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	<title>death Archives - Lok Dastak</title>
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	<description>Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak</description>
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	<title>death Archives - Lok Dastak</title>
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		<title>Death Anniversary of Vivekananda : भारत के वक्ष पर धड़कता स्वामी जी के विचार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Jul 2025 13:46:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; PRESENTED BY ARVIND JAYTILAK आज स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि है। उन्होंने अपने विचारों...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000">PRESENTED BY ARVIND JAYTILAK</span></strong></p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-thumbnail wp-image-11283" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-150x150.jpg 150w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-24x24.jpg 24w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-48x48.jpg 48w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-96x96.jpg 96w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-300x300.jpg 300w" sizes="(max-width: 150px) 100vw, 150px" /></p>
<p>आज स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि है। उन्होंने अपने विचारों से अतीत के अधिष्ठान पर वर्तमान का और वर्तमान के अधिष्ठान पर भविष्य का बीजारोपण किया। स्वामी जी का उदय ऐसे समय में हुआ जिस समय भारत के सामाजिक पुनरुत्थान के लिए राजाराम मोहन राय और शिक्षा के विकास के लिए ईश्वरचंद विद्यासागर जैसे अनगिनत मनीषी भारतीय समाज में नवचेतना का संचार कर रहे थे। स्वामी जी अपने विचारों के जरिए स्वधर्म और स्वदेश के लिए अप्रतिम प्रेम और स्वाभिमान का उर्जा प्रवाहित कर जाग्रत-शक्ति का संचार किया जिससे भारतीय जन के मन में अपनी ज्ञान, परंपरा, संस्कृति और विरासत का गर्वपूर्ण बोध हुआ। स्वामी जी की दृष्टि में समाज की बुनियादी इकाई मनुष्य था और उसके उत्थान के बिना वे देश व समाज के उत्थान को अधूरा मानते थे।</p>
<p>उनका दृष्टिकोण था कि राष्ट्र का वास्तविक पुनरुद्धार मनुष्य-निर्माण से प्रारंभ होना चाहिए। मनुष्य में शक्ति का संचार होना चाहिए जिससे कि वह मानवीय दुर्बलताओं पर विजय प्राप्त करने में और प्रेम, आत्मसंयम, त्याग, सेवा एवं चरित्र के अपने सद्गुणों के जरिए उठ खड़ा होने का सामर्थ्य जुटा सके। वे सर्वसाधारण जनता की उपेक्षा को एक बड़ा राष्ट्रीय पाप मानते थे। 1893 में शिकागो में धर्म सम्मेलन (पार्लियामेंट आफॅ रिलीजन ) के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि ‘मेरी यह धारणा वेदान्त के इस सत्य पर आधारित है कि विश्व की आत्मा एक और सर्वव्यापी है। पहले रोटी और फिर धर्म। लाखों लोग भूखों मर रहे हैं और हम उनके मस्तिष्क में धर्म ठूंस रहे हैं। मैं ऐसे धर्म और ईश्वर में विश्वास नहीं करता, जो अनाथों के मुंह में एक रोटी का टुकड़ा भी नहीं रख सकता।’</p>
<p>उन्होंने सम्मेलन में उपस्थित अमेरिका और यूरोप के धर्म विचारकों व प्रचारकों को झकझोरते हुए कहा कि ‘भारत की पहली आवश्यकता धर्म नहीं है। वहां इस गिरी हुई हालत में भी धर्म मौजूद हैं। भारत की सच्ची बीमारी भूख है। अगर आप भारत के हितैषी हैं तो उसके लिए धर्म प्रचारक नहीं अन्न भेजिए।’ स्वामी जी गरीबी को सारे अनर्थों की जड़ मानते थे। इसलिए उन्होंने दुनिया को सामाजिक-आर्थिक न्याय और समता-समरसता पर आधारित समाज गढ़ने का संदेश दिया। वे ईश्वर-भक्ति और धर्म-साधना से भी बड़ा काम गरीबों की गरीबी दूर करने को मानते थे। एक पत्र में उन्होंने ने लिखा है कि ‘ईश्वर को कहां ढुंढ़ने चले हो। ये सब गरीब, दुखी और दुर्बल मनुष्य क्या ईश्वर नहीं है? इन्हीं की पूजा पहले क्यों नहीं करते ?’</p>
<p>उन्होंने स्पष्ट घोषणा की थी कि ‘गरीब मेरे मित्र हैं। मैं गरीबों से प्रीती करता हूं। मैं दरिद्रता को आदरपूर्वक अपनाता हूं। गरीबों का उपकार करना ही दया है।’ वे इस बात पर बल देते थे कि हमें भारत को उठाना होगा, गरीबों को भोजन देना होगा और शिक्षा का विस्तार करना होगा। स्वामी जी ने भारत के लोगों को संबोधित करते हुए शिकागो से एक पत्र में लिखा कि याद रखो की देश झोपड़ियों में बसा हुआ है, परंतु शोक! उन लोगों के लिए कभी किसी ने कुछ नहीं किया।’ स्वामी जी गरीबों को लेकर बेहद संवेदनशील थे। उन्होंने गुरु रामकृष्ण परमहंस के स्वर्गारोहण के बाद उनकी स्मृति में ‘रामकृष्ण मिशन’ की स्थापना की। मिशन का उद्देश्य गरीबों, अनाथों, बेबसों और रोगियों की सेवा करना था।</p>
<p>जब उन्होंने मठ के सन्यासियों के समक्ष यह प्रस्ताव रखा तो उनका भारी विरोध हुआ। सन्यासियों ने तर्क दिया कि हम सन्यासियों को ईश्वर की आराधना करना चाहिए न कि दुनियादारी में पड़ना चाहिए। स्वामी जी सन्यासियों के उत्तर से बेहद दुखी हुए। उन्होंने कहा कि आपलोग समझते हैं कि ईश्वर के आगे बैठने से वह प्रसन्न होगा और हाथ पकड़कर स्वर्ग ले जाएगा तो यह भूल है। आंखे खोलकर देखों की तुम्हारे पास कौन है। स्वामी जी ने दरिद्र को दरिद्र नारायण कहा। उन्होंने कहा कि ‘आप अपना शरीर, मन, वचन सब कुछ परोपकार में लगा दो। तुमको पता है ‘मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, अर्थात माता में ईश्वर का दर्शन करो। पिता में ईश्वर का दर्शन करो’ लेकिन मैं कहता हूं ‘दरिद्र देवो भव, मूर्ख देवो भव।</p>
<p>अनपढ़, नादान और पीड़ित को अपना भगवान मानो और जानो कि इन सबकी सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है।’ उनका मानना था कि मानवता के सत्य को पहचानना ही वास्तव में वेदांत है। वेदांत का संदेश है कि यदि आप अपने बांधवों अर्थात साक्षात ईश्वर की पूजा नहीं कर सकते तो उस ईश्वर की पूजा कैसे करोगे जो निराकार है। एक व्याख्यान में स्वामी जी ने कहा कि जब तक लाखों लोग भूखे और अज्ञानी हैं तब तक मैं उस प्रत्येक व्यक्ति को कृतध्न समझता हूं, जो उनके बल पर शिक्षित बना और उनकी ओर ध्यान नहीं देता है। उन्होंने सुझाव दिया कि इन गरीबों, अनपढ़ों, अज्ञानियों एवं दुखियों को ही अपना भगवान मानो। स्मरण रखो, इनकी सेवा ही तुम्हारा परम धर्म है। स्वामी जी आम आदमी के उत्थान के लिए धन का समान वितरण आवश्यक मानते थे।</p>
<p>वे इस बात के विरुद्ध थे कि धन कुछ लोगों के हाथों में केंद्रीत हो। स्वामी जी अंग्रेजों द्वारा भारत के संसाधनों के शोषण से चिंतित थे और भारत की दुर्दशा का इसे एक बड़ा कारण मानते थे। स्वामी जी देश की तरक्की के लिए कषि और उद्योग का विकास चाहते थे। वे अकसर परामर्श देते थे कि रामकृष्ण मिशन जैसी संस्थाओं को निःस्वार्थ भाव से गरीबी से जुझ रहे किसानों की दशा में सुधार लाने वाले कार्यक्रम एवं परियोजनाएं हाथ में लेनी चाहिए। स्वामी जी इस मत के प्रबल हिमायती थे कि भारत का औद्योगिक विकास जापान की तरह विशेषताओं को सुरक्षित रखते हुए होना चाहिए। वे चाहते थे कि देश में स्वदेशी उद्योगों की स्थापना हो। एक बार उन्होंने उद्योगपति जमशेद जी टाटा से पूछा था कि आप थोड़े से फायदे के लिए विदेश से माचिस मंगाकर यहां क्यों बेचते हैं?</p>
<p>स्वामी जी ने सुझाव दिया कि आप देश में ही माचिस की फैक्टरी और शोध संस्थान स्थापित करें। स्वामी जी के सुझाव का परिणाम रहा कि आगे चलकर जमशेद जी टाटा ने ‘टाटा इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन फंडामेंटल साईंसेज’ की स्थापना की। स्वामी जी देश के आर्थिक विकास और नैतिक मूल्यों को एकदूसरे से आबद्ध चाहते थे। उनकी इच्छा थी कि भारत के उच्च शिक्षण संस्थाओं के पाठ्यक्रमों में विज्ञान व प्रौद्योगिकी के साथ वेदांत दर्शन भी समाहित हो। उनकी दृष्टि में वेदांत आधारित जीवन और आर्थिक विकास के बीच गहरा संबंध है। उनका मानना था कि भौतिक विज्ञान केवल लौकिक समृद्धि दे सकता है परंतु अध्यात्म विज्ञान शास्वत जीवन के लिए परम आवश्यक है। आध्यात्मिक विचारों का आदर्श मनुष्य को वास्तविक सुख देता है।</p>
<p>भौतिकवाद की स्पर्धा, असंतुलित महत्वकांक्षा व्यक्ति तथा देश को अंतिम मृत्यु की ओर ले जाती है। स्वामी जी भारत को विकास के मार्ग पर ले जाने के लिए शिक्षा, आत्मसुधार, कल्याण केंद्रीत संगठन और क्रियाशीलता की प्रवृत्ति को आवश्यक मानते थे। स्वामी जी को देश से असीम प्रेम था। शिकागो से वापसी की समुद्री यात्रा के दौरान जब वह 15 जनवरी, 1897 को श्रीलंका का समुद्री किनारे पर पहुंचे और उन्हें बताया गया कि उस तरफ जो नारियल और ताड़-खजूर के पेड़ दिखायी दे रहे हैं वो भारत के हैं, स्वामी जी इतने भावुक हो गए कि जहाज के बोर्ड पर ही मातृभूमि की ओर साष्टांग प्रणाम करने लगे।</p>
<p>स्वामी जी ने तीन भविष्यवाणियां की थी, जिनमें से दो-भारत की स्वतंत्रता और रुस में श्रमिक क्रांति सत्य सिद्ध हो चुकी हैं। स्वामी जी ने तीसरी भविष्यवाणी की है कि भारत एक बार फिर समृद्धि व शक्ति की महान ऊंचाइयों तक उठेगा। स्वामी जी का मातृभूमि से तादातम्य संपूर्ण था। वे स्वयं को ‘घनीभूत भारत’ कहते थे। स्वामी जी की शिष्या भगिनी निवेदिता ने अपनी मातृभूमि से उनके सम्मिलन को अभिव्यक्त करते हुए कहा है कि ‘भारत स्वामी जी का गहनतम अनुराग रहा है, भारत उनके वक्ष पर धड़कता है, भारत उनकी नसों में स्पंदन करता है, भारत उनका दिवास्वप्न है, भारत उनका निशाकल्प है, वे भारत का रक्त-मज्जा से निर्मित साक्षात शरीररुप हैं, वे स्वयं ही भारत हैं।’</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>Gandhi&#8217;s death anniversary : गांधी विचार से ही विश्व कल्याण संभव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Jan 2025 04:23:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>PRESENTED BY ARVIND JÀYTILAK  गांधी का शश्वत विचार ही विश्व कल्याण का मार्ग है। उनके...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>PRESENTED BY ARVIND JÀYTILAK </strong></span></p>
<p><img decoding="async" class="alignnone wp-image-11283 size-thumbnail" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-150x150.jpg 150w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-24x24.jpg 24w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-48x48.jpg 48w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-96x96.jpg 96w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-300x300.jpg 300w" sizes="(max-width: 150px) 100vw, 150px" /></p>
<p>गांधी का शश्वत विचार ही विश्व कल्याण का मार्ग है। उनके बताए रास्ते का अनुसरण करके ही विश्व को हिंसा से बचाया जा सकता है। इसलिए कि उन्होंने अपने विचारों को स्वयं के आचरण में ढालकर सिद्ध किया है। उन विचारों को सत्य और अहिंसा की कसौटी पर जांचा-परखा है। 1920 का असहयोग आंदोलन जब जोरों पर था उस दौरान चौरी-चौरा में भीड़ ने आक्रोश में एक थाने को अग्नि की भेंट चढ़ा दी। इस हिंसक घटना में 22 सिपाही जीवित जल गए। गांधी जी द्रवित हो उठे। उन्होंने तत्काल आंदोलन को स्थगित कर दिया। उनकी खूब आलोचना हुई लेकिन वे अपने इरादे से टस से मस नहीं हुए। वे हिंसा को एक क्षण के लिए भी बर्दाश्त करने को तैयार नहीं थे। उनकी दृढ़ता कमाल की थी।</p>
<p>जब उन्होंने महसूस किया कि ब्रिटिश सरकार अपने वादे के मुताबिक भारत को आजादी देने में हीलाहवाली कर रही है तो उन्होंने भारतीयों को टैक्स देने के बजाए जेल जाने का आह्नान किया। विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का आंदोलन चलाया। ब्रिटिश सरकार द्वारा नमक पर टैक्स लगाए जाने के विरोध में दांडी यात्रा की और समुद्र तट पर नमक बनाया। उनकी दृढ़ता को देखते हुए उनके निधन पर अर्नोल्ड टोनी बी ने अपने लेख में उन्हें पैगंबर कहा। प्रसिद्ध वैज्ञानिक आइंस्टीन का यह कथन लोगों के जुबान पर है कि आने वाले समय में लोगों को सहज विश्वास नहीं होगा कि हांड़-मांस का एक ऐसा जीव था जिसने अहिंसा को अपना हथियार बनाया। हिंसा भरे वैश्विक माहौल में गांधी के विचारों की ग्राहयता बढ़ती जा रही है। जिन अंग्रेजों ने विश्व के चतुर्दिक हिस्सों में युनियन जैक को लहराया और भारत में गांधी की अहिंसा को चुनौती दी, आज वे भी गांधी के अहिंसात्मक आचरण को अपनाने की बात कर रहे हैं।</p>
<p>विश्व का पुलिसमैन कहा जाने वाला अमेरिका जो अपनी धौंस-पट्टी से विश्व समुदाय को उपदेश देता है अब उसे भी लगने लगा है कि गांधी की विचारधारा की राह पकड़कर ही विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है। सच तो यह है कि गांधी के शाश्वत मूल्यों की प्रासंगिकता बढ़ी है। गांधी अहिंसा के न केवल प्रतीक भर हैं बल्कि मापदण्ड भी हैं जिन्हें जीवन में उतारने की कोशिश हो रही है। अभी गत वर्ष पहले ही अमेरिका पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ह्वाइट हाउस में अफ्रीकी महाद्वीप के 50 देशों के युवा नेताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि आज के बदलते परिवेश में युवाओं को गांधी जी से प्रेरणा लेने की जरुरत है। गत वर्ष पहले अमेरिका की प्रतिष्ठित टाइम पत्रिका ने महात्मा गांधी की अगुवाई वाले नमक सत्याग्रह को दुनिया के सर्वाधिक दस प्रभावशाली आंदोलनों में शुमार किया।</p>
<p>याद होगा अभी कुछ साल पहले जाम्बिया के लोकसभा सचिवालय द्वारा विज्ञान भवन में संसदीय लोकतंत्र पर एक सेमिनार आयोजित किया गया जिसमें राष्ट्रमंडल देशों के लोकसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों ने शिरकत की। जाम्बिया की नेशनल असेम्बली के अध्यक्ष असुमा के. म्वानामवाम्बवा ने इस सम्मेलन के दौरान गांधी के सिद्धान्तों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और कहा कि भारत के साथ हम भी महात्मा गांधी की विरासत में साझेदार हैं। उन्होनें बताया कि अहिंसा के बारे में गांधी जी की शिक्षाओं ने जाम्बिया के स्वतंत्रता आन्दोलन को बेहद प्रभवित किया। सच तो यह है कि अब गांधी के वैचारिक विरोधियों को भी लगने लगा है कि गांधी के बारे में उनकी अवधारणा संकुचित थी। उन्हें विश्वास होने लगा है कि गांधी के नैतिक नियम पहले से कहीं और अधिक प्रासंगिक और प्रभावी हैं और उनका अनुपालन होना चाहिए। गांधी जी राजनीतिक आजादी के साथ सामाजिक-आर्थिक आजादी के लिए भी चिंतित थे।</p>
<p>समावेशी समाज की संरचना को कैसे मजबूत आधार दिया जाए उसके लिए उनका अपना स्वतंत्र चिंतन था। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में विषमता रहेगी, हिंसा भी रहेगी। हिंसा को खत्म करने के लिए विषमता मिटाना जरुरी है। विषमता के कारण समृद्ध अपनी समृद्धि और गरीब अपनी गरीबी में मारा जाएगा। इसलिए ऐसा स्वराज हासिल करना होगा, जिसमें अमीर-गरीब के बीच खाई न हो। शिक्षा के संबंध में भी उनके विचार स्पष्ट थे। उन्होंने कहा है कि मैं पाश्चात्य संस्कृति का विरोधी नहीं हूं। मैं अपने घर के खिड़की दरवाजों को खुला रखना चाहता हूं जिससे बाहर की स्वच्छ हवा आ सके। लेकिन विदेशी भाषाओं की ऐसी आंधी न आ जाए कि मैं औंधें मुंह गिर पड़ूं। गांधी जी नारी सशक्तीकरण के प्रबल पैरोकार थे। उन्होंने कहा कि जिस देश अथवा समाज में स्त्री का आदर नहीं होता उसे सुसंस्कृत नहीं कहा जा सकता।</p>
<p>आज के दौर में भारत ही नहीं बल्कि विश्व समुदाय को भी समझना होगा कि उनके सुझाए रास्ते पर चलकर ही एक समृद्ध, सामर्थ्यवान, समतामूलक और सुसंस्कृत विश्व का निर्माण किया जा सकता है। आधुनिक भारतीय चिंतन प्रवाह में गांधी के विचार सार्वकालिक हैं। सच तो यह है कि गांधी भारतीय उदात्त सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत के अग्रदूत के साथ-साथ सहिष्णुता, उदारता और तेजस्विता के प्रमाणिक तथ्य हैं। सत्यशोधक संत भी हैं तो शाश्वत सत्य के यथार्थ समाज वैज्ञानिक भी। राजनीति, साहित्य, संस्कृति, धर्म, दर्शन, विज्ञान और कला के अद्भूत मनीषी भी तो मानववादी विश्व निर्माण के आदर्श मापदण्ड भी। सम्यक प्रगति मार्ग के चिंह्न भी तो भारतीय संस्कृति के परम उद्घोषक भी।</p>
<p>गांधी के लिए वेद, पुराण एवं उपनिषद का सारतत्व ही उनका ईश्वर है और बुद्ध, महावीर की करुणा ही उनकी अहिंसा है। सत्य, अहिंसा, ब्रहमचर्य, अस्तेय, अपरिग्रह, शरीर श्रम, आस्वाद, अभय, सर्वधर्म समानता, स्वदेशी और समावेशी समाज निर्माण की परिकल्पना ही उनके जीवन का परम लक्ष्य है। गांधी के आदर्श विचार उनके निजी जीवन तक ही सीमित नहीं रहे। उन्होंने अपने आदर्श विचारों को आजादी की लड़ाई से लेकर समाज निर्माण जैसे जीवन के विविध पक्षों में भी आजमाया। उस समय लोग कहा करते थे कि आजादी के लक्ष्य में सत्य और अहिंसा नहीं चलेगी और न ही इससे सभ्य समाज का निर्माण होगा। लेकिन गांधी ने दिखा दिया कि सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलकर भी आजादी और समाज निर्माण के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। आजादी के आंदोलन के दौरान गंाधी ने लोगों को संघर्ष के तीन मंत्र दिए-सत्याग्रह, असहयोग और बलिदान। उन्होंने खुद इसे समय की कसौटी पर कसा भी।</p>
<p>सत्याग्रह को सत्य के प्रति आग्रह बताया। यानी आदमी को जो सत्य दिखे उस पर पूरी शक्ति और निष्ठा से डटा रहे। बुराई, अन्याय और अत्याचार का किन्हीं भी परिस्थितियों में समर्थन न करे। सत्य और न्याय के लिए प्राणोत्सर्ग करने को बलिदान कहा। अहिंसा के बारे में उनके विचार सनातन भारतीय संस्कृति की प्रतिध्वनि है। गांधी पर गीता के उपदेशों का व्यापक असर रहा। वे कहते थे कि हिंसा और कायरता पूर्ण लड़ाई में मैं कायरता की बजाए हिंसा को पसंद करुंगा। मैं किसी कायर को अहिंसा का पाठ नहीं पढ़ा सकता वैसे ही जैसे किसी अंधे को लुभावने दृश्यों की ओर प्रलोभित नहीं किया जा सकता। उन्होंने अहिंसा को शौर्य का शिखर माना।</p>
<p>उन्होंने अहिंसा की स्पष्ट व्याख्या करते हुए कहा कि अहिंसा का अर्थ है ज्ञानपूर्वक कष्ट सहना। उसका अर्थ अन्यायी की इच्छा के आगे दबकर घुटने टेक देना नहीं। उसका अर्थ यह है कि अत्याचारी की इच्छा के विरुद्ध अपनी आत्मा की सारी शक्ति लगा देना। अहिंसा के माध्यम से गांधी ने विश्व को यह भी संदेश दिया कि जीवन के इस नियम के अनुसार चलकर एक अकेला आदमी भी अपने सम्मान, धर्म और आत्मा की रक्षा के लिए साम्राज्य के सम्पूर्ण बल को चुनौती दे सकता है। गांधी के इन विचारों से विश्व की महान विभुतियों ने स्वयं को प्रभावित बताया। आज भी उनके विचार विश्व को उत्प्रेरित कर रहे हैं। लोगों द्वारा उनके अहिंसा और सविनय अवज्ञा जैसे अहिंसात्मक हथियारों को आजमाया जा रहा है। ऐसे में उनके विचार बरबस ही प्रासंगिक हो जाते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>नोट -आलेख में लेखक के अपने निजी विचार हैं.</strong></span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>TRAGIC ACCIDENT : ग़म में तब्दील हुआ खुशियों का माहौल, सड़क हादसे तीन युवाओं की दर्दनाक मौत </title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Oct 2024 13:08:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्‍तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>REPORT BY RAJNEESH SINGH AMETHI NEWS I  मंगलवार देर शाम ट्रक ने सामने से आ...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/21120">TRAGIC ACCIDENT : ग़म में तब्दील हुआ खुशियों का माहौल, सड़क हादसे तीन युवाओं की दर्दनाक मौत </a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY RAJNEESH SINGH</strong></span></p>
<p><em><strong> AMETHI NEWS I </strong></em></p>
<p>मंगलवार देर शाम ट्रक ने सामने से आ रही बाइक को टक्कर मार दी हादसे में बाइक सवार तीन युवकों की मौत हो गई I तीनों युवक शादी का कार्ड बांट कर घर जा रहे थे,  मरने वाले में दूल्हे का भाई भी है I हादसा जगदीशपुर कोतवाली क्षेत्र के रायबरेली रोड स्थित नौडाड गांव के पास हुआ I</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार मोहनगंज थाना क्षेत्र के शंकरगंज गांव निवासी बनारसी लाल के बेटे किशन की शादी 17 नवंबर को थी, उसी की शादी का कार्ड बांटने किशन का भाई अमित पुत्र बनारसी (30) अपने भाई आकाश (26) और एक अन्य रिश्तेदार राजकुमार के साथ बाइक से भाई की शादी का कार्ड बांट कर घर आ रहा था।</p>
<p>अभी नौडाड गाॅव के पास पहुंचे ही थे ट्रक न. Up32-NN-8577 तेज रफ्तार बाइक से टक्कर हो गई I  इस हादसे में बाइक सवार तीन युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज कर आगे की कार्यवाही में जुटी  हुई है ।</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>शादी का माहौल हुआ गमगीन,गांव में नही जले चूल्हे</strong></span></p>
<p>ट्रक ने सामने से आ रही बाइक को टक्कर मार दी हादसे में बाइक सवार तीन युवकों की मौत हो थी । हादसा जगदीशपुर कोतवाली क्षेत्र के रायबरेली रोड स्थित नौडाड गांव के पास हुआ I</p>
<p>जानकारी के अनुसार मोहनगंज थाना क्षेत्र के शंकरगंज गांव निवासी बनारसी लाल के बेटे किसन की शादी 17 नवंबर को थी , उसी की शादी का कार्ड बांटने किसन का भाई अमित पुत्र बनारसी(30) चचेरे भाई आकाश(26) और एक अन्य रिश्तेदार भले सुल्तान थाना क्षेत्र रानीगंज के पूरब गांव निवासी राजकुमार पुत्र छंगू के साथ बाइक से भाई की शादी का कार्ड बांट कर घर आ रहे थे I</p>
<p>अभी नौडाड गाॅव के पास पहुंचे ही थे ट्रक संख्या Up32NN8577 तेज रफ्तार बाइक मैं टक्कर मार दी तीनों को पुलिस व स्थानीय लोगों की मदद से जगदीशपुर अस्पताल लाया गया जहां पर तीनों को डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया पुलिस द्वारा ट्रक को अपने कब्जे में ले लिया गया है और चालक की तलाश की जा रही है I</p>
<p>ग्रामीणों के अनुसार अमित और आकाश बहुत ही सरल स्वभाव एवं मिलनसार युवक थे बूढ़े मां-बाप भाई रिश्तेदार बहन ग्रामीण रो-रो कर बुरा हाल है जहां पर मां-बाप बच्चों का इंतजार कर रहे थे वहीं कुछ देर बाद मौत की खबर घर पर आ गई I</p>
<p>जिससे घर में कोहराम मच गया ग्राम वासी और क्षेत्रवासी सब घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े और जगदीशपुर हॉस्पिटल में पहुंचने पर पता चला कि तीनों की मृत्यु हो चुकी है I स्थानीय पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज कर आगे की कार्यवाही में जुटी हुई है ।<img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone wp-image-21126 size-full" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/FunPic_20241016_185008300-2.jpg" alt="" width="384" height="307" /></p>
<p><strong><span style="color: #993300"> बजने वाली थी शहनाई पसर गया सन्नाटा </span></strong></p>
<p>जिस घर में अगले 17 नवंबर को शहनाई बजने वाली थी उसे परिवार के दो चिरागों के बुझ जाने से घर में मातम पसर गया आकाश और अमित की मौत की सूचना शंकरगंज पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में मातम छा गया I शंकरगंज निवासी एवं डीबीएस के प्रबंधक संजय सिंह मृतक के घर सांत्वना देने पहुचे और मृतकों के परिजनों को सहारा देने की कोशिश की I</p>
<p>गांव निवासी राम कुमार एवं श्यामलाल ने बताया अमित और आकाश बहुत ही ईमानदार और सरल स्वभाव के युवक थे I पूरब गांव रानीगंज निवासी राजकुमार के गांव में भी परिजनों का रो रो रो कर बुरा हाल है मां बाप बुढ़ापे का सहारा छिन जाने के कारण गमगीन अवस्था में दरवाजे पर बैठे नजर आए I</p>
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		<title>MURDER OF FORMER CHIEF : चुनावी रंजिश के चलते पूर्व प्रधान की पीट- पीटकर हत्या, फैली सनसनी</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/21058</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Oct 2024 03:27:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[क्राइम न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[beaten]]></category>
		<category><![CDATA[death]]></category>
		<category><![CDATA[Due]]></category>
		<category><![CDATA[election rivalry]]></category>
		<category><![CDATA[former chief]]></category>
		<category><![CDATA[Murder]]></category>
		<category><![CDATA[sensation spread]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.lokdastak.com/?p=21058</guid>

					<description><![CDATA[<p>REPORT BY MADHAV BAJPAYEE AMETHI NEWS I  अमेठी जिले के बाजार शुकुल थाना क्षेत्र के...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/21058">MURDER OF FORMER CHIEF : चुनावी रंजिश के चलते पूर्व प्रधान की पीट- पीटकर हत्या, फैली सनसनी</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY MADHAV BAJPAYEE</strong></span></p>
<p><em><strong> AMETHI NEWS I </strong></em></p>
<p>अमेठी जिले के बाजार शुकुल थाना क्षेत्र के संसारपुर गांव निवासी पूर्व प्रधान शिवनारायण सिंह को चुनावी रंजिश में दबंगों ने मारपीट कर घायल कर दिया। घायलावस्था में शिवनरायण को लखनऊ ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।। ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए गांव में जनपद के कई थानों की पुलिस बल पीएससी को तैनात कर दिया गया है। पत्नी व बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।</p>
<p>घटना की सूचना के बाद अपर पुलिस अधीक्षक व सीओ मौके पर पहुंचकर हत्याआरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की निर्देश दिए।<br />
बताया जाता है कि मंगलवार की सुबह करीब छह बजे के करीब पूर्व प्रधान प्रतिनिधि शिवनारायण सिंह किसी काम से बाइक पर सवार होकर देवगिरी गांव की तरफ जा रहे थे।</p>
<p>रास्ते में राजकुमार सिंह के दूध डेयरी के निकट पहले से घात लगाए बाइक सवार पांच लोगों ने उसे रोक लिया। जब तक वह कुछ समझ पाते बाइक सवार दबंग लाठी व डंडों से हमला कर दिया।</p>
<p>दबंगों की पिटाई से शिवनरायण के सिर पर गंभीर चोट आई। वह जमीन पर गिर पड़े। दबंगो की इस मारपीट से शिवनारायण मरणासन्न हो गए।। परिवारीजन आनन-फानन में घायल पूर्व प्रधान को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भर्ती कराया गया।</p>
<p>जहां पूर्व प्रधान हालत नाजुक देखते हुए डॉक्टरों ने उसे ट्रामा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया गया। जहां इलाज के दौरान मंगलवार की दोपहर उसकी मौत हो गई।</p>
<p>सूचना मिलते ही प्रधान प्रतिनिधि समर्थकों की भीड़ उमड़ पड़ी। गांव में तनाव को देखते हुए अमेठी जनपद के कई थानों की पुलिस कैंप कर रही है। ग्रामीणों की मानें तो पंचायत चुनाव में दोनों आमने-सामने चुनाव लड़े थे। तभी से दोनों पक्षों में दुश्मनी हो गई थी।</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>बोले थानाध्यक्ष नहीं मिली तहरीर</strong></span></p>
<p>थानाध्यक्ष दयाशंकर मिश्र ने बताया कि पीड़ित के परिजन लखनऊ में है उनके द्वारा अभी तहरीर नहीं मिली है। चार लोगों को हिरासत में लिया गया है। शीघ्र ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।</p>
<p><span style="color: #00ff00"><strong>दो बार रह चुका था प्रधान</strong></span></p>
<p>शिवनारायण दो बार संसारपुर ग्राम सभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वर्ष 2010 से लेकर 2020 तक उन्होंने ग्राम पंचायत का प्रतिनिधित्व किया । एक बार वो स्वयं दूसरी बार सीट बदलने पर अपने समर्थक राम सागर यादव को ग्राम प्रधान पद पर निर्वाचित कराए थीं।</p>
<p>क्षेत्र में वह काफी लोकप्रिय थे। उनकी ईमानदारी की चर्चाएं दिनभर लोग करते दिखे। ग्रामीण पूर्व प्रधान शिव नारायण सिंह की हत्या किए जाने से आक्रोशित है।</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>परिवार में पत्नी, दो बेटी व दो बेटे</strong></span></p>
<p>मृतक शिव नारायण नरायण के दो बेटियां व दो बेटे हैं। पत्नी रमा सिंह की आंखों से अश्रु थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। वह बदहवास हो इधर-उधर देख रही थीं। गांव की महिलाएं उसे समझा रही थीं। बेटियों की चीत्कार से हर सख्स की आंखों से अश्रु निकल रहे ।</p>
<p><span style="color: #800000"><strong>परिजनों का रो रो कर बुरा हाल</strong></span></p>
<p>54 वर्षीय शिवनारायण सिंह की मौत से परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। मृतक के भाई मंडल उपाध्यक्ष शिव नायक सिंह सिंह बड़े भाई के हत्या से काफी दुखी है ।वे कहते है कि बड़े परिवार का सहारा थे।</p>
<p>उनकी मौत से पत्नी रमा सिंह के सिर से जहां पति का साया उठ गया है वहीं पुत्री रोशनी पूनम एवं पुत्र विजय अलेंद्र सिंह सहित चार बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है।</p>
<p><span style="color: #008000"><strong>चुनाव के बाद हुई थी रंजिश</strong></span></p>
<p>पूर्व प्रधान के भाई शिवनायक सिंह ने बताया कि लखनऊ ट्रामा सेंटर में भाई शिव नारायण सिंह को मृत घोषित कर दिया गया है। रंजिश में पीट-पीटकर उनकी हत्या की गई है।</p>
<p>चुनाव का परिणाम आने के बाद से ही पूर्व प्रधान व वर्तमान प्रधान के प्रतिनिधि बीच रंजिश चल रही थी। अक्सर विवाद होते थे। कई बार शिकायत भी की गई। प्रधान प्रतिनिधि व उनके समर्थकों के हौसले बुलंद थे।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-21061 size-full" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241009-WA0004.jpg" alt="" width="640" height="480" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241009-WA0004.jpg 640w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241009-WA0004-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>कई थानों की बुलानी पड़ी फोर्स</strong></span></p>
<p>इस संबंध में सीओ अतुल सिंह ने बताया कि घटना में कोई अप्रिय घटना व शांति व्यवस्था कायम करने के लिए अमेठी जनपद जामो, अमेठी, मुसाफिरखाना, जगदीशपुर, मोहनगंज, कमरौली, भाले सुल्तान,,इन्हौना, महिला थाना, एक कंपनी पीएससी बल एंबुलेंस तैनात किया गया है।</p>
<p><span style="color: #800080"><strong>एएसपी व सीओ भी पहुंचे</strong></span></p>
<p>मौके पर एसपी हरेंद्र कुमार व मसाफिरखाना अतुल सिंह ने घटना स्थल पर पहुंचकर आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने के निर्देश थानाध्यक्ष को दिए। एएसपी हरेंद्र कुमार ने बताया कि गिरफ्तारी के लिए टीम लगी है। दबिश दी जा रही है जल्द ही सभी आरोपी गिरफ्तार कर लिए जाएंगे।</p>
<p>अधिकारी ने बताया कि मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस के मुताबिक, प्रथम दृष्टतया यह मामला पंचायत चुनाव और जमीनी विवाद से जुड़ा है I</p>
<p>लेकिन मामले के सभी पहलुओं की छानबीन की जा रही है। मृतक के भाई शिव नायक सिंह संसारपुर के पूर्व प्रधान हैं और मौजूदा समय में यह सीट दलित कोटे में आरक्षित है।&#8221;बहरहाल समाचार लिखे जाने तक पुलिस को कोई तहरीर प्राप्त नहीं हुई है।</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/21058">MURDER OF FORMER CHIEF : चुनावी रंजिश के चलते पूर्व प्रधान की पीट- पीटकर हत्या, फैली सनसनी</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
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