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	<title>Bihar Archives - Lok Dastak</title>
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	<description>Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak</description>
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		<title>Sawan Festival : 03 अगस्त को झूमेगा जीकेसी, मनाएगा “सावन महोत्सव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 31 Jul 2025 14:54:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; REPORT BY LOK REPORTER PATNA, BIHAR। पारिवारिक सौहार्द, सांस्कृतिक उमंग और पारम्परिक भारतीयता का...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>REPORT BY LOK REPORTER</strong></span></p>
<p><em><strong>PATNA, BIHAR।</strong></em></p>
<p>पारिवारिक सौहार्द, सांस्कृतिक उमंग और पारम्परिक भारतीयता का संगम “सावन महोत्सव” राजधानी पटना में, ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेंस (जीकेसी) अपने केन्द्रीय कार्यालय रॉयल गार्डेन, पटना में 3 अगस्त 2025, रविवार को आयोजन करेगी। इस्बात की जानकारी जीकेसी मीडिया प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार श्रीवास्तव ने दी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इस महोत्सव की विशेषता यह है कि इसमें जी.के.सी. की महिला सदस्य, पदाधिकारीगण एवं उनके परिवारजन पारंपरिक हरे परिधानों में सज-धजकर शामिल होंगे। सावन का महीना वैसे भी हरियाली, उल्लास और रिमझिम फुहारों का प्रतीक होता है, ऐसे में जब पूरा वातावरण मस्ती में डूबा हो और लोग अपने पारिवारिक एवं सांस्कृतिक जुड़ाव को मन से जी रहे हों, तो दृश्य स्वयं में ही मनोहारी बन जाता है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. निशा परासर और सह-संयोजिका अराधना कुमारी हैं, जो इस आयोजन को महिलाओं की भागीदारी और सांस्कृतिक प्रस्तुति के दृष्टिकोण से एक नई ऊंचाई देने का प्रयास कर रही हैं। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की पूरी स्वतंत्रता दी गई है। कोई भी सदस्य नृत्य, संगीत, कविता, नाटक अथवा पारम्परिक खेलों के जरिए मंच को सजा सकता है।</p>
<p>कार्यक्रम में सपरिवार उपस्थिति को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे सामाजिक समरसता और पारिवारिक एकता को बल मिलेगा। प्रतिभागी हरे-भरे परिधान में होंगे, जो सावन की पारंपरिक पहचान को उभारेंगे। कार्यक्रम का प्रारंभ अपराह्न 4 बजे होगा और इसे एक सांझ की सांस्कृतिक महफिल के रूप में अनुभव किया जा सकेगा।</p>
<p>ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेंस हमेशा से अपने सामाजिक- सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में एकता, परंपरा और प्रगति का संदेश देती आई है। यह सावन महोत्सव न केवल मौसम की सुंदरता को समर्पित है, बल्कि यह कायस्थ समाज की सामाजिक जीवंतता और सांस्कृतिक चेतना का भी प्रतीक बनेगा।</p>
<p>ग्लोबल उपाध्यक्ष-सह-राष्ट्रीय सदस्यता अभियान प्रभारी-सह-बिहार प्रदेश अध्यक्ष दीपक अभिषेक ने यह सूचना साझा करते हुए समाज के सभी सदस्यों से अपील किया है कि वे इस पारिवारिक मिलन समारोह में सहभागी बनकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाएं और सावन के इस उत्सव को एक अविस्मरणीय स्मृति में बदलें।</p>
<p><span style="color: #993300"><strong>तैयारी बैठक में इनकी रही मौजूदगी</strong></span></p>
<p>दीपक अभिषेक के अनुसार, कार्यक्रम में जीकेसी ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद, प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन, ग्लोबल उपाध्यक्ष सह अध्यक्ष, बिहार प्रदेश दीपक कुमार अभिषेक, राष्ट्रीय सदस्यता अभियान संयोजक सह वरिष्ठ उपाध्यक्ष सह सदस्यता अभियान प्रभारी,बिहार प्रदेश निलेश रंजन, बिहार प्रदेश उपाध्यक्ष रवि शंकर प्रसाद सिन्हा, बिहार प्रदेश सचिव डॉ कृष्ण कुमार सिन्हा, सावन महोत्स्व 2025 संयोजक डॉ निशा परासर, सदस्य पटना जिला संदीप कुमार सिन्हा , कार्यालय सचिव प्रसून श्रीवास्तव एवं जीकेसी पटना जिला के सभी सदस्य एवं पदाधिकारी लोग, कार्यक्रम में सपरिवार शामिल होने की सहमति दी है।</p>
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		<title>नहाय खाय के साथ शुरू हुई छठ महापर्व</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Oct 2022 15:45:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मअध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[Bihar]]></category>
		<category><![CDATA[Chhath pooja-2022]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[उषा अर्घ्य]]></category>
		<category><![CDATA[खरना]]></category>
		<category><![CDATA[छठी मैया]]></category>
		<category><![CDATA[नदी]]></category>
		<category><![CDATA[नहाय खाय]]></category>
		<category><![CDATA[पारण]]></category>
		<category><![CDATA[सांध्य अर्घ्य]]></category>
		<category><![CDATA[सूर्य को अर्घ्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>छठ की पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को की जाती है...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>छठ की पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को की जाती है I छठ पूजा का पर्व नहाय खाय के साथ शुरुआत हो गई है I इस तरह आज यानी 28 अक्टूबर से महापर्व की शुरुआत हो गई है I पहले दिन महिलाएं दिन भर उपवास रख कर सिर्फ एक बार भोजन ग्रहण करती हैं I चार दिनों तक चलने वाली ये पूजा 31 अक्टूबर को ऊषा अर्घ्य देकर महिलाएं अपनी पूजा का समापन करेंगी I छठ के चार दिनों में सूर्य भगवान और छठ मैया की पूजा की जाती है I इसी बीच महिलाएं 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं और चौथे दिन सूर्य को अर्घ्य देकर अपना व्रत तोड़ती है और जल ग्रहण करती हैं I</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-3671" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2022/10/images-13-300x221.jpeg" alt="" width="300" height="221" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2022/10/images-13-300x221.jpeg 300w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2022/10/images-13.jpeg 468w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>महिलाएं क्यों रखती हैं छठ व्रत</strong><br />
इस पूजा का प्रचलन मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है I ये यहां का मुख्य पर्व माना जाता है I लेकिन अब इसका दायरा दिनों दिन पूरे देश में फैल चुका है I पहले बिहार,झारखंड एवं पूर्वी यूपी के लोग जहां रहते थे वहीं मना लेते थे I लेकिन अब उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों सहित दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में भी बड़े पैमाने पर मनाया जाने लगा है I इसके लिए स्थानीय सरकार व प्रशासन बाकायदा नदियों के किनारे व्यवस्था दे रहे हैं I जिससे श्रद्धालुओं को कोई परेशानी नहीं हो I अपने बच्चों और परिवार की भलाई, समृद्धि और प्रगति के लिए भगवान सूर्य और छठी मैया से प्रार्थना करती हैं I माना जाता है कि षष्ठी देवी भगवान ब्रह्मा की मानस पुत्री हैं I पुराणों में इन्हें माता कात्यायनी भी कहा गया है, जिनकी षष्ठी तिथि को नवरात्रि में पूजा की जाती है I बिहार-झारखंड की स्थानीय भाषा में षष्ठी देवी को छठ मैया कहा जाता है I</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>ऐसे होती है चार दिनों की छठ पूजा</strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000">पहला दिन- नहाय खाय</span></strong><br />
छठ पूजा के पहले दिन को नहाय खाय कहा जाता है I इस दिन महिलाएं दिन में उपवास रखती हैं I एक बार ही भोजन किया जाता है I<br />
<strong><span style="color: #ff0000">दूसरा दिन- खरना</span> </strong><br />
छठ के दूसरे दिन को खरना कहा जाता है I महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं I व्रत रखने वाली महिलाओं द्वारा ही प्रसाद के रूप में गुड़ की खीर बनाती हैं I<br />
<strong><span style="color: #ff0000">तीसरा दिन-सांध्य अर्घ्य</span> </strong><br />
तीसरे दिन को सांध्य अर्घ्य कहा जाता है I इस दिन महिलाएं और पुरुष दोनों मिलकर संध्या काल में सूर्य को नदियों या तालाबों में कमर तक पानी में खड़े होकर सांध्य अर्घ्य दिया जाता है I</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>चौथा दिन- उषा अर्घ्य</strong> </span><br />
छठ पूजा के आखिरी दिन को उषा अर्घ्य कहा जाता है I उषा काल में सूर्य को जल रह कर अर्घ्य दिया जाता है I इसके बाद ही भक्त छठी माई की पूजा का समापन करते हैं I तब जाकर पारण करते हैं I और 36 घण्टे का उपवास तोड़ते हैं I</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000">अर्घ्य देते समय पढ़ते हैं ये मंत्र</span></strong></p>
<p>इस पूजा में सूर्य को अर्घ्य देते वक्त आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीदमम् भास्कर। दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तुते।।  मान्यता है कि इस मंत्र का जाप करने से तेज, बल, यश, कीर्ति और मान सम्मान में वृद्धि होती है I</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-3670" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2022/10/images-1-5.jpeg" alt="" width="169" height="117" /></strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>छठ पूजन की सामग्री </strong></span></p>
<p>छठ पूजा में निम्न सामग्रियां लगती हैं&#8211;</p>
<p>पांच गन्ने जिसमें पत्ते लगे हों, पानी वाला नारियल, अक्षत, पीला सिंदूर, दीपक, घी, बाती, कुमकुम, चंदन, धूपबत्ती, कपूर, दीपक, अगरबत्ती, माचिस, फूल, हरे पान के पत्ते, साबुत सुपाड़ी, शहद का भी इंतजाम कर लें. इसके अलावा हल्दी, मूली और अदरक का हरा पौधा, बड़ा वाला मीठा नींबू, शरीफा, केला और नाशपाती की भी जरूरत पूजा के लिए पड़ती है. इनके अलावा शकरकंदी और सुथनी लेना न भूलें. मिठाई, गुड़, गेंहू और चावल का आटा और घी की भी व्यवस्था कर लें.</p>
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