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	<title>articles Archives - Lok Dastak</title>
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	<description>Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi.Lok Dastak</description>
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	<title>articles Archives - Lok Dastak</title>
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		<title>अयोध्या &#8211; काशी &#8211; उज्जैन की तर्ज पर हो मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि का पुनरोद्धार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Jan 2024 15:36:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>PRESENTED BY DR GOPAL CHATURVEDI VRINDAVAN।                   ...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000"><strong>PRESENTED BY DR GOPAL CHATURVEDI </strong></span></p>
<p><span style="color: #000000"><strong><em>VRINDAVAN। </em>                   <img decoding="async" class="alignnone size-thumbnail wp-image-16651" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240109-WA0843-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240109-WA0843-150x150.jpg 150w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240109-WA0843-719x720.jpg 719w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240109-WA0843-24x24.jpg 24w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240109-WA0843-48x48.jpg 48w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240109-WA0843-96x96.jpg 96w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240109-WA0843-300x300.jpg 300w" sizes="(max-width: 150px) 100vw, 150px" /></strong></span></p>
<p>&#8220;विष्णु पुराण&#8221; के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के अनुज शत्रुघ्न ने लवण नामक असुर का वध कर &#8220;मधुरा&#8221; नामक नगर की स्थापना की थी। जो कि कालांतर में मथुरा नाम से प्रख्यात हुआ। इसी मथुरा के डीग दरवाजा के निकट मल्लपुरा क्षेत्र में है कटरा केशव देव। यहां स्थित मथुरा के अत्यंत क्रूर व अत्याचारी राजा कंस के कारागार में आज से लगभग पांच हजार दो सौ वर्ष पूर्व भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में रात्रि के ठीक 12 बजे लीला पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी माता देवकी के गर्भ से जन्म लिया था।</p>
<p>भगवान श्रीकृष्ण, भगवान विष्णु के साक्षात अवतार थे। उनके अवतार का प्रमुख कारण कंस के अत्याचारों से पृथ्वी को मुक्त कराना था। जैसा कि उन्होंने &#8220;श्रीमद्भवतगीता&#8221; में स्वयं कहा है-<br />
&#8221; जब-जब पृथ्वी पर अन्याय, अत्याचार, पापाचार आदि बुराइयाँ बढ़ जाती हैं, तो उनके नाश के लिए मैं अवतार लेता हूँ तथा धर्म की रक्षा करता हूं।&#8221; भगवान श्रीकृष्ण के जन्म लेने वाला स्थान उनके जन्म से ही अत्यंत पवित्र व पूज्य माना गया है। यहाँ प्रथम मन्दिर का निर्माण भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र ब्रजनाभ ने ईसा पूर्व 80 में कराया था। कालक्रम में इस मंदिर के ध्वस्त होने के बाद गुप्तकाल के सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने सन 400 ई. में दूसरे वृहद मन्दिर का निर्माण करवाया। परन्तु इस मंदिर को भी महमूद गजनवी ने सन 1017 ई. में ध्वस्त कर दिया।</p>
<p>ततपश्चात महाराज विजयपाल देव के शासन काल (सन 1150 ई. के आसपास) में जज्ज नामक व्यक्ति ने तीसरे मन्दिर का निर्माण कराया। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर के दर्शन चैतन्य महाप्रभु ने सन 1515 ई. में किये थे। यह मंदिर भी 16वीं शताब्दी में सिकन्दर लोधी द्वारा ध्वस्त कर दिया गया। सम्राट जहांगीर के शासनकाल में ओरछा के राजा वीरसिंह देव बुंदेला ने चौथी बार एक अन्य भव्य मंदिर का निर्माण कराया,जो कि 250 फुट ऊंचा था। उस समय इसके निर्माण पर 33 लाख रुपये व्यय हुए थे। इस मंदिर के बने स्वर्ण शिखर की चमक 56 किमी दूर स्थित आगरा तक से देखी जा सकती थी। इस मंदिर को भी मुगल शासक औरंगजेब ने सन 1669 ई. में नष्ट कर दिया।</p>
<p>लगातार चार बार श्रीकृष्ण जन्म भूमि मन्दिर के ध्वस्त होने के बाद कई वर्षों तक यह स्थान उपेक्षित पड़ा रहा और धार्मिक जनों को अत्यंत कष्ट व निराशा देता रहा। सन 1803 में जब मथुरा ब्रिटिश शासन के अंतर्गत आया तो ईस्ट इंडिया कम्पनी ने सन 1815 में कटरा केशव देव को नीलाम कर दिया। काशी के राजा पटनीमल ने इस स्थान को नीलामी में खरीदा। उनकी यह उत्कट अभिलाषा थी कि वह भगवान केशवदेव के मंदिर को पुनः बनवाएं परन्तु यह इच्छा उनके जीवन काल में पूर्ण नही हो सकी। महामना मदन मोहन मालवीय ने 6 फरवरी सन 1944 को यह स्थान सेठ जुगलकिशोर बिड़ला के आर्थिक सहयोग से राजा पटनीमल के उत्तराधिकारी रायकृष्ण दास से खरीद लिया। परन्तु वह भी अपने जीवन काल में यहां मन्दिर निर्माण नही करवा सके।</p>
<p>मालवीय जी के द्वारा अधूरे छोड़े गए कार्य को पूरा करने के लिए सेठ जुगलकिशोर बिड़ला ने 21 फरवरी सन 1951 को श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की स्थापना की। साथ ही यहां मथुरा के नागरिकों के श्रमदान से निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ। श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पुनरुद्धार हेतु जाने वाली खुदाई में प्राप्त अवशेषों से उस पवित्र स्थल का भी पता चला जहां पर कि कंस के कारागार में वसुदेव-देवकी रहे थे और जहां भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। अब इस स्थान को सुरक्षित कर दिया गया है। जिससे भक्त-श्रद्धालु इसके दर्शन कर सकते हैं।</p>
<p>&#8220;भगवत भवन&#8221; श्रीकृष्ण जन्मभूमि का प्रमुख आकर्षण है। उत्तुंग शिखर वाले इस भवन का 11 फरवरी सन 1956 को शिलान्यास हुआ था। 17 वर्षों में हुए इसके निर्माण पर 12 करोड़ रुपये की धनराशि व्यय हुई है। यहां पांच मन्दिर हैं, जिनमें राधा-कृष्ण का मंदिर मुख्य है। इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण एवं राधा रानी की छ:-छ: फुट की अत्यंत व आकर्षक मानवाकार प्रतिमा स्थापित हैं। राधा-कृष्ण के इस मंदिर के दायीं ओर बलराम,सुभद्रा व जगन्नाथ के दर्शन हैं। बायीं ओर सीताराम व लक्ष्मण का मंदिर है। राम मंदिर के समीप है केशवेश्वर मन्दिर,जिसमें पारद लिंग प्रतिष्ठित है। जगन्नाथ मंदिर के निकट स्थित मंदिर में माँ दुर्गा की अष्टभुजी मूर्ति के दर्शन हैं।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-16650" src="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240110-WA0458.jpg" alt="" width="719" height="401" srcset="https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240110-WA0458.jpg 719w, https://www.lokdastak.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240110-WA0458-300x167.jpg 300w" sizes="(max-width: 719px) 100vw, 719px" /></p>
<p>यहां के प्रमुख आकर्षण त्रिनेत्र नारियल व नौ पत्ती वाला बेलपत्र आदि है। &#8220;भागवत भवन&#8221; की समूची छत अत्यंत मनोहारी व चित्ताकर्षक भित्ति चित्रकारी से सुसज्जित है। इस भवन के परिक्रमा मार्ग पर सम्पूर्ण&#8221;श्रीमद्भागवत&#8221; को ताम्र पत्र पर अंकित किया गया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि के अन्य आकर्षक यहां के श्रीकृष्ण चबूतरे पर लगे द्वादश शिला पट्टों पर प्राकृतिक रूप से उभरी भगवान श्रीकृष्ण की छवियां, विशाल सत्संग भवन, भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं की यंत्र चालित झांकियां, भव्य पार्क व फुव्वारे, संस्कृत विद्यालय व छात्रावास, गोपालन केंद्र, व्यायाम शाला, धर्मशाला, आयुर्वेद औषधालय आदि हैं।</p>
<p>इसके अलावा यहां से तमाम सत्साहित्य भी प्रकाशित होता है। यहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की मध्य-रात्रि को भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा का पंचामृत से वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य अभिषेक होता है। जिसके दर्शन करने हेतु देश-विदेश के असंख्य भक्त-श्रद्धालु मथुरा आते हैं।<br />
श्रीकृष्ण जन्मभूमि के सटी हुई कुदसिया बेगम की मस्जिद है, जो कि ईदगाह के नाम से जानी जाती है। इसे मुगल शासक औरंगजेब के द्वारा श्रीकृष्ण जन्मभूमि के चौथे मन्दिर को ध्वस्त करने के बाद उससे प्राप्त मलवे से मन्दिर के ही एक भाग में बनवाया गया था। साथ ही मन्दिर की सभी मूर्तियों से हीरे-जवाहरात आदि निकालकर उन्हें मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे गढ़वा दिया था ताकि उन पर यहां आने-जाने वाले व्यक्तियों के पांव पड़ें। तब से श्रीकृष्ण जन्म भूमि व ईदगाह विवादों के घेरे में बनी हुई है।</p>
<p>जब कि पुरातत्वविदों ने प्राचीन काल में हुई इस स्थान की खुदाई में प्राप्त अवशेषों व शिलालेखों आदि के आधार पर यह प्रमाणित किया हुआ है कि ईदगाह वाला स्थान भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि का ही है। जबकि मुस्लिमों समुदाय ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि वाले स्थान पर अपना स्वामित्व बताते हुए कई बार न्यायालय में मुकदमे दायर किये हैं। परंतु वह हर बार पराजित हुए हैं। खेद है कि यहां अभी भी पारम्परिक कटुता के चलते शासन ने इस स्थान के चप्पे-चप्पे पर स्थायी सुरक्षा व्यवस्था का प्रबंध किया हुआ है।</p>
<p>हमारी प्रभु से यह कामना है कि वह मुस्लिम समुदाय को यह सद्बुद्धि दे कि वह पुराने विवादों व मतभेदों को समाप्त कर प्रेम व सौहार्द्र से रहते हुए हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल कायम करें। साथ ही हम शासन से भी यह मांग करते हैं, कि वो अयोध्या &#8211; काशी &#8211; उज्जैन की तर्ज पर मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि का भी पुनरोद्धार करे।</p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>(लेखक वरिष्ठ साहित्यकार व पत्रकार हैं।</strong></span></p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>ARTICLE__________  अधीनता से आजादी तक का सफर____</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक दस्तक]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Aug 2023 02:40:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। विजयी विश्व तिरंगा प्यारा का जयघोष...</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><span style="font-weight: 400">देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। विजयी विश्व तिरंगा प्यारा का जयघोष से देश झंकृत और चमत्कृत है। स्वाभिमान से देश का माथा दमक रहा है। अटक से कटक और कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर घर तिरंगा की ऊंची शान से आसमान गुंजायमान है। पर्वत, पठार नदियां, झरने सबसे आजादी के तराने प्रस्फुटित हो रहे हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400"> पक्षियों का कलरव, भंवरों का गुंजन और मलयगिरी से उठती सुगंधियां भारत की समृद्धि-समरसता और एकता-अखंडता के भाव को लयबद्ध कर रही हैं। सड़कों, संस्थानों व प्रतिष्ठानों से उठती इंकलाब की गूंजे और वंदेमात्रम के मधुर स्वर उन परवानों की याद दिला रहे हैं जिन्होंने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">अधीनता से आजादी तक का सफर त्याग व बलिदान का हैं। पतन से उत्थान तक का है। समर्पण और संकल्प का है। समर्पण व संकल्प का यह उच्चतम भाव और अनवरत 75 वर्षों की साधना से ही आज भारत उपलब्धियों के आसमान पर है। इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए देश को कई बदलावों से गुजरना पड़ा है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">नतीजा आज देश संपूर्ण दुनिया को अपनी सामाजिक-आर्थिक व सांस्कृतिक उपलब्धियों की विराटता का बोध करा रहा है। आज भारत दुनिया का सबसे सफल लोकतांत्रिक देश बन चुका है जिसकी सराहना दुनिया भर में होती है। आजादी के बाद ही भारत ने अपने सभी नागरिकों को ढ़ेरों अधिकार दे दिया जिससे नागरिकों को अपने व्यक्तित्व को संवारने की आजादी मिली। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">आज के भारत में जाति, धर्म, रंग, लिंग, कुल, गरीब व अमीर आदि के आधार समान है। जनमत का समर्थक भारत ने संसदीय शासन प्रणाली में सभी वर्गों को समान प्रतिनिधित्व प्रदान किया है। आज भारत में सत्ता प्राप्ति के लिए खुलकर प्रतियोगिता होती है और साथ ही लोगों को चुनाव में वोट के द्वारा अयोग्य प्रतिनिधियों को हटाने का मौका भी देता है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">देश का संविधान राज्य के लोगों की स्वतंत्रता और उनके अधिकारों में अनुचित हस्तक्षेप करने का अधिकार सरकारों को नहीं दिया है। भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती है कि राजनीतिक दल सभाओं, भाषणों, समाचारपत्रों, पत्रिकाओं तथा अन्य संचार माध्यमों से जनता को अपनी नीतियों और सिद्धांतों से अवगत कराते हैं। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">विरोधी दल संसद में मंत्रियों से प्रश्न पूछकर, कामरोको प्रस्ताव रखकर तथा वाद-विवाद द्वारा सरकार के भूलों को प्रकाश में लाते हैं। सरकार की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखते हुए उसकी नीतियों और कार्यों की आलोचना करते हैं। भारत ने धर्म या भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी इच्छानुसार शिक्षण संस्थाएं स्थापित करने तथा धन का प्रबंध करने का अधिकार दिया है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">भारतीय लोकतंत्र में शिक्षण-संस्थाओं को सहायता देते समय राज्य किसी शिक्षण संस्था के साथ इस आधार पर भेदभाव नहीं करता है कि वह संस्था धर्म या भाषा पर आधारित किसी अल्पसंख्यक वर्ग के प्रबंध में है। इसी तरह भारतीय नागरिकों को सूचना प्राप्त करने का अधिकार हासिल है। इस व्यवस्था ने भारतीय नागरिकों को शासन-प्रशासन से सीधे सवाल-जवाब करने की नई लोकतांत्रिक धारणा को जन्म दी है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">इस व्यवस्था से सरकारी कामकाज में सुशासन, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बढ़ा है जिससे आर्थिक विकास को तीव्र करने, लोकतंत्र की गुणवत्ता बढ़ाने और भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने में मदद मिल रही है। सूचना के अधिकार से सत्ता की निरंकुशता पर अंकुश लगा है। यह चमकते-दमकते भारत का शानदार चेहरा है। 274 रुपए प्रति व्यक्ति आय के साथ शुरु हुआ आजादी का आर्थिक सफर आज भारत को दुनिया की ताकतवर आर्थिक महाशक्तियों की कतार में खड़ा कर दिया है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">वह दिन दूर नहीं जब भारत 2040 तक दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था का तमगा हासिल कर लेगा। आज भारत की अर्थव्यवस्था 3 ट्रिलियन डाॅलर के पार पहुंच चुकी है। प्रति व्यक्ति आय भी 90 हजार रुपए से पार है। यह भारत की समृद्धि, ताकत और तरक्की की पहचान है। सच कहें तो आज भारत हर रोज तरक्की की नई इबारत लिख रहा है। कल-कारखाने, उद्योग धंधे और औद्योगीकरण से विकास का पहिया तेजी से घूम रहा है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">औद्योगीकरण और वैश्वीकरण ने भारतीय शिक्षा, विज्ञान व संचार के क्षेत्र को एक नया आयाम दिया है जिसके जरिए वह नए-नए इनोवेशन के जरिए दुनिया को अचंभित कर रहा है। आज देश में कई विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थान हैं। इनके जरिए आज भारतीय छात्र दुनिया भर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। कभी भारत अपने उपग्रह को स्थापित करने के लिए अमेरिका और रुस की मदद लेता था लेकिन आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन-इसरो हर रोज नया कीर्तिमान रच रहा है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400"> इसरो के जरिए स्वदेशी उपग्रहों के साथ कई विदेशी उपग्रह एक साथ भेजे जा रहे हैं। इन 75 वर्षों में देश ने समाज के अंतिम पांत के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने के लिए सामाजिक सुरक्षा व सेवाओं का विस्तार किया है। सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए देश में पोषण सुरक्षा की देखभाल राष्ट्रीय तैयार मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम, समन्वित बाल विकास योजना, किशोरी शक्ति योजना, किशोर लड़कियों के लिए पोषण कार्यक्रम और प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना चलायी जा रही है। राष्ट्रीय तैयार मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम पूरे भारत में चल रहा है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">समन्वित बाल विकास योजना का विस्तार भी चरणबद्ध ढंग से हो रहा है। 11 से 18 वर्ष तक की उम्र की लड़कियों के पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी विकास के लिए सरकार ने किशोरी शक्ति विकास योजना को हर जगह लागू किया है। भारत ने श्रम आंदोलन के तहत सामाजिक सुरक्षा को मजबूती देने के लिए राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कार्यक्रम योजना को लागू किया है। सामाजिक सुरक्षा के तहत रोजगार सृजन और गरीबी उन्मूलन रणनीति के तहत सरकार द्वारा स्वरोजगार योजना और दिहाड़ी रोजगार योजना चलाया जा रहा है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग को संशोधित कर लघु एवं ग्रामीण उद्योगों के जरिए ज्यादा से ज्यादा रोजगार सृजन करने के लिए सुनिश्चित किया गया है। असंगठित क्षेत्र को सामाजिक सुरक्षा से लैस करने के लिए राष्ट्रीय उद्यम आयोग की स्थापना एक पारदर्शी निकाय के रुप में की गयी है। किसानों की दशा सुधारने के लिए वर्ष में 6000 रुपए दिए जा रहे हैं। अब राष्ट्रीय आय का लगभग 28 प्रतिशत भाग कृषि आय से प्राप्त होने लगा है। कृषि कार्य हेतु भूमि उपयोग बढ़कर 43.05 प्रतिशत हो गया है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400"> सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और बिचैलियों की भूमिका समाप्त होने से किसानों को उनके उत्पादों की अच्छी आय मिलने लगी है और उत्तम कृषि उत्पादन ने अर्थव्यवस्था और उद्योग-धंधों का विस्तार किया है। दूसरी ओर भारत तेजी से डिजिटल भारत बन रहा है। आधार और भीम जैसे दो डिजिटल कदमों ने भारत में कामकाज और जीने के तौर-तरीके को आसान किया है। आज देश में 131.68 करोड़ आधार कार्ड धारक और 26 करोड़ यूपीआई यूजर्स हैं। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">देश की आजादी के उपरांत भारत का उद्देश्य एक शक्तिशाली, स्वतंत्र और जनतांत्रिक भारत का निर्माण करना था। ऐसा भारत जिसमें सभी नागरिकों को विकास और सेवा का समान अवसर मिले। ऐसा भारत जिसमें जातिवाद, क्षेत्रवाद, भाषावाद, आतंकवाद, नक्सलवाद, छुआछुत, हठधर्मिता और मनुष्य द्वारा मनुष्य के शोषण के लिए स्थान न हो। भारत इस लक्ष्य को तेजी से हासिल कर रहा है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400">अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भारत हर रोज नया कीर्तिमान गढ़ रहा है। कृषि, उद्योग-धंधे और कल-कारखानों के विस्तार से भारत पांच ट्रिलियन इकोनाॅमी की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। हर वर्ष के बजट में पूंजीगत खर्च पर जोर बढ़ाने से घरेलू विनिर्माण को गति मिल रही है। कर राजस्व संग्रह में तेजी से इजाफा हो रहा है। कृषि क्षेत्र के ढांचागत विकास के लिए आने वाले पांच वर्षों में 25 लाख करोड़ रुपए निवेश का खाका तैयार है जिससे देश तेजी से विकास करेगा।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400"> कृषि में नए-नए अनुसंधानों से किसानों की आमदनी बढ़ रही है और नुकसान का जोखिम कम हो रहा है। हर खेत को पानी, कानूनी सुधार में भूमि पट्टेदारी कानून, ठेके पर खेती, मार्केंट सुधार और आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव की संभावना मूर्त रुप ले रही है। देश के समक्ष आतंकवाद, नक्सलवाद, अलगाववाद, छद्म युद्ध, विद्रोह, विध्वंस, जासूसी गतिविधियों, साइबर क्राइम, मुद्रा-जालसाजी, कालाधन और हवाला जैसी गंभीर चुनौतियां भी हैं जिसका भारत सफलता से मुकाबला कर रहा है। इससे दुनिया भर में भारत की साख बढ़ रही है। </span></p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>अरविंद जयतिलक</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>(लेखक/स्तंभकार)</strong></span></p>
<p>&nbsp;</p>
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