<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Birth Archives - Lok Dastak</title>
	<atom:link href="https://www.lokdastak.com/archives/tag/birth/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.lokdastak.com/archives/tag/birth</link>
	<description>Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak</description>
	<lastBuildDate>Sun, 28 Sep 2025 05:48:07 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-lok-fb-32x32.png</url>
	<title>Birth Archives - Lok Dastak</title>
	<link>https://www.lokdastak.com/archives/tag/birth</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>Bhagat Singh&#8217;s Birth Anniversary : भारत राष्ट्र के क्रांतिनायक भगत सिंह</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/24845</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Sep 2025 05:48:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
		<category><![CDATA[Anniversary]]></category>
		<category><![CDATA[Bhagat Singh's]]></category>
		<category><![CDATA[Birth]]></category>
		<category><![CDATA[क्रांतिनायक]]></category>
		<category><![CDATA[भगत सिंह]]></category>
		<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[शहीद]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.lokdastak.com/?p=24845</guid>

					<description><![CDATA[<p>प्रस्तुति &#8211; अरविन्द जयतिलक युवाओं के क्रांतिनायक भगत सिंह के जीवन की अनेक ऐसी बातें...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/24845">Bhagat Singh&#8217;s Birth Anniversary : भारत राष्ट्र के क्रांतिनायक भगत सिंह</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2><span style="color: #ff0000"><strong>प्रस्तुति &#8211; अरविन्द जयतिलक</strong></span></h2>
<p><img decoding="async" class="alignnone wp-image-11283 size-thumbnail" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-150x150.jpg 150w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-24x24.jpg 24w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-48x48.jpg 48w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-96x96.jpg 96w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2023/05/photo-Arvind-Jaiteelak-1-300x300.jpg 300w" sizes="(max-width: 150px) 100vw, 150px" /></p>
<p>युवाओं के क्रांतिनायक भगत सिंह के जीवन की अनेक ऐसी बातें हैं जो देश के युवाओं को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा से भर देती है। 23 वर्ष की उम्र में ही भगत सिंह ने अपने लेखन और राष्ट्रभक्ति के बरक्स एक ऐसा आंदोलन खड़ा कर दिया जिससे दशकों तक भारत की युवा पीढ़ी प्रेरणा लेती रहेगी। भगत सिंह ने अपनी गरिमामय शहादत और आंदोलित विचारों से देश-दुनिया को संदेश दिया कि क्रांतिकारी आंदोलन के पीछे उनका मकसद अंध राष्ट्रवाद नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की परिकल्पना थी। हालांकि यह त्रासदी है कि आजादी के चार दशक बाद तक भगत सिंह के विचार और उनसे जुड़े दस्तावेज देश के आमजन तक नहीं पहुंच पाए और देश की युवा पीढ़ी उनके आंदोलित व राष्ट्रवादी विचारों से अपरिचित रही।</p>
<p>भगत सिंह के विचारों और क्रांतिकारिता को समझने के लिए जेल के दिनों में उनके लिखे खतों और लेखों को पढ़ना-समझना आवश्यक है। उन खतों और लेखों के माध्यम से समझा जा सकता है कि भगत सिंह रक्तपात के कतई पक्षधर नहीं थे। वे और उनके साथियों ने पुलिस सुपरिटेण्डेंट स्कॉट को निशाना तब बनाया जब 1928 में साइमन कमीशन के बहिष्कार के लिए भयानक प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शन में भाग लेने वाले प्रदर्शनकारियों पर ब्रिटिश हुकुमत ने लाठियां बरसायी जिसमें लाला लाजपत राय बुरी तरह घायल हुए और अंततः मृत्यु को प्राप्त हुए। भगत सिंह समाजवाद और मानववाद के पोषक थे और इसी कारण उन्होंने ब्रिटिश हुकुमत की भारतीयों के प्रति शोषण की नीति का विरोध किया।</p>
<p>भारतीयों के प्रति अत्याचार से उनका विरोध लाजिमी था ठीक उसी तरह जिस तरह एक महान देशभक्त का होता है। भगत सिंह कतई नहीं चाहते थे कि ब्रिटिश संसद से मजदूर विरोधी नीतियां पारित हो। उनकी सोच थी कि अंग्रेजों को पता चलना चाहिए कि हिंदुस्तानी जाग चुके हैं और वे अधिक दिनों तक गुलामी के चंगुल में नहीं रह सकते। उन्होंने अपने विचारों से अंग्रेजों को यह बात समझानी चाही लेकिन अंग्रेज समझने को तैयार नहीं थे। तब उन्होंने अपनी बात उन तक पहुंचाने के लिए 8 अप्रैल, 1929 को अपने साथी क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त से मिलकर ब्रिटिश सरकार की केंद्रीय असेंबली में बम फेंका। उन्होंने यह बम खाली स्थान पर फेंका ताकि किसी को नुकसान न पहुंचे। बम फेंकने के बाद उन्होंने इंकलाब-जिंदाबाद के नारे लगाए और पर्चे फेंके। बम फेंकने का मकसद खून-खराबा करना नहीं था।</p>
<p>उन्होंने कहा भी कि ‘यदि बहरों को सुनना है तो आवाज को बहुत जोरदार होना होगा, जब हमने बम गिराया तो हमारा ध्येय किसी को मारना नहीं था, हमने अंग्रेजी हुकुमत पर बम गिराया था, अंग्रेजों को भारत छोड़ना चाहिए और उसे आजाद करना चाहिए।’ उल्लेखनीय तथ्य यह कि बम गिराने के बाद वे चाहते तो भाग सकते थे लेकिन उन्होंने भागना स्वीकार नहीं किया। बल्कि बहादुरी से गिरफ्तारी दी। सच कहें तो भगत सिंह ने यह साहस दिखाकर अंग्रेजों को समझा दिया कि एक हिंदुस्तानी क्या-क्या कर सकता है। उनका यह साहस दर्शाता है कि वे शांति के पैरोकार थे और हिंसा में उनका विश्वास रंचमात्र भी नहीं था। उन्होंने अपनी क्रांतिकारिता को रेखांकित करते हुए कहा भी है कि ‘जरुरी नहीं था कि क्रांति में अभिशप्त संघर्ष शामिल हो। यह बम और पिस्तौल का पंथ नहीं था।’</p>
<p>भगत सिंह का अहिंसा में कितना अधिक विश्वास था वह इसी से समझा जा सकता है कि एक स्थान पर उन्होंने कहा कि ‘अहिंसा को आत्मबल के सिद्धांत का समर्थन प्राप्त है जिसमें अंततः प्रतिद्वंदी पर जीत की आशा में कष्ट सहा जाता है, लेकिन तब क्या हो जब ये प्रयास अपना लक्ष्य प्राप्त करने में असफल हो जाए? तभी हमें आत्मबल को शारीरिक बल से जोड़ने की जरुरत पड़ती है ताकि हम अत्याचारी और क्रुर दुश्मन के रहमोंकरम पर ना निर्भर करें।’ क्या ऐसे विचार वाले एक महान क्रांतिकारी को हिंसावादी कहना उचित होगा? कतई नहीं। ध्यान देना होगा कि 1919 में जब जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ तो भगत सिंह का खून खौल उठा था। लेकिन उन्होंने हिंसा का रास्ता अख्तियार करने के बजाए महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदालन का समर्थन किया।</p>
<p>जेल में भगत सिंह ने बहुत यातनाएं सही। न तो उन्हें अच्छा खाना दिया जाता था और न ही पहनने को साफ-सुथरे कपड़े दिए जाते थे। उन्हें बुरी तरह पीटा जाता था और गालियां दी जाती थी। लेकिन वे तनिक भी विचलित नहीं हुए। उन्होंने जेल में रहते हुए ही अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंक दिया। भगत सिंह की जनमानस में व्याप्त लोकप्रियता से अंग्रेज इस कदर डरे हुए थे कि 24 मार्च, 1931 को उन्हें फांसी पर लटकाने के बाद उनके मृत शरीर को टुकड़े-टुकड़े कर दिए। उन्हें भय था कि अगर उनके मृत शरीर को उनके परिजनों को सौंपा गया तो देश में क्रांति की ज्चाला भड़क उठेगी जिसे संभालना मुश्किल होगा। भगत सिंह ने क्रांति के बारे में स्पष्ट कहा है कि ‘किसी को क्रांति शब्द की व्याख्या शाब्दिक अर्थ में नहीं करनी चाहिए, जो लोग इस शब्द का उपयोग या दुरुपयोग करते हैं उनके फायदे के हिसाब से इसे अलग-अलग अर्थ और अभिप्राय दिए जाते हैं।’</p>
<p>बिडंबना यह है कि भगत सिंह को कुछ इसी तरह के फ्रेम में फिट कर उनके क्रांतिकारी विचारों की व्याख्या की गयी है जो एक किस्म से उनकी अहिंसक विचारधारा के साथ छल है। बिडंबना यह भी कि इतिहास के पन्नों में भी उनके जीवन और बलिदान को सही रुप में दिखाने के बजाए विकृत करने की कोशिश की गयी। उदाहरण के तौर पर देश के जाने-माने इतिहासकार विपिन चंद्रा और मृदुला मुखर्जी की किताब में शहीद भगत सिंह को कथित रुप से क्रांतिकारी आतंकवादी के तौर पर उद्घृत किया गया है। यह न सिर्फ एक महान क्रांतिकारी का अपमान भर है बल्कि विकृत इतिहास लेखन की परंपरा का एक शर्मनाक बानगी भी है। विकृत इतिहास लेखन की ऐसी शरारतपूर्ण बानगियां इतिहास में और भी दर्ज हैं जिससे भारतीय इतिहास के नायकों की छवि धूमिल हुई है। महान लेखक और राजनीतिज्ञ सिसरो ने इतिहास के बारे में कहा था कि इतिहास समय के व्यतीत होने का साक्षी होता है।</p>
<p>वह वास्तविकताओं को रोशन करता है और स्मृतियों को जिंदा रखता है। देश जानना चाहता है कि औपनिवेशिक गुलामी और शोषण के विरुद्ध आवाज बुलंद करने वाले शहीद-ए-आजम भगत सिंह किस तरह क्रांतिकारी आतंकवादी थे और इतिहास का यह विकृतिकरण किस तरह विद्यार्थियों के लिए पठनीय है। कोई भी इतिहासकार या विचारक अपने युग की उपज होता है। उसकी जिम्मेदारी होती है कि वह अपनी लेखनी से कालखंड की सच्चाई का ईमानदारी से दुनिया के सामने रखे। राष्ट्र को सुपरिचित कराए। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण कि अंग्रेज और मार्क्सवादी इतिहासकार भारतीय इतिहास लेखन की मूल चेतना को समझ नहीं सके और भारतीय इतिहास के सच की हत्या कर दी।</p>
<p>अगर भारतीय इतिहास को भारतीय चेतना व मानस के प्रकाश में लिखा गया होता तो आज भगत सिंह को क्रांतिकारी आतंकवादी या शिवाजी को पहाड़ी चूहिया अथवा चंद्रगुप्त मौर्य की सेना को डाकुओं का गिरोह नहीं कहा जाता। विलियम कैरे, अलेक्जेंडर डफ, जॉन मुअर, और चार्ल्स ग्रांट जैसे इतिहासकारों ने भारत के इतिहास को अंधकारग्रस्त और हिंदू धर्म को पाखंड और झूठ का पर्याय कहा। भारत में अंग्रेजी शिक्षा के जनक और ईसाई धर्म को बढ़ावा देने वाले मैकाले ने तो यहां तक कहा कि भारत और अरब के संपूर्ण साहित्य का मुकाबला करने के लिए एक अच्छे यूरोपिय पुस्तकालय की एक आलमारी ही काफी है।</p>
<p>1834 में भारत के शिक्षा प्रमुख बने लार्ड मैकाले ने भारतीयों को शिक्षा देने के लिए बनायी अपनी नीति के संदर्भ में अपने पिता को एक पत्र लिखा जिसमें कहा कि मेरी बनायी शिक्षा पद्धति से भारत में यदि शिक्षा क्रम चलता रहा तो आगामी 30 वर्षों में एक भी आस्थावान हिंदू नहीं बचेगा। या तो वे ईसाई बन जाएंगे या नाम मात्र के हिंदू रह जाएंगे। समझा जा सकता है कि इतिहास लेखन की आड़ में अंग्रेजी इतिहासकारों और उनसे प्रभावित भारतीय इतिहासकारों के मन में क्या था।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>नोट &#8211; लेखक एक वरिष्ठ स्तम्भकार हैं।</strong></p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/24845">Bhagat Singh&#8217;s Birth Anniversary : भारत राष्ट्र के क्रांतिनायक भगत सिंह</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>BIRTH ANNIVERSARY FAIR : लोक कला और संस्कृति को समर्पित होगा पं० दीनदयाल जन्मोत्सव मेला</title>
		<link>https://www.lokdastak.com/archives/20842</link>
					<comments>https://www.lokdastak.com/archives/20842#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Sep 2024 15:36:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्‍तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[मथुरा]]></category>
		<category><![CDATA[Anniversary]]></category>
		<category><![CDATA[Birth]]></category>
		<category><![CDATA[fair]]></category>
		<category><![CDATA[Mathura news]]></category>
		<category><![CDATA[गौ पूजन]]></category>
		<category><![CDATA[गौ वंश प्रतियोगिता]]></category>
		<category><![CDATA[जन्मोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[पंडित दीनदयाल उपाध्याय]]></category>
		<category><![CDATA[लोक कला]]></category>
		<category><![CDATA[लोक संस्कृति]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.lokdastak.com/?p=20842</guid>

					<description><![CDATA[<p>REPORT BY MUKESH SHARMA DEENDAYAL DHAM (FARAH) ,MATHURA I  भारत माता के अमर सपूत, एकात्म...</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/20842">BIRTH ANNIVERSARY FAIR : लोक कला और संस्कृति को समर्पित होगा पं० दीनदयाल जन्मोत्सव मेला</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY MUKESH SHARMA</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>DEENDAYAL DHAM (FARAH) ,MATHURA I </strong></span></p>
<p>भारत माता के अमर सपूत, एकात्म मानव दर्शन के प्रणेता, पं० दीनदयाल उपाध्याय जी की स्मृति में आयोजित चार दिवसीय विराट जन्मोत्सव मेला का शुभारंभ हवन और कलश यात्रा के साथ होगा। जन्मोत्सव समारोह 29, 30 सितंबर, 1 एवं 2 अक्टूबर को दीनदयाल धाम में उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया जायेगा। जन्मोत्सव समारोह का शुभारम्भ घोष के साथ कलश यात्रा और हवन के साथ 29 सितंबर को और समापन 2 अक्टूबर की देर रात्रि संस्कृति विभाग उ०प्र० के सौजन्य चित्र विचित्र महाराज द्वारा भजन संध्या के साथ होगा।</p>
<p>शुक्रवार को यह जानकारी स्मारक समिति निदेशक सोनपाल ने दीनदयाल धाम में पत्रकारों को दी। उन्होंने बताया कि चार दिवसीय जन्मोत्सव मेला का शुभारम्भ 29 सितंबर की प्रातः 7:30 बजे से स्मारक समिति से मंदिर परिसर तक कलश यात्रा और 8:30 बजे से दीनदयाल धाम राधाकृष्ण मंदिर पर सामूहिक हवन के साथ होगा। इसी दिन रंगोली प्रतियोगिता, लोकगायन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। आध्यात्मिक प्रवचन सतपाल महाराज मंत्री उत्तराखंड सरकार द्वारा होंगे। सायं को विद्यार्थियों का रंग मंचीय कार्यक्रम और रात्रि को रसिया दंगल होगा।</p>
<p>पं० दीनदयाल उपाध्याय स्मृति महोत्सव समिति संरक्षक अशोक कुमार टैंटीवाल ने बताया कि दूसरे दिन पंडित जी का जन्मोत्सव हिंदू सनातन तिथि अनुसार आश्विन कृष्ण त्रयोदशी संवत 2081तदनुसार 30 सितंबर को प्रातः स्मारक भवन में हवन व बधाई गीत के साथ मनाया जाएगा। सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता होगी। पडित जी के जीवन पर आधारित नाटय, ध्येय गीत, उत्तर प्रदेश के जनपदों की कला पर आधारित कार्यक्रम होंगे। एकात्ममानव दर्शन विषय पर गोष्ठी दोपहर एक बजे से और सायंकाल संस्कृति विभाग द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंर्तगत बृजवंदना, महारास, चरकुला, मयूर नृत्य, फूलों की होली एवं अन्य जनपदीय लोक नृत्य अयोजित होंगे। राष्ट्रीय कवि सम्मलेन रात्रि 8 बजे से होगा, जिसमें मुख्य अतिथि जयवीर सिंह कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार होंगे।</p>
<p>कोषाध्यक्ष नरेंद्र पाठक ने बताया कि तीसरे दिन प्रातः गौ पूजन एवं स्वस्थ गौवंश प्रतियोगिता, भगवान श्रीराम स्वरूप सज्जा प्रतियोगिता, विश्व पर्यावरण संरक्षण पर गोष्ठी एवं परिचर्चा, अपरान्ह 2 बजे से महिला लोकगीत प्रतियोगिता, सायं 3 बजे विराट कुश्ती दंगल में मुख्य अतिथि सूर्य प्रताप शाही कैबिनेट कृषि मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार होंगे। सायं को सांस्कृतिक कार्यक्रम में डाडिया नृत्य एवं गायन की संगीतमय प्रस्तुति होगी। रात्रि 10 से बजे जिकड़ी भजन होंगे।</p>
<p>सर्व व्यवस्था प्रमुख नीरज कुमार गर्ग ने बताया कि मेला के अंतिम दिन मेधावी छात्र सम्मान समारोह, बृज श्री सम्मान एवं संत समागम कार्यक्रम दोपहर एक बजे होगा। सांयकाल राष्ट्र निर्माण में मातृ शक्ति की भूमिका पर गोष्ठी, किसान एवं ग्रामीण विकास संगोष्ठी, सम्मान एवं समापन समारोह में समस्त कार्यक्रमों एवं प्रतियोगिता के विजेताओं का सम्मान होगा। इसमें चौ० लक्ष्मी नारायण सिंह कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार रहेंगे। मेला का समापन सायं 7 बजे से चित्र विचित्र की भजन संध्या के साथ होगा।</p>
<p>मुकेश शर्मा समिति प्रचार विभाग ने बताया कि लोक कला और लोक संस्कृति को समर्पित इस जन्मोत्सव मेला समारोह में खान-पान की दुकानें, झूला और कृषि प्रदर्शनी मेला का खास आकर्षण होंगे। जन्मोत्सव पर दीनदयाल धाम में जगह- जगह दीप प्रज्जवलित किये जायेंगे।<br />
प्रेस वार्ता में सह मंत्री बृजमोहन गौड़ , मुकेश शर्मा प्रचार विभाग उपस्थित रहे।</p>
<p>The post <a href="https://www.lokdastak.com/archives/20842">BIRTH ANNIVERSARY FAIR : लोक कला और संस्कृति को समर्पित होगा पं० दीनदयाल जन्मोत्सव मेला</a> appeared first on <a href="https://www.lokdastak.com">Lok Dastak</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.lokdastak.com/archives/20842/feed</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
