दलाल मरीजों को झांसा देकर निजी अस्पताल ले जाते हैं लेकिन उसका निष्कर्ष यह होता है कि मरीज की हैसियत से बढ़ कर बिल तैयार हो जाता है। जिसके बाद निजी अस्पताल वाले मरीज की मौत के बाद भी लाश तब तक नहीं देते जब तक उनके पैसे वसूल नहीं हो जाते हैं। इसका उदाहरण मकबूल आलम रोड भोजूबीर, लंका के कई निजी अस्पताल है। यहां मरीजों की मौत का मामला सामने आने के बाद तीमारदारों की तरफ से आरोप लगाये जा चुके हैं कि लाश को आईसीयू में वेंटिलेटर पर पैसे बढ़ाने के लिए रखा गया था और इसको लेकर कई बार मारपीट और हंगामा भी हो चुका है। इन सबके बावजूद सरकारी तंत्र वाराणसी में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। वह दलालों के सामने बौना साबित हो रहा है।<br />
सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंक और पैथालॉजी सेंटर के इर्द-गिर्द दलाल डॉक्टर के कमरे से लेकर जनरल व इमरजेंसी वार्ड तक में अपना जाल फैलाए रहते हैं। मरीज ज्यों ही डॉक्टर को दिखाकर ओपीडी से बाहर निकलता है और बाहर से लिखी जांच या दवा के बारे में आस-पास के लोगों से पूछना शुरू करता है। उसे परिसर में मौजूद दलाल तुरंत अपना शिकार बनाने की जुगत में लग जाते हैं। दलाल मरीजों को बताते हैं कि अस्पताल की मशीन खराब है। बाहर जांच करवा लो बेहतर रहेगा क्योंकि रिपोर्ट भी आज ही मिल जायेगी। उससे तुम्हें आज ही रिपोर्ट के मुताबिक दवा भी मिल जायेगी। इन दलालों का जमावड़ा रैन बसेरे में भी रहता है। वहां ठहरने वाले तीमारदारों को बहला-फुसलाकर मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती करने के लिए तैयार किया जाता है। यहां दलाल 20 प्रतिशत लोगों को फुसलाने में सफल हो जाते हैं। मरीज के बेहतर इलाज और बेहतरीन सुविधाओ की मृग मरीचिका में फंसे मरीज के प्रियजन निजी अस्पताल मकड़जाल में फंस हांफते रहते है और लाखों का चूना लगता है अलग से। अब इस सारे खेल को सत्ता में बैठे हुक्मरान कैसे देख रहे है और कोई प्रभावी कार्यवाही क्यो नही हो रही है ये यक्ष प्रश्न बना हुआ है। यह हाल सिर्फ बनारस का ही नहीं है बल्कि पूरे प्रदेश में यही हालात चल रहे हैं डॉक्टर और निजी अस्पतालों निजी पैथोलॉजियों के बीच का गठजोड़ आम गरीब जनता के लिए भारी पड़ रहा है I सरकारी तंत्र पूरी तरह से मौन है I</p>
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		<title>शरीर में इन्सूलिन बनना बंद होने पर खून में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है- डॉ सौरभ सिंह</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Nov 2022 14:22:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[health care]]></category>
		<category><![CDATA[health news]]></category>
		<category><![CDATA[खून में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है]]></category>
		<category><![CDATA[डायबिटिक]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ सौरभ सिंह]]></category>
		<category><![CDATA[मरीज़]]></category>
		<category><![CDATA[शरीर में इन्सूलिन बनना बंद]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सौरभ सिंह ने बताया कि डायबिटीज किसी वायरस या बैक्टेरिया के कारण नहीं होता है।...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>सौरभ सिंह ने बताया कि डायबिटीज किसी वायरस या बैक्टेरिया के कारण नहीं होता है। मनुष्य ऊर्जा के लिये भोजन करता है यह भोजन स्टार्च में बदलता है फिर स्टार्च ग्लूकोज में बदलता है। जिन्हे सभी कोशिकाओं में पहुॅचाया जाता है। जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है। ग्लूकोज को अन्य कोशिकाओं तक पहुॅचाने का काम इन्सुलिन का होता है और डायबिटिक रोगी के शरीर में इन्सूलिन बनना बंद अथवा कम हो जाता है जिससे शरीर के खून में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है सामान्य स्वस्थ्य व्यक्ति के खाली पेट ग्लूकोज की मात्रा mg/dL70-100 mg/dL रहता है। खाने के डेढ़ से 2 घंटे के बाद यह मात्रा mg/dL 120-140 mg/dL हो जाता है। सीएससी प्रभारी अमेठी डा सौरभ सिंह ने बताया कि डायबिटीज दो प्रकार की होती है, डायबिटीज 1 में  रोगी के शरीर में इन्सुलिन की मात्रा कम बनती है जिसे नियंत्रित किया जा सकता है, पर खत्म नहीं किया जा सकता है इसमें रोगी को इन्सुलिन इन्जेक्शन के द्वारा दिया जाता है यह बच्चो और 19 साल तक के युवाओं को हो सकता है। डायबिटीज 2 में &#8211; रोगी का शरीर शरीर इन्सुलिन का पूर्णतः इस्तेमाल नहीं कर पाता है। इसको योग, परहेज, दवाइयों तथा उचित खान-पान के जरिये नियंत्रित किया जा सकता है। यह व्यस्को में होता है। डायबिटीज के रोगी के शरीर में शुगर की मात्रा को संतुलित रखना आवश्यक होता है क्यों कि कम तथा अधिक दोनो ही स्थिति में रोगी के लिये प्राण घातक हो सकता है।</p>
<p><strong>डायबिटीज होने के कारण &#8211;</strong><br />
अनुवांशिक, इन्सुलिन की कमी या इन्सुलिन रिसेप्टर रजिस्टेंश ( इसे हिंदी में लिखें ), सही खान पान का न होना, तनाव, शारीरिक काम की कमी, ड्रग्स, स्मोक करना।</p>
<p>लक्षणः- अत्यधिक भूख लगाना, प्यास ज्यादा लगना, पेशाब ज्यादा लगना, किसी घाव को भरने में बहुत अधिक समय लगना, शरीर के कुछ भागों का सुन्न होना, आँखो से कम दिखना, जल्दी थकान होना, किसी भी चीज का जल्दी इन्फेक्शन होना, पैरों में दर्द, कमजोरी।</p>
<p><strong>ध्यान रखने योग्य बातें &#8211;</strong><br />
पर्याप्त 6-7 घंटे की नींद लें।<br />
मॉर्निग वाक ( हिन्दी में लिखें ) एवं योग को दिनचर्या मे शामिल करें।<br />
दवाओं को नियमित ले और डाक्टर की सलाह को माने।<br />
संतुलित आहार डाक्टर की सलाह लें।<br />
उचित समय अंतराल में डाक्टर की सलाह से जॉच करायें।<br />
डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है परन्तु खत्म नहीं<br />
तनाव से बचें।<br />
अगर डायबिटीज को कंट्रोल न किया जाय तो ये हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फ्लय्योर या अंधापन का खतरा बढ़ जाता है</p>
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		<title>कांग्रेस ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Nov 2022 15:32:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[health care]]></category>
		<category><![CDATA[health news]]></category>
		<category><![CDATA[डेंगू व मलेरिया]]></category>
		<category><![CDATA[मच्छर जनित डेंगू]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य विभाग]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अमेठी । डेंगू व मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियो की रोकथाम व मरीजों के समुचित इलाज...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: left">अमेठी । डेंगू व मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियो की रोकथाम व मरीजों के समुचित इलाज की व्यवस्था को लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंघल की अगुवाई में कार्यकर्ताओं के राज्यपाल को पत्र भेजकर समुचित व्यवस्था करने की मांग की है।<br />
प्रदेश के राज्यपाल को भेजे गए पत्र के माध्यम से कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंघल ने कहा कि जिले में मच्छर जनित डेंगू व मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियो की रोकथाम के लिए किसी भी गांव अथवा कस्बों ने दवाओं आदि का छिड़काव नही किया जा रहा है जिसके कारण आम जनमानस के जीवन के साथ खिलवाड़ हो रहा है।सरकारी अस्पतालों में दवाओं के साथ मरीजों के लिए न तो बेड की व्यवस्था है और न ही पर्याप्त दवाएं उपलब्ध है।विभागीय अधिकारी कागजों में सबकुछ बेहतर होने का खोखला दावा लगातार कर रहे हैं।हालत यहां तक है कि मरीजों को फर्श पर लिटा कर इलाज किया जा रहा है।बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के कारण मरीजों की या तो जाने जा रही है I</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-4145" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2022/11/IMG-20221109-WA0396-300x169.jpg" alt="" width="300" height="169" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2022/11/IMG-20221109-WA0396-300x169.jpg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2022/11/IMG-20221109-WA0396-1024x576.jpg 1024w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2022/11/IMG-20221109-WA0396-768x432.jpg 768w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2022/11/IMG-20221109-WA0396.jpg 1152w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>वही निजी अस्पतालों में लोग महंगा इलाज कराने को विवश हैं ।झोलाछाप डॉक्टरों के यहां भी बड़ी संख्या में इलाज के लिए जा रहे मरीजों के साथ खिलवाड़ हो रहा है।जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंघल के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल से अस्पतालों में मरीजों के समुचित इलाज के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं कराने के साथ ही गांव गांव कीटनाशक दवा के छिड़काव कराने की मांग की है।ज्ञापन देने वालों में सुनील सिंह अनिल सिंह देवेंद्र सिंह नरसिंह बहादुर सिंह सहित अन्य कांग्रेसी नेता शामिल हैं।</p>
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		<title>रामनगरी पहुंचे मेहुल भारत,एक लाख किमी0 साइकिल चलाने का संकल्प</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/3850</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Nov 2022 03:31:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अयोध्या]]></category>
		<category><![CDATA[उत्‍तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[health care]]></category>
		<category><![CDATA[जागरूकता]]></category>
		<category><![CDATA[दीपोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदूषण]]></category>
		<category><![CDATA[मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[योगी]]></category>
		<category><![CDATA[राम नगरी]]></category>
		<category><![CDATA[संकल्प]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; अयोध्या I एक लाख किलोमीटर साइकिल यात्रा का संकल्प लेकर जब 26 हजार किलोमीटर...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p>अयोध्या I<br />
एक लाख किलोमीटर साइकिल यात्रा का संकल्प लेकर जब 26 हजार किलोमीटर की यात्रा करके नागपुर निवासी पेशे से शिक्षक मेहुल भारत जब अयोध्या में आयोजित हुए भव्य दीपोत्सव में पहुंचे तो अयोध्या को देखकर वह अभिभूत हो उठे। अयोध्या में पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में भव्य दीपोत्सव मनाए जाने के साथ रिकॉर्ड 17 लाख 76 हजार दीपो के जलने करीब 3 लाख लोगो के साथ मेहुल भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। पिछले साल के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस यानी 21 जून 2021 को उन्होंने यह साइकिल यात्रा शुरू की। पिछले 16 महीने में वह 26 हजार किलोमीटर की यात्रा पूरी कर चुके हैं।</p>
<p>दीपोत्सव में शामिल होने अयोध्या पहुंचे मेहुल ने बताया कि &#8220;मेरा अयोध्या आने का कोई प्लान नहीं था। लेकिन यहां की दिवाली के बारे में इतना सुन रखा था कि 1 महीने पहले ही तय कर लिया था कि यहां की दिवाली में शामिल होना है। पीएम मोदी के आने की खबर ने खुशी को दोगुना कर दिया। यात्रा का मकसद पूछने पर मेहुल बताते हैं, लोगों को हेल्थ के प्रति जागरूक करने के लिए मैने 1 लाख किलोमीटर लंबी साइकिल यात्रा की शुरुआत की है। इस यात्रा से यह संदेश भी देना है कि साइकिल चलाने से आप बीमार नहीं होंगे, सड़कों पर प्रदूषण कम होगा। लोग प्रकृति से जुड़ेंगे तो सब कुछ बेहतर होगा।</p>
<p>बता दे कि मेहुल अब तक 26 हजार किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं। उनकी यात्रा एमपी के होशंगाबाद से शुरू हुई थी। वह राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गोवा, दमन दीव की यात्रा पूरी कर चुके हैं। इस वक्त यूपी में हैं। अयोध्या की दीवाली छूट न जाए इसलिए मेहुल ने पिछले हफ्ते एक दिन में ही 120 किलोमीटर साइकिल चला दी। आम तौर पर एक दिन में 50 से 70 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं।दिनभर साइकिल चलाने के बाद मेहुल रात में स्कूलों में रुकते हैं। अगर स्कूल नहीं मिला तो आश्रम, गुरुद्वारा खोजते हैं। अगर यह भी नहीं मिला तो खुद का टेंट लगाते हैं और उसी में सो जाते हैं। मेहुल बताते हैं &#8220;पिछले एक साल में बहुत मुसीबतें आई। बीमार हुआ तो यात्रा भी रोकनी पड़ी। कभी समुद्र में मोबाइल चला गया। एकबार तो गाड़ी के नीचे आते आते बचा था। लेकिन जब ठान लिया है कि यात्रा पूरी करनी है तो फिर रुकेंगे नहीं। फिलहाल मेहुल ने 25 प्रतिशत यात्रा पूरी कर ली है। अब वह उत्तर भारत के राज्यों की यात्रा पर हैं। उनका संदेश साफ है। हेल्थ के प्रति आप जागरूक हों। बढ़ते प्रदूषण के प्रति सचेत हों।&#8221;</p>
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		<title>लघु फिल्म  “पोषणगत एनीमिया’ के माध्यम से महिलाओं को किया जा रहा जागरूक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Oct 2022 12:30:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[“पोषणगत एनीमिया’]]></category>
		<category><![CDATA[health care]]></category>
		<category><![CDATA[health news]]></category>
		<category><![CDATA[खून की कमी]]></category>
		<category><![CDATA[जागरूक]]></category>
		<category><![CDATA[पोषण युक्त भोजन]]></category>
		<category><![CDATA[प्रोटीन]]></category>
		<category><![CDATA[लघु फिल्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लघु फिल्म “पोषणगत एनीमिया’ के माध्यम से बालिकाओं एवं गर्भवती को एनीमिया के प्रति जागरूक...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/3568">लघु फिल्म  “पोषणगत एनीमिया’ के माध्यम से महिलाओं को किया जा रहा जागरूक</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>लघु फिल्म “पोषणगत एनीमिया’ के माध्यम से बालिकाओं एवं गर्भवती को एनीमिया के प्रति जागरूक किया जा रहा है। लघु फिल्म पोषण गत एनीमिया में गांव की एक लड़की सुमन चक्कर खा कर गिर जाती है, गांव की अम्मा उसके चेहरे पर<br />
पानी का छिड़काव करती है और सुमन उठ जाती है, उसके बाद उसे स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाकर एएनएम को दिखाती है, तब पता चलता है की सुमन को खून की कमी है, लघु फिल्म के माध्यम से एनीमिया से बचने के बारे में बताया जाता है। एक लड़की यदि जीवन चक्र की किसी भी अवस्था में कुपोषित होती है तो उसका प्रभाव उसके जीवन में आने वाली हर अवस्था को प्रभावित करता है। इसलिए इस समय संतुलित व पर्याप्त भोजन करना अत्यंत आवश्यक है। जनपद के अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी राम प्रसाद ने<br />
बताया कि बालिकाओं में एनीमिया माहवारी के कारण खून की कमी से हो जाती है। इसके लिए खानपान पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है, गर्भधारण या शिशु के जन्म के पश्चात एनीमिया बेहद सहजता से उत्पन्न हो जाती है, जो अनदेखा करने पर बेहद घातक साबित हो सकती है।<br />
उन्होंने बताया कि इसको लेकर लोगों को न सिर्फ इसके बारे में जागरूक किया जा रहा है, बल्कि आशा कार्यकर्ताओं के द्वारा गांव-गांव जाकर खून की कमी यानी एनीमिया दूर करने के लिए आयरन की गोली व प्रोटीन युक्त आहार के विषय मे जागरूक किया जा रहा है. साथ-साथ घरेलू उपायों की सलाह भी दी जा रही है।</p>
<p>खून की कमी के लक्षण-<br />
&gt; सांस लेने में दिक्कत होना<br />
&gt; थकान<br />
&gt;हाथ-पैर ठंडे होना<br />
&gt;त्वचा में पीलापन<br />
&gt;कमजोरी<br />
&gt;चक्कर आना<br />
&gt;सिरदर्द<br />
&gt;दिल की अनियमित धड़कन</p>
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